मैंने खुद लिखा अपनी किस्मत मैं दर्द इशारा तो मिला था कई बार ज़िन्दगी का संभल जाता अगर गौर करता ज़रा भी आज यूँ मारा मारा न फिरता दर बदर ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल […]

आतंक का आओ मिलकर नाश करें, चोर उचक्कों का चलो पर्दाफाश करें। छोटे मोटे गुंडे मवाली को सबक सिखा, उनके अपराधी हौसले का अंत करें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मुझे देख तुम्हें सच में रोना आता हैं, मैं खुश हूँ इंसानियत को जिंदा देखकर। हालातों को देख मुँह फेरने वाले सैकड़ों हैं, एक जिंदा दिल को देख मेरे दिल तू दुआ कर।। ✍महेश गुप्ता […]

ज़मीन पर टिके हो कदम मंज़िल पर टिकी हो नज़र राहें खुद आसान हो जाएंगी लाख मुश्किलों से भरी हो डगर ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

दिल्ली के चोर सन्नाम हैं जहाँ में, नेता और चोर बेइमान हैं वहाँ के। कभी मत आना उनके झांसे में, फ्री फ्री बोलकर ठगते बहुत है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

सपना उज्जवल भविष्य का जितना ही बड़ा होगा कामयाबी का ताज रत्नों से उतना ही जड़ा होगा क्या हुआ अभी फर्श पर नज़र आते हैं हम कल अपने सम्मान में भी जनसैलाब उमड़ा होगा ©अनीता […]

दिल की सुनो दिल से करो बात, इंसानियत को जगाओ मित्र करो ना रात। रब से करो तुम अपने दुख का फरियाद, अपने प्यार को लुटा नफरत को दो मात।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

जिन्हें हम भूल जाते हैं फिर भी वो याद आते हैं बन कर रतजगे यादों के ज़हन में क्यों उतर जाते हैं ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

लौटना न मुसाफिर बस कदम तू बढ़ाना आयें जो भी मुश्किल खुल कर तू भिड़ जाना कोई ज़ोर नहीं चलता गर मज़बूत हों इरादे हारा वही है बस जो मुश्किलों से दूर भागे ©अनीता शर्मा […]

यूँ बनती बिगड़ती किस्मत की नुमाइश ना कर बन्दे तक़दीर सँवरती नहीं शिकायत के पुलिंदों से ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

लिख दी है इबारत कामयाबी की मैंने तवज्जो मेहनत को देकर पहले अब इंतज़ार है अपनी किस्मत का कब दौर मेरा भी लाएगी ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

दूरियां ज़बरदस्त कायम है दरमियाँ दो दिलों के कौन जाकर समझाए उन्हें किस्मत से मोहब्बत मिलती है दिलों में रंजिशें हो तो इश्क़ मुकम्मल हुआ नहीं करते ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

सावन की बूंदें मन में हलचल कर रहीं तुम कहाँ हो मीत मेरे आओ ना, मत रहो यूँ दूर मुझसे आओ ना, मैं मनोहर ऋतु में आखें भर रही, बाढ़ मत आने दो मेरे नैन […]

सावन की एक-एक बूंद कैसा एहसास दिलाती है? कोपलें भी फूटते लगती हैं…. पत्तियां नाचती हैं सावन में और पुष्प आपस में सौंदर्य की बातें करते हैं सब मगन होते हैं सावन में…. जब बरसात […]

अपराधै का बाटा जिन हिट्या नंतिनौ, अपराधै को बाटो बर्बाद करि दे लो। गरीबै का छोरा गैंगों में जिन घुस्या, गैंगों में फँसि बेर वापसी नै हुनी। जिन फंस्या, जिन फंस्या जन फंस्या नंतिनौ, अपराधै […]

राधा ने प्रेम किया मोहन को टूट कर, फिर भी चले गए मोहन राधा का दामन छोड़कर। क्या प्रेम का यही अर्थ है! क्यों विरह का सामना करना पड़ता है? क्यों वेदना की लौ में […]

तेरे ज़िस्म के पन्ने बस यूँ ही पलटता हूँ मैं तेरे चेहरे में अपनी पहली मोहब्बत ढूंढ़ता हूँ, तेरी रूह से कोई वास्ता नहीं मेरा तेरे इश्क को मैं अपना मुकद्दर समझता हूँ।

तेरे ज़िस्म के पन्ने बस यूँ ही पलटता हूँ मैं तेरे चेहरे में अपनी पहली मोहब्बत ढूंढ़ता हूँ तेरी रूह से कोई वास्ता मेरा तेरे इश्क को मैं अपना मुकद्दर समझता हूँ

शीर्षक:- ‘हम स्कूल चलेंगे’ हम स्कूल चलेंगे जहाँ हम खूब पढ़ेँगे, सीखेंगे अच्छी बातें और पायेंगे ज्ञान, पढ़ लिखकर हम बनेंगे अच्छे और महान, हाँ, हम स्कूल चलेंगे जहाँ हम खूब पढ़ेंगे। प्रार्थना सभा में […]

उड़ जा रे पंछी ख़ुशी से उस असीमित गगन में क्या सोचता है बैठ कर फिर कैद की फिराक में जल्दी से छोड़ दे ये बसेरा कहीं और जाकर खोज ले यहाँ पिंजरे है तेरी […]

जलते ही रोशनी फैलाती है, मोमबत्ती भी सीख दे जाती है, हम मानस पुतलों की तरह इक तालमेल बैठाती है व्यक्तित्व छोटा हो या बड़ा, महक भी चाहे हो जुदा, लेकिन कार्य पृथक नहीं इनका, […]

तुम कहती हो तो मान लेता हूँ कि दाग अच्छे हैं। किन्तु सच यह है कि दाग अच्छे होते नहीं हैं। एक बार लग जाने के बाद कहाँ धुल पाते हैं दाग जब दाग लग […]

मतलबी ही रहे तुम ज़िन्दगी के हर पड़ाव में अब उम्र हो चली है ज़रा पश्चाताप कर लो माना तुम ज़िन्दगी भर करते रहे छलावा! पर याद रहे मिलता हर कर्म का हिसाब, वक़्त करता […]

तुम्हे दूर जाना था, तो पास आये ही क्यों वादों से मुकर जाना था, तो सब्ज़ बाग़ दिखाए क्यूँ मेरी फितरत में नहीं शामिल बेवज़ह रिश्तों को तोड़ देना पर तुम खुदगर्ज़ निकले तो फिर […]

सिर्फ तुकबंदी नहीं कविता कोई यह तो ह्रदय से उपजता बोल है, दर्द का साक्षात अनुभव है यही प्रेम, करुणा, स्नेह मिश्रित घोल है, डॉ सतीश पांडेय, चम्पावत उत्तराखंड

मेरी कल्पना में कहीं जो बसी है वो मदमस्त थिरकती जो अपनी ही धुन में , फूलों सी महकती हर अदा में अभिव्यक्ति मोहपाश में बांधे वो कजरारी निगाहें , हाँ तुम वही मेरी प्रियवंदिनी […]

किस्मत ने पलटकर कहा आगे भी बढ़ ज़रा मैं बहुत बुलंद हूँ मैंने कहा तू बुलंद है फिर भी पलट सकती है ज़रा सामने देख मेरा लक्ष्य है खड़ा अब तेरे लिए नहीं उसके लिए […]

मौसम ए साजिश का है, ये मौसम बारिश का है, किसी को इंतज़ार रहता है, बारिश में भीगने का, एहसास,अच्छा होता है। हवाओं में वो सुकून होता है, ये मुहब्बत का सुरूर होता है। दिल […]

ओ माँ कितनो को तुझ पर कविताएं पढ़ते देखा है तेरी तारीफों में कितने कसीदे गढ़ते देखा है, कितनो को शब्दोँ से सिर्फ तुझपर प्यार लुटाते देखा है, कितना इस दुनिया को तेरी ममता का […]

बादशाहत दिखाते रहे आग पर आग लगाते रहे इक्कों के मायाजाल में फँसे बाजियों में गड्डियॉं फटकाते न जाने कितनी कीमत चुकाते गए ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

इस भरी बरसात में सब धुल गई बाहरी पर्तें मेरे व्यवहार की, अब छुपाऊँ किस तरह से झुर्रियां जो मेरी असली उमर दर्शा रही। खोट है मेरी नियत में आज भी आप करते हो भरोसा […]

ए आलस तू भाग जा यूँ जिन्न की तरह मुझपर ना कब्ज़ा जमा बहुत कुछ ज़िन्दगी में है करने को अभी बाकी तू मेरी कल्पनाओं पर ना यूँ लगाम लगा मंसूबे तेरे मैं पहचान गयी […]

कितनी दूर चलना है इसकी फ़िक्र कौन करता है बस मंज़िलें सही मिल जाएँ ज़माना भी ज़िक्र उसकी करता है जो लक्ष्य भेदकर अपना सफलता के परचम लहराता है वो कहाँ खटकता है फिर किसी […]

घनी काली चाँदनी रात जैसे हो रही तारों की बरसात महकाती गुज़रती ये ठंडी हवा, नींद के आगोश में है सारा जहाँ, ये रात क्या कह रही है, क्या किसी ने उस नज़्म को सुना, […]

सफर बहुत लम्बा तूफानों से घिरा था इरादा मेरा लेकिन पक्का बड़ा था बड़ी मज़बूती से पकड़ी थी जो पतवार अपनी मेरा ज़ज़्बा मेरी मुश्किलों के आगे जो खड़ा था लौटना न मुसाफिर बस कदम […]

कितनी रातें गुज़र जाती हैं नींद आये तो भी आंखें सोती नहीं ज़हन में ख्याल तेरा नज़र में इंतज़ार पलकें भीगती हैं पर आँख रोती नहीं ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

शुक्रगुज़ार तेरे नहीं तेरी तस्वीर के हैं तन्हाइयों में भी हमारे साथ होती है छोड़ती नहीं एक पल हमारा साथ साथ जगती भी है और साथ सोती है ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

दिलकश महबूब से इश्क़ बेहद खूबसूरत एहसास देता है कहीं नाकाम आशिक़ बना देता है कहीं सरताज बना लेता है ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

जीवन की है कठोर डगर,बढने से पहले तू संवर लक्ष्य हासिल करना है अगर,खोल ले तीसरी नजर। मासूम तुम्हारा चित जितना ये दुनिया उतनी मासूम नहीं प्रश्न खङा होगा तुझ पे सरे शाम सुबह चारों […]

साँझ हो रही है, ऊंचे पहाड़ों के शिखर बादलों से आलिंगन कर रहे हैं। साफ साफ कुछ नहीं दिख रहा है, परस्पर प्रेम है या बस दिखावा है। जो भी है कुछ तो घटित हो […]