हे परमवीर हे युद्धवीर हे शरहद के रक्षक दुश्मन के खातिर एक नकेल मैं देता हूँ। दुश्मन मिल जाए गर्दिश में जिससे मिनटों में एक आग्नेयास्त्र राफेल मैं देता हूँ।।

बेटी कोई वस्तु नहीं जो जो उसका दान करोगे, बेटी तो बेटी है, क्यों बेटी का दान करोगे। ब्याह करो पर दान नहीं क्या यह उसका अपमान नहीं, जो वस्तु समझ कर दान हो गई, […]

गांव का मकान रोता तो होगा। मेरे आने की आस में सोता ना होगा।। ख़ुद को संभालने की कोशिश करता। घुट घुट के खंडहर होता तो होगा।। सिपाही बनकर पड़ा ताला भी। अब जंग से […]

मेरे घर में रहे तो फिर किराया दे गए होते भंवर में था , मुझे कोई किनारा दे गए होते नहीं कुछ और ख्वाहिश है सनम तुमसे मुझे लेकिन चले जाना हि था तो दिल […]

गरीब गरीब रह गया, सेठ सौ गुना सेठ। खाई सा अंतर हुआ, भूख बराबर पेट।।1 गरीबों के उत्थान की, बनी योजना लाख। कागज में पूरी हुई, उस तक पंहुची खाक।।2 —– सतीश पाण्डेय

कितने बदल गये है इंसान। बेच कर अपना ईमान।। सच्चाई से कोस दूर भागे। झूठ के बीज बोये बेईमान।। बुरी नजर वाले का मुंह है गोरा। नेकी करने वाले को बना दिए हैवान।। झूठ के […]

रख अभी जिंदा मुझे, आंसू बहाने के लिए साथ तेरे प्रेम का रिश्ता निभाने के लिए और कुछ ना मांगता हूं बस यही अरदास है। दे दे बस दो गज जमीं इक आशियाने के लिए […]

मुझे तेरी हथेली पर जिगर की बात लिखने दे तुझे लव की कसम है आज सारी रात लिखने दे लिहाजा आप मुझसे हो खफा एहसास है लेकिन मिला जो आपसे मुझको वही सौगात लिखने दे। […]

छाती चौड़ी की सिगरेट जलाई, सोचता है इसे पी रहा हूँ। तू नहीं पी रहा इसको प्यारे यह धुंआ तो मजे से तुझे पी रहा। —– डॉ0 सतीश पाण्डेय

लोकतंत्र के वृहद भवन का मुझको स्तम्भ मानो न मानो मैं धरम जाति भेदों से ऊपर आम जनता की बातें लिखूंगा। जो घटित हो रहा है लिखूंगा जो गलत हो रहा है कहूंगा, सब चलें […]

रखे रहो हाथो पे हाथ प्रिया , सोचती रहो कोई अनसोंची बात प्रिया, सर्द हवा के झोंके में, जरा- ठहर जाओ रात प्रिया, हम मिलजुल कर सुख दुःख बाटेंगे, जो मिलेगा जन्म जात प्रिया।

अंगारों से खेलूंगा और तूफ़ा से लड़ जाऊंगा मंज़िल मुठ्ठी में होगी ,ऐसे पीछे पड़ जाऊंगा एक हार से कम ना आंको मुझे जरा दुनिया वालों हर मुश्किल घुटने टेकेगी, गर जिद पे अड़ जाऊंगा […]

जय महादेव जय मृगपाणी दक्षाध्वरहर जय कामारी शशिशेखर ,नीलकंठ भगवन जय महाकाल जय त्रिपुरारी शिव शंकर, गंगाधर शंभू जय जगद्गुरू जय व्योमकेश मुझे अपनी शरण में लो भगवन ,सर्वज्ञ अनिश्वर जय महेश। ✍️ देव 🙏

तुम मिटाती रहो मेरे प्यार के सबूत मैं सबूत जुटाता रहूंगा। तुम कितना भी मेरे ख्वाबों से बचना चाहो मैं हर रात ख्वाबों में आता रहूंगा।

स्वप्न में रोज लिखती हूँ तुम्हारे नाम की कविता, कहीं कोई देख ना ले बस इसी चिंता में रहती हूँ, इसलिए उन सबूतों को मिटाकर ही मैं जगती हूँ।

हौंसले के दम पर जीते आ रहा हूं, लहू को बहाकर घूंट पीते आ रहा हूं। पहचान की परवाह करना मैं छोड़ दिया, धर्म कर्म से जीने का सलीका जब से सीखा हूं।। ✍महेश गुप्ता […]

हारा प्राणी हारा प्राणी धूल चटाता, जीता प्राणी टेस में जीता। जागरूक हमेशा लड़ता है, हालातों से कभी नहीं घबराता।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

तन मन में मेरे ज्वाला धधक रहा, सीने में मेरे बदले की भावना पनप रहा। दूर हो जा मेरे नज़रों से पापी पाकिस्तानी, तेरे दशहतगर्द का खेल मैं जान रहा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

आज राजनिति का लगता है भोर हुआ है, चारों तरफ नेता जी का मचा शोर हुआ है। आंख खुला नेता जी का जथ्था देखा घर पर, लगता है वर्षो बाद चूनाव का बिगुल बजा हुआ […]

आतंक का आओ मिलकर नाश करें, चोर उचक्कों का चलो पर्दाफाश करें। छोटे मोटे गुंडे मवाली को सबक सिखा, उनके अपराधी हौसले का अंत करें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मुझे देख तुम्हें सच में रोना आता हैं, मैं खुश हूँ इंसानियत को जिंदा देखकर। हालातों को देख मुँह फेरने वाले सैकड़ों हैं, एक जिंदा दिल को देख मेरे दिल तू दुआ कर।। ✍महेश गुप्ता […]

दिल्ली के चोर सन्नाम हैं जहाँ में, नेता और चोर बेइमान हैं वहाँ के। कभी मत आना उनके झांसे में, फ्री फ्री बोलकर ठगते बहुत है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

दिल की सुनो दिल से करो बात, इंसानियत को जगाओ मित्र करो ना रात। रब से करो तुम अपने दुख का फरियाद, अपने प्यार को लुटा नफरत को दो मात।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

तुम्हारे प्यार में मैं क्या से क्या हो गया, कभी मिट्टी का दीया कभी मटका बन गया, जब देखा तुम्हारो हाथों में गैर का हाथ। मैं फौलादी मिट्टी का इंसान टूट कर बिखर गया।। महेश […]

आतंकी गुंडे मवालियों का जात धर्म नहीं होता, सपनों में भी हत्यारो से अच्छा कर्म नहीं होता। गुंडे बदमाश के लिए आलाप कढ़ाने वाले आस्तीन, जाहिलो के लिए दिल में कोई मर्म नहीं होता।।

संवेदनाएं मर चुकी हैं आज सब किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो सब दिखावा है मेरे व्यवहार में किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो. डॉ. सतीश पांडेय, चम्पावत उत्तराखंड