मेरी ज़िंदगी का मैं ही हिस्सा नहीं था। मुझे भूल जाओ मैं कोई किस्सा नहीं था।। , मुझ पर इलजाम लगाकर के जाने वाला। क्या कहूँ शख्स वो भी मुझ सा नही था।। , क़िस्मत […]

आज भी मैं तेरा इंतजार करता हूँ! शामों-सहर खुद को बेकरार करता हूँ! जी रहा हूँ तन्हा ख्यालों में महादेव, शायद मैं अब भी तुमसे प्यार करता हूँ! मुक्तककार- #महादेव’

॥ नाक का नक़्क़ारखाना ॥ सोचिए जरा ! क्या होता, अगरचे इन्सान की नाक न होती ? सर्वप्रथम तो आधी दुनिया अंधी होती नाक न होती तो भला, चश्मा कहां पिरोती ! नाक न होती […]

तकदीर का क्या, वो कब किसकी सगी हुई है। दुनिया अपने हौसले से ,जमीं हुई है। खुशफहमी ना पाल कि नसीब से सब मिलेगा। कर्म करने से ही ये आसमाँ झूकेगा। लाख लगाओ फेरे ,मन्दिर, […]

वो रोती रही रात भर इसलिये कि सरहद से आई खबर इसलिए। बड़े नाज से उसने पाला जिसे वो आया तिरंगे में घर इसलिए। सुहागन लगी चूड़ियाँ तोडने चलेगी अकेली डगर इसलिए। कोई तो मिलेगा […]

http://pravaaah.blogspot.in/2016/11/blog-post_75.htmlसमाज आज एक छल तंत्र की ओर बढ़ रहा है प्रजातंत्र खत्म हुआ। अराजकता बढ़ रही, बुद्धिजीवी मौन है या चर्चारत हे कृष्ण फिर से गीता सुनाओ कर्तव्य पथ पर हमें चलाओ फिर से कई […]

वक्त बदल गया है मगऱ ख्वाब नहीं बदला! तेरी मस्त अदाओं का शबाब नहीं बदला! चाहत का जुनून अभी जिन्दा है महादेव, तेरी जुल्फों का अभी आदाब नहीं बदला! मुक्तककार- #महादेव’

जिन्हें हम याद करना नहीं चाहते उन्हे ही भुला नहीं पाते जो पल भूल गए हैं उनका अहसास भुला नहीं पाते၊ आँसू जो अब तक बहें नहीं उन्हें सुखा नहीं पाते जो सूख चुके हैं […]

शाखों के हरियाले पत्ते, जो हैं आज पीत हुए, शीत-ग्रीष्म सहते -सहते, बदरंग और अतीत हुए, उन पतझड़ के नीरस , पत्तो में भी था आस कभी, जिन शबनमी अश्को का, नयनो में था आवास […]

देश का सम्मान लेकिन किसी इंसान का नहीं, चाहे बिलखते रहे सब बस अपना मुकाम हो सही, देश-भक्ति की बातें किस्से, कहानियों, नगमो में ही जचे, क्योंकि सब करे कृत्य जिसमें खुद का फायदा हो […]

दरिया को हमेशा समंदर की चाहत है। नर्म लहज़ा नर्म बातें समझों सियासत है। , मेरी जिंदगी की दुआ करने वालों शक्रिया। मुझे तो हर रोज़ मर जाने की आदत है।। , ख़तावार ही सीखा […]

अपनी यादों में बार बार खोने दे मुझे! अपने ख्यालों में बार बार होने दे मुझे! अश्क़ भी बेताब हैं पलकों में महादेव, अपनी चाहत में बार बार रोने दे मुझे! मुक्तककार- महादेव’

दिल टूटने का लिखने से क्या सम्बन्ध है, ठोष हृदए को विचार आने में क्या कोई प्रतिबंध है, जीवंत हुँ तो रखता हुँ अपना मंतव्य हर कहीं, इंसान बनने की राह पे बात करता हुँ […]

जब तेरे शहर की गलियों से गुजरता हूँ, तेरी बेवफाई तेरी जफा को याद करता हूँ l     क्या खूब की थी तूने बेवफाई मेरे साथ, आज तेरे हर ख्वाब से भी डरता हूँ […]

हो कर दूर तुमसे मैं जाऊंगा कहाँ? तेरे बिना मंजिल को पाऊंगा कहाँ? दर्द चुभ रहें हैं साँसों में महादेव, अश्कों को दामन में छुपाऊंगा कहाँ? मुक्तककार- #महादेव’ (मात्रा भार 22)

शमा ने परवाने की क्यों राख मांग दी, जलते हुए परवाने ने भी फिर आग लांघ दी, ये देखते हुए सिख लो अब तुम भी एक सबक, सिर्फ शमा के विश्वास को परवाने ने जान […]

जिंदगी जिंदगी जिंदगी जिंदगी। बेबसी बेबसी बेबसी बेबसी।। , ख्वाहिशे ख्वाहिशें ख्वाहिशे ख्वाहिशे। कुछ नहीं कुछ नहीं कुछ नहीं कुछ नहीं।। , काफिले काफिले काफिले काफिले। हम नहीं हम नहीं हम नहीं हम नहीं।। , […]

इक दास्ताँ अधूरी तुमको सुनायें कैसे। गिरती हुई दीवारे फिर से उठाए कैसे।। , जैसे पढ़ी थी दुनिया वैसी नहीं हक़ीक़त। सच जो है मैंने जाना खुद को बताएँ कैसे।। , हर हर्फ़ में हमारी […]