( संदर्भ आपातकाल ) ‘वे’ चंद लोग थे जो, आए और ज़ब्त करने लगे आग के संभावित ठिकाने । —– रौशनी गुल कर दी —– चूल्हे ठंडे और, माचिस गीली । : सख़्त पाबंदी थी […]
( संदर्भ आपातकाल ) ‘वे’ चंद लोग थे जो, आए और ज़ब्त करने लगे आग के संभावित ठिकाने । —– रौशनी गुल कर दी —– चूल्हे ठंडे और, माचिस गीली । : सख़्त पाबंदी थी […]
उनके होने से ही मौसम में बहार आ जाती है अहसास ए इश्क से रूह भी सिहर जाती है
अपने दिल को दिमाग से हर रोज लड़ाता है, इंसान इंसानों के बीच रहके भी फड़फड़ाता है।। राही अंजाना
कौन कहता है के हम सब कुछ पल दो पल में कर लेंगे, हम तो मेहमाँ ही दो पल के पल दो पल में क्या कर लेंगे, रहने दो ज्यादा से ज्यादा थोड़ा तो उथल […]
नारी की दशा बहोत ही विचित्र सी है है देवी पर क्यों अपवित्र सी है ? है हर जीवन का स्रोत… पर जीते जी स्वयं मृत सी है
दिखावे के प्यार दिखावे का खुला आसमां मिला जब भी उड़ना चाहा मुझको बस नीचे का रास्ता मिला
कसम से हर जुबाँ से दर्द मिला कभी नज़रों से वो दर्द मिला न जाने कब बदलेगा ये हालात नारी होने का हर दर्द मिला
मै अपने साये में धूप लेकर चलती हूं तेरे लिये छाव फैलाये चलती हूं तू कभी मिल जाता है मुझे अगर तेरे पाव के नीचे हाथ बिछाये चलती हूं
तन्हाई में तुम्हारा ख्याल जो आया दूर पहाड़ो पर फैली धुंध बन गया सर्दियों की खिली धूप बन तपा फूलो पर ओस की बूंद बन गया……
दर्द इतना है कि कराह रहा हूँ । जतन खूब किए मगर हार रहा हूँ । गम करना था अपने हालातों पर मुझे । मगर मेरी जुर्रत तो देखो, मुस्कुरा रहा हूँ ।।
दिल अपना है मगर धकड़न पराई है, इस बात की खबर मैंने ही फैलाई है, नज़र वालों ने ही यहाँ नज़र चुराई है, इस बात में ढूँढो तो कितनी सच्चाई है, किसीने न सुनी मैंने […]
Rishton ki ek nadi hai Kabhi tezz toh kabhi dhime ye bahi hai Kabhi dur toh kabhi pass Apno ko ye kar gayi hai Kabhi ubhar-ne toh kabhi Dooba-ne wale rishte ye de gayi hai […]
तराजू के दोनों पलड़ों पर रखकर आंकते देखा, वजन प्यार का फिर भी मेरे कम भाँपते देखा, बन न पाया था किसी साँचे से जब आकार मेरा, के लेकर हाथों में फिर मिट्टी को नरम […]
कह रहे हो तुम ये , मैं भी करूँ ईशारा, सारे जहां से अच्छा , हिन्दुस्तां हमारा। ये ठीक भी बहुत है, एथलिट सारे जागे , क्रिकेट में जीतते हैं, हर गेम में है आगे। […]
मौजो से भिड़े हो , पतवारें बनो तुम, खुद हीं अब खुद के, सहारे बनो तुम। किनारों पे चलना है , आसां बहुत पर, गिर के सम्भलना है, आसां बहुत पर, डूबे हो दरिया जो, […]
सब यहा मिलकर मुम्बतीया जलाते जा रहे। और वो एक एक हमारी बेटियां मिटाते जा रहे।। ना समझ मासूम ओर कमजोर बच्चीयो पर। ये कुछ नामर्द अपनी ताकत दिखाते जा रहे।। ” रहस्य ” देवरिया
पापा इतना सब आप कैसे कर लेते हो? कैसे असल जिंदगी में हरफनमौला रह लेते हो? हर काम में परफेक्ट कैसे हो लेते हो वो चलना सिखाना, वो कंधों पर घुमाना, बचपन में पढ़ाना साथ […]
तुम तो कहते थे कि जी नहीं पाओगे मेरे बिना अरसे बाद मिला तो सवाल किया उसने मैंने कहा आखरी साँस पर तेरे साथ का वादा किया था ना तू आया ना वो अखरी साँस […]
पुलवामा आतंकी हमले में शहीद देश के उन वीरों भावभीनी श्रध्दांजलि (( जय हिंद )) अब हर आतंकियों के मंशुबे नाकाम करना है। अब हर हाल में तुम्हें जलाकर राख करना है।। छुपे बैठे हैं […]
पुलवामा हमले में शहीद वीरों को भावभीनी श्रद्धांजलि देश भक्ति के ये नारे हर रोज क्यों नहीं लगते। ऐ आग हरदम सबके दिलों में क्यों नहीं जलते।। सियासी खेल खेलने वाले क्या जाने दर्द ए […]
ऐसे अपनो को क्यों सताता जा रहा है तू। हर बार हमे क्यों रुलाता जा रहा है तू।। “” “” “” “” “” “” मेघो की आवाज सून ऐ काले बादल। बिन बरसे आगे क्यों […]
जरुरत से ज्यादा जुर्रत कर हिम्मत से ज्यादा हिमाकत कर। ख्वाब जितने भी हैं जिस्म में तेरे उन सबको रूह में शामिल कर। जरुरी नहीं सबको जिन्दा दिखे तू किसी के लिए मरने का भी […]
Ghar ghar chitthi aaj Saputo ne bheji h Ghr me cuha mare Sarhad pr saheedi h Ankhe tak tak jgti h Kya diwali kya eidi h Rat sansanati thand thi Har rat aise beeti h […]
Me likh du kuch agr To sayro me shumar ho jaunga Tabiyat rahegi hari bhri mgr Lfjo me bimar ho jaunga Rakh dur najar apni Kahi me shikar ho jaunga Dimag h nhi aur dil […]
Teri Yaado ka ghar bana ke rahati huoi puche agar ko mera naam, naam tera hi kahati hu
tapti dophari sahab kheton me jlta hu me mitti ka hu sahab mitti me plta hu suraj se phle ugta hu me sanjh bad ankhe mlta hu koso ki duri naapi h mene koso pedal […]
साथ निभाने के लोगों के तरीके अजीब हैं, अपनों से भी ज्यादा लोग गैरों के करीब हैं, मर चुके हैं एहसास यूँ दिल की हिफाज़त में, के धड़कन में नज़रबंद वो कितने अदीब हैं, गुमराह […]
वो दिल ओ दिमाग की पकड़ से बाहिर लगती है, सच यह बात उसके चेहरे से ही ज़ाहिर लगती है।। राही अंजाना
बहुत शोर मच रहा है बाहिर सुनो, शायद भीतर मेरे सब ख़ामोश हैं।। राही अंजाना
बिजली चले जाने पर हम रात चांद के तले बिताते हैं क्रंक्रीट की छत पर बैठ हम प्रकृति को कोसते हैं हवाओं से मिन्नते करते शहरों की छतों पर तपती गरमी में नई सभ्यता रचते […]
चंद वक्त ले लो दुनिया भी बदल लो। एक एहसान करो तुम ही बदल जाओ आजकल में चीखों को सुनो फिर सोचो क्या तुम काबिल हो। एक बार तुम घर में बैठ जाओ देखों लोग […]
जब कभी भी मैं आईने को रूबरू देखता हूँ, सूरत और सीरत को खुद की हूबहू देखता हूँ।। राही अंजाना
वजन ईंटो का उठाकर भी हल्का लगने लगा, कन्धों पे जिम्मेदारी का जो हल्ला लगने लगा।। राही अंजाना
बच्चे की खातर माँ कितने ही दान निकाल देती है, M जिस्म से अपनी सौ बार जैसे जान निकाल देती है, भूख से बिलखता गर दिख भी जाये कोई मासूम तो, कुछ सोचे बिन दुपट्टे […]
न जाने किस-किस का हसीन आशियाना हूँ मैं, लोग कहते हैं के खुले ज़माने का फ़साना हूँ मैं, जो उखाड़ने की जद्दोजहद में हैं जड़ों को मेरी, उनसे खुले दिल से कहता हूँ के कोई […]
ख्वाबों ख्यालों में किसी का कोई पहरा नज़र नहीं आता, जो नज़र में आता तो उसका कोई चहरा नज़र नहीं आता, घूमती गुमराह सी नज़र आती हैं जो खामोश राहें हमको, उन राहों पे ढूंढ़े […]
मेरी पहली कविता की ना जाने क्यों याद आ गयी, आँखों में ना जाने खुशियों की आँसू क्यों आ गयी। लिखने का वैसे हमें कोई शौक नहीं था, पर हाथों ने कलम को अपना लिया […]
“बचपन की वो मीठी यादें“ बचपन की वो मीठी यादें , वो नन्हीं-सी अठखेलियां , याद आती है बहुत , वो भोली-सी नादानियां ! वो माँ का आँचल और पापा की अंगुली थामें , चलना, […]
फूलों का रंग चुरा के उसने तुझे सजा दिया पानी को आग लगानेवाला अंगार बना दिया अपनी निगाहों से हवा का रुख जो मोड़ दे उस ऊपरवाले ने ना जाने कैस तुझे बना दिया
साद और बर्बाद भी हुआ मौला प्यार भी किया नफरत भी किया मौला गुनाह भी किया मौला शफा भी किया अंत में रुका जहा तोह पिटारा खाली था जो कमाया वोह रह गया मौला तू […]
तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तेरे ख़्यालों की जंज़ीरों का क्या करूँ? अश्क़ों को छुपा लेता हूँ पलकों में लेकिन- मैं तेरे सपनों की ज़ाग़ीरों का क्या करूँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
चेहरे हर एक रोज बदलने का शौख रखते हैं, कुछ लोग अपने आप को बड़ा बेख़ौफ़ रखते हैं।। राही अंजाना
छोटी सी उमर में बदल कर देखो चाल बैठ गया, पहनके इंसा ही जानवर की देखो खाल बैठ गया, बड़ी बहुत हो गई ख्वाइशों की बोतल उस दिन से, रिश्तों का कद भूल जब कोई […]
ज्ञान की पोथियाँ सारी चन्द पैसों में तोल लेता हूँ मैं, जो भी जब भी मुँह में आ जाये यूँही बोल देता हूँ मैं, समझ पाता नहीं हूँ किताबों में लिखे काले अक्षर मैं, सो […]
मन की बातो को कलम के सहारे से इशारा देता हूँ मैं अंजाना होकर भी कुछ लहरों को किनारा देता हूँ, जब जुबां और दिल सब हार कर अकेले में बैठते हैं, तब मैं दर्द […]
कुछ बेदर्द इंसानों ने अपनी अक्ल उतार कर रख दी, मासूम ज़िन्दगी की आईने में शक्ल उतार कर रख दी, दिन में लगे जो गहरे घावों की वस्ल उतार कर रख दी, पुनर्जन्म के पन्नों […]
शिकार करने चली थी बाज का, हुस्न के गुरूर मे ।। हँसी थामे ‘सच’ कहू … पर भी ना मिला कबुतर का ।। ~ सचिन सनसनवाल
गम है तोह रो ले चेहरा पढ़ के दिल का हाल जाने वाले अभी कहा बनते है
बारिश की पहली बूंद सी सुकून दे जाती तू इस तपती धरती को जीने के और मौके दे जाती तू लाखों वजूहात थे नफ़रतें थी सब धूल गए अब बस तुझमे घुल जाने को दिल […]
तोड़ सके तो कोशिश कर ले एक और बार, अब कसम से दिल को पत्थर कर लिया मैंने।। राही अंजाना
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