=============================== वो जो तेरी यादों का समंदर कभी सूखता ही नहीं । लाख भुलाना भी चाहा मगर दिल भूलता ही नहीं। हैं बरसता हुआ गम की घटा जो सावन ले आया, जुदा ए सनम तुम […]

नहीं थकती……। —————————- अश्रुपूरित नयन मेरे क्यों….? राह तुम्हारी ताकते नही थकती शून्यमात्र बिन तेरे-जीवन के पल “प्रीत”हमारी-कहते नही थकती मनुहार दिल की-सुने तेरा दिल भी “उम्मीदें”दिल की-सहते नही थकती गुदगुदाते मन को-मिलन के पल […]

न सवाल हुआ , न जवाब ही हमारी तन्हाई में । आंखों ही आंखों से बात हुई हमारी तन्हाई में । खामोशी को इकरार समझने लगे थे,ख्वाबों मे, पर जिंदगी है हकीकत समझ में आई […]

जब एक दिन तुम बिना बताये दूर कही मुझसे चली जाओगी वापस फिर से आओगी क्या वापस फिर से आओगी क्या मैं नाराज था तुमसे उस पल मुझे मनाने वाला कोई नही था अब फिर […]

जा रही हूँ आज सबसे दूर, खुद की ही तलाश में। वहीं, जहाँ छोड़ आयी थी खुद को, किसी की याद में। पर अब उससे भी ज़्यादा मुझे ज़रूरत है मेरी। अब ढूंढना है मुझे […]

एक ताज़ा ग़ज़ल …….. गुलफिशानी – फूलों की बारिश , बदगुमानी – शक ******************************** मैंने दुश्मन पे गुलफिशानी की … आबरू.. उसकी पानी पानी की …. मुझ पे जब ग़म ने मेहरबानी की ….. मैने […]

इक तस्वीर है इस दिल के पास। फिर क्यु दिल है उदास – उदास।। माना की तु दुर है सदियों से मगर, तेरी यादे है मेरे दिल के आसपास।। वो लरजते होठो से मेरे गीतो […]

आज कुछ खाली – खाली लगता है …२ यूँ जो छोड़ गए तुम मुझके … हर चेहरा सवाली लगता है … आज कुछ खाली – खाली लगता है … हँस के मिलती हूँ जब भी […]

जल उठे थे बुझ के हम, शमा – ए – लौ से प्यार की; फिर तेरी हर एक झलक, पे नज़रों को झुका जाना; गर कही जो चल पड़े, तेरे बुलाने पे सनम; वो तेरा […]

तेरी यादों का समन्दर कभी सुखता नही। आँखों में खुशी है मगर दर्द मिटता नही। चौमासें सावन सा बरसता गम है सीने में, जुदा-ए-सनम तुम बीन दिल अब लगता नही। लाख बोई फस्लें आरजुओं की […]

जमाने बीत गए जिनको भुलाये हुए आजफिर हैं क्यो याद वही आये हुए कितने बेरुखी से तोड़े थे वो दिल को दिल के टूकड़ो को हैं हम सम्भाले हुए सोचते थे न आएगी क़यामत कभी […]

उसी का शहर था उसी की अदालत। वो ही था मुंसिफ उसी की वक़ालत।। , फिर होना था वो ही होता है अक्सर। हमी को सजाएं हमी से ख़िलाफ़त।। , ये कैसा सहर है क्यू […]

जिसकों कहतें थे हम हमसफ़र अपना। वो तो था ही नही कभी रहगुज़र अपना।। , तुमको मुबारक हो भीड़ इस दुनिया की। हम काट लेंगे तन्हा ही ये सफर अपना।। , भूल गए हो यक़ीनन […]

हर रास्ता हमसे तंग हुआ, हम फिर रास्ते की तलाश मे निकले , शजरो शजर की चाहत मे रास्ते महज इत्तेफाक निकले । ठहरे जहाँ पल भर को ब आजादी ब आबोताब , हमारी आबादी […]

ग़ज़ल-ये तुम क्यों भूल गए मैंने तुम से प्यार किया था…..ये तुम क्यों भूल गए तुमको सब कुछ मान लिया था ये तुम क्यों भूल गए सुबह थी तुम शाम थी तुम मेरे दिल की […]

इस दीपक में एक कमी है,,,, हर सैनिक की याद जली है ।।।।।।। जिसने दी आज़ादी हमको,,,,,,,,, उनकी बेहद कमी खली है ।।।।। दुश्मन को मारा सरहद पे,,,,,,,,,, तो दीवाली आज मनी है ।।।।।।। देखो […]

इस तरह उलझी रही है जिन्दगी,,,,,, कोन कहता है सही है जिन्दगी।।।।। उलझनो का हाल मै किससे कहु,,, आँख के रस्ते बही है जिन्दगी।।।। अब नही पढना नशीब में इसे,,, गर्द सी मुझपे जमी है […]

तुझको ही बस तुझको सोचू इतना तो कर सकती हूँ,,,,,,,,, तेरे ग़म को अपना समझू इतना तो कर सकती हूँ ।।।।।।।।।। मुझको क्या मालूम मुहब्बत कैसे करती है दुनिया,,,,,,, हद से ज्यादा तुझको सोचू इतना […]

वतन पे है नजर जिसकी बुरी उसको मिटा देगें,,, सबक ऐसा सिखा देगें कि धड से सर उडा देगें।। जहाँ पानी बहाना है वहां पर खून देगें हम,,, वतन से प्यार कितना है जहाँ को […]

करे हैं काम वो इस धूप में जलती सी इक औरत,,, गमों को झेल लेती है सभी, गहरी सी इक औरत।।। बडों का मान रखती है झुकी रहती है कदमो में,,, कि रिश्तों के दरख्तों […]

ये मदहोश शाम और तन्हाई का आलम अपनों के बारे में न सोचते तो क्या सोचते   करीब-ए-मर्क़ है फिर भी अकेले इसलिये खबरी के बारे में न सोचते तो क्या सोचते   हुआ कभी […]

विधा-ग़ज़ल काफिया-ओ रदीफ़-तो कभी ************************* चाहती हो मुझे अगर बताओ तो कभी देख कर मुझको मुस्कुराओ तो कभी यूँ ना तड़पाओ तुम इतना दिल को मेरे हाल-ए-दिल अपना सुनाओ तो कभी दोस्त तो है बहुत […]

बहुत परेशान करती है तन्हा रातें हमकों। मुसल्सल याद आती है मुलाकातें हमको।। , ऐसे क्यूँ ख़फ़ा हो गए बिना सबब के तुम। क़ोई वजह थी जहन में तो बताते हमकों।। , ख़ुद मुज़रिम होके […]

जिंदगी भर ये क्या इन्तेज़ाम किया हमनें। इक उम्र तो बस यूँ ही तमाम किया हमनें।। , पता नहीं किस ख़्वाहिश में दर ब दर हुए। न सुकून ही मिला न आराम किया हमनें।। , […]

ख़्वाब है जिंदगी,जिंदगी ख्वाब है। चेहरे देखा है उसका अलग आब है।। , जिसको कहतें रहे उम्र भर हम दवा। उसको सारा जहाँ कहता शराब है।। , खुद ही बदलें नहीं बस ये कहतें रहें। […]

इस क़ैद ए तन्हाई से कब रिहा होंगें हम। सोचा तो था की मुकम्मल जहां होंगे हम।। , रोज़ आते है ख़्याल हमकों परेशान करने। अब जितना कहेंगे उतने ही रवां होंगे हम।। , तुम […]

एक शराब की कहानी है ये एक शराबी की जुबानी है ये पीता है वो सुबह-शाम जी भर के एक शराबी की ईमानदारी है ये सुकून देती है ये बहुत दिल में जाने के बाद […]

तेरे इश्क मे…….तेरे इश्क मे , तेरे इश्क मे बेबस हुए तेरे इश्क मे बेखुद हुए तेरे इश्क मे बेहद हुए दीवाने हम ! तेरे इश्क मे…….तेरे इश्क मे , तेरे इश्क के दरिया मे […]

इक जमानें मे सच है शज़र हुआ था मैं। जानें कितने परिंदों का घर हुआ था मैं।। , अपनी छाह में बच्चों को खेलता देखके। जरूर ही जमाने से बेखबर हुआ था मैं।। , मेरे […]

माना तेरे काफ़िलो में शामिल नहीं हुए। पर ऐसा न था की हम मंजिल नहीं हुए।। , इक उम्र गुजरी यूँ ही ख्वाबो ख्यालों में। कुछ देख न पाएं कुछ हासिल नहीं हुए।। , जिंदगी […]

कब तक करोंगे यूँ बेईमानी खुद से। मुझे छोड़कर करोगे,नादानी खुद से।। , हमारी दास्तानों को फरेब कहने वाले। लिख नहीं पाओगें ये,कहानी खुद से। , तन्हाई में मिलें है लोग जो समन्दर किनारे। उनका […]

न वो वक़्त रहा न याद है क़िस्सा कोई। मेरे हिस्से में ही नहीं है मेरा हिस्सा कोई।। , ये किया है ख़िज़ाँओ ने जहाँ घर अपना। गुजरे जमानों में था यही गुलिस्ताँ कोई।। , […]

सफ़र फासलों का है ये बड़ा दर्द भरा, गर हो मुम्किन,तो कोई और अज़ाब दो ना बड़ा नहीं देखूँगा तेरी सूरत मैं कभी, इन आँखों को कोई और पता दो ना ज़रा बातों-बातों में बनी […]

हम तेरे वादों की जब गहराई में उतरे। सदमा सा लगा जब सच्चाई में उतरे।। , तुमको ढूंढते रहें थे महफिल महफिल। पर सुकून मिला जब तन्हाई में उतरे।। , जिसनें चाहा जैसा वैसा बनाया […]

इक अरसे से कोई ख्वाब नहीं देखा हमने। जब से तुम गए आफ़ताब नहीं देखा हमने।। , लफ्ज़ दर लफ्ज़ हम क्या क्या नहीं हुए थे। पर खुद का लिखा किताब नहीं देखा हमने।। , […]

कुछ न कुछ दिल में चलता रहता है। इक ख़्वाब अनदेखा पलता रहता है।। , क़िस्मत कहें की मुक़द्दर कहें उसको। जो नाम सुबह शाम खलता रहता है।। , वक़्त गुजरा है कुछ इस तरह […]

देखो तो मजमा आजकल उनका इधर लगता है मतलब की है यारी, सर-बसर लगता है कहते थे कभी मुल्क की आवाम के हैं सेवक देखो तो आज बनारस ही उनका घर लगता है कब्रिस्तान और […]

जो भी तुम कहते हो वही होगा। ऐसा सोचते हो तो नही होगा।। , हमसें क्यूँ पूँछते हो पते ठिकाने। मैं आसमाँ नहीं पता ज़मी होगा।। , किसकी राहों में अब पलकें बिछाएं। हम समंदर […]