जिंदगी  में   मेरी   एक  अपनापन है  आज़कल जेब में भले ही गोपाल ठन–ठन है  आज़कल।   साथ   देने  को   कोई  दूसरा  साथ में नहीं बस  अपना बेचारा  साफ मन है आज़कल।   तुम    जब […]

  तेरा — मेरा इश्क पुराना लगता है । दुश्मन हमको फिर भी जमाना लगता है ॥ गुलशन – गुलशन खुशबू तेरी साँसों की । मौसम भी तेरा ही दीवाना लगता है ॥ पर्वत – […]

कइस अकेला है वह, मुझे जाने दो जो किया है वादा, मुझे निभाने दो वो समां भी कितना रंगीन होगा जब मिल बैठेंगे दीवाने दो चलेंगी रात भर इस दिल की बातें और भरेंगे मय […]

हमारे साथ कदम से कदम मिला चल सको तो चलो के इस इश्क़ में कुछ देर ठहर सको तो चलो बहुत ही हौसला चाहिए, इस दिल की निगेबानी करने को अगर तुम इसकी पहरेदारी कर […]

किसी को भूल जाने मे वक़्त तो लगता है के आँखों के आंसू मिटाने में वक़्त तो लगता है जब बैठे हो चाहत-ऐ-किस्ती मे, तो सब्र करो इसको साहिल तक पहुचाने में वक़्त तो लगता […]

हो गयी रुकसत घटा बरसने के बाद खिला मौसम नया बरसने के बाद मेरे गमो से रूबरू हो कर ये हवा भी जोर से बहने लगी बरसने के बाद होता आमना-सामना कुछ पल के लिए […]

जिंदगी की सुंदर प्लास्टिक, कचरें में बदल जाती है अगर यूज न हो ढंग से, ऐसे ही जल जाती है कभी कभी जिंदगी से बढी मौत हो जाती है जिंदगी कभी कभी पानी में भी […]

बहुत शराफत से पेश आये कुछ लोग हमारे जनाजे पर आये कुछ लोग आखरी रस्म की कदर करी उन सब ने हमें कांधा देने आये कुछ लोग रस्म-ऐ-बफा सब निभा नहीं सकते है काबा पर […]

अधूरी सी जिंदगी का अधूरा फ़साना हूँ मैं। नई सी दुनिया में शख़्स कोई पुराना हूँ मैं।। , चल रही है सरहदों पे जंग न जाने कब से। पता नहीं की किस गोली का निशाना […]

हवा के नर्म परों पर सलाम लिखती हूँ गुलों की स्याही से जब जब पयाम लिखती हूँ बड़ा सहेज के रखती हूँ तेरे खत सारे जो सुब्हो शाम मैं तेरे ही नाम लिखती हूँ जिसे […]

कब तलक ख़ुद को समेटा जाये, चल कोई ख़्वाब निचोड़ा जाये… कोई आया नहीं अपना हमारे कारवां में चलो आज कोई पराया जोड़ा जाये.. जिंदगी चली जा रही है सीधी सी आज इसे कहीं और […]

दूर रह कर कभी दूर नहीं रहता है मेरी चाहत है सदा दिल के मकीं रहता है देखिए दिल और नज़र में है ताअल्लुक कैसा चोट लगती है कहीं दर्द कहीं रहता है बामो दर […]

मैं ये नहीं कहता की तुम भला नहीं करते। पर बेबसों को रौंदकर अच्छा नहीं करते।। ‘ मदद कर दिया करो कभी बेबसों की भी। खुद के लिए तो हम क्या क्या नहीं करते।। ‘ […]

देखना है की हिस्सों में कैसे बँट पाउँगा मैं। इक बूढ़ा शज़र हूँ लगता है कट जाऊंगा मैं।। ‘ मुझे सहारा देने में दिक्कतें तो है बच्चों को। ख़ामोश ही रहूँगा की जब थक जाऊंगा […]

इक ज़माना था जब डरता था मैं। जब तेरी गलियों से गुजरता था मैं।। , तुम बेख़बर थे तुमको क्या मालूम। की कैसे ही पल भर में मरता था मैं।। , हालात बदल गए है […]

मेरी मौत का तमाशा देखने चले आओ के मैं मर रहा हु मुझे देखने चले आओ कुछ तो मेरे दिल मैं भी अरमान होंगे तुम जानते हो क्या है मेरी आखरी खुवाईश मुझसे पूछने चले […]

खुद को शराब, और अपनी जवानी को नशा कहते है खुद है वो एक मुर्दा और हमको वो फनाह कहते है हुसन-ऐ-शबाब परोसना एक काम-ऐ-सबाब है उनके लिए इबादत-ऐ-मोहोब्बत को वो एक संगीन गुनाह कहते […]

बस एक यही अदा हमको उसकी भाती नहीं है के बुलाने के बाबजूद भी वो मिलने आती नहीं है, मोहोब्बत है उसको हमसे हम जानते है यूँ तो बस अपने मुँह से वो हमको कभी […]

तेरे शहर का मौसम मैंने अजीब देखा लोगो का वह पैर एक अलग तहज़ीब देखा, खरीद सके न मुझ से इंसा को वो एक कौड़ी-ऐ-खुसी देकर तेरे शहर के लोगो को मैंने बहुत गरीब देखा, […]

मेरी ज़िंदगी का मैं ही हिस्सा नहीं था। मुझे भूल जाओ मैं कोई किस्सा नहीं था।। , मुझ पर इलजाम लगाकर के जाने वाला। क्या कहूँ शख्स वो भी मुझ सा नही था।। , क़िस्मत […]

वो रोती रही रात भर इसलिये कि सरहद से आई खबर इसलिए। बड़े नाज से उसने पाला जिसे वो आया तिरंगे में घर इसलिए। सुहागन लगी चूड़ियाँ तोडने चलेगी अकेली डगर इसलिए। कोई तो मिलेगा […]

दरिया को हमेशा समंदर की चाहत है। नर्म लहज़ा नर्म बातें समझों सियासत है। , मेरी जिंदगी की दुआ करने वालों शक्रिया। मुझे तो हर रोज़ मर जाने की आदत है।। , ख़तावार ही सीखा […]

इक दास्ताँ अधूरी तुमको सुनायें कैसे। गिरती हुई दीवारे फिर से उठाए कैसे।। , जैसे पढ़ी थी दुनिया वैसी नहीं हक़ीक़त। सच जो है मैंने जाना खुद को बताएँ कैसे।। , हर हर्फ़ में हमारी […]

बेवफ़ाई समझी नहीं वफ़ा वफ़ा करने लगे। जरा सी चोट खाई नही दवा दवा करने लगे।। , नासमझ हो तुमने काँटे है जंगल पे जंगल। अब जब साँस रुकी है तो हवा हवा करने लगें।। […]

जब जब मैं बेबाक हुआ हूँ। तब तब मैं मजाक हुआ हूँ।। , बेगुनाह होके सज़ा काटी है मैंने। तब जाके कही इंसाफ हुआ हूँ।। , गवाह है मेरा जलता हुआ मकान। की ज़िन्दा था […]

मोहब्बत के बदलें मोहब्बत नहीं है। हक़ीक़त के बदले हक़ीक़त नहीं है।। , बहुत मर्तबा हम भी उलझें थे भँवर में। पहले सी अपनी अब तबियत नहीं है।। , सुबह शाम मेरी थे जो फ़िक्र […]

खुद को ही खुद से मैंने जुदा कर दिया। इक इंसान था जिसे हमने खुदा कर दिया।। , मुक़म्मल होने में लगे थे हमको कई साल। मगर तुमने मुझे पल भर में धुंआ कर दिया।। […]

तुमसे दूर होकर भी ज़िन्दा हूँ मैं। बस इतनी सी बात पे शर्मिंदा हूँ मैं।। , ख़्वाहिशों की दुनियां में जाना तो था। पर जो उड़ न पाया वो परिंदा हूँ मैं।। , ज़िन्दगी गुजारी […]

जब कभी भी तुमको पुकारा है हमने। बस इक मीठे से दर्द को उभारा है हमने।। , सूनसान राहों पर हुई हो जो कोई आहट। तो वही उम्मीद वही चेहरा निहारा है हमने।। , मेरी […]

इक शाम हूँ ख़मोशी की आवाज हूँ मैं। मैं इक समंदर हूँ समझो बेहिसाब हूँ मैं।। ‘ सुनो उम्र भर मुझसे रूठकर रहने वाले। कहते हो सबसे,की तुमसे नाराज हूँ मैं।। ‘ इक शहर था […]

दर्द ऐसे भी अपने कोई संभाला करता है। जैसे चराग जलता है मगर उजाला करता हैं।। ‘ सफर करने निकले थे कुछ रोशनी को लेकर। पर ये तूफान है कि हर वक्त दम निकाला करता […]

जिंदगी में यहा सबका कोई हमदर्द नहीं होता! गमों से कहना हो कह दो हमें अब दर्द नहीं होता!! ‘ की मौसम भी बदला है हवाएँ भी अब भी ठंडी है! मगर जहाँ पर बर्फ […]

मासूम चेहरे जो कभी,गुनाह नहीं करते। हम यूँ जाग के रातो को,सुबह नही करते।। , हममें है लाख कमियां,चलो हम मानते है। पर दिल से कहना,क्या तुम खता नहीं करते।। , तर्जुबा एक ये भी […]

चाँद जमीन पर कभी उतरता है क्या?? बिन तपे कभी सोना निखरता है क्या?? ‘ हम कहेंगे हजार बार फरेबी को फरेबी। सच लिखने से यहाँ कोई डरता है क्या?? ‘ हमें तो याद है […]

सभी  इल्ज़ाम  शीशे  पर  ये  जग कबतक लगायेगा , भला।  नाकामियों   को   वो   यहाँ   कैसे   छुपायेगा ।   तुम्हारा  है  तुम्ही  रख  लो  उजाला  और  सूरज भी , हमारा   […]

हज़ार दवा है बस इक बुख़ार के लिए। अब दुआ ही करो इस बीमार के लिए।। , हम ख़ुशी से रहते है मौसम चाहें जो हो। अब इंतज़ार थोड़े करेंगे बहार के लिए।। , यहाँ […]

किस वज़ह से मिली है ये तन्हाई हमको। दिखतीं ही नहीं है ख़ुद की परछाईं हमकों।। , सदियों पहले किसी ने पुकारा था हमें भी। वो आवाज़ आज तक देती है सुनाई हमको।। , न […]

इल्तज़ा क्या करे कुछ न बाकी रहा। न वो महफिल रही न वो साथी रहा।। ‘ इस क़द्र जिंदगी भी खफा हो गई। साँसे चलती रही कुछ न बाक़ी रहा।। ‘ जख़्म देकर वो कहते […]