मित्रो , ईश्वर के आशीर्वाद से , आज मेरी रचना , एक बार फिर राष्ट्रीय अखबार “दैनिक वर्तमान ” मे प्रकशित हुई है जिससे मेरे साहित्यिक क्षेत्र को बल , संबल प्राप्त हुआ है। आपके […]
मित्रो , ईश्वर के आशीर्वाद से , आज मेरी रचना , एक बार फिर राष्ट्रीय अखबार “दैनिक वर्तमान ” मे प्रकशित हुई है जिससे मेरे साहित्यिक क्षेत्र को बल , संबल प्राप्त हुआ है। आपके […]
सवाल जीत का है या हार का न मालूम राही, मगर जिंदगी तो हर पल जंग सी लगती है।। – राही (अंजाना)
चल पड़ी उस राह पर,जहां काटें बहुत थे| माँ, तेरी फूल जैसी गोदी से उतरकर ये काटें बहुत चुभ रहे थे| चलते हुए एक ऐसा काटा चुभा था, कि ज़ख्म से खून आज भी निकल […]
आज मेरे पास सावन की मातृ दिवस की लिंक आई । फिर क्या इसे देखकर मुझे भी सनक आई । फिर मैने भी कलम उठाई । और पुरी महेनत से एक कविता बनाई । फिर […]
जब पास तेरे कुछ ना हो उम्मीद किसी से कुछ ना हो अमावस की रात हो काला घाना अंधकार हो तब खुद को तू सवारना हिम्मत कभी ना हारना। जब मायूसियो की आंधी हो मुश्किलो […]
जब पास तेरे कुछ ना हो उम्मीद किसी से कुछ ना हो अमावस की रात हो काला घाना अंधकार हो तब खुद को तू सवारना हिम्मत कभी ना हारना। जब मायूसियो की आंधी हो मुश्किलो […]
आजकल नींद सोती है मेरे बिस्तर पर, और मैं तो ख्यालों की दुनिया मैं टहलने निकल जाती हूँ|
मुझको मुझसे जीत कर, खुशियाँ मना रहे थे वो| शायद हारकर जीतने और जीत कर हारने के , उस एहसास से वाकिफ़ न थे वो|
मेरी हर इक ग़ज़ल की अब तक ज़मीन तुम हो ….. मेरा अलिफ़ बे पे से चे और शीन तुम हो …. जज़्बात से बना मैं इक प्यार का नगर हूँ रहते हो इस में […]
अक्षर से शब्द बना शब्दों से बने वाक्य वाक्यों से फिर कविताएँ बनी जिनको पढ़ रहे आप।
बहुत याद आते हैं वो दिन जब हम भी स्कूल जाते थे पीठ पर बस्ता, गले में बोतल खेलते- कूदते पहुँचते थे। कक्षा की वो प्रिय अध्यापिका प्यार से हमको पढ़ाती थीं जब भी कुछ […]
संघर्षों में जीवन की तू परिभाषा कहलाती है, रंग बिरंगी तितली सी तू इधर उधर मंडराती है, खुद को पल- पल उलझा कर तू हर मुश्किल सुलझाती है, खुली हवा में खोल के बाहें तू […]
एक युवती जब माँ बनती है, ममता के धागों से बच्चे का भविष्य बुनती है, ज़ज्बात रंग -बिरंगे उसके, बच्चे के रंग में ढलते हैं, दिल के तारों से हो झंकृत, लोरी की हीं गूंज […]
एक माँ ही तो है जिसने मुझसे और मैंने उससे बिना एक दूजे को देखे बेपनाह प्रेम और साथ निभाया है। एक माँ ही तो है जिसने मेरे बिना कुछ बोले मेरी हर एक बात […]
लाख अपने गिर्द हिफाजत की लकीरें खीचूँ, एक भी उन में नहीं “माँ ” तेरी दुआओं जैसी, लाख अपने को छिपाऊँ कितने ही पर्दों में, एक भी उन में नहीं “माँ” तेरे आँचल जैसा, लाख […]
कितनी दफ़ा उँगलियाँ अपनी जला दी तूने… ‘माँ’ मेरे लिए चंद, रोटियाँ फुलाने में ! कितनी दफ़ा रातें गवां दी, “माँ” तूने मुझे सुलाने में, कितनी दफ़ा आँचल भिगा दिया, “माँ” तूने मुझे चुपाने में, […]
जो मन की बंजर धरती में फूल खिलाये तुम, टूटी मेरी हिम्मत को जो फिर से जागाये तुम, बिखरे मेरे मन की चादर जो फिर से लगाये तुम, उजड़ी हुई बगिया में भी जो सुगन्ध […]
मन ******** मन की बंजर धरती पर फूल उगाए कौन मेरी सोई हिम्मत को,फिर से जगाए कौन बिखरा-बिखरा हैं मन मेरा टूटा टूटा जाए कल्पनाओ में मेरे फिर आये कौन जहाँ खो गई सुंगध सुमनों […]
बिसात शतरंज की आज भी लगा लेता हूँ, चाल अपने हुनर की आज भी दिखा लेता हूँ, हाथी और घोड़ों की आज भी पहचान नहीं है मुझे, तो अपने पैदल भी मैं बड़े मोहरों से […]
रेत की जरूरत रेगिस्तान को होती ! सितारो की जरूरत आसमान को होती!!! आप हमे भुल जा कोई गम नही , मै लोहा हूँ मुझे सोना की जरूरत नही होती। मुझे तो मालुम था जब […]
रेत की जरूरत रेगिस्तान को होती ! सितारो की जरूरत आसमान को होती!!! आप हमे भुल जा कोई गम नही , मै लोहा हूँ मुझे सोना की जरूरत नही होती। मुझे तो मालुम था जब […]
शब्दों में भी कितना जादू है चाहे तो किसी को अपना बना ले चाहे तो इन्ही से बाण चला दे।।
कितनी तेज़ हो गई जिंदगी कितनी आगे निकल रही है चिट्टी पत्री के झंझट से निकल कर व्हाट्सअप, फेसबुक में आ गई है।
कितनी तेज़ हो गई जिंदगी कितनी आगे निकल रही है चिट्टी पत्री के झंझट से निकल कर व्हाट्सअप, फेसबुक में आ गई है।
इतिहास है आज भी जिस पर मौन, वह है आखिर कौन, वह है आखिर कौन? जो लड़ता रहा हर समय किसी के लिए, और मरता रहा किसी के लिए| रहता है वो सबसे दूर, देश […]
इतिहास है आज भी जिस पर मौन, वह है आखिर कौन, वह है आखिर कौन? जो लड़ता रहा हर समय किसी के लिए, और मरता रहा किसी के लिए| रहता है वो सबसे दूर, देश […]
खामोशी को समेटकर कुछ अल्फाजो का पिटारा लाया हूं, उस ख़ुदा से भी बढ़कर है वो जिसके बारे में आपको कुछ बताने आया हूं। उसकी हिदायतों से मैने जिंदगी के हर रंग में रंगना सीखा […]
उसके नजर मे आँसु का कोई मोल नही। ए आँख! तु ऐसे ना आँसु ना वहा ना कर किसी से गिला सिकवा। यही था जीवन रास्ते राही की, जिसको तु ने अपना समझा– वो आसमान […]
किसी को जिम्मेदारी की बेडियों ने जकड़ा है, तो कोई मुक्त है बारिश में भीग जाने को।।।
लपेटकर कलाई में धागा जो रिश्ता बांधती है, जब कोई सुनता नहीं मेरी तो वो कहना मानती है, सर पर तो रखता हूँ मैं हाथ उसके प्यार से, मगर एक वो है जो मेरे लिए […]
माना के ज़हरीली ज़िन्दगी है मगर जिगर पाक रखते हैं, हम इन्सा नहीं जो दिल में कोई बात रखते हैं, यूँ तो गले लगाने की फितरत नहीं हमारी, मगर इरादे जो भी हो हम साफ़ […]
किसी कलमकार की कलम के नखरे हजार देखो, कहीं बनाती किसी की ज़िन्दगी तो कहीं ये बिगाड़ देखो, किसी अस्त्र से कम नहीं है वजूद इसका, चाहे तो गिरा दे किसी के भी तख्तो ताज […]
यूँ तो हर एक नज़र को किसी का इंतज़ार है, किसे दिख जाये मन्ज़िल और कौन भटक जाए, कहना कुछ भी यहाँ दुशवार है, एक ही नज़र है फिर भीे पड़े हैं पर्दे हजार आँखों […]
माना के आँसूओ में वजन नहीं होता, पर एक भी जो छलक जाए तो मन हल्का हो जाता है।। – राही (अंजाना)
गुरु ज्ञान की पुस्तक हमको सही गलत का पाठ पढ़ाए, अन्धकार के पर्दे को नज़रों से सहज भाव से खोल दिखाए, जीवन एक जटिल पहेली जिसमें उलझे तो कोई सुलझ न पाए, पर गुरु मार्गदर्शक […]
तुम्हारे जाने से ज़िन्दगी उलझ सी गई है, तुम्हारे साथ में कुछ तो सुलझा सा था।। राही (अंजाना)
तुम्हारे जाने से ज़िन्दगी इतनी सी बदली हैं पहले मुस्कुराते थे..अकेले में भी अब सबके बीच हँसते हैं… – राजनंदिनी रावत
कभी सूनसान गली तो कभी खुले मैदान में पकड़ ली जाती है, तू क्यों कटी पतंग सी हर बार लूट ली जाती है, वो चील कौवों से नोचते कभी जकड़ लेते हैं तुझे, तू क्यों […]
कवि होना भी खुदा की रहमत का ही नमूना है वरना युं अपने दर्द को शब्दों में बयां कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं।
पानी से भरी आखें लेकर मुझे घूरती ही रही शीशे के उस पार खड़ी लड़की उदास बहुत थी।
मकड़ी जैसे मत उलझो तुम गम के ताने बाने में, तितली जैसे रंग बिखेरो हँस कर इस ज़माने में..
तु आए और आकर लिपट जाए मुझसे उफ्फ ये मेरे महंगे ख्वाब
कितना खुश है वो मुझे भुलाकर ए खुदा मुझे भी उसके जैसा दिल दे दे….।
दौलत नहीं शोहरत नहीं न वाह वाह चाहिए कैसे हो कहां हो बस दो लफ्जों की परवाह चाहिए।।
जिन्दगी तेरी नराजगी से क्या होगा । ये मुस्कुराहट जिन्दगी का karzadar है।
तुम्हारे जाने से ज़िन्दगी उलझ सी गई है, तुम्हारे साथ में कुछ तो सुलझा सा था।। राही (अंजाना)
किसी कलमकार की कलम के नखरे हजार देखो, कहीं बनाती किसी की ज़िन्दगी तो कहीं ये बिगाड़ देखो, किसी अस्त्र से कम नहीं है वजूद इसका, चाहे तो गिरा दे किसी के भी तख्तो ताज […]
खामोशियाँ यूँही तो खामोश नहीं होती, कोई वजह तलाशो क्यों इनमें आवाज नहीं होती।। राही (अंजाना)
यूँ तो हल्की सी है ज़िन्दगी, वजन तो बस ख्वाइशों का है।। राही (अंजाना)
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