खुद को ही खुद में उलझा लिया मैंने। मुझे वहम था ,तुझे सुलझा लिया मैंने।। , दूर तलक देखा सब अँधेरा ही अँधेरा था। फिर इक रोशनी को पास बुला लिया मैंने।। , चले थे […]
खुद को ही खुद में उलझा लिया मैंने। मुझे वहम था ,तुझे सुलझा लिया मैंने।। , दूर तलक देखा सब अँधेरा ही अँधेरा था। फिर इक रोशनी को पास बुला लिया मैंने।। , चले थे […]
कहाँ किसी को समझ आऊँगा मैं। बस इक लम्हा हूँ गुजर जाऊंगा मैं।। ‘ तूफानों अब के दम भर के मिलना। तिनका नही हूँ जो बिखर जाऊँगा मैं।। ‘ मुझे गुमराह करने वाले वहम में […]
जख़्म दे रहे है ,दवा देने वाले। गुनाह कर रहे है,सजा देने वाले।। , चिरागों की हस्ती,मिटती नहीं है। सुन लो तुफानो को,पता देने वाले।। , अभी मैं हूँ तनहा ,कल क्या रहूँगा। महफिल से […]
वो ख़्वाब; वो ख़याल, वो अफ़साने क्या हुए । सब पूछते हैं लोग; वो दीवाने क्या हुए ॥ अपनों से जो अज़ीज़ थे आधे—अधूरे लोग । ‘पहचान’ दी जिन्होंने; वो ‘बेगाने’ क्या हुए ॥ किसने […]
बंधु ! शक्ति–स्वरूपा माँ दुर्गा की आराधना के अकल्पनीय दिवस और अंतत: वैभव एवं विजय के पर्व ‘दशहरा’ पर मन–मानस में व्याप्त ‘लोभ–मोह–आघात’ के प्रतीक “रावण” का दहन । आप सभी का हार्दिक अभिनंदन एवं […]
वतन में आज नया आफताब निकला है, हर एक घर से गुल ए इंकलाब निकला है। सवाल बरसों सताते रहे थे जो हमको, सुकूनबख्श कोई अब जवाब निकला है। गये थे सूख समन्दर उदास आंखो […]
तेरी कलम को कभी अपनी रुबाई नहीं दूंगा, मैं तुझको चश्म-ए-नम की कमाई नहीं दूंगा l तेरी आंखों में वहम के कई पर्दे टंगे हुए हैं, मैं तुझे सामने रहकर भी दिखाई नहीं दूंगा l […]
ज़रा सा गौर से सुन अब ये आईंदा नहीं होना, कि मुझको तेरा होके और शर्मिन्दा नहीं होना| जहां मतलबपरस्ती आशनाई नोच खाती है, मुझे ऐसी तेरी बस्ती का बाशिन्दा नहीं होना| बहोत ही बेरहम […]
अगर इश्क हो तो ही होती गज़ल है। ख़यालों के बिस्तर पे सोती गज़ल है।। दिशा है दिखाती ये भटके हुओं को, दिलों की ख़लिस को भी धोती गज़ल है।। जो साहित्य […]
हंसाकर कहीं तुम रुला तो न दोगे, कोई जख़्म फिर से नया तो न दोगे। हसीं वादियों के सपने दिखाकर, कहीं यार तुम भी दग़ा तो न दोगे। हिफ़ाजत का कर के बहाना कहीं […]
****** यही सोचा मैं ज़िंदगी की बेहिसी पर ग़ज़ल कहूँगा अज़ाब तेरे, तेरी अज़ीयत की चाशनी पर ग़ज़ल कहूँगा भटक रहा हूँ मैं कबसे तन्हा न हमसफर है न रौशनी है ये सहरा सहरा भटक […]
******** तुम जो आओ ख्वाब में तो राब्ता रह जाएगा इक दिया उम्मीद का दिल में जला रह जाएगा पूछ लो तुम हाल मेरा बस दिखावे के लिए के भरम दिल में मुहब्बत का ज़रा […]
2.01(63) मैं ! तुझे छू कर; ‘गु…ला…ब’ कर दूँगा ! ज़िस्म के जाम में, ख़ालिस शराब भर दूँगा !! तू; मेरे आगोश में, इक बार सही; आ तो ज़रा ! ख़ुशबू—सा बिखर जाएगी, सारा हिसाब […]
बचपन साथ बहारें देखें बड़े हुए बंटवारें देखें फिर आँगन में धुप ना आयी आँखे अब दीवारें देखें चल फिर रेत के महल बनायें और नदियों की धारें देखें मंदिर में तो मिला नहीं रब […]
ज़िंदगी को इस—–तरह से जी लिया । एक प्याला-–फिर; ज़हर का पी लिया ॥ वक़्त के सारे ‘थ…पे…ड़े’ सह लिए । गम जो बरपा, इन लबों को सी लिया ॥ अब अगर कुन्दन—सा दीखता….मैं दमकता […]
ღღ_मैं भी लिक्खूँगा किसी रोज़, दास्तान अपनी; मैं भी किसी रोज़, तुझपे इक ग़ज़ल लिक्खूँगा! . लिक्खूँगा कोई शख्स, तो परियों-सा लिक्खूँगा; ग़र गुलों का ज़िक्र आया तो, कमल लिक्खूँगा! . बात ग़र इश्क़ की […]
इन परों में वो आसमान, मैं कहॉ से लाऊं इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं (कफ़स = cage) हो गये पेड सूने इस पतझड के शागिर्द में अब इन पर नये […]
२१२२ १२१२ २२ अपने ही क़ौल से मुकर जाऊँ । इससे बेहतर है खुद में (खुद ही) मर जाऊँ ।। तू मेरी रूह की हिफ़ाजत है ; बिन तेरे जाऊँ तो किधर जाऊँ । तेरी […]
इस मंच से जुड़े सभी काबिल रचनाकारों के नाम- ****उड़ान भरने दो**** अपनी आगोश में ये आसमान भरने दो, ये नये परिन्दे हैं,इन्हें उड़ान भरने दो l ये जिन्दगी जीने का हुनर सीख जायेंगे, ज़रा […]
काश! कोई तो रास्ता निकले. मुश्किलों से मेरा गला निकले. जान..छूटेगी.. उसके.. छूने से, जान आये तो मेरी जां निकले. लाख सदियों में तय नहीं होगा, फ़ासले.. इतने दरमियां निकले. कौन.. होता हूँ.. दोष दूँ […]
**मेरी गज़लों में तुझे ढूढ रहे हैं ज़माने वाले** मेरी गज़लों में तुझे ढूढ रहे हैं ज़माने वाले, अब कहां तुझको छुपाऊं छोड़ के जाने वाले l कोई तो है जो इस […]
ताज़ा गज़ल- मेरा ये हुक्म है सांसों::Er Anand Sagar Pandey मेरा ये हुक्म है सांसों कि एहतियात रहे, वो रहे ना रहे ता-उम्र उसकी बात रहे l वो क़मर हो के […]
एक पुरानी गज़ल- **ख्वाबों की फसलें आज भी मैं बोया करता हूं::गज़ल** हक़ीक़त जान ले कि रात भर मैं रोया करता हूं, बहुत हैं दाग दामन में जिन्हें मैं धोया करता हूं […]
???????? ग़ज़ल ——— डगमगाती सी नाव है भाई । भाइयों में तनाव है भाई ।। याद कैसे रहे लगी दिल की । आज झूठा लगाव है भाई ।। दिल बड़ा पाक-साफ होता था । अब […]
**समझदार लोग धूल फांकते हैं::आनन्द सागर** जो अपने आगे दूसरों को कम में आंकते हैं, ऐसे ही समझदार लोग धूल फांकते हैं l जिनसे अपने घर का हाल सम्भाला नहीं जाता, ऐसे […]
रात भर करवटें मैं बदलता रहा अँधेरो में खुद को छलता रहा टूटा नहीं जमाने की चोट से साँसों की तपिश से पिघलता रहा ताल्लुक नहीं था जिनसे मेरा उनको भी ताउम्र सहता रहा दिल […]
कदम हैं अब भी हरकत में कहीं ठहरा नहीं हूं मैं, यक़ीनन टूट चुका हूं मगर बिखरा नहीं हूं मैं l अभी भी आईने में खुद को अक्सर ढूढ लेता हूं, सुनो ऐ गर्दिश-ए-हालात बस […]
पुरानी डायरियों से- **अब बात मेरी जान पे है::गज़ल** जेहन में दर्द जो उठता है आसमान पे है, बात ये है कि अब बात मेरी जान पे है l खौफ़ लगता है कि सांसें ना […]
उपर चढ़ते , नीचे जाते ईमान खरीदे बेचे जाते ~ ए सी कमरों में बैठ कर क्या क्या नहीं सोचे जाते ~ सियासत का पहला पाठ पाँव कैसे खींचे जाते ~ किरदार पे कैसा भी […]
**तेरे दर से उठे कदमों को::गज़ल** तेरे दर से उठे कदमों को किस मंज़िल का पता दूंगा मैं, भटक जाऊंगा तेरी राह में और उम्र बिता दूंगा मैं l हां मगर अपने होठों पे तेरा […]
लहू के आसूँ रोना, बमुश्किल समझ आएगा किसी से दिल लगा लो बस तजुर्बा खुद ही मिल जाएगा / जर्रा-ए-ख़ामोशी में है क्या रक्खा यहाँ कोई छुप न पाएगा तलाश-ए-महफ़िल रखो जारी कातिल मिल ही […]
मन की बात खुदा ही जानें आँखें तो दिल की सुनती हैं, जिनसे पल भर की दूरी रास नहीं उनसे ही निगाहें लड़ती हैं, दिल भँवर बीच यूँ फँस जाता साँसें भी मुअस्सर ना होतीं, […]
एक ताज़ा ग़ज़ल के चन्द अश’आर आप हज़रात की ख़िदमत में पेश करता हूँ; गौर कीजिएगा… चाहता था जिसे जिन्दगी की तरह, वो रहा बेवफ़ा जिन्दगी की तरह। हाँ मेरा प्यार था बस उसी के […]
कश्तियाँ समंदर को ठुकराने लगी है.. तुमसे भी बगावत की बू आने लगी है.. मत पूछिए क्या शहर में चर्चा है इन दिनों.. मुर्दों की शक्ल फिर से मुस्कुराने लगी है.. मैं सोचता हूँ इन […]
कतरा-कतरा करके समन्दर निकाल दूंगा मैं, मैने तय किया है अपनी आंखें खंगाल दूंगा मैं ll मेरे सदमों का सबब तुम हो ये राज राज रहेगा, कोई गर पूछ भी लेगा तो टाल दूंगा मैं […]
देखना उनकी नियत भी बे-असर हो जायेगी, चालबाज़ी जब हमारी कारगर हो जायेगी. देखना है खेल मुझे साफ़ पौशाको का उस दिन, भोली जनता जब कभी भी जानबर हो जायेगी. बिगडे लोगो के लिए बिगडे […]
तेरी बुराईयों को हर अखबार कहता है, और तू है मेरे गाँव को गँवार कहता है. ऐ शहर मुझे तेरी सारी औकात पता है, तू बच्ची को भी हुश्न-ए-बहार कहता है. थक गया है वो […]
****बगावत कर लेंगे::गज़ल**** छुप के बैठे हैं कई अल्फाज़ मेरे होठों की तहों में, तुम कोई बात करोगे तो ये बेबात बगावत कर लेंगे l बड़ी मुश्किल से मेरे हालात मेरे काबू […]
**…..TERA NAAM…..** Mere Honthoon Per Jab Bhi Tera Naam Aaya Aankh Main Aansu, Haath Main Jaam Aaya Tere Ishq Ki Talab DIl Ko Aaisi Padi Yaad Dil Ko Tu Subah-Shaam Aaya Mere Honthoon Per Jab […]
मस्जिदों में काश की भगवान हो जायें मंदिरों में या खुदा आजान हो जाये ! ईद में मिल के गले होली मना लेते काश दिवाली में भी रमजान हो जाये !! बाअदब मतिहीन मिलते मौलवी […]
“मातृ दिवस पर चंद पंक्तियां ” …………………………………………….. जमाने में जो सच है जरा उसको बताइए दौर-ए भरम है युं नही बातें बनाईए | युं कहकहे लगा करार आये कब तलक चेहरे से बंया है न […]
मेरी पुरानी रचना… ……………………….. खाक पर बैठ कर इतना भी इतराना क्या दर्द चेहरे पे लिखा है इसे छिपाना क्या…! कब कहां किस तरह से क्या होगा , जब चले जाना है जहाँ से तो […]
भूल कर भूल से ये भूल मत किया किजे कभी किसी को भरोसा नही दिया किजे | मुकर गर जाइये करके करार दिलवर से इस अदावत पे कभी प्यार मत किया किजे || जो पीछे […]
……………गजल…………. हम समंदर को समेटे चल रहे है ठंडे पानी में भी हम उबल रहे है ! दुश्मनों के पर निकलते जा रहे है देख अपनो की खुशी हम जल रहे है || है बडी […]
“गजल” चलो इक बार हम एक दुसरे में खो कर देख लें चलो इक बार हम एक दुसरे के होकर देख लें ! बिताएँ है बहुत लमहा अजाब-ए तन्हाई के हम चलो हरेक पल को […]
जिन्दगी जब भी मुस्कुराती है गीत उनके ही गुनगुनाती है | पलक गीरते जो पास होती है आँख खुलते ही चली जाती है || कदम-कदम पे मुश्किलें मिलती जिन्दगी हमको आजमाती है | आशना जिसको […]
तेरी आँखों में रहूँगी तो सँवर जाऊँगी गर तेरे बदले मिले दुनिया मुकर जाऊँगी ख्याल हूँ कैद न कर तू मुझे इन पलको में खुशबू बन तेरा मै दामन छू गुज़र जाऊँगी छूना मत तल्ख़ […]
तेरी तस्वीर रू ब रू कर ली जब भी जी चाहा गुफ्तगू कर ली हम ने दिल में बसा लिया तुम को अपनी हर सांस मुश्कबू कर ली प्यार के इक हसीन धागे से जिंदगी […]
” गजल ” जहर मौत और जिन्दगी भी जहर है सिसकती है रातें दहकता शहर है | सदमों का आलम बना हर कही पर सहम अपने घर में हम करते बसर है || ना हम […]
हिसारे जात से बाहर निकल के देखते हैं चलो खुद का नज़रिया हम बदल के देखते हैं … सफर का शौक है हम को कहीं भी ले चलो तुम तुम्हारे साथ भी कुछ दूर चल […]
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