( संदर्भ आपातकाल ) ‘वे’ चंद लोग थे जो, आए और ज़ब्त करने लगे आग के संभावित ठिकाने । —– रौशनी गुल कर दी —– चूल्हे ठंडे और, माचिस गीली । : सख़्त पाबंदी थी […]

दिल अपना है मगर धकड़न पराई है, इस बात की खबर मैंने ही फैलाई है, नज़र वालों ने ही यहाँ नज़र चुराई है, इस बात में ढूँढो तो कितनी सच्चाई है, किसीने न सुनी मैंने […]

तराजू के दोनों पलड़ों पर रखकर आंकते देखा, वजन प्यार का फिर भी मेरे कम भाँपते देखा, बन न पाया था किसी साँचे से जब आकार मेरा, के लेकर हाथों में फिर मिट्टी को नरम […]

कह रहे हो तुम ये , मैं भी करूँ ईशारा, सारे जहां से अच्छा , हिन्दुस्तां हमारा। ये ठीक भी बहुत है, एथलिट सारे जागे , क्रिकेट में जीतते हैं, हर गेम में है आगे। […]

मौजो से भिड़े हो , पतवारें बनो तुम, खुद हीं अब खुद के, सहारे बनो तुम। किनारों पे चलना है , आसां बहुत पर, गिर के सम्भलना है, आसां बहुत पर, डूबे हो दरिया जो, […]

सब यहा मिलकर मुम्बतीया जलाते जा रहे। और वो एक एक हमारी बेटियां मिटाते जा रहे।। ना समझ मासूम ओर कमजोर बच्चीयो पर। ये कुछ नामर्द अपनी ताकत दिखाते जा रहे।। ” रहस्य ” देवरिया

पापा इतना सब आप कैसे कर लेते हो? कैसे असल जिंदगी में हरफनमौला रह लेते हो? हर काम में परफेक्ट कैसे हो लेते हो वो चलना सिखाना, वो कंधों पर घुमाना, बचपन में पढ़ाना साथ […]

तुम तो कहते थे कि जी नहीं पाओगे मेरे बिना अरसे बाद मिला तो सवाल किया उसने मैंने कहा आखरी साँस पर तेरे साथ का वादा किया था ना तू आया ना वो अखरी साँस […]

पुलवामा आतंकी हमले में शहीद देश के उन वीरों भावभीनी श्रध्दांजलि (( जय हिंद )) अब हर आतंकियों के मंशुबे नाकाम करना है। अब हर हाल में तुम्हें जलाकर राख करना है।। छुपे बैठे हैं […]

पुलवामा हमले में शहीद वीरों को भावभीनी श्रद्धांजलि देश भक्ति के ये नारे हर रोज क्यों नहीं लगते। ऐ आग हरदम सबके दिलों में क्यों नहीं जलते।। सियासी खेल खेलने वाले क्या जाने दर्द ए […]

ऐसे अपनो को क्यों सताता जा रहा है तू। हर बार हमे क्यों रुलाता जा रहा है तू।। “” “” “” “” “” “” मेघो की आवाज सून ऐ काले बादल। बिन बरसे आगे क्यों […]

जरुरत से ज्यादा जुर्रत कर हिम्मत से ज्यादा हिमाकत कर। ख्वाब जितने भी हैं जिस्म में तेरे उन सबको रूह में शामिल कर। जरुरी नहीं सबको जिन्दा दिखे तू किसी के लिए मरने का भी […]

साथ निभाने के लोगों के तरीके अजीब हैं, अपनों से भी ज्यादा लोग गैरों के करीब हैं, मर चुके हैं एहसास यूँ दिल की हिफाज़त में, के धड़कन में नज़रबंद वो कितने अदीब हैं, गुमराह […]

बिजली चले जाने पर हम रात चांद के तले बिताते हैं क्रंक्रीट की छत पर बैठ हम प्रकृति को कोसते हैं हवाओं से मिन्नते करते शहरों की छतों पर तपती गरमी में नई सभ्यता रचते […]

चंद वक्त ले लो दुनिया भी बदल लो। एक एहसान करो तुम ही बदल जाओ आजकल में चीखों को सुनो फिर सोचो क्या तुम काबिल हो। एक बार तुम घर में बैठ जाओ देखों लोग […]

बच्चे की खातर माँ कितने ही दान निकाल देती है, M जिस्म से अपनी सौ बार जैसे जान निकाल देती है, भूख से बिलखता गर दिख भी जाये कोई मासूम तो, कुछ सोचे बिन दुपट्टे […]

न जाने किस-किस का हसीन आशियाना हूँ मैं, लोग कहते हैं के खुले ज़माने का फ़साना हूँ मैं, जो उखाड़ने की जद्दोजहद में हैं जड़ों को मेरी, उनसे खुले दिल से कहता हूँ के कोई […]

ख्वाबों ख्यालों में किसी का कोई पहरा नज़र नहीं आता, जो नज़र में आता तो उसका कोई चहरा नज़र नहीं आता, घूमती गुमराह सी नज़र आती हैं जो खामोश राहें हमको, उन राहों पे ढूंढ़े […]

मेरी पहली कविता की ना जाने क्यों याद आ गयी, आँखों में ना जाने खुशियों की आँसू क्यों आ गयी। लिखने का वैसे हमें कोई शौक नहीं था, पर हाथों ने कलम को अपना लिया […]

“बचपन की वो मीठी यादें“ बचपन की वो मीठी यादें , वो नन्हीं-सी अठखेलियां , याद आती है बहुत , वो भोली-सी नादानियां ! वो माँ का आँचल और पापा की अंगुली थामें , चलना, […]

फूलों का रंग चुरा के उसने तुझे सजा दिया पानी को आग लगानेवाला अंगार बना दिया अपनी निगाहों से हवा का रुख जो मोड़ दे उस ऊपरवाले ने ना जाने कैस तुझे बना दिया

साद और बर्बाद भी हुआ मौला प्यार भी किया नफरत भी किया मौला गुनाह भी किया मौला शफा भी किया अंत में रुका जहा तोह पिटारा खाली था जो कमाया वोह रह गया मौला तू […]

तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ? अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन- मैं तेरे सपनों की ज़ाग़ीरों का क्या करूँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

छोटी सी उमर में बदल कर देखो चाल बैठ गया, पहनके इंसा ही जानवर की देखो खाल बैठ गया, बड़ी बहुत हो गई ख्वाइशों की बोतल उस दिन से, रिश्तों का कद भूल जब कोई […]

ज्ञान की पोथियाँ सारी चन्द पैसों में तोल लेता हूँ मैं, जो भी जब भी मुँह में आ जाये यूँही बोल देता हूँ मैं, समझ पाता नहीं हूँ किताबों में लिखे काले अक्षर मैं, सो […]

मन की बातो को कलम के सहारे से इशारा देता हूँ मैं अंजाना होकर भी कुछ लहरों को किनारा देता हूँ, जब जुबां और दिल सब हार कर अकेले में बैठते हैं, तब मैं दर्द […]

कुछ बेदर्द इंसानों ने अपनी अक्ल उतार कर रख दी, मासूम ज़िन्दगी की आईने में शक्ल उतार कर रख दी, दिन में लगे जो गहरे घावों की वस्ल उतार कर रख दी, पुनर्जन्म के पन्नों […]

बारिश की पहली बूंद सी सुकून दे जाती तू इस तपती धरती को जीने के और मौके दे जाती तू लाखों वजूहात थे नफ़रतें थी सब धूल गए अब बस तुझमे घुल जाने को दिल […]