भोर हो रही है धीरे-धीरे सूरज की धमक बढ़ रही है, थोड़ा किनारे हो जा बादल के टुकड़े, आज पूरी तरह चमकने दे उसे, तू इक्कट्ठा कर आज अपने सारे अंश कल बरस लेना पूरी […]

जब तलक मानव को मानव मात्र से, भेद की नजरों से देखूं तब तलक। जब तलक समभाव मेरे में न हो, तब तलक कविता कहूँ तो झूठ है। कर्म मेरा नीच है तो कवि नहीं, […]

ज़िन्दगी कभी अज़ीब सी भंवर उठाती है चहुँ और पानी तो नज़र आता है न जाने नाव क्यों न चल पाती है झकझोरती हैं ख्वाइशें दिल में दबी उसके पंख फड़फड़ाते तो है पर वो […]

ज़िन्दगी अबूझ पहेली सी है कभी बहुत करीब एक सहेली सी कुछ उठते सवाल उलझे से नहीं मिलते जवाब सुलझे से बड़ी शिद्दत से अगर खोजें तो कुछ हल पाने में आसानी होगी ज़्यादा बुद्धिमत्ता […]

मेरे अपनों से ही तो प्रेरित हैं मेरे शब्दों की गहराईयाँ वर्ना हर बात पर अक्सर हम बेज़ुबां हो जाते थे ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्ति बस दिल से

आँखों की नमी देखकर हम, नज़रें उनसे चुराने लगे, वो फिर से कही रो ना दें, हम खुल कर मुस्कुराने लगे ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्ति बस दिल से

ये राहें ले ही जाएंगी मंज़िलों तक हौसला रख कभी सुना है अँधेरे ने सवेरा होने ना दिया ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्ति बस दिल से

तेरी यादों को सलाम करता हूँ और अब मैं रात्रि को विराम देता हूँ। नींदे है छत पर सोई हुई, मगर मैं अपनी आँखों को आराम देता हूँ। चलो ठीक है अब तुम्हारी यादों को […]

इस काँच में कहाँ से आई दरारें? उस रात जब जोर से आँधी आई थी तब खिड़कियाँ आपस में गले थी। और चीख-चीख कर अपने मिलन की खुशी प्रकट कर रही थी और सावन के […]

बताओ ना! तुमने यह नूर कहाँ से पाया है? फूलों से रंगत चुराई, या फिर कलियों से नूर पाया है। बताओ ना! तुमने यह नूर कहाँ से पाया है? तितलियों से ली शरारत या भंवरों […]

तुम्हें याद है वह बूढ़ा बरगद? जिसके तले हम सपने सँजोते थे कल्पनाएं करते थे। अपने भविष्य की अनगिनत और एक दूसरे के कंधे पर सर रखकर रो लेते थे। तुम्हें याद है मेरे पास […]

नारी पर अत्याचार करना ही पौरुष की निशानी नहीं है। बल्कि हर कदम पर नारी के साथ चलना और उसके सम्मान को सर्वोपरि रखना ही पौरुष की निशानी है।

मैं दहलीज पार नहीं कर सकता मगर तू तो आ सकती है मिलने कोई बहाना लेकर जैसे मिलते थे हम पहले उसी तरह मिल जा तू फिर से क्योंकि बहुत वक्त हो गया तुझे देखे […]

तू मुस्काया मैं रो दी थी, तू घर आया मैं बाहर थी, उस जाने ऐसा क्या था राहों में मिले अचानक हम, मैं शर्मायी तेरी होकर, तू मुस्काया मेरा होकर तबसे तू मेरा मैं तेरी, […]

हौंसले के दम पर जीते आ रहा हूं, लहू को बहाकर घूंट पीते आ रहा हूं। पहचान की परवाह करना मैं छोड़ दिया, धर्म कर्म से जीने का सलीका जब से सीखा हूं।। ✍महेश गुप्ता […]

आपका ख़याल जब भी हमें आता है ज़िन्दगी के प्रति नजरिया ही बदल जाता है कमाल क़ि बात है,किश्तों में ही सही मेरे दिल की उलझनों को सुलझाता है आपका ख्याल साथ कुछ ऐसे निभाता […]

हारा प्राणी हारा प्राणी धूल चटाता, जीता प्राणी टेस में जीता। जागरूक हमेशा लड़ता है, हालातों से कभी नहीं घबराता।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

तन मन में मेरे ज्वाला धधक रहा, सीने में मेरे बदले की भावना पनप रहा। दूर हो जा मेरे नज़रों से पापी पाकिस्तानी, तेरे दशहतगर्द का खेल मैं जान रहा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

आज राजनिति का लगता है भोर हुआ है, चारों तरफ नेता जी का मचा शोर हुआ है। आंख खुला नेता जी का जथ्था देखा घर पर, लगता है वर्षो बाद चूनाव का बिगुल बजा हुआ […]

मैंने खुद लिखा अपनी किस्मत मैं दर्द इशारा तो मिला था कई बार ज़िन्दगी का संभल जाता अगर गौर करता ज़रा भी आज यूँ मारा मारा न फिरता दर बदर ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल […]

आतंक का आओ मिलकर नाश करें, चोर उचक्कों का चलो पर्दाफाश करें। छोटे मोटे गुंडे मवाली को सबक सिखा, उनके अपराधी हौसले का अंत करें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मुझे देख तुम्हें सच में रोना आता हैं, मैं खुश हूँ इंसानियत को जिंदा देखकर। हालातों को देख मुँह फेरने वाले सैकड़ों हैं, एक जिंदा दिल को देख मेरे दिल तू दुआ कर।। ✍महेश गुप्ता […]

ज़मीन पर टिके हो कदम मंज़िल पर टिकी हो नज़र राहें खुद आसान हो जाएंगी लाख मुश्किलों से भरी हो डगर ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

दिल्ली के चोर सन्नाम हैं जहाँ में, नेता और चोर बेइमान हैं वहाँ के। कभी मत आना उनके झांसे में, फ्री फ्री बोलकर ठगते बहुत है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

सपना उज्जवल भविष्य का जितना ही बड़ा होगा कामयाबी का ताज रत्नों से उतना ही जड़ा होगा क्या हुआ अभी फर्श पर नज़र आते हैं हम कल अपने सम्मान में भी जनसैलाब उमड़ा होगा ©अनीता […]

दिल की सुनो दिल से करो बात, इंसानियत को जगाओ मित्र करो ना रात। रब से करो तुम अपने दुख का फरियाद, अपने प्यार को लुटा नफरत को दो मात।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

जिन्हें हम भूल जाते हैं फिर भी वो याद आते हैं बन कर रतजगे यादों के ज़हन में क्यों उतर जाते हैं ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

लौटना न मुसाफिर बस कदम तू बढ़ाना आयें जो भी मुश्किल खुल कर तू भिड़ जाना कोई ज़ोर नहीं चलता गर मज़बूत हों इरादे हारा वही है बस जो मुश्किलों से दूर भागे ©अनीता शर्मा […]

यूँ बनती बिगड़ती किस्मत की नुमाइश ना कर बन्दे तक़दीर सँवरती नहीं शिकायत के पुलिंदों से ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

लिख दी है इबारत कामयाबी की मैंने तवज्जो मेहनत को देकर पहले अब इंतज़ार है अपनी किस्मत का कब दौर मेरा भी लाएगी ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

दूरियां ज़बरदस्त कायम है दरमियाँ दो दिलों के कौन जाकर समझाए उन्हें किस्मत से मोहब्बत मिलती है दिलों में रंजिशें हो तो इश्क़ मुकम्मल हुआ नहीं करते ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से

सावन की बूंदें मन में हलचल कर रहीं तुम कहाँ हो मीत मेरे आओ ना, मत रहो यूँ दूर मुझसे आओ ना, मैं मनोहर ऋतु में आखें भर रही, बाढ़ मत आने दो मेरे नैन […]

सावन की एक-एक बूंद कैसा एहसास दिलाती है? कोपलें भी फूटते लगती हैं…. पत्तियां नाचती हैं सावन में और पुष्प आपस में सौंदर्य की बातें करते हैं सब मगन होते हैं सावन में…. जब बरसात […]

अपराधै का बाटा जिन हिट्या नंतिनौ, अपराधै को बाटो बर्बाद करि दे लो। गरीबै का छोरा गैंगों में जिन घुस्या, गैंगों में फँसि बेर वापसी नै हुनी। जिन फंस्या, जिन फंस्या जन फंस्या नंतिनौ, अपराधै […]

राधा ने प्रेम किया मोहन को टूट कर, फिर भी चले गए मोहन राधा का दामन छोड़कर। क्या प्रेम का यही अर्थ है! क्यों विरह का सामना करना पड़ता है? क्यों वेदना की लौ में […]

तेरे ज़िस्म के पन्ने बस यूँ ही पलटता हूँ मैं तेरे चेहरे में अपनी पहली मोहब्बत ढूंढ़ता हूँ, तेरी रूह से कोई वास्ता नहीं मेरा तेरे इश्क को मैं अपना मुकद्दर समझता हूँ।

तेरे ज़िस्म के पन्ने बस यूँ ही पलटता हूँ मैं तेरे चेहरे में अपनी पहली मोहब्बत ढूंढ़ता हूँ तेरी रूह से कोई वास्ता मेरा तेरे इश्क को मैं अपना मुकद्दर समझता हूँ