चंद वक्त ले लो दुनिया भी बदल लो। एक एहसान करो तुम ही बदल जाओ आजकल में चीखों को सुनो फिर सोचो क्या तुम काबिल हो। एक बार तुम घर में बैठ जाओ देखों लोग […]

बच्चे की खातर माँ कितने ही दान निकाल देती है, M जिस्म से अपनी सौ बार जैसे जान निकाल देती है, भूख से बिलखता गर दिख भी जाये कोई मासूम तो, कुछ सोचे बिन दुपट्टे […]

न जाने किस-किस का हसीन आशियाना हूँ मैं, लोग कहते हैं के खुले ज़माने का फ़साना हूँ मैं, जो उखाड़ने की जद्दोजहद में हैं जड़ों को मेरी, उनसे खुले दिल से कहता हूँ के कोई […]

ख्वाबों ख्यालों में किसी का कोई पहरा नज़र नहीं आता, जो नज़र में आता तो उसका कोई चहरा नज़र नहीं आता, घूमती गुमराह सी नज़र आती हैं जो खामोश राहें हमको, उन राहों पे ढूंढ़े […]

मेरी पहली कविता की ना जाने क्यों याद आ गयी, आँखों में ना जाने खुशियों की आँसू क्यों आ गयी। लिखने का वैसे हमें कोई शौक नहीं था, पर हाथों ने कलम को अपना लिया […]

“बचपन की वो मीठी यादें“ बचपन की वो मीठी यादें , वो नन्हीं-सी अठखेलियां , याद आती है बहुत , वो भोली-सी नादानियां ! वो माँ का आँचल और पापा की अंगुली थामें , चलना, […]

फूलों का रंग चुरा के उसने तुझे सजा दिया पानी को आग लगानेवाला अंगार बना दिया अपनी निगाहों से हवा का रुख जो मोड़ दे उस ऊपरवाले ने ना जाने कैस तुझे बना दिया

साद और बर्बाद भी हुआ मौला प्यार भी किया नफरत भी किया मौला गुनाह भी किया मौला शफा भी किया अंत में रुका जहा तोह पिटारा खाली था जो कमाया वोह रह गया मौला तू […]

तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ? अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन- मैं तेरे सपनों की ज़ाग़ीरों का क्या करूँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

छोटी सी उमर में बदल कर देखो चाल बैठ गया, पहनके इंसा ही जानवर की देखो खाल बैठ गया, बड़ी बहुत हो गई ख्वाइशों की बोतल उस दिन से, रिश्तों का कद भूल जब कोई […]

ज्ञान की पोथियाँ सारी चन्द पैसों में तोल लेता हूँ मैं, जो भी जब भी मुँह में आ जाये यूँही बोल देता हूँ मैं, समझ पाता नहीं हूँ किताबों में लिखे काले अक्षर मैं, सो […]

मन की बातो को कलम के सहारे से इशारा देता हूँ मैं अंजाना होकर भी कुछ लहरों को किनारा देता हूँ, जब जुबां और दिल सब हार कर अकेले में बैठते हैं, तब मैं दर्द […]

कुछ बेदर्द इंसानों ने अपनी अक्ल उतार कर रख दी, मासूम ज़िन्दगी की आईने में शक्ल उतार कर रख दी, दिन में लगे जो गहरे घावों की वस्ल उतार कर रख दी, पुनर्जन्म के पन्नों […]

बारिश की पहली बूंद सी सुकून दे जाती तू इस तपती धरती को जीने के और मौके दे जाती तू लाखों वजूहात थे नफ़रतें थी सब धूल गए अब बस तुझमे घुल जाने को दिल […]

‘ब्लैकबोर्ड’ जैसा तुम्हारा दिल, काले पत्थर सा सख्त , पर अन्दर से साफ है ।। ‘चॉक’ से तुम्हारे सुन्दर विचार, इजहार करो, अन्दर रखना पाप है ।। कुछ गलत मानो हो भी जाए, तो डरने […]

राष्ट्र का नेता कैसा हो? जो रहें लिप्त घोटालों में, जिनके चित बसे सवालों में, जिह्वा नित रसे बवालों में, दंगा झगड़ों का क्रेता हो? क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो? राष्ट्र का नेता कैसा […]

अँधेरे की वाट लगाने को जुगनुओं को आना पड़ा, समन्दर में नहाने को खुद उतर चाँद को आना पड़ा, आवाज़ लगाई दिल ओ ज़ान से मगर सुनी नहीं गई, तो गमों के बिस्तरों को फिर […]

मरम्मत उसूलों की करनी अभी बाकी रह गई, कहीं सच के मुँह पर लगी झूठी चाबी रही गई, बना तो लिए बर्तन सोने चाँदी के भी कारीगर ने, के अमीरी में गरीबी की थाली यूँही […]

छोड़ कर पीछे सबको आज चाँद को घुमाने निकला हूँ, सच कहता हूँ दोस्त मेरे आज खुद को गुमाने निकला हूँ, सोया था न जाने कब से समन्दर की बाँहों में यूँ अकेला, पिघले हुए […]

ज़िन्दगी कोरा कागज़ थी हमारी तुमने कुछ रंग भर दिए आये हो तोह रुक जाओ इतनी जल्दी क्या जाने की पर रोक तोह हम सकते नही वरना रब बुरा मान जाएगा उसे भी तोह अच्छे […]

चले थे हम भी साथ ही तोह तुम आगे हम पीछे रह गए ज़िन्दगी ने तुम्हे सहारा दिया हमे अंधेरा इसमे कोई मलाल नहीं पर कभी तोह पीछे मुड़कर तुम देखते एक आध चाय के […]

अब तो हमसे कोई और सफर नहीं होता, क्यों भला उनसे अब भी सबर नहीं होता, सब पर होता है बराबर से के जानता हूँ मैं, एक बस उन्हीं पे मेरा कोई असर नहीं होता, […]

तू मन की अति भोली मां, दूजा नहीं तुझ सा प्यारा मां, ऊपर वाले की सूरत में, तू ही तू बस दिखती मां , मुझे जब नींद न आती , लोरी गा कर तू सुलाती […]

अपने आप से ही एक जंग जारी रक्खा करो, खेल कोई भी हो पर अपनी बारी रक्खा करो।। दुश्मन हर कदम पर बैठे हैं नज़रें गढ़ाए यहाँ, होसके तो दुश्मनी में भी कहीं यारी रक्खा […]

दिल ने धड़कन की ही मान लो के अब सुनना छोड़ दी, स्त्री को नचाया जबसे इंसा ने कठपुतली बुनना छोड़ दी, देखती ही रहीं आँखों की दोनों पुतलियाँ एक दूजे को, उँगलियों के इशारों […]

इतनी भी क्या नाराज़गी पगली एक बार पूछ तोह लिया होता गुस्से से चल दी तू एक बार मुड़ के देख तोह लिया होता सोच के देखो जो छोड़ के जाते है वोह अक्सर रूठ […]

उन बेवा आंखों का आलम मत पूछो, सूख गए हैं आंसू उन बेवा आंखों की , बसे थे जिनमें हजारों सपने, टूट गए है वे सारे सपने, बह गए हैं वे झरने सारे, चले गए […]

है परिभाषित सतत संघर्ष और संग्राम अभिनंदन। हैं हम सारे अयोध्या के निवासी, राम अभिनंदन। वो जो हर भौंकते से श्वान का मुंह वाण से भर दे। कि इस कलयुग में उस एकलव्य है नाम […]

रेत यू तोह हाथ से फिसलता हैं जितना जोड़ लगाओ उतना तेज़ फिसलता जाता है पढ़ उसमे पानी मिलाओ तोह हाथ मे जम जाता है रिस्ते में इज्ज़त उस पानी का काम करती है

तेरे आने से दिल को करार आया है। तुझे पाकर खुशियां बेशुमार पाया है। मैंने पी नहीं लेकिन, मैं नशे में चूर हूं, मुहब्बत का ये कैसा, खुमार छाया है। मौसमें भी अब रंगीन सी […]

कुछ कहे बिना ही बहुत कुछ कह गया, ख़ामोश बादल यूँही बरस कर रह गया, बनाया आशियाना बड़ी उम्मीदों से हमनें, ज़रा सी हुई हरकत तो परस कर रह गया, कैद ऐ मोहब्बत की गिरफ्त […]

तेरी यादों की जागीर है जन्नत मेरी , हर पल हर छण तुम ही को देखती है आंखें मेरी , नजर तो आओ तुम ही को ढूंढती हैं आंखें मेरी , तेरे सिवा किसी को […]

तेरी यादों की जागीर है जन्नत मेरी , हर पल हर छण तुम ही को देखती है आंखें मेरी , नजर तो आओ तुम ही को ढूंढती हैं आंखें मेरी , तेरे सिवा किसी को […]

सोचता हूं, मैं पानी होता काश, तुम्हारे प्यासे होठों की बुझाता प्यास। सोचता हूं, मैं हवा होता काश, हर पल अपने स्पर्श का दिलाता एहसास। सोचता हूं, मैं खुशबू होता काश, तुम्हारे तन को महकाता […]