रेत की जरूरत रेगिस्तान को होती ! सितारो की जरूरत आसमान को होती!!! आप हमे भुल जा कोई गम नही , मै लोहा हूँ मुझे सोना की जरूरत नही होती। मुझे तो मालुम था जब […]

खामोशी को समेटकर कुछ अल्फाजो का पिटारा लाया हूं, उस ख़ुदा से भी बढ़कर है वो जिसके बारे में आपको कुछ बताने आया हूं। उसकी हिदायतों से मैने जिंदगी के हर रंग में रंगना सीखा […]

लपेटकर कलाई में धागा जो रिश्ता बांधती है, जब कोई सुनता नहीं मेरी तो वो कहना मानती है, सर पर तो रखता हूँ मैं हाथ उसके प्यार से, मगर एक वो है जो मेरे लिए […]

माना के ज़हरीली ज़िन्दगी है मगर जिगर पाक रखते हैं, हम इन्सा नहीं जो दिल में कोई बात रखते हैं, यूँ तो गले लगाने की फितरत नहीं हमारी, मगर इरादे जो भी हो हम साफ़ […]

किसी कलमकार की कलम के नखरे हजार देखो, कहीं बनाती किसी की ज़िन्दगी तो कहीं ये बिगाड़ देखो, किसी अस्त्र से कम नहीं है वजूद इसका, चाहे तो गिरा दे किसी के भी तख्तो ताज […]

गुरु ज्ञान की पुस्तक हमको सही गलत का पाठ पढ़ाए, अन्धकार के पर्दे को नज़रों से सहज भाव से खोल दिखाए, जीवन एक जटिल पहेली जिसमें उलझे तो कोई सुलझ न पाए, पर गुरु मार्गदर्शक […]

कभी सूनसान गली तो कभी खुले मैदान में पकड़ ली जाती है, तू क्यों कटी पतंग सी हर बार लूट ली जाती है, वो चील कौवों से नोचते कभी जकड़ लेते हैं तुझे, तू क्यों […]

कवि होना भी खुदा की रहमत का ही नमूना है वरना युं अपने दर्द को शब्दों में बयां कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं।

किसी कलमकार की कलम के नखरे हजार देखो, कहीं बनाती किसी की ज़िन्दगी तो कहीं ये बिगाड़ देखो, किसी अस्त्र से कम नहीं है वजूद इसका, चाहे तो गिरा दे किसी के भी तख्तो ताज […]

शाम हो गई तुम्हे खोजते माँ तुम कब आओगी जब आओगी घर तुम खाना तब ही तो मुझे खिलाओगी, रात भर न सो पाई करती रही तुम्हारा इंतजार सुबह होते ही बैठ द्वार निगाहें ढूंढ […]

कम्बख्त वो हमारे सामने बेवजह ही मुस्कुरा गऐ बेवजह ही हम उनकी बाहोँ में आ गऐ खबर न थी जमाने को इस नए चमन से रिश्ते की हम भी बेखबर जमाने से नैना लड़ाते चले […]

तलबगार है कई पर मतलब से मिलते हैं ये वो फूल हैं जो सिर्फ मतलबी मौसम में खिलते हैं रोक लगाती है दुनिया तमाम इन पर पर देखो मान ये इश्कबाज पक्के जो पाबंदियों में […]

काश भ्रष्टाचार न होता ,फिर भलों का दिल न रोता कानून ढंग से काम करता, काश भ्रष्टाचार न होता। लोकतंत्र भ्रष्ट न होता, रिश्वत का तो नाम न होता संसद ढंग से काम करता, काश […]

जो और कोई कह ना पाए कर ना पाए और कोई ऐसा जज्बा लिए संग में चलता है अकेला कोई। उसके पास अनूठी क्षमता और अनोखा ज्ञान है सदा ही कागज पर अपने रचता अलग […]

माँ तुम दिल में ठान लो कि मुझको दुनिया में लाओगी इस बार दुनिया कि मान कर मुझको नहीं मिटाओगी। क्या हक नहीं है मेरा माँ इस दुनिया में आने का क्या अरमान नहीं है […]

जमाने में रहे पर जमाने को खबर न थी ढिंढोरे की तुम्हारी आदत न थी अच्छे कामों का लेखा तुम्हारा व्यर्थ ही रह गया हमसे साथ तुम्हारा अनकहा सा कह गया जीतना ही सिखाया हारने […]

हर एक तनहा लम्हे में एक अर्थ ढूँढा करती थी| हर अँधेरी रुसवाई में गहरा अक्श ढूँढा करती थी | मैं मेरी परछाई में एक शख्स ढूँढा करती थी| मेरी मुझसे हुई जुदाई में कुछ […]

वाह रे दुनिया ! मै चीखा–चिल्लया तेरी बातों से। “हाँ” मै चीख रहा हूँ,चिल्ला रहा हूँ,मेरा कोई औकाद नही किसी पर अवाज उठाने की! केवल जख्मों के छालों से सदा सुने है,सिसक -सिसक कर सोई […]

हमे तो मालुम था, पतझड़ मे पत्ते भी साथ छोड़ देते है,देखकर मेरी तबाही को अपनो भी साथ छोड़ देते है!! बस तु तो चलती हुई मुशाफीर थी- ये मतलबी दुनिया बाप को भी छोड़ […]

संघर्षों में जीवन की तू परिभाषा कहलाती है, रंग बिरंगी तितली सी तू इधर उधर मंडराती है, खुद को पल- पल उलझा कर तू हर मुश्किल सुलझाती है, खुली हवा में खोल के बाहें तू […]

अब मुझे मेरी जिन्दगी या श्मशान चाहिए!! गरीब हूँ मालिक मुझे मेरा सम्मान चाहिए । मै रोता रहता हूँ अमीर के अत्याचारो से,धिन जाती है मुझे अपने उपर हो रहे” मुझे समानता का अधिकार अपने […]

वस्ती की पुकार ———————————– डरावना–डरावना सी भय लगी इस वस्ती मे। चार–पाँच लफँगा हर मोड़ पर खड़ा इस वस्ती मे। कितना राज छुपाए डरा–डरा सा हूँ खादी पहने वाले के बच्चे बनकर लफँगा खड़े इस […]

गजल : कुमार अरविन्द नहीं तकदीर में जो मेरे क्यों फिर जुस्तजू करते | मेरी किस्मत में क्या है वो पता जाकर के यूं करते | रखी इज्जत हमेशा है जिसने अपना समझकर तो | […]

मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत […]