शीर्षक:- ‘हम स्कूल चलेंगे’ हम स्कूल चलेंगे जहाँ हम खूब पढ़ेँगे, सीखेंगे अच्छी बातें और पायेंगे ज्ञान, पढ़ लिखकर हम बनेंगे अच्छे और महान, हाँ, हम स्कूल चलेंगे जहाँ हम खूब पढ़ेंगे। प्रार्थना सभा में […]
शीर्षक:- ‘हम स्कूल चलेंगे’ हम स्कूल चलेंगे जहाँ हम खूब पढ़ेँगे, सीखेंगे अच्छी बातें और पायेंगे ज्ञान, पढ़ लिखकर हम बनेंगे अच्छे और महान, हाँ, हम स्कूल चलेंगे जहाँ हम खूब पढ़ेंगे। प्रार्थना सभा में […]
उड़ जा रे पंछी ख़ुशी से उस असीमित गगन में क्या सोचता है बैठ कर फिर कैद की फिराक में जल्दी से छोड़ दे ये बसेरा कहीं और जाकर खोज ले यहाँ पिंजरे है तेरी […]
जलते ही रोशनी फैलाती है, मोमबत्ती भी सीख दे जाती है, हम मानस पुतलों की तरह इक तालमेल बैठाती है व्यक्तित्व छोटा हो या बड़ा, महक भी चाहे हो जुदा, लेकिन कार्य पृथक नहीं इनका, […]
तुम कहती हो तो मान लेता हूँ कि दाग अच्छे हैं। किन्तु सच यह है कि दाग अच्छे होते नहीं हैं। एक बार लग जाने के बाद कहाँ धुल पाते हैं दाग जब दाग लग […]
मतलबी ही रहे तुम ज़िन्दगी के हर पड़ाव में अब उम्र हो चली है ज़रा पश्चाताप कर लो माना तुम ज़िन्दगी भर करते रहे छलावा! पर याद रहे मिलता हर कर्म का हिसाब, वक़्त करता […]
लिबास बदलकर, किरदार बदल देता है, वो महानायक है, रोज नया इतिहास, रच देता है।
तुम्हे दूर जाना था, तो पास आये ही क्यों वादों से मुकर जाना था, तो सब्ज़ बाग़ दिखाए क्यूँ मेरी फितरत में नहीं शामिल बेवज़ह रिश्तों को तोड़ देना पर तुम खुदगर्ज़ निकले तो फिर […]
सिर्फ तुकबंदी नहीं कविता कोई यह तो ह्रदय से उपजता बोल है, दर्द का साक्षात अनुभव है यही प्रेम, करुणा, स्नेह मिश्रित घोल है, डॉ सतीश पांडेय, चम्पावत उत्तराखंड
बरसात हो रही है मन झूम रहा है ऐसे ऊँचे ऊँचे पेड़ों की पंत्तियां झूम रही हैं जैसे, रिम झिम छम छम छम छम छम छम
तलबगार है ये बंद खिड़की उस शख्श के दीदार की जो वादा करके गया आने का अब हद्द हो चुकी इंतज़ार की गुज़रती हैं जब भी हवाएं यहाँ से दर्द की आहट उठ जाती है […]
मेरी कल्पना में कहीं जो बसी है वो मदमस्त थिरकती जो अपनी ही धुन में , फूलों सी महकती हर अदा में अभिव्यक्ति मोहपाश में बांधे वो कजरारी निगाहें , हाँ तुम वही मेरी प्रियवंदिनी […]
किस्मत ने पलटकर कहा आगे भी बढ़ ज़रा मैं बहुत बुलंद हूँ मैंने कहा तू बुलंद है फिर भी पलट सकती है ज़रा सामने देख मेरा लक्ष्य है खड़ा अब तेरे लिए नहीं उसके लिए […]
मौसम ए साजिश का है, ये मौसम बारिश का है, किसी को इंतज़ार रहता है, बारिश में भीगने का, एहसास,अच्छा होता है। हवाओं में वो सुकून होता है, ये मुहब्बत का सुरूर होता है। दिल […]
ओ माँ कितनो को तुझ पर कविताएं पढ़ते देखा है तेरी तारीफों में कितने कसीदे गढ़ते देखा है, कितनो को शब्दोँ से सिर्फ तुझपर प्यार लुटाते देखा है, कितना इस दुनिया को तेरी ममता का […]
बादशाहत दिखाते रहे आग पर आग लगाते रहे इक्कों के मायाजाल में फँसे बाजियों में गड्डियॉं फटकाते न जाने कितनी कीमत चुकाते गए ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से
इस भरी बरसात में सब धुल गई बाहरी पर्तें मेरे व्यवहार की, अब छुपाऊँ किस तरह से झुर्रियां जो मेरी असली उमर दर्शा रही। खोट है मेरी नियत में आज भी आप करते हो भरोसा […]
ए आलस तू भाग जा यूँ जिन्न की तरह मुझपर ना कब्ज़ा जमा बहुत कुछ ज़िन्दगी में है करने को अभी बाकी तू मेरी कल्पनाओं पर ना यूँ लगाम लगा मंसूबे तेरे मैं पहचान गयी […]
कितनी दूर चलना है इसकी फ़िक्र कौन करता है बस मंज़िलें सही मिल जाएँ ज़माना भी ज़िक्र उसकी करता है जो लक्ष्य भेदकर अपना सफलता के परचम लहराता है वो कहाँ खटकता है फिर किसी […]
घनी काली चाँदनी रात जैसे हो रही तारों की बरसात महकाती गुज़रती ये ठंडी हवा, नींद के आगोश में है सारा जहाँ, ये रात क्या कह रही है, क्या किसी ने उस नज़्म को सुना, […]
सफर बहुत लम्बा तूफानों से घिरा था इरादा मेरा लेकिन पक्का बड़ा था बड़ी मज़बूती से पकड़ी थी जो पतवार अपनी मेरा ज़ज़्बा मेरी मुश्किलों के आगे जो खड़ा था लौटना न मुसाफिर बस कदम […]
कितनी रातें गुज़र जाती हैं नींद आये तो भी आंखें सोती नहीं ज़हन में ख्याल तेरा नज़र में इंतज़ार पलकें भीगती हैं पर आँख रोती नहीं ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से
शुक्रगुज़ार तेरे नहीं तेरी तस्वीर के हैं तन्हाइयों में भी हमारे साथ होती है छोड़ती नहीं एक पल हमारा साथ साथ जगती भी है और साथ सोती है ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से
दिलकश महबूब से इश्क़ बेहद खूबसूरत एहसास देता है कहीं नाकाम आशिक़ बना देता है कहीं सरताज बना लेता है ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से
बेशक हम बंद हैं अपने ख्यालों के दुनिया में अगर तुम्हे आना होता तो तुम दरवाजे पर आते जरूर
जीवन की है कठोर डगर,बढने से पहले तू संवर लक्ष्य हासिल करना है अगर,खोल ले तीसरी नजर। मासूम तुम्हारा चित जितना ये दुनिया उतनी मासूम नहीं प्रश्न खङा होगा तुझ पे सरे शाम सुबह चारों […]
साँझ हो रही है, ऊंचे पहाड़ों के शिखर बादलों से आलिंगन कर रहे हैं। साफ साफ कुछ नहीं दिख रहा है, परस्पर प्रेम है या बस दिखावा है। जो भी है कुछ तो घटित हो […]
इतना चाहती हूँ इतना ना इतराया करो,बेरूखी में, ना दिन जाया करो यूँ दूर ना मुझसे रहो,बुलाने से पहले आ जाया करो क्यू खामोश हो या खुद में ही मदहोश हो चुप हो ऐसे तुम […]
आवरण मेरा बहुत ही भव्य है, आचरण में दाग धब्बे पड़ गए, जम गई अंतः पटल में कालिमा भाहरी दिखने की है यह लालिमा। – डॉ0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत उत्तराखंड।
खूब पढ़े खूब बढ़े शिक्षा ही जीवन का आधार है, इसके बिना जीवन निराधार है। शिक्षा ही जिन्दगी का सच्चा अर्थ बताती हैं, सत्य और अनंत उन्नति का मार्ग बताती है। शिक्षक नित नवीन सबक […]
जब तुम यूँ समर्पण भाव से मुझे देखते हो.. अनगिनत आकांक्षाएं उमड़ उठती हैं ह्रदय में… मेरी थर्राई देह तप्त लौह -सी दहक उठती है जब तेरी सांसों का घूंट पीती हूं मैं… जाग उठते […]
जीतकर अक्सर मैं यूँ ही हार जाता हूँ बनकर खुशी मैं बहन का चेहरा सजाता हूँ।
क्या लिखा करता था मैं ये भूल गया बहन ने हौसला बढ़ाया है। जब उदास हुआ हूँ मैं तेरे धोखे से बहन ने मुस्कुराना सिखाया है।
फ्रिज में रखी शब्जी की तरह धीरे धीरे खराब हो रही है मेरी लय, कल कहीं बेसुरा न हो जाऊं पढ़ ले जल्दी से उन पंक्तियों को जो मैंने तेरे लिए लिखी हैं। —- डॉ0 […]
सांप! मारना नहीं चाहिए था ये वाला वो बता रहे हैं ये पानी वाला सांप था जानता था कितने सांप, मगरमच्छ और है उस तालाब में उसे रखना चाहिए था एक वीआईपी वाले बिल में […]
मुकम्मल कभी वो प्यार नहीं जो तवज्जो रंगे नूर से मिले जो सीरत से दिल लगाए वो मुहब्बत कमाल होती है @अनीता
माथे पर शिकन से उभरती लकीरों को देखकर एक फ़कीर ने कहा तूने बुलंद किस्मत है पायी उसे क्या पता था कि एक जान के बदले में गिरवी रख आया हूँ अपनी सारी कमाई ©अनीता […]
शतरंज में अक्सर बाज़ियाँ पलट जाती हैं अक्लमंदी से मोहरे चलना ए बाज़ीगर किस्मत बुलंद हैं गर अदने से मोहरे की तो राजा के हिस्से में शह और मात आती है ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस […]
दूरियां ज़बरदस्त कायम है दरमियाँ दो दिलों के कौन जाकर समझाए उन्हें किस्मत से मोहब्बत मिलती है दिलों में रंजिशें हो तो इश्क़ मुकम्मल हुआ नहीं करते ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से
जब सावन के एक एक बूंद, अंबर से धरती पे गिरती है। तब न जाने क्यों ए ग़ालिब, अश्क मेरी गालो को भिगोती है।।
देह में अभिमान की गर्मी पड़ी आसुंओं के स्रोत सूखे पड़ गये नैन की झिलमिल सुहानी पुतलियां आग के ओले गिराती रह गई। बाजुओं की शक्ति से कमजोर की कुछ मदद करने की चाहत खो […]
आग जलने दो यारों, धुआं ना करो दिल के जख्मों को गहरा कुआं ना करो मर ही जाने दो मुझको तुम्हें है कसम मेरे जीने की रब से दुआ ना करो शक्ति त्रिपाठी देव
आम खाके गुठलियों का ढेर लगाना है मेरी नहीं फ़ितरत। एक गुठली से बृक्ष लगाना, चाह मेरी और मेरी यही फितरत।।
तुम्हारे प्यार में मैं क्या से क्या हो गया, कभी मिट्टी का दीया कभी मटका बन गया, जब देखा तुम्हारो हाथों में गैर का हाथ। मैं फौलादी मिट्टी का इंसान टूट कर बिखर गया।। महेश […]
आतंकी गुंडे मवालियों का जात धर्म नहीं होता, सपनों में भी हत्यारो से अच्छा कर्म नहीं होता। गुंडे बदमाश के लिए आलाप कढ़ाने वाले आस्तीन, जाहिलो के लिए दिल में कोई मर्म नहीं होता।।
इस कदर प्यार में डूबा कि फिर उबर ना सका, पसंद बहुत आया पर दिल में उतर ना सका।
आज सोंचा कि थोड़ा मुकम्मल हो लूँ जहान को अपने खुशियों से रोशन कर लूँ।
क्या अपराधी मार देने से इन्साफ हो गया। आज क्या शह देने वालों का पर्दाफ़ाश हो गया।
मर गया आज एक और रावण मगर रामराज़्य की कोई उम्मीद नहीं जब शह देने वाले जीवित हैं तो गुंडाराज खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं।
संवेदनाएं मर चुकी हैं आज सब किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो सब दिखावा है मेरे व्यवहार में किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो. डॉ. सतीश पांडेय, चम्पावत उत्तराखंड
मानों कल हि की बात हो…… एक नन्ही सी गुड़िया, मेरे गुड्डे से ब्याही थी। दुल्हन के लिबास में, आंगन में खिलखिलाई थी। मुस्कुराहट पर उसकी, दुनिया सारी वार दू्ं। दुआओं-आशिर्वाद संग, उम्र भर का […]
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