सबकी रातों में ख्वाबों की पहरेदारी रहती है, पर मेरी आँखों में खाली जिम्मेदारी रहती है, कहता हर शख्स है खुल कर दिल की अपने, पर मेरे चेहरे पे ठहरी सी दुनियाँदारी रहती है, सुना […]

डर के साये में खुद को दबाये बेटियाँ रहती हैं, बहुत कुछ है जो खुद ही छुपाये बेटियाँ रहती हैं, अपने को अपनों से पल-पल बचाये बेटियाँ रहती हैं, होठों को भला किस कदर सिलाए […]

आखरी उम्मीद थी वो भी टुट गई। तुझे से ही उम्मीद थी —- और तु ही हमको छोड़ गयी। एक आखरी उम्मीद थी वो भी टुट गई। मंजिल पर पहुँचना दुर की बात थी। पहले […]

तुमने उकटी है मेरी औकाद तुमने उकटी है मेरी औकाद तेरा भी कोई उकटे गा। अब मेरी बद्दुआएँ पीछे करेगी, हालत को कुछ एेसे बन जायेगे। अपनी बाल तु ऩोचेगी अपना सर खुद फोड़गी।। किस […]

संस्कारों के बीज यहाँ पर अक्सर बोये जाते हैं, सम्बंधों के वृक्षों पर नये पुष्प संजोये जाते हैं, मात-पिता, दादा-दादी और भाई बहन के नातों से, हर एक क्षण में खुशियों के कई रंग पिरोये […]

मिलने से पहले इतना मत घबराया करो, हर बात को यूँ मुझसे न बताया करो, देखना है गर उस खुदा की रहमत तो, सर ही नहीं दिल को भी तो झुकाया करो, चुप रहकर ही […]

अर्जियां लाया हूँ लिखकर चेहरे पर अपने, कलम को अपनी ज़रा विश्राम दिया है, झुकाया नहीं है आँखों को तेरे दर पर आज, पलकों को अपनी ज़रा आराम दिया है, छोड़ कर बैठा हूँ आज […]

मोबाइल की उपस्थिति में किताबों की अनुपस्थिति लग रही है, जिंदगी छोटे से गैजेट्स में डिजिटली कैद लग रही है।।  – राही (अंजाना)

एक मुक्तक श्री कलाम साहब के लिए – कोई उस खुदा को जाकर मेरा पैगाम दे दो , मेरे देश भारत को तुम उसका ईनाम दे दो ! मेरे मोला मेरे मालिक पर्वर्दीगार-ए-आलम , सारे […]

*“प्यार की निशानी “* ^^^^^^^^^^^^–^ गीतकार जानकीप्रसाद विवश मेरा हर शेर , तेरे प्यार की निशानी है। प्यार तेरा , मेरे जीवन की अमर कहानी है । मत समझ सिर्फ हँसी जिस्म से है प्यार […]

*दर्द से नाता* ******** गीतकार- जानकीप्रसाद विवश दर्द का जिंदगी से नाता है , बेहिसाबी से दर्द भी इसे निभाता है। न किसी को है , किसी की कभी कोई चिंता , दर्द की जिंदगी […]

जवाब… बस देती ही रही हूं जवाब… घर जाने से लेकर घर आने का जवाब… खाने से लेकर खाना बनाने का जवाब… बस देती ही रही हूं जवाब… चित्र से लेकर चरित्र का जवाब… सीता […]

ख़्वाबों से बाहर निकल के देखते हैं, चलो आज हकीकत से मिल के देखते हैं, बहुत दिन हुए अब छुपाये खुद को, चलो आज सबको रूबरू देखते हैं, बड़ी भीड़ है जहाँ तलक नज़र जाती […]

हर पल मेरी परवाह करते थकती क्यों तू न है, माँ मुझको इतना बतला दे तेरा भी क्या सपना है।।   चंदा मामा के किस्से कहकर कैसे हँसते-हँसते तू लोरियाँ सुनाती थी माँ मझको इतना […]

मेरे बातो पर उनको विश्वास नही होता, चाहे कुछ भी हम कर ले मेरे बातो पर उनको विश्वास नही होता।। एक पागल मै हूँ उन्हे हर पल याद करते हूँ पर वो कहती है,कि तेरे […]

यूं तो अरमानों के इरादे भी परेशान हैं, पानी की बूँदें भी आँखों की बारिश से हैरान हैं| पर जनाब हमारी गुस्ताखियों की भी हद नहीं होती, ऐसी केफ़ियत में अपनी ही परछाई में सुकून […]

कुछ भी नहीं छुपाता हूँ मैं माँ को सब कुछ बताता हूँ, माँ मुझ पर प्यार लुटाती है मैं सब कुछ भूल जाता हूँ, मैं भूखा जब हो जाता हूँ माँ मुझको खूब खिलाती है, […]

“माँ” कितनी बार धुप मे खुन को जलाई तुने “माँ” मेरी लिए चंद रोटियाँ लाने मे। कितनी बार तुने खुशी बेच ली “माँ” तुने मुझे सुलाने मे।। कितनी बार दुसरे से लड़ गई ” माँ […]

सुबह के चार जैसे ही बजते हैं आँखें उसकी खुल जाती हैं इधर से उधर,उधर से इधर साफ़ सफाई से शुरुआत है करती खाना बना के सबको रखती बच्चों को विद्यालय छोड़ती नौकरी को तैयार […]

आई तुझ्यासाठी मी काय लिहू, आणि किती लिहू, तुझ्या महितीसाठी शब्दच अपुरे आहेत, तुझ्यासमोर सगळे जगच फिके आहे।। आई तुझ्या बद्दल बोलायला मला शब्दच उरणार नाहीत. आणि तुझे उपकार फेडायला मला हजारो जन्म पुरणार नाहीत।। […]

दिल की बातो पर उनको एतबार नहीं होता। चाहे कुछ भी करले उन्हें हमसे प्यार नहीं होता।। एक हम हैं उन्हें याद हर पल करते रहते हैं। पर वो कहते बात करने का समय यार […]

रुलाता भी नहीं और खुश रहने भी नही देता। ख्वाबो मे आने का वादा कर सोने नही देता।। बड़े बे अदब और बेरहम है हमसफर मेरा। दर्द देता है हंस कर पर मरहम नहीं देता।। […]

मिली मुझे खुशियाँ (“रहस्य:) देवरिया मेरे होठों कि हॅशी तेरे आनें से है, मिली मुझे खुशीयाॅ तेरे बहाने से है,, “””””””” मेरे लबों कि मुस्कुराने की वजह , बे पनाह तेरा प्यार मुझपे लूटाने से […]

एक और ग़लत आंखों में ख्वाबो को सजाने की ” रहस्य ” देवरिया आंखों मे ख्वाबो को सजाने की हिमाकत ना करते। काश दिल में किसी को बसाने की हिम्मत ना करते।। %%%%%%% कबूल कहा […]

मित्रो , ईश्वर के आशीर्वाद से , आज मेरी रचना , एक बार फिर राष्ट्रीय अखबार “दैनिक वर्तमान ” मे प्रकशित हुई है जिससे मेरे साहित्यिक क्षेत्र को बल , संबल प्राप्त हुआ है। आपके […]

चल पड़ी उस राह पर,जहां काटें बहुत थे| माँ, तेरी फूल जैसी गोदी से उतरकर ये काटें बहुत चुभ रहे थे| चलते हुए एक ऐसा काटा चुभा था, कि ज़ख्म से खून आज भी निकल […]

आज मेरे पास सावन की मातृ दिवस की लिंक आई । फिर क्या इसे देखकर मुझे भी सनक आई । फिर मैने भी कलम उठाई । और पुरी महेनत से एक कविता बनाई । फिर […]

जब पास तेरे कुछ ना हो उम्मीद किसी से कुछ ना हो अमावस की रात हो काला घाना अंधकार हो तब खुद को तू सवारना हिम्मत कभी ना हारना। जब मायूसियो की आंधी हो मुश्किलो […]

जब पास तेरे कुछ ना हो उम्मीद किसी से कुछ ना हो अमावस की रात हो काला घाना अंधकार हो तब खुद को तू सवारना हिम्मत कभी ना हारना। जब मायूसियो की आंधी हो मुश्किलो […]

बहुत याद आते हैं वो दिन जब हम भी स्कूल जाते थे पीठ पर बस्ता, गले में बोतल खेलते- कूदते पहुँचते थे। कक्षा की वो प्रिय अध्यापिका प्यार से हमको पढ़ाती थीं जब भी कुछ […]

संघर्षों में जीवन की तू परिभाषा कहलाती है, रंग बिरंगी तितली सी तू इधर उधर मंडराती है, खुद को पल- पल उलझा कर तू हर मुश्किल सुलझाती है, खुली हवा में खोल के बाहें तू […]

एक युवती जब माँ बनती है, ममता के धागों से बच्चे का भविष्य बुनती है, ज़ज्बात रंग -बिरंगे उसके, बच्चे के रंग में ढलते हैं, दिल के तारों से हो झंकृत, लोरी की हीं गूंज […]

एक माँ ही तो है जिसने मुझसे और मैंने उससे बिना एक दूजे को देखे बेपनाह प्रेम और साथ निभाया है। एक माँ ही तो है जिसने मेरे बिना कुछ बोले मेरी हर एक बात […]

लाख अपने गिर्द हिफाजत की लकीरें खीचूँ, एक भी उन में नहीं “माँ ” तेरी दुआओं जैसी, लाख अपने को छिपाऊँ कितने ही पर्दों में, एक भी उन में नहीं “माँ” तेरे आँचल जैसा, लाख […]

कितनी दफ़ा उँगलियाँ अपनी जला दी तूने… ‘माँ’ मेरे लिए चंद, रोटियाँ फुलाने में ! कितनी दफ़ा रातें गवां दी, “माँ” तूने मुझे सुलाने में, कितनी दफ़ा आँचल भिगा दिया, “माँ” तूने मुझे चुपाने में, […]

जो मन की बंजर धरती में फूल खिलाये तुम, टूटी मेरी हिम्मत को जो फिर से जागाये तुम, बिखरे मेरे मन की चादर जो फिर से लगाये तुम, उजड़ी हुई बगिया में भी जो सुगन्ध […]

मन ******** मन की बंजर धरती पर फूल उगाए कौन मेरी सोई हिम्मत को,फिर से जगाए कौन बिखरा-बिखरा हैं मन मेरा टूटा टूटा जाए कल्पनाओ में मेरे फिर आये कौन जहाँ खो गई सुंगध सुमनों […]

रेत की जरूरत रेगिस्तान को होती ! सितारो की जरूरत आसमान को होती!!! आप हमे भुल जा कोई गम नही , मै लोहा हूँ मुझे सोना की जरूरत नही होती। मुझे तो मालुम था जब […]