Category: हिन्दी-उर्दू कविता
सैकड़ों आंसू …. , यूं ही नहीं …. खज़ाने में मेरे , जब भी कोई रोता है , उसके आंसू बटोर लाता हूं . किसके हैं … , कब गिरे थे … वज़ह …… बता […]
कल अनायास मिला राह में दीन – हीन ; कातर याचक—सा खड़ा : सच उसने आवाज़ लगाई — “ मुझे रास्ता बताओ ….. भाई ! “ सच एक सुगंध की तरह फैलता है : ज़ेहन […]
ღღ__बाकी हैं चन्द साँसें अब, बेज़ार से दिसम्बर की; . एक नए दिन की तलाश में, पूरा साल ही जा रहा है !!…….#अक्स
तालीम नहीं मिली कभी, ना इल्म था हमें कभी बस इक तसव्वुर था, जो ज़हन मे घुल गया कभी शिरकत किया करते थे, हम महफिल ए इश्क में अब तो दिल ही हमारा महफिलों ढल […]
ღღ__माफ़ करना पर आज, कोई शायरी नहीं है “साहब”; . कि रिश्तों की ठंड में, लफ्ज़ भी जम गये मेरे !!……..#अक्स
pyaar sirf ek alfaaz hai humare liye… jiski na koi surat hai, na hi koi murat hai… par aapke alfaazon se andaaza lgate hai, jo bhi ho, par shaayad pyaar bhot hi khoobsurat hai….
ღღ__मेरे गुनाह-ए-इश्क़ का, कोई फैसला तो सुना दो “साहब” . इस दिल को समझाने में, कुछ वक़्त भी तो लगता है!!…..#अक्स
chal pdii hu aise ek raste pr, jiski manzil ka na koi pta hai…. khushiyaan dene ki koshish ki maine bhot, yahi meri sabse bdii khta hai…. meri talaash mein mat nikalna yaaron, dhund na […]
dil-o-jaan se chahte hain hum tumhein… hakiqut mein milna shaayad ab naseeb mein nahi… isliye jaldi palko ka milan aankhon se kra dete hai… kyonki khwaabon k zariye hi tumse milna, ab pasand hain humein…
थे क़रीब इक दूजे के …. लेकिन फिर भी दरम्यां हमारे , दुरी रह गयी …. इबादत करते हुए , इक भी दर ना छोड़ा ख़ुदा का … फिर भी कोई मज़बूरी रह गयी.. कह […]
आज मेरे आंगन में आफ़ताब आया है सर्द दिन में लगता है ख्वाब आया है नये नये रंगो में नहाया हुआ जिंदगी का नया पैगाम आया है
मोहब्त का ले सहारा उन्हें पाने की सोची….. ख़ुद ही बे – सहारा हो गए ….. जिनका अक्श कभी ओझल ना हुआ , नजरों से …. वही आज इक धुंधला नजारा हो गए …. […]
चलो आज बात करे गुज़रे जमाने की मैंने जरूरत समझी आप सबको बताने की ….. संग उसके मुस्कुराकर समझते थे क्या बेनज़ीर रौनक है मेरे काशाने की …. इक मरतबा भुला ही दिया […]
ღღ__जो तुम कर रहे हो “साहब”, सितम की इन्तहा नहीं तो क्या है; . कि दूर भी जा रहे हो मुझसे, वो भी ज़रा-ज़रा कर के !!………#अक्स
समझने को दुनिया ने क्या क्या हमें समझा जो न समझना था, लोगो ने वही समझा देख के दुनिया की समझदारी, हम यही समझे जो न कुछ समझा यहां, वही सब कुछ समझा|
क़ायनात ने क्या ख़ूब साज सजाया हैं …. जिंदगी के बे- रंग रंगो ने क्या रंग दिखाया हैं…. ज़रा नज़रे उठा देख ए – फ़लक , मेरी और …. मिलने मुझ से ” चाँद ” […]
लफ्ज है ये या बेबस दिल है मेरा धड़कन जिसकी किसी को सुनाई नहीं देती… अनु
कोई नहीं जानता ख्वाहिशें मेरी अनजान है सब मेरे ख्वाबों से मेरे अश्कों को पानी समझती है दुनिया किनारे रहते है लोग मेरी मझंधारों से
ღღ__भला और क्या दूँ तुझको, सुबूत अपनी वफ़ा का मैं; . कि ख़ुद का भी ना हुआ हूँ, जबसे तेरा हुआ हूँ मैं !!…….#अक्स
वो पूछते है हमसे कि आजकल हम क्या करते है क्या बताएं कि उनके इंतजार में किस कदर मरते है अपने अहसास, अपनी आरजू दिल में दबाए रखे है वो कहते है कि आजकल हम […]
महफ़िल – ए – यारोँ में , थोड़ा अलग दिखा देते हैँ ….. मुझे , मेरे अल्फ़ाज …… फितरत बता देते हैं , मेरी …. मेरे अल्फ़ाज ….. मैं इंसान हूँ तो जायज़ हैं , […]
ღღ__शायद ये आँखें मूँद लेने का, सही वक़्त है “साहब”; . कि रोज़ ख्वाहिशों का मरना, हमसे अब देखा नहीं जाता !!……#अक्स . www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/
ये सर्दियों का मौसम, और ये तन्हाईयों का आलम; . कहीं जान ही ना ले-ले, इनसे मिलके बेबसी मेरी !!……#अक्स . www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/
दिल खोया हुआ है अलसाई बादियों में ख्वाबों को भी नींद लग गयी है सर्दी की इस अलसाई आदतों ने जिंदगी जैसे रुक सी गयी है
तलब ऐसी उठी दिल से….. की उन्हीं के तलबगार हो गए…. जमाने की जुबां पर …. किस्से हमारी मुलाकातों के बार – बार हो गए…. पता कर चुके थे , हैँ उनकी तरकश में इक […]
आंधी की आग में जला था एक घर, हँसी थी गई, खिलौने थे टूटे, छूटा था एक बचपन ! घर था टुटा, आदर्श था छूटा , चल रही थी सासे, दम था घुटा, दिखावटी […]
ღღ__इस कदर भी याद, ना आया करो “साहब”; . मेरी खुशियों की नींद में, खलल पड़ता है !!…….#अक्स . www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/
kya bataye kese din maan chalte h mere.. bahut hi kharab haalat par har pal machalte h mere. mein jhuti hasi hasu toh bhi mera hi kasoor… ke dusman to dusman dost bhi jalte h […]
vishvas na krna tum muj par glti se toot jane ka darr h muje.. mera na hona tum kbhi par tere chuut jane ka darr h muje.. yu to kbhi m drii nhi zindgi me […]
थोड़ा रंज में , थोड़ी ख़ुशी में , साल ये बीता …. ख़ुद की मोहब्त को हारा , लेकिन फिर भी जीता …… मुसलसल हैं आज भी यादों का कारवाँ …. थोड़ा तन्हा , […]
jane kya baat hogi aaj din bhar me khusi c baith gyi h seene me lbon se muskurahat hatt nhi rhi kosis kitni krega jmana bhaf ne jane kya baat h aaj subh bhar me.. […]
jane kya baat h aaj din bhar me khusi c baith gyi h seene me lbon se muskurahat hatt nhi rhi kosis kitni ki jmane bhar ne jane kya baat h aaj din bhar me
ღღ___तुझको पाने की कोशिश भी, तू जो कह दे तो ना करूँ; . पर पाने की आरजू रखना, तो कोई गुनाह नहीं !!………#अक्स
Jb mile the tumse, to socha tumhe kbhi khone nahi deinge…. Dheere dheere Jana tumhe, fir soch Nek Ho tu…. Jb dekha guroor tumhara, to faisla kiya tujh jaise ko kbhi jindgi me aane nhi […]
ღღ__कुछ इस तरह से लिक्खा है, उस ख़ुदा ने मेरा नसीब; . कि मैं तो सबका हो जाऊंगा “साहब”, कोई मेरा नहीं होगा !!…….#अक्स
साँसे चल रही हैँ , बिन उसके.. आने वाला , जीने में मज़ा क्या… चाह लिया उसे , उसकी इजाज़त के बगैर ….. इसमें किया गुनाह क्या …. मोहब्त हैं उनसे , तभी मांगती हैं […]
थोड़ा मायूस हूँ , थोड़ा तन्हा हूँ .. कोई राह – ए – ख़ुशी बता दो…. ख़ुद की ख़ामोशी देख , ख़ामोश क़ायनात भी दिख रही हैँ ….. कोई मुस्कुराना सीखा दो …. बे – […]
सांसे चलती है अभी मगर धड़कने कुछ थम सी गयी है जिंदा हूं किसी इंतजार में इक ख्वाहिश है जिंदा अभी तक वरना मैं तो कब की मर गयी हूं
मोहब्बत से नफरत तक आने में, वक़्त तो लगता है; जागती आँखों को सुलाने में वक़्त तो लगता है!! . इतनी जल्दी कहाँ से सीखा, तुमने रक़ीबों-सा हुनर; अपने महबूब को रुलाने में, वक़्त तो […]
चुनौती ज़िन्दगी का, कहता हैं, हूँ मैं हर मोड पर, लेकिन हम भी कुछ कम नहीं, इन्हीं चुनौतियों के सात जीना सीख लिया हैं, की कभी कबार लगता हैं की इनके बिना ज़िन्दगी अधूरी हैं. […]
सुनती आ रही हूं बातें दुनिया की बातों में पता नहीं अपनापन कहीं खो जाता है करती हैं बातें दुनिया जमाने भर की मगर खुद को बयां नहीं कर पाता है
रुका रुका सा लगता है वक्त जब से वो गये है सब थम सा गया है बहते थे अश्क आंखो से अब लगता है वो भी जम से गये है
कफ़स दिल में कुछ जज़्बात .. आबो संग बीता जाता हूँ , ” मैँ “….. पुष्प हूँ , खिलनें के लिए बना हूँ …. फ़िर भी ना जाने क्यों , मुरझा जाता हूँ , […]
Kash ansu b khin bikte hote “Jnab” To ek do mehlo k nwab hum b hote aaj.
teri aadat muje is kadar lgi “jnab” meri khamosi b baate krne lgi..
ज़रा इक निग़ाह डाल देखों सावन पर ” पंकजोम ” प्रेम ” ” …. ख़ामोश अल्फ़ाज़ मेरे ,सबसे बतियाते बतियाते दिखेंगे ….. पंकजोम ” प्रेम “
उसने कहा बहुत अमीर हूँ ” मैं ” , दिल से…. लेकिन चाहत का इक भी टका , वो मुझ पर खर्च ना कर सकी..
सूरत तो उसकी देखी, पर सीरत नहीं देखी; ღღ_है मेरी खता ये, कि मैं आदमी-सा था ! . ღღ_वक़्त के साथ उनके, बदला किये ख्याल; इन हालात में बिछडना, तो लाज़मी-सा था!!……#अक्स
अपनी पूरी कमाई तूने मय पर लूटा दी….. ए – ग़ालिब…. जरा मुझे ये बता… उस दो घूंट में , जिंदगी जीने का स्वाद कितना है…. पंकजोम ” प्रेम “