सैकड़ों आंसू …. , यूं ही नहीं …. खज़ाने में मेरे , जब भी कोई रोता है , उसके आंसू बटोर लाता हूं . किसके हैं … , कब गिरे थे … वज़ह …… बता […]

कल अनायास मिला राह में दीन – हीन ; कातर याचक—सा खड़ा : सच उसने आवाज़ लगाई — “ मुझे रास्ता बताओ ….. भाई ! “ सच एक सुगंध की तरह फैलता है : ज़ेहन […]

थे क़रीब इक दूजे के …. लेकिन फिर भी दरम्यां हमारे , दुरी रह गयी …. इबादत करते हुए , इक भी दर ना छोड़ा ख़ुदा का … फिर भी कोई मज़बूरी रह गयी.. कह […]

मोहब्त का ले सहारा उन्हें पाने की सोची….. ख़ुद ही बे – सहारा हो गए …..   जिनका अक्श कभी ओझल ना हुआ , नजरों से …. वही आज इक धुंधला नजारा हो गए …. […]

चलो आज बात करे गुज़रे जमाने की मैंने जरूरत समझी आप सबको बताने की …..   संग उसके मुस्कुराकर समझते थे क्या बेनज़ीर रौनक है मेरे काशाने की ….   इक मरतबा भुला ही दिया […]

क़ायनात ने क्या ख़ूब साज सजाया हैं …. जिंदगी के बे- रंग रंगो ने क्या रंग दिखाया हैं…. ज़रा नज़रे उठा देख ए – फ़लक , मेरी और …. मिलने मुझ से ” चाँद ” […]

वो पूछते है हमसे कि आजकल हम क्या करते है क्या बताएं कि उनके इंतजार में किस कदर मरते है अपने अहसास, अपनी आरजू दिल में दबाए रखे है वो कहते है कि आजकल हम […]

महफ़िल – ए – यारोँ में , थोड़ा अलग दिखा देते हैँ ….. मुझे , मेरे अल्फ़ाज …… फितरत बता देते हैं , मेरी …. मेरे अल्फ़ाज ….. मैं इंसान हूँ तो जायज़ हैं , […]

ღღ__शायद ये आँखें मूँद लेने का, सही वक़्त है “साहब”; . कि रोज़ ख्वाहिशों का मरना, हमसे अब देखा नहीं जाता !!……‪#‎अक्स‬ . www.facebook.com/अन्दाज़-ए-बयाँ-with-AkS-Bhadouria-256545234487108/

तलब ऐसी उठी दिल से….. की उन्हीं के तलबगार हो गए…. जमाने की जुबां पर …. किस्से हमारी मुलाकातों के बार – बार हो गए…. पता कर चुके थे , हैँ उनकी तरकश में इक […]

थोड़ा रंज में , थोड़ी ख़ुशी में , साल ये बीता …. ख़ुद की मोहब्त को हारा , लेकिन फिर भी जीता ……   मुसलसल हैं आज भी यादों का कारवाँ …. थोड़ा तन्हा , […]

साँसे चल रही हैँ , बिन उसके.. आने वाला ,  जीने में मज़ा क्या… चाह लिया उसे , उसकी इजाज़त के बगैर ….. इसमें किया गुनाह क्या …. मोहब्त हैं उनसे , तभी मांगती हैं […]

थोड़ा मायूस हूँ , थोड़ा तन्हा हूँ .. कोई राह – ए – ख़ुशी बता दो…. ख़ुद की ख़ामोशी देख , ख़ामोश क़ायनात भी दिख रही हैँ ….. कोई मुस्कुराना सीखा दो …. बे – […]

सांसे चलती है अभी मगर धड़कने कुछ थम सी गयी है जिंदा हूं किसी इंतजार में इक ख्वाहिश है जिंदा अभी तक वरना मैं तो कब की मर गयी हूं

मोहब्बत से नफरत तक आने में, वक़्त तो लगता है; जागती आँखों को सुलाने में वक़्त तो लगता है!! . इतनी जल्दी कहाँ से सीखा, तुमने रक़ीबों-सा हुनर; अपने महबूब को रुलाने में, वक़्त तो […]

चुनौती ज़िन्दगी का, कहता हैं, हूँ मैं हर मोड पर, लेकिन हम भी कुछ कम नहीं, इन्हीं चुनौतियों के सात जीना सीख लिया हैं, की कभी कबार लगता हैं की इनके बिना ज़िन्दगी अधूरी हैं. […]

कफ़स दिल में कुछ जज़्बात .. आबो संग बीता जाता हूँ ,  ” मैँ “….. पुष्प हूँ , खिलनें के लिए बना हूँ ….   फ़िर भी ना जाने क्यों , मुरझा जाता हूँ , […]

सूरत तो उसकी देखी, पर सीरत नहीं देखी; ღღ_है मेरी खता ये, कि मैं आदमी-सा था ! . ღღ_वक़्त के साथ उनके, बदला किये ख्याल; इन हालात में बिछडना, तो लाज़मी-सा था!!……‪#‎अक्स

अपनी पूरी कमाई तूने मय पर लूटा दी…..   ए  – ग़ालिब…. जरा मुझे ये बता… उस दो घूंट में , जिंदगी जीने का स्वाद कितना है….   पंकजोम ” प्रेम “