सुनाती नहीं मैं अपना गम किसी को तो खुशियों का इजहार करूँ कैसे, मुश्किले है मेरी राह में बहुत मैं अपनी मंजिल पर आगे बढूँ तो बढूँ कैसे?
सुनाती नहीं मैं अपना गम किसी को तो खुशियों का इजहार करूँ कैसे, मुश्किले है मेरी राह में बहुत मैं अपनी मंजिल पर आगे बढूँ तो बढूँ कैसे?
दीवारों के भी कान होते है, लोग कहते हैं लेकिन मेरी चीखें क्यों सुन नहीं पाता है मेरा खामोश घर
बिना पत्तों की टहनियां कहां छांव देती हैं जिंदगी से जब ज्यादा मांगो तो हमेशा घाव देती है
कितनी अजीब है दुनिया कितने अजीब है लोगों के काम बटोर रहे हैं दोनों हाथों से जाने को कर खाली झोली तमाम
आज टूट गये हम तुम्हारे वादों की तरह बरस गयी आंखे हमारी बावरे सावन की तरह
जरूरी नहीं कि हर दिल इश्क में टूटा हो अक्सर अपने भी दिल तोड़ दिया करते हैं, खुशियों में तो मशरूफ हो जाते सभी पर मुश्किल पड़ते ही दामन छोड़ दिया करते हैं
ख्वाहिशों के बाजार में आयी हूं कुछ खरीदने की खातिर मगर दाम ही इतने है हर ख्वाहिश के कि खाली हाथ ही वापस चली, बन मुसाफ़िर
चाय में डूबे बिस्किट सी हो गयी है जिंदगी कब टूट जाये, कब घुल जाये खबर नहीं
अपने आवाज को बुलंद करके देखो, अपने वाणी में मधुरता घोल करके देखो। पावनता में तुम एक बार जी कर देखो, रिश्तों को हवा पानी खाद एक बार दे कर देखो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
शिखर की ऊंचाईयों को टकते सभी, पांव के छाले खून का रिसाव दिखता नहीं। मेहनत हौसले को दुनिया समझती नहीं, यहा के लोग बड़े जालिम है तरक्की देखते नहीं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
समाज में धोखेबाजों का लगा अंबार है, असमाजिक तत्वों से भरा संसार है। उग्रता में बह रहा देश का अहंकार, चरित्र के आन बान पर टिका यह संसार है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
आदर्श के बल पर ही टीका है संसार, आदर्श से ही चल रहा रिति व्यवहार। नजर खतरों का अबइशारा हो गया, नजर से नजर मिला कर धोखाधड़ी कर रहा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बातों से कब तक जीते रहेंगे, रहमो करम पर कब तक रहेंगे। उग्रता के शाख पर कब तक बैठोगे, सच्चाई को समझो और बढ़ो तुम आगे।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
पगड़ी मत उछालों बीच बाजार में, पग होता है शान नेक इंसान का। झूठ का दामन पकड़ जलील ना करो, इंसानियत का गला घोंटना काम है शैतान का।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नेता जी मिठी बाणी बोले लगता है चुनाव आया है, भरी दोपहरी मेड़ पर डोले लगता तनाव छाया है। याचना में भैया बाबू करके मांगे वोट दिन दुखी बन, जीतते चुनाव तेवर बदले सलाह देते […]
आन बान शान में जले मेरी जवानी, लहू के कतरे को देख तड़पे मेरी जिंदगानी। अहर्निश के वादों को मैं संजो कर रखता, कभी भूल सकता नहीं वीरों की बलिदानी।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
तन्हा सफर में मैं आगे बढ़ रहा हूं, मजबूरी की गठरी लेकर चल रहा हूं। वादें पुरा करने को पैदल सफर कर रहा हूं, अपने कदमों से गिन गिन कर दूरी तय कर रहा हूं।। […]
आ गया वक्त अब रहस्य उजागर करने का, यथार्थ के चक्कर में समय ना बर्बाद करो। साधक बनकर देश का कल्याण करो, सांत्वना देकर परेशान आत्मा पर उपकार करो।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
देशवासियों योग करो तन मन से निरोग रहो, आयुर्वेद योग के अलौकिक गुणों को अपनाकर । अपने इम्यून सिस्टम को हम सभी मजबूत करें, आओ एक उपकार करें योग के गुणों को बतलाकर।। महेश गुप्ता […]
हे मां शारदे करो मेरा अभिनन्दन स्वीकार, अज्ञानता को दूर कर करो मातृ हम पर उपकार। हाथ जोड़ विनती करूं शीश झुका करूं प्रणाम, नव कण्ठ स्वर चेतना का भर दो मां शारदे भण्डार।। ✍महेश […]
योग करो निरोग रहो का आन्दोलन चलाना है, घर घर को जागरूक करके अलख जगाना है, नित सुबह और शाम योग करना व करवाना है। तन को निरोगी बनाकर रोग मुक्त भारत बनाना है।। ✍महेश […]
ताश के पत्तों-सा ढह जाएगा तू एक दिन विलुप्त ही हो जाएगा। यही हरकतें रही ना तेरी चीन तो तू बिन मौत ही हिंदुस्तान के हाथों मारा जाएगा।
चंद सिक्के क्या खत्म हुये रुखसत हो गये जो मेरे करीब थे तनहाई है जो साथ रहती है अब बस खामोशी है जो अजीज है
विनयचंद यूँ रो रो कर कितने को श्रद्धांजलि दोगे। आँसू कम पड़ जाऐंगे तेरे आखिर कितना रोओगे।। सभी शहीदों के खातिर अब अपना शीश झुकाता हूँ। एक जन्म क्या हर जन्मों में आभार तेरा फरमाता […]
बीस वीरों की टोली में ये सात रत्न बिहारी हैं। शहादत के सात फूल पे ‘विनयचंद ‘बलिहारी है।।
शहीद चंदनकुमार भोजपुर वाले तुम्हें झुककर सलाम हम करते हैं। फूल कहाँ अपनी अंजली में निज अश्कों का दान हम करते हैं।। 🌹 ॐशांतिॐ 🌹
सिंहभूमि के सिंह थे तुम गणेश हंसदा भैया। तेरी शहादत अमर रहेगी सदा सर्वदा भैया।। सम्मान सहित ये ‘विनयचंद ‘ प्रणाम करेगा सदा सदा। साहित्य कलम से करता हूँ बिहार केसरी तुम्हें अदा। 🌹
ओस की बूंद चाटकर, हवा वंसती को खाकर। हरियाली का दामन पकड़, खुशी का प्यारे इजहार कर।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
वीरों की शक्ति अजर अमर रहें, थाती देश का सुसज्जित रहें। नयन की भाषा पढ़ना सिखों, अचल संपत्ति का हिसाब रहें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
ओस की नयना शोभे तन पर, हवा वंसती मोहे मुझको । हरियाली तेरे बदन की सजनी, खुशियों की आभा बनकर बुलाये मुझको।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
हवा का झोंका प्यार का एहसास कराता, ओंस की बूंद तन मन में आग लगाता। हरियाली खेतों की तराशे तुझे सनम, बसंती झोंका खुशीयों का गीत सुनाता।। महेश गुप्ता जौनपुरी
आंखों से आंखें जब मिल जाती, प्यार का बिगुल दिल में बज जाती। इशारों की बातें जब जेहन में उतरती, आंखें गड़ाएं नजरें शनम को ढुढ़ती।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
पंच परमेश्वर का राय सदैव लेकर, करते रहना सत्य का अभिषेख। झूठे मक्कार को बेनकाब करके, लिखते रहना तुम सच्चाई पर लेख।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
आंख में मिचोली बहुत हुआ, थाम लो अब मेरा तुम हाथ। प्रेम डगर बहुत कठिन है सनम, हाथों में हाथ लेकर चूम लो माथ।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
धोखा चाल को करो बेनकाब, पंच परमेश्वर से लगाओ गुहार। सत्य की राह पर चलकर प्यारे, उलझकर में पड़कर ना मानो हार।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
प्रेम डगर आसान नहीं है प्यारे, बरसों लग जाते हैं इसे परखने में। हौसले के दम पर जो लड़ते हैं, प्यार में वही जीत सफल होते कहने में।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
आंखों का काम ही है, कहीं ना कहीं टिक जाना। परिस्थितियों को जांच परख कर, हौसले से प्यार का गुल खिलाना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
प्रेम पथिक जब चलते राहों में, पाकर ही लौटते प्रेमी राहों को। गली मोहल्ले का नाम पता कर, चूम लेते कांटेदार शाखाओं को।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
प्रेम में दिल का तड़पना होता है, अपने प्रीति को पाने का चाह होता है। दर्द लोक लाज सब बिसरा कर, प्रेमी खुद को पागल आवारा समझता है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नजर से नजर मिली दिल की बात कह गयी, दर्द प्यार तड़प और आह की बात कह गयी। छुप छुपकर देखना अच्छा लगा मोहब्बत को, तन्हाई जुदाई की बात पल पल की रात कह गयी।। […]
सच्चे आशिक जिस्म के मोहताज नहीं होते, प्रेम समर्पण करके खुद को आबाद कर जाते। आंच ना आये मोहब्बत की छोर में, इसलिए प्रेमी खुद को सरेआम मौत को गले लगाते।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दिल जब लगता अच्छा बुरा कहां दिखता, तड़प आह दर्द को कहां वह गौर करता। आंखों आंखों से प्यार का इजहार करके, खुद को हिर रांझा जैसा मशीहा समझता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
समय ने ऐंसा करवट लिया, सब गूलर के फूल हो गये । कोरोना महामारी में पड़कर, सब अपनों से दूर हो गये।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बेकार से बेगार भली ये जिंदगी, रहम से भली बिखर जाये ये जिंदगी। ताने बाने सुनना मेरा आदत नहीं दोस्त, खुद को झुकना वसूल नहीं मेरी जिंदगी।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कोरोना महामारी नहीं बहाना है, मनु समझो बात को यह जानलेवा है। हंसी-मजाक में ना लो इस वैश्विक महामारी को, सारी दुनिया इस समय कोरोना से हारी है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दाद देता हूं आपके परख को, सलाम करता हूं आपके समझ को। आप समझ लेती है इशारों इशारों की बातें, बड़ी शातिर है परखने में लोगों को, ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
रावण का अंत करना है तो, घर के वीभीषण को ढूंढ़ो । सच्चाई पर विजय पाना है तो, अपने अंदर के अवगुणों को ढूंढ़ो।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
मुफ्त पर आश्रित है देश के बेईमान, अपना जेब भरने के लिए बेंच दिये इमान। माला पहन ईमानदारी का करते है ढ़ोंग, ऐंसे धूर्त पुरुष को करते है दूर से नमन।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कर्म हमेशा करते रहना, धर्म का देना सदैव तुम साथ। हे पावन धरा के वीर सपूत, वीभीषण को रखना तुम साथ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अन्याय जब हद से बढ़ने लगे, नारी का हरण कलुषित पुरुष करने लगे। धर्म का विभीषण जन्म तब हैं लेता, जब पाप अमृत कुंड का विकास होने लगे।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
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