मां के आंगन को, पकवानों की खुशबू से महकाती है। कभी बहन बनकर, कभी दोस्त बनकर, रास्ता दिखाती हैं। ख़ामोश मुस्कुराहट से ही, सब-कुछ कहजाति है। पर कभी – कभी तो, बड़ी-बड़ी आंखों से हमें […]
मां के आंगन को, पकवानों की खुशबू से महकाती है। कभी बहन बनकर, कभी दोस्त बनकर, रास्ता दिखाती हैं। ख़ामोश मुस्कुराहट से ही, सब-कुछ कहजाति है। पर कभी – कभी तो, बड़ी-बड़ी आंखों से हमें […]
फिर शान से लहराया तिरंगा, देखो आज अपने देश में। बड़ा सुहावन लगे जन गण मन गीत, आज अपने देश मे।। कहीं इंक़िलाब जिंदाबाद तो कहीं जय जवान जय किसान। यही नारे से प्रेरित हो […]
देखी दुनिया सारी फिर भी रहे अनाड़ी कर कुछ भी न पाए वो बनते रहे खिलाडी
अम्मा, एक बात कहूं ये जो तुम बकरी भैस गोबर घास में लगी रहती हो न अच्छा है, तुम अकेली तो नही बाबू की अलग सुनने की आदत, तुम्हारी थकान, तुम जो आकर शाम को […]
हज़ारों सवालों से भरी ये ज़िन्दगी कभी खुद के वजूद पर सवाल उठाती कभीचलती भी,कभी दौड़ती भी है ये थक कर कभी चूर चूर हो जाती हर दिन नए हौसलों को संग लेकर शाम ढलते […]
कैसे समझाएं तुम्हें कि हम कोई झुंड नहीं है मवेशियों के कैसे यकीन दिलाएं तुम्हें कि हमारे भी कई ख्वाब हैं छोटी-छोटी ख्वाहिशें हैं जिन्हें हम भूल नहीं सकते तुम हमारे जीवन में आते हो […]
धरती जल रही अम्बर जल रहा जल रहा सकल जहान । हाल कहे क्या पशु-पक्षियों के हैं व्याकुल सब इन्सान ।। सघन छाँव करके मैं तरूवर सबको पास बुलाया । खुद जलकर सूरज किरणों से […]
सुनाती नहीं मैं अपना गम किसी को तो खुशियों का इजहार करूँ कैसे, मुश्किले है मेरी राह में बहुत मैं अपनी मंजिल पर आगे बढूँ तो बढूँ कैसे?
वतन फ़रामोश तेरा अंतिम घड़ी एक दिन आएगा। तेरी चौड़ी छाती पे देखना, हमारा तिरंगा फहराएगा।। बहुत सह लिए तेरा जुर्म एक दिन फैसला हो जाएगा। सुभाष भगत आज़ाद की दास्तान मेरा पंजा बताएगा।। फौलादी […]
भ्रूण हत्या पाप है तू पाप का भागी न बन बाप है बेटी बचा ले बधिक अपराधी न बन – डॉ0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत, उत्तराखंड।
रुह जब लहू होकर रोती है मौत से जिंदगी जब रूबरू होती है लौट आते है सारे मंजर नजर में मेरी जब जिंदगी मौत सी हूबहू होती है
रिश्ता तो एक ही है तुमारा और मेरा उनसे तुमारे पास जमीन है ना! और वो उसी का भाव जानते है। ~ राजू पाण्डेय
भीड़ है बहुत दिखता तन्हा हर इंसान हैं एक दूजे से मुँह फुलाये खड़े मकान हैं सूरज को भी जगह नहीं झांक पाने की फुर्सत किसे, दूजे की देली लांघ जाने की फिर भी पड़ोसी […]
दीवारों के भी कान होते है, लोग कहते हैं लेकिन मेरी चीखें क्यों सुन नहीं पाता है मेरा खामोश घर
हम वो वीर है जो मरने से कभी डरे ही नहीं। सिन्हे पे गोली खा के भी सिर झुकाए ही नहीं।।
सुनाती नहीं मै अपना गम किसी को तो अपनी खुशियों का इजहार करूँ कैसे ? मुश्किलें है बहुत रास्ते में मेरे मैं अपनी मंजिल पर आगे बढूँ तो बढूँ कैसे?
सच कभी हमारा दामन नहीं छोड़ता कोई भटकाव हमारा प्रण नहीं तोड़ता जब भी विरोधाभास का आभास हुआ हम कोई प्रतिक्रिया देते वक़्त नहीं भूले अपने शब्दों को बोलने से पहले तोलना फिर भी जाने […]
आने से पहले ही गैर जीवन का पुरौधा बन गया जन्म से पहले ही जननी की कोख का सौदा हो गया अंश किसी का,गर्भ किसी का ,किसी और गर्भ में प्रत्यारोपित लोग कौन ,देश कौन […]
बिना पत्तों की टहनियां कहां छांव देती हैं जिंदगी से जब ज्यादा मांगो तो हमेशा घाव देती है
कितनी अजीब है दुनिया कितने अजीब है लोगों के काम बटोर रहे हैं दोनों हाथों से जाने को कर खाली झोली तमाम
पैर जैसे ही पड़े आंगन में बरसों बाद एक एक पाथर मचल उठा, सुबक पड़ा उसके आने के अहसास से ये तो वही पैर थे जो बरसों पहले बच्पन में दिनभर धमाचौकड़ी करते थे आंगन […]
आज टूट गये हम तुम्हारे वादों की तरह बरस गयी आंखे हमारी बावरे सावन की तरह
चारो तरफ कयामत ही कयामत है। जिधर देखो करोना के ही क़हर है।। महामारी में जी रहे है हम और आप। फिर भी उम्मीद के किरण जलाए बैठे है।। आज नहीं तो कल होंगे कामयाब […]
जिस महफ़िल में कोई जानता ना हो, उस महफ़िल में जाना क्यूं है जिस महफ़िल में,अनसुना कर दें तुझे उस महफ़िल में, कुछ सुनाना क्यूं है मुखौटे लगा कर बैठे हैं लोग जहां, वहां तुझे […]
हम भी टूटे थे जब तुम्हारे वादे झूठे थे हम रोते थे जब तुम किसी और के साथ हस्ते थे आज हम खुद को मनाना सिख लिए बस तूम्हारी परवाह छोड़ दिये
रंग-बिरंगे नज़ारे हैं बेहिसाब.. खो न जाना इन नज़ारो में.. ज़रा सम्भलना, यह दुनिया हैं जनाब। साथ बैठ के खाते जिस संग, वहीं दगा कर जाते हैं और बड़ी-बड़ी बातें करते बेहिसाब, ज़रा सम्भल कर […]
धरा दुल्हन सी सज गयी है रिम झिम रिम झिम बूँदे जैसे गा रहीं हैं पेड़ पौधे और हरियाली झूम झूम के नाच रहे हैं अम्बर गर्जा बिजली तडकी ढोल नगाड़े से पीट रहे हैं […]
जिसे पल-पल दिल से चाहा, उसका एक कतरा भी हमारा न हुआ। कसमें- वादे हमसें थे, पर खुशी का हम संग बटँवारा न हुआ। झूमते थे, ज़माने के जश्नो में जो, हम संग एक पल […]
करारा जवाब मिलेगा, अभिनंदन हमारे पास होगा, जब पाकिस्तान का बात होगा, 56″ इंच का साथ होगा, युद्ध जब चीन से होगा, जवानों का बलिदान होगा, फिर भी उसका अभिमान होगा, राजा रानी में तकरार […]
पहली बारिश….। आज सुबह से बारिश रुकने का नाम नही ले रही जानती हो, पहली बारिश याद आ गयी, उस रोज देर तक बस स्टॉप पर ठहरे रहे, अजनबी से,तुम मुझसे अनजान थी और मैं […]
Saavan pratiyogita me सहभाग लेना चाहती हुं ! मेरी कविता स्वीकार करें. *शहीद* शहीद हुवा हैं मेरा सैनिक युद्धभूमी गलवान हम सबको अभिमान शौर्य का भारत हैं बलवान !! शस्त्र उठाओ अस्त्र उठाओ पवित्र भूमी […]
गजल- उजाला हो जाये | कभी हमारे भी घर आइये अंधेरों मे उजाला हो जाये | आपके रूप की चाँदनी मे अंधेरों का मुंह काला हो जाये | फैला है हर तरफ कोरोना हम आए […]
सडकें ठहर गई सी लगती हैं हर तरफ सन्नाटा ही सन्नाटा है बचकर निकलना अब चमन में फूलों के संग मिल गया कांटा है। कोरोना का कहर कहें या कहें प्रकृति से खिलवाड़ की सजा […]
नभमंडल को देख हमने तो बस ये सीखे हैं। एक चांद के बिना लाखों सितारे फीके हैं।। प्रेम नगर में आकर भी प्रीत की रीति न सीखे हैं। दु:ख दरिया को पार करे वो जीवन […]
“आजादी के मतवाले हँसकर फंदे पर झूल गये, बोलो उन वीर सपूतो को हम सब कैसे भूल गये। मंगल पांडेय ने देखो आजादी का बिगुल बजाया था, टोली संग अपनी अंग्रेजो को खूब मजा चखाया […]
एक बार मां बीमार पड़ी हफ्तों उपवास जब जिद करके मैंने एक निवाला उठाया मेरे हाथ बीच में ही थाम के उसने पूछा दबी आवाज में पापा ने खाना खाया? पापा को आदत है अक्सर […]
जरूरी नहीं कि हर दिल इश्क में टूटा हो अक्सर अपने भी दिल तोड़ दिया करते हैं, खुशियों में तो मशरूफ हो जाते सभी पर मुश्किल पड़ते ही दामन छोड़ दिया करते हैं
“लज्जा नही आती जब देश के खिलाफ़ बोलते हो, जिस थाली में खाते हो उसी में छेद करते हो। इसी देश मे जन्मे यही पले और बड़े हुये, बोले दुश्मन के जैसे क्यों शब्द तुम्हारे […]
तूझसे मिलकर लगा कि कुछ यूं जिंदगी बिताएगे कुछ तुम बोलोगे कुछ हम कहते जाएंगे यूं ही समय,दिन और ऋतु बदल गई न जाने किसकी नज़र हमारे रिश्ते को लग गई कि अब न तुझे […]
आप लिखते खूब हो पर कभी गाते नही हो, मंच पर समर्पण भाव मे नजर आते नही हो। आपकी रचनाओं मे जीवन की सारी सच्चाई दिखती है, हर पाठक को उसमे अपनी ही परछायी दिखती […]
शरहद पर से पापा मेरे फोन किए थे शाम को। कुछ दिन धीरज रखना बेटा आऊँगा मैं गाम को ।। पढ़ना लिखना खेल कूद में सदा रहो तुम आगे। दादा दादी और अम्मा का रखना […]
तेरे कांधे पे सर रख, रोना चाहता हूं मां। तेरी गोद में सर रख, सोना चाहता हूं मां। तू लोरी गाकर, थपकी देकर सुला दे मुझे, मैं सुखद सपनों में, खोना चाहता हूं मां। तेरी […]
वक्त ये रूख का कुछ तो साथ दिया । हम शायर बने तेरी शायरी का ।। शायर विकास कुमार(बिहार)
हिन्दी सावन शिव भजन 2 -भोला जी की भंगिया | भोला जी की भंगिया ,गौरा जी की परेशानिया | मन मन रोती है गुस्सा करती है | भंगिया पिसती है गणेश जी की अम्मा | […]
🍀🌷🌹🙏नमन् है मेरे देश के वीर सिपाही को 🍀🌹🙏 ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, कोटी कोटी प्रणाम है मेरे देश के वीर सिपाहियों को जो अपनी जान की परवाह किए बिना मेरे देश की जान बचाने के लिए कोई […]
‘एक सवाल’:- अजीब विडंबना है देश की एक ही समय पर एक ही बात के लिए स्त्री पुरुष के लिए अलग-अलग नियम क्यों? यह बात मेरी समझ से परे है। और आए दिन यह सवाल […]
ख्वाहिशों के बाजार में आयी हूं कुछ खरीदने की खातिर मगर दाम ही इतने है हर ख्वाहिश के कि खाली हाथ ही वापस चली, बन मुसाफ़िर
सुख के झूठे मुखोटो का क्या मौल यह दुःख ही सच्चा अपना, जो हमने झैला है
लिपट कर तुझसे तिरंगा भी रोया था उस पर मरने वाला आज उसमें ही घुसकर सोया था भारत माँ के सपूत ने चैन शान्ति बाँटी थी भारत माँ के लिए एक माँ ने अपना लाल […]
हिन्दी सावन शिव भजन 1- बाबा बैजनाथ के धाम मे | चलो सब कावर लेके बाबा बैजनाथ के धाम मे | सुल्तानगंज से जल लेकर चढ़ाये बम बम भगवान मे | अबकी कावर मे सब […]
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