बहुत ही बखूबी से तुमने मुझे नज़रन्दाज़ किया, जानते हुए भी मुझको क्यूँ अनजान किया, जब खामोश मोहब्बत ही हमारी जुबान थी, तो क्यों रिश्तों को अपने यूँ अज़ान किया॥ To be cont.. राही (अंजाना)
बहुत ही बखूबी से तुमने मुझे नज़रन्दाज़ किया, जानते हुए भी मुझको क्यूँ अनजान किया, जब खामोश मोहब्बत ही हमारी जुबान थी, तो क्यों रिश्तों को अपने यूँ अज़ान किया॥ To be cont.. राही (अंजाना)
ममता के आइने मे प्यारी सी सूरत है माँ, सूरज की धूप मे छाया का आँचल है माँ, दुखों के समन्दर में सुख का किनारा है माँ, दुनियॉ की भीड़ में सकून का ठिकना है […]
कुछ शब्द कहे थे हमने तो, वो शब्द जाने कब – लोगो कि जुबान पर चढ़ गए और किस्से हो गए . हम तो सभी के थे , जाने कब हम – बट गए उनके […]
जब जिन्दगी में आलम वीरान मिल जाते हैं! भटकी हुई तमन्ना के निशान मिल जाते हैं! भीगी हुई सी तन्हाई में चलते हैं कदम, बिखरे हुए इरादों के तूफान मिल जाते हैं! मुक्तककार- #महादेव'(26)
तेरी आँखों के बिस्तर पर अपने प्यार की चादर बिछा दूँ क्या? तेरे ख़्वाबों के तकिये के सिरहाने मैं सर टिका लूँ क्या? कर दूँ मैं मेरे दिल के जज़्बात तेरे नाम सारे, दे इजाज़त […]
कौन जानता है कि कौन मिलेगा कहां देखौं न मैं तो हूँ यहां और तुम हो न जाने कहां लेकिन तुम मिल रहे हो मुझसे पढ़कर मेरी लिखी जुबां। – कुमार बन्टी
बातें दिल की बयां करना आसां नहीं इतना लेकिन अपनी सदा को इतना काबिल तो जरूरी है बनाना कि डर से भी कभी न पड़े डरना। सदा= आवाज़ – कुमार बन्टी
खुद पे कुछ इस तरह से वार किया मैंने। तेरा न आना तय था इंतज़ार किया मैंने।। , जब थी फूलों सी फ़ितरत तो तोड़ा सबने। अब तोहमतें है खुद को ख़ार किया मैंने।। , […]
https://ritusoni70ritusoni70.wordpress.com/2017/04/06 कभी यूँ हीं हँस लिया करो, उदासी का दामन छोड़, खुशियों से मिल भी लिया करो, बहुत छोटी है जिन्दगी, जीने की तमन्ना बुन भी लिया करो। कभी यूँ हीं हँस लिया करो, गुम-सुम […]
किस किस को मैं अपनी नादानी को कहूँ? किस किस को मैं दर्द की रवानी को कहूँ? जले हुए से ख्वाब हैं अश्कों में तैरते, किस किस को मैं प्यार की कहानी को कहूँ? मुक्तककार- […]
किस किस को मैं अपनी नादानी को कहूँ? किस किस को मैं दर्द की रवानी को कहूँ? जले हुए से ख्वाब हैं अश्कों में तैरते, किस किस को मैं प्यार की कहानी को कहूँ? मुक्तककार- […]
जो लिखा ही नहीं वो ख़्यालो में है। जिंदगी का मज़ा अब सवालों में है।। , जो जाता है उसको चले जानें दो। देख लेंगे हम ग़म के जो प्यालों में है।। , तस्वीरों को […]
अकेली नही हूँ,पर तन्हा तो हूँ, यहाँ हूँ तो सही,पर पता नही कहाँ हूँ। कैसे कहु और किससे कहु , मेरे मन की व्यथा ये। सब कुछ होते हुए भी, क्यों तन्हा हूँ मैं। भीड़ […]
तेरी सूरत का मैं दीवाना हूँ कबसे! तेरी बेताबी का परवाना हूँ कबसे! अंजामे-बेरूखी से बिखरी है जिन्दगी, जख्मे-तन्हाई का अफसाना हूँ कबसे! मुक्तककार- #महादेव'(24)
ख़्वाब है जिंदगी,जिंदगी ख्वाब है। चेहरे देखा है उसका अलग आब है।। , जिसको कहतें रहे उम्र भर हम दवा। उसको सारा जहाँ कहता शराब है।। , खुद ही बदलें नहीं बस ये कहतें रहें। […]
टूटता जा रहा हूँ मै . छूटती हुई राहें-बढ़ता हुआ अँधेरा, भटकता जा रहा हूँ मै . टूटता हुआ किनारा-उमड़ता हुआ सागर , डूबता जा रहा हूँ मै . समाज का बंद कमरा-कमरे में मै […]
मेरी बेखुदी को कोई नाम न देना! मेरी तमन्नाओं को इल्जाम न देना! बहके हुए इरादों को तड़पाना न कभी, सुलगी हुई तन्हाई की शाम न देना! मुक्तककार- #महादेव'(23)
याद आती है वो जग़ह, जब कभी पक्की सड़कों पे चलते चलते, थक जाता हूँ मैं और मन होता है, की इस शोर से दूर जाकर किसी पेड़, की छाह में बैठ जाऊँ और मिलूँ […]
दिन भर अखबार लिए फिरता है इक बच्चा उसकी सुबह कब होती होगी, उसकी शाम कब होती होगी, शायद उसके लिए दोपहर न होती होगी, क्योंकि एक अजब सी चमक थी, उसकी आँखों में इतनी […]
इक तारा आज फिर से टूटा बिखर गया। आसमान ने ये देखा वो फिर सिहर गया।। , किसकी है ये खता की वो छोड़ आया घर। या खुद की ही वजह से वो यूँ बिखर […]
कबसे तड़प रहा हूँ तुमको याद करते करते! कबसे तड़प रहा हूँ मैं फरियाद करते करते! बैठा हुआ हूँ मुद्दत से तेरे इंतजार में, कबसे जिन्द़गी को मैं बरबाद करते करते! मुक्तककार- #महादेव'(27)
कभी रुलाया है, तो कभी हंसाया भी है, जिन्दगी तुझसे कोई शिकवा नहीं है, कभी खोया है, तो कभी पाया भी है
तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है, और तू मेरे गांव को गँवार कहता है। ऐ शहर मुझे तेरी औक़ात पता है, तू बच्ची को भी हुस्न ए बहार कहता है। थक गया […]
साहिल पे मैं आता हूँ अक़्सर, पता नहीं किस चाहत में , किसकी जुस्तजू में, बस सुकून मिलता है। , समंदर की लहरें कभी शांत रहती है, कभी कभी कुछ सवाल करती है, जैसे मेरे […]
इस क़ैद ए तन्हाई से कब रिहा होंगें हम। सोचा तो था की मुकम्मल जहां होंगे हम।। , रोज़ आते है ख़्याल हमकों परेशान करने। अब जितना कहेंगे उतने ही रवां होंगे हम।। , तुम […]
नहीं हारनी है हिम्मत जब तक ये साँस हैं क्योंकि मुझे उम्मीद की चाह से ज्यादा कोशिश की राह पे विश्वाश है। – कुमार बन्टी
कभी तो तेरे लब पर मेरा नाम आएगा! कभी तो मेरी चाहत का पैगाम आएगा! खींच लेगी तुमको कभी यादों की खूशबू, कभी तो तेरी नजरों का सलाम आएगा! मुक्तककार- #महादेव’
अमीर लोगों की अमीरी से बड़े लोगों की बड़लोकी से मुझे नफरत नहीं मुझे नफ़रत है उनके नखरों से और मुझे ये भी मालूम है कि जिन लोगों में है ये नखरे उन्हें ही नफ़रत […]
वर और वधू के लिए जितनी दौड़ दिख रही है उससे ज्यादा तो लड़कों में गर्लफ्रेंड और लड़कियों में बॉयफ्रेंड के लिए आजकल एक दौड़ सी लगी है। माँ–बाप से ज्यादा भाई तो है […]
मिल जायेगी ताबीर मेरे ख्वाबों की एक दिन, या ख्वाब बिखर जायें कुछ कह नहीं सकता। बह जाउं समंदर में तिनके की तरहं या फ़िर, मिल जाये मुझे साहिल कुछ कह नहीं सकता। इस पार […]
ऐ फ़लक ऐ हवा वो नजारा क्या हुआ। हर शाम जो दिखा था वो सितारा क्या हुआ।। , हमसें निभाया न गया क़िरदार जिंदगी का। जब छोड़ दी है दुनिया फिर तमाशा क्या हुआ।। , […]
एक शराब की कहानी है ये एक शराबी की जुबानी है ये पीता है वो सुबह-शाम जी भर के एक शराबी की ईमानदारी है ये सुकून देती है ये बहुत दिल में जाने के बाद […]
अपनी मोहोब्बत की चर्चा मैँ आम न कर दू कही उस बेवफा को मैँ बदनाम न कर दू डरता हू मैँ बस इस मोहोब्बत की रुसवाई से कही मैँ उस बेवफा को सरे आम न […]
हमारे चेहरे की सजावट पर न जाओ दोस्त, हमने छुपा रखे है बहुत गम इस में यूँ ही मुस्कुरा के। Dev Kumar
तेरे वादों के बारे में तू ही जाने मैँ तो बस अपनी वफ़ा को जानता हूँ जिस दिन ये धड़कन दिल की रूठेगी उस दिन ही मेरी वफ़ा टूटेगी। Dev Kumar
तेरे इश्क मे…….तेरे इश्क मे , तेरे इश्क मे बेबस हुए तेरे इश्क मे बेखुद हुए तेरे इश्क मे बेहद हुए दीवाने हम ! तेरे इश्क मे…….तेरे इश्क मे , तेरे इश्क के दरिया मे […]
इक जमानें मे सच है शज़र हुआ था मैं। जानें कितने परिंदों का घर हुआ था मैं।। , अपनी छाह में बच्चों को खेलता देखके। जरूर ही जमाने से बेखबर हुआ था मैं।। , मेरे […]
खामोश नजरों के नजारे बोलते हैं! खामोश लहरों के किनारे बोलते हैं! मुश्किल है कह देना लबों से चाहत को, खामोश कदमों के इशारे बोलते हैं! मुक्तककार- #महादेव'(23)
माना तेरे काफ़िलो में शामिल नहीं हुए। पर ऐसा न था की हम मंजिल नहीं हुए।। , इक उम्र गुजरी यूँ ही ख्वाबो ख्यालों में। कुछ देख न पाएं कुछ हासिल नहीं हुए।। , जिंदगी […]
मैं इक सदी से बैठी हूं, इस मोड़ पर मगर कोई इंसा इधर से गुजरा नहीं
#मां ” वो तपते तवे पे भूक जला रही थी” “मां को चार रोटी की भूक थी, पर वो एक ही खा रही थी” ~शाबीर
कभी राहे-जिन्दगी में बदल न जाना तुम! कभी गैर की बाँहों में मचल न जाना तुम! सूरत बदल रही है हरपल तूफानों की, कभी हुस्न की आँधी में फिसल न जाना तुम! मुक्तककार- #महादेव'(24)
न ये ज़ुबाँ किसी की गुलाम है न मेरी कलम को कोई गुमान है, छुपी रही बहुत अरसे तक पहचान मेरी, आज हवाओं पर नज़र आते मेरे निशान है, जहाँ खो गईं हैं मेरे ख़्वाबों […]
दिन में देखा सपना रात को देखा सपना रात का जब टूटा सपना दिन में जगा हुआ पाया लेकिन दिन का जब टूटा सपना रात में भी सो न पाया। – कुमार […]
माँ के लिया बहुत सुना पढ़ा लिखा है सभी ने। कुछ पंक्तियाँ पापा के नाम। छुटपन से हर रोज पापा मेरे मुझे टहलाने ले जाते रहे, ऊँगली पकड़ कर मेरी मुझे वो रास्ता दिखाते रहे, […]
मोती को धागे से और धागे को मोती से जब तक होता नहीं प्यार तब तक उनकी नहीं बनती कोई विशिष्ट पहचान। मोती=शब्द धागे=विचार – कुमार बन्टी
दिन में देखा सपना रात को देखा सपना रात का जब टूटा सपना दिन में जगा हुआ पाया लेकिन रात का जब टूटा सपना दिन में भी सो न पाया। – कुमार […]
कब तक करोंगे यूँ बेईमानी खुद से। मुझे छोड़कर करोगे,नादानी खुद से।। , हमारी दास्तानों को फरेब कहने वाले। लिख नहीं पाओगें ये,कहानी खुद से। , तन्हाई में मिलें है लोग जो समन्दर किनारे। उनका […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.