ममता की छाँव तले , समता का भाव लिए, इंसानियत का सभी में, संचार चाहती हूँ, माँ हूँ मैं,हाँ भारत माँ, एकता और सदभाव का, प्रवाह चाहती हूँ । माँ हूँ मैं,हाँ प्रकृति माँ, संरक्षण […]

जिसे हम जीना कहते हैं, वो पल-पल मरना है जानो, निज हित में रत रहना, खाना, सोना , जगना ये, जीना नहीं है मानो । सृष्टि की श्रेष्टतम रचना का, मूल्य तो तुम अॉको, जग […]

इक ज़माना था जब डरता था मैं। जब तेरी गलियों से गुजरता था मैं।। , तुम बेख़बर थे तुमको क्या मालूम। की कैसे ही पल भर में मरता था मैं।। , हालात बदल गए है […]

आपके आ जाने से फिर बहार आ गयी है! हरतरफ तेरी खुशबू खुशगवार आ गयी है! आलम भी वीरान था इरादों का महादेव, मेरी जिन्दगी फिर से एक बार आ गयी है! #महादेव_की_कविताऐं

काश,कश लेते ही धुँआ हो गया जानेमन सोचते ही रह गए किस सोच में जानेमन तुमने तो पल में बोझा फेक दिया उलझनों से सुलह न हुई सुलझे कहा तुम जानेमन काश,कश लेते ही धुँआ […]

कैशलेस होने में हर्ज क्या है? फिर सोचा ये मर्ज क्या है? गौर किया तो कुछ तस्वीर यूँ उभरी। मेरे घर आने वाली वो अनजान वृद्धा , बाला जी से तानपूरा लेआने वालेभक्त। वो कभी […]

॥ बेटी के लिए एक कविता ॥  “अ—परिभाषित सच !” डरते—सहमते—सकुचाते मायके से ससुराल तक की अबाध—अनिवार्य यात्रा करते हुए मैंने; गांठ बांधी पल्लू से साथ में; ढेरों आशंकाएं …………. कई; सीख—सलाइयतें ……………   हिचकियों […]

तेरी आंखें में जैसे कोई नशा दिखाई पड़ता है तेरे होंठ में जैसे कोई मदिरा दिखाई पड़ता है ये तेरा धीरे धीरे पलकों को उठा कर हँसना तेरे मुस्कुराहट में जैसे कोई कतल-ऐ-अंदाज़ दिखाई पड़ता […]

  ये गुलाब थोड़ा तनहा-तनहा सा है ये गुलाब थोड़ा बिखरा-बिखरा सा है छूटा है ये शायद किसी के हाथों से ये गुलाब थोड़ा सहमा-सहमा सा है रहता है काँटों के साथ है कर, खुसी […]

मेरी मौत का तमाशा देखने चले आओ के मैं मर रहा हु मुझे देखने चले आओ कुछ तो मेरे दिल मैं भी अरमान होंगे तुम जानते हो क्या है मेरी आखरी खुवाईश मुझसे पूछने चले […]

उनकी फितरत भी बड़ी कमल की होती थी रोज़ हमको वो भूल जाया करते थे वो, हमारी ज़िद्द भी मगर कमल की होती थी हर रोज़ हम उनको शिद्दत से याद कर लिए करते थे…………………!!

खुद को शराब, और अपनी जवानी को नशा कहते है खुद है वो एक मुर्दा और हमको वो फनाह कहते है हुसन-ऐ-शबाब परोसना एक काम-ऐ-सबाब है उनके लिए इबादत-ऐ-मोहोब्बत को वो एक संगीन गुनाह कहते […]

बस एक यही अदा हमको उसकी भाती नहीं है के बुलाने के बाबजूद भी वो मिलने आती नहीं है, मोहोब्बत है उसको हमसे हम जानते है यूँ तो बस अपने मुँह से वो हमको कभी […]

बहुत काम शब्दो मैं बया कर दी मैंने अपनी सक्शियत इस से भी काम शब्दो मैं बया करूँगा तेरी बेवफाई को , ज़माना भी जान पाएगा तेरे जैसे हरदर्द के किस्से को ज़माना भी जान […]

तेरे शहर का मौसम मैंने अजीब देखा लोगो का वह पैर एक अलग तहज़ीब देखा, खरीद सके न मुझ से इंसा को वो एक कौड़ी-ऐ-खुसी देकर तेरे शहर के लोगो को मैंने बहुत गरीब देखा, […]

तड़प कर देख एक बार ज़ालिम कभी खुद को किसी पैर फनाह भी कर, सजा भी बाखूबी मिलेगी तुझ को चाहत मे बशर्त है की तू मोहोब्बत करने का गुनाह तो कर……………!!

दर्द जब उसको होगा, तब तड़प का उसको भी एहसास होगा, जब ठुकराएगा कोई उसको, तब उसको हमारी मोहोब्बत का विश्वास होगा, न था हमारी ज़िन्दगी मैं कोई उसके अलावा, न उसके अलावा ज़िन्दगी मैं […]

अपनी पहचान को मैं सर-ऐ-आम कैसे करू अपनी चाहत को मैं गुमनाम कैसे करू उसने नहीं की बफ मेरे साथ ये और बात है भला मैं इस मोहोब्बत शब्द को बदनाम कैसे करू…………………!!

सुना है वो फिर से हमें चाहने लगे है आँखों से आंसू बहाने लगे है झेल रहे है वो भी शिकस्त-ऐ-पछतावा सुबह-ओ-शाम हमको बुलाने लगे है……………………………..!!

जान निकल गई जिस्म से मगर, मोहोब्बत का अरमान न मिटा, रूठ गई मोहोब्बत मगर, दिल का ईमान न मिटा, टूट गया खुवाबगाह चाहत का, और लूट गई हर चाहत मेरी, मिट गई पूरी ज़िन्दगी […]

कुछ तो कमी तुझ मैं भी रही होगी कुछ तो तेरा भी कसूर रहा होगा ऐसे ही मोहोब्बत किसी को नहीं छोड़ती अकेला ऐसे ही कोई मोहोब्बत मैं तन्हा नहीं होता…………………….!!

होते ही सहर मुझको खामोशी घेरती है! तेरे प्यार की मुझको मदहोशी घेरती है! मुमकिन नहीं है रोकना ख्यालों को महादेव, तेरे दर्द की मुझको सरगोशी घेरती है! #महादेव_की_कविताऐं’ (26)

किसी रोज़ सब साथ होंगे मिलेंगे, बैठेंगे, जुमले फरमाएंगे एक कप चाय के साथ फिर भिड़ जायेंगे वही कल जो बीत गया फिर से दोहराएंगे वो बातें जो अधूरी रह गयी उन्हें पूरा करने आएंगे […]

सब कुछ तो छोड़ आया मैं अपना अतीत के पन्नों में सख्शियत मेरी अब इंसान -ऐ -आम रह गई है खुशियों की सुबह न जाने कब से नहीं देखी बस ज़िन्दगी में गमो की शाम […]

मौत ने तोहफा दिया ज़िन्दगी मिल जाए तो सवरती बिखरती कट जाती है रो रो कर गुजरती लम्हे सी हस्ती दिल खोल बोलती सोच कर ये मौत ही देती है ज़िन्दगी देती तोहफे हज़ार इक […]

मुझे जब तेरा रुख़सार याद आता है! वक्त का ख्याले-बेकरार याद आता है! दर्द से बिखरी हुयी सी हसरतें महादेव, मुझे हर पल का इंतजार याद आता है! मुक्तककार- #महादेव’