जब आई थी सजधज कर तुमसे मिलने लिये हाथों में गुलाब का फूल कोई हसरत थी मन में प्यार की जब कोई कमेंट ना किया तुमने जाने लगी थी भारीमन से गिला लेकर पलटकर देखा […]

कितना भी मैं करना चाहूँ मैं अपने प्यार का इजहार आई लव यू कहकर पर कमबख्त जुबान फिसल जाती है और मुँह से निकल जाता है जयहिंद प्रस्तुति – रीता जयहिंद

चंदा से सीखो तुम घना कोहरा छाया चांद ना घबड़ाया बारिश ने धूम मचाई काली घटा घिर आई बादलों के आगोश में छिपकर रात बिताई जागकर सारी रैना किया सूर्य का इंतजार तनिक ना भरमाया […]

केजू भैया सोच रहे ये मोदी ने तो खाई मलाई अपने हाथ तो फोक भी ना आई केजू भैया इसमें तेरी नहीं कोई बुराई दूसरे की थाली में सबको दिखता खाना ज्यादा अपनी थाली खाली […]

जब से ये नोटबंदी हुई है। सभी पत्नियों की घेराबंदी हुई है छुपे हुये नोटों की पतियों से पत्नियों की चर्चा सरेआम हुई है पत्नियों के राज पर्दाफाश हुये हैं पतियों से सरकार हिसाब मांग […]

अपना बचपन की सत्य गाथा सुंदर सा परिवार हमारा छोटा शहर हाथरस था प्यारा पांच भाई और हम दो थी बहना मात – पिता के हम थे गहना छोटी थी पर बहुत चंचल थी लाड़ […]

मोहब्बत और दुशमनी जो दिल से निभाते है बस वही शख्स दुनिया में जी पाते है दीन – दुखियों की जो सेवा करते हैं बस वही लोग ईश्वर को रिझाते हैं गिरते हुये को जो […]

शादी हो या मौत जन्म हो या जन्म दिन खुशी हो या गम पंडित के होते सब अच्छे दिन परंतु क्या जब हुई नोटबंदी तब कहाँ थी इनकी भविष्यवाणी एक भी ऐसा पंडित बतलाना वरना […]

जब आई थी सजधज कर तुमसे मिलने लिये हाथों में गुलाब का फूल कोई हसरत थी मन में प्यार की जब कोई कमेंट ना किया तुमने जाने लगी थी भारीमन से गिला लेकर पलटकर देखा […]

जिंदगी जिंदगी जिंदगी जिंदगी। बेबसी बेबसी बेबसी बेबसी।। , ख्वाहिशे ख्वाहिशें ख्वाहिशे ख्वाहिशे। कुछ नहीं कुछ नहीं कुछ नहीं कुछ नहीं।। , काफिले काफिले काफिले काफिले। हम नहीं हम नहीं हम नहीं हम नहीं।। , […]

दवा मैं दे दूँ तेरे इस गम का, मेरे गर गम पता बता तो, सितम मानता हूँ बहोत हुए हैं, लेकिन मेरे सितम की खता बता तो, जिद्द ही लिए अब भी बैठे रहोगे, कभी […]

ममता की छाँव तले , समता का भाव लिए, इंसानियत का सभी में, संचार चाहती हूँ, माँ हूँ मैं,हाँ भारत माँ, एकता और सदभाव का, प्रवाह चाहती हूँ । माँ हूँ मैं,हाँ प्रकृति माँ, संरक्षण […]

जिसे हम जीना कहते हैं, वो पल-पल मरना है जानो, निज हित में रत रहना, खाना, सोना , जगना ये, जीना नहीं है मानो । सृष्टि की श्रेष्टतम रचना का, मूल्य तो तुम अॉको, जग […]

इक ज़माना था जब डरता था मैं। जब तेरी गलियों से गुजरता था मैं।। , तुम बेख़बर थे तुमको क्या मालूम। की कैसे ही पल भर में मरता था मैं।। , हालात बदल गए है […]

आपके आ जाने से फिर बहार आ गयी है! हरतरफ तेरी खुशबू खुशगवार आ गयी है! आलम भी वीरान था इरादों का महादेव, मेरी जिन्दगी फिर से एक बार आ गयी है! #महादेव_की_कविताऐं

काश,कश लेते ही धुँआ हो गया जानेमन सोचते ही रह गए किस सोच में जानेमन तुमने तो पल में बोझा फेक दिया उलझनों से सुलह न हुई सुलझे कहा तुम जानेमन काश,कश लेते ही धुँआ […]

कैशलेस होने में हर्ज क्या है? फिर सोचा ये मर्ज क्या है? गौर किया तो कुछ तस्वीर यूँ उभरी। मेरे घर आने वाली वो अनजान वृद्धा , बाला जी से तानपूरा लेआने वालेभक्त। वो कभी […]

॥ बेटी के लिए एक कविता ॥  “अ—परिभाषित सच !” डरते—सहमते—सकुचाते मायके से ससुराल तक की अबाध—अनिवार्य यात्रा करते हुए मैंने; गांठ बांधी पल्लू से साथ में; ढेरों आशंकाएं …………. कई; सीख—सलाइयतें ……………   हिचकियों […]

तेरी आंखें में जैसे कोई नशा दिखाई पड़ता है तेरे होंठ में जैसे कोई मदिरा दिखाई पड़ता है ये तेरा धीरे धीरे पलकों को उठा कर हँसना तेरे मुस्कुराहट में जैसे कोई कतल-ऐ-अंदाज़ दिखाई पड़ता […]

  ये गुलाब थोड़ा तनहा-तनहा सा है ये गुलाब थोड़ा बिखरा-बिखरा सा है छूटा है ये शायद किसी के हाथों से ये गुलाब थोड़ा सहमा-सहमा सा है रहता है काँटों के साथ है कर, खुसी […]

मेरी मौत का तमाशा देखने चले आओ के मैं मर रहा हु मुझे देखने चले आओ कुछ तो मेरे दिल मैं भी अरमान होंगे तुम जानते हो क्या है मेरी आखरी खुवाईश मुझसे पूछने चले […]

उनकी फितरत भी बड़ी कमल की होती थी रोज़ हमको वो भूल जाया करते थे वो, हमारी ज़िद्द भी मगर कमल की होती थी हर रोज़ हम उनको शिद्दत से याद कर लिए करते थे…………………!!

खुद को शराब, और अपनी जवानी को नशा कहते है खुद है वो एक मुर्दा और हमको वो फनाह कहते है हुसन-ऐ-शबाब परोसना एक काम-ऐ-सबाब है उनके लिए इबादत-ऐ-मोहोब्बत को वो एक संगीन गुनाह कहते […]

बस एक यही अदा हमको उसकी भाती नहीं है के बुलाने के बाबजूद भी वो मिलने आती नहीं है, मोहोब्बत है उसको हमसे हम जानते है यूँ तो बस अपने मुँह से वो हमको कभी […]