कितना अच्छा होता! अगर ऐसे ही हमारे नाम भी अलग होते , और काम भी अलग-अलग होते , मगर, जात और धर्म एक ही होती, इंसानियत।
कितना अच्छा होता! अगर ऐसे ही हमारे नाम भी अलग होते , और काम भी अलग-अलग होते , मगर, जात और धर्म एक ही होती, इंसानियत।
हे परमवीर हे युद्धवीर हे शरहद के रक्षक दुश्मन के खातिर एक नकेल मैं देता हूँ। दुश्मन मिल जाए गर्दिश में जिससे मिनटों में एक आग्नेयास्त्र राफेल मैं देता हूँ।।
पढ़ने लिखने में मन लगाकर कुछ आगे बढ़ने की सोच रखो बच्चो कुछ बनने की सोच रखो
बेटी कोई वस्तु नहीं जो जो उसका दान करोगे, बेटी तो बेटी है, क्यों बेटी का दान करोगे। ब्याह करो पर दान नहीं क्या यह उसका अपमान नहीं, जो वस्तु समझ कर दान हो गई, […]
किताबों से अच्छे मित्र कहां हैं, कविता से अच्छे चित्र कहां हैं। दुखी हो के ना बैठ “गीता”, “सावन” पे जाओ, सखी, दोस्त, बंधु यहां हैं।
देश भक्ति की सरिता बहे देश भक्ति की कविता बहे ऐसी बरसात हो देश भक्ति की बाढ़ हो
प्यारी सी शुभरात्रि है सभी को कविता यूँ ही खिलती रहे सावन में बरसती रहे
प्यारी वर्षा ऋतु में देखो कितनी सुन्दर हरियाली है, नाहा रहे हैं सारे पौधे शाखाएं क्या मतवाली हैं,
वीरों को नमन सैनिकों को नमन जो भी सीमा में प्रहरी तैनात हैं उन सभी को नमन जय हिन्द जय हिन्द
गांव का मकान रोता तो होगा। मेरे आने की आस में सोता ना होगा।। ख़ुद को संभालने की कोशिश करता। घुट घुट के खंडहर होता तो होगा।। सिपाही बनकर पड़ा ताला भी। अब जंग से […]
मेरे घर में रहे तो फिर किराया दे गए होते भंवर में था , मुझे कोई किनारा दे गए होते नहीं कुछ और ख्वाहिश है सनम तुमसे मुझे लेकिन चले जाना हि था तो दिल […]
देश की रक्षा पहला धर्म देश की रक्षा पहला कर्म, जुटे देश की रक्षा को, नाम देश का ऊंचा हो.
गरीब गरीब रह गया, सेठ सौ गुना सेठ। खाई सा अंतर हुआ, भूख बराबर पेट।।1 गरीबों के उत्थान की, बनी योजना लाख। कागज में पूरी हुई, उस तक पंहुची खाक।।2 —– सतीश पाण्डेय
आत्मघात, मानसिक पीड़ाएँ, छीना-झपटी, राह भटकना, बेरोजगारी के दुष्प्रभाव हैं, पहला काम हो इसे रोकना.
कितने बदल गये है इंसान। बेच कर अपना ईमान।। सच्चाई से कोस दूर भागे। झूठ के बीज बोये बेईमान।। बुरी नजर वाले का मुंह है गोरा। नेकी करने वाले को बना दिए हैवान।। झूठ के […]
रख अभी जिंदा मुझे, आंसू बहाने के लिए साथ तेरे प्रेम का रिश्ता निभाने के लिए और कुछ ना मांगता हूं बस यही अरदास है। दे दे बस दो गज जमीं इक आशियाने के लिए […]
पता नहीं तुम कैसे लिख लेते हो कविता, इतनी आसानी से मेरे तो ख्याल ही गुल रहते है ठहरते ही नहीं कागज पर
बेटियां तो जिंदगी का मूल हैं बेटियां शुभकामना स्फूर्ति हैं, वंश चलने की न कर चिंता मनुज, बेटियां निज वंश की ही पूर्ति हैं,
मत काटो मेरी पंख ;मेरे अपनों मैं बुलंदी के आसमानों में उड़ना जानता हूं। छोड़ दो मुझे मेरे रास्ते पर , मैं ठोकरो से संभलना जानता हूं।
मुझे तेरी हथेली पर जिगर की बात लिखने दे तुझे लव की कसम है आज सारी रात लिखने दे लिहाजा आप मुझसे हो खफा एहसास है लेकिन मिला जो आपसे मुझको वही सौगात लिखने दे। […]
पानी के बुलबुले जैसी जिंदगी है मेरी सुन्दर है, सूरज से रोशन भी मगर कब हो जाये खत्म फ़ूट जाये कब बुलबुला, खबर नहीं
छाती चौड़ी की सिगरेट जलाई, सोचता है इसे पी रहा हूँ। तू नहीं पी रहा इसको प्यारे यह धुंआ तो मजे से तुझे पी रहा। —– डॉ0 सतीश पाण्डेय
लोकतंत्र के वृहद भवन का मुझको स्तम्भ मानो न मानो मैं धरम जाति भेदों से ऊपर आम जनता की बातें लिखूंगा। जो घटित हो रहा है लिखूंगा जो गलत हो रहा है कहूंगा, सब चलें […]
नाम बदलते रहा मैं चेहरे छुपाता रहा अपनी झूठी पहचान बनाने को पैंतरे बदलता रहा,
सावन मास शिव का मास शिव ही शिव चारों ओर बरसात की बूंदें शिव को करा रही स्नान , देवाधिदेव महादेव का आओ सब करें ध्यान,
रखे रहो हाथो पे हाथ प्रिया , सोचती रहो कोई अनसोंची बात प्रिया, सर्द हवा के झोंके में, जरा- ठहर जाओ रात प्रिया, हम मिलजुल कर सुख दुःख बाटेंगे, जो मिलेगा जन्म जात प्रिया।
अंगारों से खेलूंगा और तूफ़ा से लड़ जाऊंगा मंज़िल मुठ्ठी में होगी ,ऐसे पीछे पड़ जाऊंगा एक हार से कम ना आंको मुझे जरा दुनिया वालों हर मुश्किल घुटने टेकेगी, गर जिद पे अड़ जाऊंगा […]
जय महादेव जय मृगपाणी दक्षाध्वरहर जय कामारी शशिशेखर ,नीलकंठ भगवन जय महाकाल जय त्रिपुरारी शिव शंकर, गंगाधर शंभू जय जगद्गुरू जय व्योमकेश मुझे अपनी शरण में लो भगवन ,सर्वज्ञ अनिश्वर जय महेश। ✍️ देव 🙏
तुम मिटाती रहो मेरे प्यार के सबूत मैं सबूत जुटाता रहूंगा। तुम कितना भी मेरे ख्वाबों से बचना चाहो मैं हर रात ख्वाबों में आता रहूंगा।
स्वप्न में रोज लिखती हूँ तुम्हारे नाम की कविता, कहीं कोई देख ना ले बस इसी चिंता में रहती हूँ, इसलिए उन सबूतों को मिटाकर ही मैं जगती हूँ।
हौंसले के दम पर जीते आ रहा हूं, लहू को बहाकर घूंट पीते आ रहा हूं। पहचान की परवाह करना मैं छोड़ दिया, धर्म कर्म से जीने का सलीका जब से सीखा हूं।। ✍महेश गुप्ता […]
नाम पहचान को तांक में रखकर, धर्म कर्म सदैव करते रहना यारों। अजर अमर के ढोंग को त्याग कर, मरकर ख्वाहिश फूलों का ना करो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
हारा प्राणी हारा प्राणी धूल चटाता, जीता प्राणी टेस में जीता। जागरूक हमेशा लड़ता है, हालातों से कभी नहीं घबराता।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
बड़ी बड़ी बाते से हौसला मिलता, चींटी के कहर से हाथी मरता । ईर्ष्या बड़े बड़े को नाश करता, छोटे बनने से बहुत कुछ मिलता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
तन मन में मेरे ज्वाला धधक रहा, सीने में मेरे बदले की भावना पनप रहा। दूर हो जा मेरे नज़रों से पापी पाकिस्तानी, तेरे दशहतगर्द का खेल मैं जान रहा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
आज राजनिति का लगता है भोर हुआ है, चारों तरफ नेता जी का मचा शोर हुआ है। आंख खुला नेता जी का जथ्था देखा घर पर, लगता है वर्षो बाद चूनाव का बिगुल बजा हुआ […]
देश समाज में ये क्या फैला है, आतंक का बजता बिगुल यहां हैं। देख कर अहर्निश का अपराध, रो रो कर मेरा बुरा हाल हुआ है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
आतंक का आओ मिलकर नाश करें, चोर उचक्कों का चलो पर्दाफाश करें। छोटे मोटे गुंडे मवाली को सबक सिखा, उनके अपराधी हौसले का अंत करें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अपराधी खुल्लम खुल्ला घूमें, चमचों का जब बाजार गरम हो, नेता जब जनता का कदम चूमें, तब समझो चुनाव का भोर हुआ हैं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मुझे देख तुम्हें सच में रोना आता हैं, मैं खुश हूँ इंसानियत को जिंदा देखकर। हालातों को देख मुँह फेरने वाले सैकड़ों हैं, एक जिंदा दिल को देख मेरे दिल तू दुआ कर।। ✍महेश गुप्ता […]
चोर चोर मौसेरा भाई, नेता अपराधी जट्टे बट्टे। काम निकालते बनकर सच्चे, अपराध को बढाते बनकर अच्छे।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दिल्ली के चोर सन्नाम हैं जहाँ में, नेता और चोर बेइमान हैं वहाँ के। कभी मत आना उनके झांसे में, फ्री फ्री बोलकर ठगते बहुत है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दिल की सुनो दिल से करो बात, इंसानियत को जगाओ मित्र करो ना रात। रब से करो तुम अपने दुख का फरियाद, अपने प्यार को लुटा नफरत को दो मात।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बरसात हो रही है मन झूम रहा है ऐसे ऊँचे ऊँचे पेड़ों की पंत्तियां झूम रही हैं जैसे, रिम झिम छम छम छम छम छम छम
आग जलने दो यारों, धुआं ना करो दिल के जख्मों को गहरा कुआं ना करो मर ही जाने दो मुझको तुम्हें है कसम मेरे जीने की रब से दुआ ना करो शक्ति त्रिपाठी देव
आम खाके गुठलियों का ढेर लगाना है मेरी नहीं फ़ितरत। एक गुठली से बृक्ष लगाना, चाह मेरी और मेरी यही फितरत।।
तुम्हारे प्यार में मैं क्या से क्या हो गया, कभी मिट्टी का दीया कभी मटका बन गया, जब देखा तुम्हारो हाथों में गैर का हाथ। मैं फौलादी मिट्टी का इंसान टूट कर बिखर गया।। महेश […]
आतंकी गुंडे मवालियों का जात धर्म नहीं होता, सपनों में भी हत्यारो से अच्छा कर्म नहीं होता। गुंडे बदमाश के लिए आलाप कढ़ाने वाले आस्तीन, जाहिलो के लिए दिल में कोई मर्म नहीं होता।।
संवेदनाएं मर चुकी हैं आज सब किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो सब दिखावा है मेरे व्यवहार में किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो. डॉ. सतीश पांडेय, चम्पावत उत्तराखंड
देखी दुनिया सारी फिर भी रहे अनाड़ी कर कुछ भी न पाए वो बनते रहे खिलाडी
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.