मेरा बिगडना तो लाजमीं है न? पापा! तुम साथ कहाँ हो मुझको डाँटनें के लिए??😢😢 @Chandani
मेरा बिगडना तो लाजमीं है न? पापा! तुम साथ कहाँ हो मुझको डाँटनें के लिए??😢😢 @Chandani
आज मेरी खुद से मुलाकात हो गई चुप थी जमाने से, आज खुद से बात हो गई।
आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप […]
अब तू अपनाए या ठुकराए मर्जी तेरी , हम ठहरे मनमौजी मन किया हो लिए तेरे।। @chandani
आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप […]
आती है याद बचपन की….. वो झूलों पर मस्त होकर झूलना, पेडो की छांव में बेफिक्र होकर खेलना , आती है याद बचपन की….. वो बारिश में मस्त होकर भीगना, नदी पोखर में छपा छप […]
तेरी बेहिसाब यादें हैं मेरी जागीरें हैं, मुझसे ज्यादा अमीर कोई होगा क्या।। @chandani
फिर बेवा आँखे रोईं हैं कोई ख्वाब जरूर जला होंगा ।। #चाँदनी
कुछ अपने अपनों को ही पराया कहने लगे, दिल को धड़कन का मानो साया कहने लगे।। जो गवांते रहे घर का हर इक कोना रात दिन, गैरों की महफ़िल में ही सब कमाया कहने लगे।। […]
सत्य है नारी, सब पर है भारी। अब मलेरिया को ही देख लो, नर एनाफिलीज की, नहीं है औकात। ये तो है मादा एनाफिलीज की सौगात। दुनिया होती, भगवान को प्यारी। सत्य है नारी, सब […]
क्या मिलेगा तुमको हम बेजुबानों से उलझकर , इतना ही हौसला है तो खुदा से दो दो हाथ करो ..।। #chandani
कोई करतब कोई जादू नहीं दिखना होता है, बस मज़हबी दीवारों से बाहिर आना होता है, मुश्किल ये नहीं के बस दायरें बाँधे हैं दरमियाँ, हमें खुद के ही दिल को तो समझाना होता है, […]
एक बूढ़ी थी लाचार वह, थी भुख से बेचैन वह , बैठी थी सड़क किनारे वह, लिए हाथों में कटोरा वह, इस आस में कि पसीजे, दिल किसी का और देदे कटोरे में दो चार […]
मेरी साँसों में उसके आंचल की खुशबू महकती है। तुम गौर से देखो मुझमें मेरी मां झलकती है।। Chandani
ज़िन्दगी सतत संग्राम हैं यारों यहां हर चीज़ की लड़ के हासिल होती है कोई हमे रास्ता नहीं देता खुद ही रास्ता बनाने की कोसिस करनी होती है हार मान लेने से लक्ष्य को पाने […]
खुदा से बढ़ कर खुद कोई, नवाब नहीं होता। उसकी मर्ज़ी के बिना कोई, कामयाब नही होता। खुदा से खौफ खा बंदे, गुनाह करने से पहले, कौन कहता गुनाहों का कोई, हिसाब नहीं होता। यहीं […]
हवाओं में पतंग की तरह उड़ने को जी करता है बैठकर लहरों की बाहों में तैरने को जी करता है जी करता है पा लूं ऊंचाई आसमा की पाताल की गहराई नापने को जी करता […]
मात्र श्रृंगार की ना रहे पराकाष्ठा इसमें अंगार भी चरम होना चाहिए। मात्र प्रेम और आसक्ति ना बने कविता पंक्तियों में वंदे मातरम होना चाहिए।
जीवन के दहलीज का यह चौथा पहर, देखे हैं जिंदगी के कितने उथल-पुथल, ना कोई उमंग है ना कोई तरंग है , ना अब जीने की कोई ख्वाइश है , बस जिंदा है तब तक […]
जीवन के दहलीज का यह चौथा पहर, देखे हैं जिंदगी के कितने उथल-पुथल, ना कोई उमंग है ना कोई तरंग है , ना अब जीने की कोई ख्वाइश है , बस जिंदा है तब तक […]
जीवन के दहलीज का यह चौथा पहर जीवन के दहलीज का यह चौथा पहर, देखे हैं जिंदगी के कितने उथल-पुथल, ना कोई उमंग है ना कोई तरंग है , ना अब जीने की कोई ख्वाइश […]
उसने मेरे दिलो दीवार के पार देख लिया, मुझसे पूछे बिना ही मुझमे यार देख लिया, बैठा तो था मैं अंधेरे की चौखट पर गुमसुम, पर वही था जिसने मुझमे प्यार देख लिया।। राही अंजाना
जब कभी भी वो मेरा कहीं ज़िक्र करता है, मुझे लगता है वो बेशक मेरी फ़िक्र करता है।। राही अंजाना
कोई बात दबी है जहन में मेरे कोई बात चले तो कुछ बात बने
माँ भूख लगी है घर में कोई खाना नहीं हैं तोह क्या खाली बर्तनों को चूल्हे में जलाकर ताकी खाने की आस में उसे नींद आ जाये यह भी याद है माँ भूख लगी है […]
अबला अब समझो नहीं तुम, हूं मैं एक चिंगारी.. लड़कों से अब कम नहीं मैं, हूं मैं सब पर भारी.. सेना क्षेत्र हो या हो पायलट… डॉक्टर वकील की तो पूछो मत तुम, हर मैदान […]
मैंने ज़ाम से ज़ाम टकराना छोड़ दिया। यारों मैंने पीना – पिलाना छोड़ दिया। खबर जो फैली, कि मैं हो चला बै-रागी, दोस्तों ने महफ़िल में बुलाना छोड़ दिया। दोस्ती का मतलब जानता हूं मैं, […]
रिश्तों के धागों से खुद को सिलना सीख लेते हैं, आसमां से ज़मी के बीच ही खिलना सीख लेते हैं, बनाते ही नहीं ख्वाब वो उन मखमली बिस्तरों के, गरीबी की गोद में ही जो […]
तेरे प्यार की अंताक्षरी में राही हार कर, बैठा है जंग शब्दों से अक्षरी जीत कर।। राही अंजाना
उन दरख्तों को हमने उखड़ते देखा है। जो तूफान में तन कर खड़े होते हैं। तूफान का झुककर जो सम्मान नहीं करते, वो जमीन पर उखड़ कर पड़े होते हैं। इंसानों को भी टूट कर […]
तेरी गोद में आकर मुझको जन्नत मिल जाती है, मांगी हुई मेरी पूरी मुझको मन्नत मिल जाती है।। राही अंजाना
मेरे ख्वाबों में तुम रोज चले आते हो , ख्वाब टूटते ही तुम दूर चले जाते हो, जिंदगी बेजान न हुई होती इतनी , छोड़कर अगर तुम न जाते मुझको, तेरी तस्वीर इन आंखों में […]
मेरे ख्वाबों में तुम रोज चले आते हो , ख्वाब टूटते ही तुम दूर चले जाते हो, जिंदगी बेजान न हुई होती इतनी , छोड़कर अगर तुम न जाते मुझको, तेरी तस्वीर इन आंखों में […]
मन को समझाया था मैने..इस इश्क विश्क से दूर रहो पर ये मन,मन ही मन मै अपनी मन मानी कर बैठा____!!!!
मन को समझाया था मैने..इस इश्क विश्क से दूर रहो पर ये मन,मन ही मन मै अपनी मन मानी कर बैठा____!!!!
वफ़ा करनी भी सीखो इश्क़ की नगरी में ए दोस्त, फ़क़त यूँ दिल लगाने से दिलों में घर नहीं बनते !!
मंज़िल पता नहीं, निकला हूं अंजान सफर में। अमृत ढुंढने निकला हूं , दुनिया भरी ज़हर में। इंसानियत बांध कर सभी ने, रख दी ताक पर, डरता हूं कहीं गिर ना जाऊं, खुद की नज़र […]
ओ दुनिया के रखवाले तूने क्या खूब ये दुनिया बनाई, सूरज बनाया तूने चंदा बनाया, तारे बनाए तूने सितारे बनाए, अंबर ये नीले नीले तूने बनाया, ओ दुनिया के रखवाले….. नदियां बनाया तूने झील ये […]
बीते लम्हों से खुलके गुजारिश करनी होगी, आज फिर डाकिये से सिफारिश करनी होगी, दबा रखीं थीं एहसासों की चिट्ठियां छिपाकर, खुलेआम लगता है सबकी रवाईश करनी होगी।। राही अंजाना रवाईश- आतिशबाजी
देखो फिर किचड़ उछालने का दौर आ चला है। खुद का दामन संभालने का दौर आ चला है। लाख दाग सही, खुद का गिरेबां बेदाग नहीं, दुसरों की गलतियां गिनाने का दौर आ चला है। […]
ओ नील गगन के सौदागर,, हवा में उड़ना तेरी फितरत है, मुझे भी अपनी पंख दे दे पंछी , मैं भी ऊरु उस नील गगन में, उड़ कर उस नभ को छू लूं , क्या […]
यह टूटे हुए घरों की कहानी है फुटपात पर बीती जिसकी जवानी है भीख मे बस वह इंसानियत मांगते रहते न जाने क्यों,आँखों में उनके आशाओं का पानी है मांग कर जिंदगी जीना किसी की […]
छलक जाए पैमाना, मैं जाम नहीं। भले खास ना सही, पर आम नहीं। एक बार गले लगा कर तो देखो, भूला सको मुझे, वो मैं नाम नहीं। गुरूर नहीं मेरा, खुद पर यकीन है, आज़मा […]
हर शब्द हर वक्त तुझे झूठा ही लगेगा यहाँ, जो तूने प्रेम का ढाई अक्षर गर पढ़ा ही नहीं, जो कहता हूँ सच है ऐ मेरे दिल सुन तो ज़रा, ख्वाब दिलों के बाहिर तूने […]
बुझते चराग है हम, हवा न दो सारा शहर जला देंगे खुद को शेर समझने वाले, कभी लड़कर देखो तुम्हे गीदड़ बना देंगे है शक्ति इतनी मुझमें की, तुम कहो तो कांटो के शहर में […]
ऐ हवा जरा ठहर तू, मेरी एक बात तो सुन, क्यों रूकती नहीं मेरे पास तुम, करनी है तुमसे कुछ बात, ऐ हवा जरा ठहर तू…… कहां से आई हो तुम ? कहां तुझे जाना […]
दिल की जो बातें थीं सुनता था पहले, सच ही में सच था जो कहता था पहले। करने अब सच से खिलवाड़ आ गया, लगता है उसको व्यापार आ गया। कमाई की खातिर दबाता है […]
कितने भी जुल्म तुम कर लो, बांध दो कितनी ही जंजीरो से मिटा देंगे तेरी हस्ती पल भर में जब छूटेंगे हम तीरों से
कहां कह पाती हूँ मैं कुछ तुमसे अल्फ़ाज जज्बातों का साथ ही नही देते।
बन रंगरेज इस तरह रंग डाले, रंग ए रूह और भी निखर जाए। मिले गले इस तरह दोस्त बनकर, दुश्मनी हो अगर, टूटकर बिखर जाए।।
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