‘ब्लैकबोर्ड’ जैसा तुम्हारा दिल, काले पत्थर सा सख्त , पर अन्दर से साफ है ।। ‘चॉक’ से तुम्हारे सुन्दर विचार, इजहार करो, अन्दर रखना पाप है ।। कुछ गलत मानो हो भी जाए, तो डरने […]

राष्ट्र का नेता कैसा हो? जो रहें लिप्त घोटालों में, जिनके चित बसे सवालों में, जिह्वा नित रसे बवालों में, दंगा झगड़ों का क्रेता हो? क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो? राष्ट्र का नेता कैसा […]

अँधेरे की वाट लगाने को जुगनुओं को आना पड़ा, समन्दर में नहाने को खुद उतर चाँद को आना पड़ा, आवाज़ लगाई दिल ओ ज़ान से मगर सुनी नहीं गई, तो गमों के बिस्तरों को फिर […]

मरम्मत उसूलों की करनी अभी बाकी रह गई, कहीं सच के मुँह पर लगी झूठी चाबी रही गई, बना तो लिए बर्तन सोने चाँदी के भी कारीगर ने, के अमीरी में गरीबी की थाली यूँही […]

छोड़ कर पीछे सबको आज चाँद को घुमाने निकला हूँ, सच कहता हूँ दोस्त मेरे आज खुद को गुमाने निकला हूँ, सोया था न जाने कब से समन्दर की बाँहों में यूँ अकेला, पिघले हुए […]

ज़िन्दगी कोरा कागज़ थी हमारी तुमने कुछ रंग भर दिए आये हो तोह रुक जाओ इतनी जल्दी क्या जाने की पर रोक तोह हम सकते नही वरना रब बुरा मान जाएगा उसे भी तोह अच्छे […]

चले थे हम भी साथ ही तोह तुम आगे हम पीछे रह गए ज़िन्दगी ने तुम्हे सहारा दिया हमे अंधेरा इसमे कोई मलाल नहीं पर कभी तोह पीछे मुड़कर तुम देखते एक आध चाय के […]

अब तो हमसे कोई और सफर नहीं होता, क्यों भला उनसे अब भी सबर नहीं होता, सब पर होता है बराबर से के जानता हूँ मैं, एक बस उन्हीं पे मेरा कोई असर नहीं होता, […]

तू मन की अति भोली मां, दूजा नहीं तुझ सा प्यारा मां, ऊपर वाले की सूरत में, तू ही तू बस दिखती मां , मुझे जब नींद न आती , लोरी गा कर तू सुलाती […]

अपने आप से ही एक जंग जारी रक्खा करो, खेल कोई भी हो पर अपनी बारी रक्खा करो।। दुश्मन हर कदम पर बैठे हैं नज़रें गढ़ाए यहाँ, होसके तो दुश्मनी में भी कहीं यारी रक्खा […]

दिल ने धड़कन की ही मान लो के अब सुनना छोड़ दी, स्त्री को नचाया जबसे इंसा ने कठपुतली बुनना छोड़ दी, देखती ही रहीं आँखों की दोनों पुतलियाँ एक दूजे को, उँगलियों के इशारों […]

इतनी भी क्या नाराज़गी पगली एक बार पूछ तोह लिया होता गुस्से से चल दी तू एक बार मुड़ के देख तोह लिया होता सोच के देखो जो छोड़ के जाते है वोह अक्सर रूठ […]

उन बेवा आंखों का आलम मत पूछो, सूख गए हैं आंसू उन बेवा आंखों की , बसे थे जिनमें हजारों सपने, टूट गए है वे सारे सपने, बह गए हैं वे झरने सारे, चले गए […]

है परिभाषित सतत संघर्ष और संग्राम अभिनंदन। हैं हम सारे अयोध्या के निवासी, राम अभिनंदन। वो जो हर भौंकते से श्वान का मुंह वाण से भर दे। कि इस कलयुग में उस एकलव्य है नाम […]

रेत यू तोह हाथ से फिसलता हैं जितना जोड़ लगाओ उतना तेज़ फिसलता जाता है पढ़ उसमे पानी मिलाओ तोह हाथ मे जम जाता है रिस्ते में इज्ज़त उस पानी का काम करती है

तेरे आने से दिल को करार आया है। तुझे पाकर खुशियां बेशुमार पाया है। मैंने पी नहीं लेकिन, मैं नशे में चूर हूं, मुहब्बत का ये कैसा, खुमार छाया है। मौसमें भी अब रंगीन सी […]

कुछ कहे बिना ही बहुत कुछ कह गया, ख़ामोश बादल यूँही बरस कर रह गया, बनाया आशियाना बड़ी उम्मीदों से हमनें, ज़रा सी हुई हरकत तो परस कर रह गया, कैद ऐ मोहब्बत की गिरफ्त […]

तेरी यादों की जागीर है जन्नत मेरी , हर पल हर छण तुम ही को देखती है आंखें मेरी , नजर तो आओ तुम ही को ढूंढती हैं आंखें मेरी , तेरे सिवा किसी को […]

तेरी यादों की जागीर है जन्नत मेरी , हर पल हर छण तुम ही को देखती है आंखें मेरी , नजर तो आओ तुम ही को ढूंढती हैं आंखें मेरी , तेरे सिवा किसी को […]

सोचता हूं, मैं पानी होता काश, तुम्हारे प्यासे होठों की बुझाता प्यास। सोचता हूं, मैं हवा होता काश, हर पल अपने स्पर्श का दिलाता एहसास। सोचता हूं, मैं खुशबू होता काश, तुम्हारे तन को महकाता […]

आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप […]

आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप […]

आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप […]

कुछ अपने अपनों को ही पराया कहने लगे, दिल को धड़कन का मानो साया कहने लगे।। जो गवांते रहे घर का हर इक कोना रात दिन, गैरों की महफ़िल में ही सब कमाया कहने लगे।। […]

सत्य है नारी, सब पर है भारी। अब मलेरिया को ही देख लो, नर एनाफिलीज की, नहीं है औकात। ये तो है मादा एनाफिलीज की सौगात। दुनिया होती, भगवान को प्यारी। सत्य है नारी, सब […]

कोई करतब कोई जादू नहीं दिखना होता है, बस मज़हबी दीवारों से बाहिर आना होता है, मुश्किल ये नहीं के बस दायरें बाँधे हैं दरमियाँ, हमें खुद के ही दिल को तो समझाना होता है, […]

एक बूढ़ी थी लाचार वह, थी भुख से बेचैन वह , बैठी थी सड़क किनारे वह, लिए हाथों में कटोरा वह, इस आस में कि पसीजे, दिल किसी का और देदे कटोरे में दो चार […]

ज़िन्दगी सतत संग्राम हैं यारों यहां हर चीज़ की लड़ के हासिल होती है कोई हमे रास्ता नहीं देता खुद ही रास्ता बनाने की कोसिस करनी होती है हार मान लेने से लक्ष्य को पाने […]

खुदा से बढ़ कर खुद कोई, नवाब नहीं होता। उसकी मर्ज़ी के बिना कोई, कामयाब नही होता। खुदा से खौफ खा बंदे, गुनाह करने से पहले, कौन कहता गुनाहों का कोई, हिसाब नहीं होता। यहीं […]

हवाओं में पतंग की तरह उड़ने को जी करता है बैठकर लहरों की बाहों में तैरने को जी करता है जी करता है पा लूं ऊंचाई आसमा की पाताल की गहराई नापने को जी करता […]

मात्र श्रृंगार की ना रहे पराकाष्ठा इसमें अंगार भी चरम होना चाहिए। मात्र प्रेम और आसक्ति ना बने कविता पंक्तियों में वंदे मातरम होना चाहिए।

जीवन के दहलीज का यह चौथा पहर, देखे हैं जिंदगी के कितने उथल-पुथल, ना कोई उमंग है ना कोई तरंग है , ना अब जीने की कोई ख्वाइश है , बस जिंदा है तब तक […]

जीवन के दहलीज का यह चौथा पहर, देखे हैं जिंदगी के कितने उथल-पुथल, ना कोई उमंग है ना कोई तरंग है , ना अब जीने की कोई ख्वाइश है , बस जिंदा है तब तक […]