वर्ष कलैंडर शाल हैं बदले ! किंतु न अपने हाल हैं बदले !! नये साल का शोर करो मत ! पेड़ों ने बस छाल हैं बदले !! थोड़ा चतुर हुई क्या मछली ! मछुवारों ने […]

वह भिखारी मलिन मटमैला फटा पट पहने था वह पथवासी नमित निगाहे नित पथ पर नयनों से नीर निकलता विदीर्ण करता ह्रदय अपने भाग्य पर कांपते हाथों में कटोरा स्कंध पर उसके परिवार का बोझ […]

सितम पे सितम तुम ढाते रहे अफ़साने मगर महोब्बत के बनते रहे लफ़्जों में कहां बयां होती है कहानी मेरी कर सको गर महसूस तो जानो किस कदर हम दरिया ए आग में जलते रहे… […]

निकल जाते है उन रास्तों पर जिनकी कोई मंजिल नहीं अंधेरे होते है जिन राहों में मगर कोई अंजुमन नहीं होते है कांटे, कंकड़ फूलों का बागान नहीं बस इक साथी की तलाश होती है […]

सोचता हूं कभी कभी क्यों हो जाते है शुष्क जम जाते है क्यों रिश्ते बर्फ़ की तरह लेकिन तभी लुड़क पडते है गर्म गर्म आंसू नर्म रुखसारों पर पिघल जाती है सारी बर्फ़ रिश्तों की […]

चाहे कितनी नफ़रत कर लो हमसे तेरे दिल को अपना बनाकर रहेगें बहुत रो चुकी है आंखे हमारी तेरी आंखों से आंसू हम गिराकर रहेंगे चाहे कितनी भी अंधेरी हो जिंदगी की रातें शम्मां महोब्बत […]

मौत करती है नए रोज़ बहाने कितने ए – अप्सरा ये देख यहाँ तेरे दीवाने कितने   मुलाक़ात का इक भी पल नसीब ना हुआ कोई मुझ से पूछे बदले आशियाने कितने   तेरे इंतजार […]

कुछ अश्कों की महफिल जमी और वो याद आये रुखसार कुछ नम से हुए और वो याद आये एक जमाने की मोहब्बत वो चंद लम्हो में भुला बैठे हम भूलकर भी उन्हे भूला ना पाये […]

सूनी सूनी रातों में कभी कोई दस्तक दे जाता है मेरे दिल के दरवाजे पर… कभी कोईे चेहरा नहीं दिखता बस आहट होती है हल्की सी और कुछ कदमों की आवाज जो मचा देती है […]

ღღ__आगाज़ तो इस बरस का, लाजवाब हुआ है “साहब”; . बस यही अन्दाज़, मेरे अन्जाम तक बनाये रखना !!……#अक्स . समस्त मित्रों एवं शुभचिंतकों को नूतन वर्ष २९१६ की हार्दिक शुभकामनाएँ !!

रह – रह कर ज़ेहन में बस यही ख्याल आ रहा हैं मुझे तनिक बदलने दो , नया साल आ रहा हैं …..   बेचैन धड़कन हो गयी है शायद संग अपने ख़ुशियां बे-मिसाल ला […]

उन्नति को लगी रहे आप से मिलने की लगन …. इस नववर्ष , आपके यहाँ हो खुशियों का आगमन …. सिलसिलेवार रहे चेहरे पर  रौनक – ए – मुस्कराहट ….. रब की रहमत से  सदा […]

व्यंग्य गीत ———– अनुपम त्रिपाठी ” किस्सा–कुर्सी — का ” बचपन में किस्सों में कुर्सियों की बातें सुनते थे।आजकल कुर्सियों के किस्से आम हैं । लेकिन ये कुर्सियाँ मिलती कैसे हैं ? इस लोकतंत्र की […]

(हर पति की ओर से अपनी पत्नी के प्रति शाश्वत भावना एवं हर पत्नी की अपने पति के प्रति सारस्वत भावना को समर्पित् हास्य — रचना ) आखिरकार ईश्वर ने हमारी सुन ही ली आज सुबह-सबेरे ही […]

गुस्ताखी माफ़ ! बच्चों के प्रश्न भी अज़ीब होते हैं ! मगर ; सच्चाई के कितने क़रीब होते हैं !! कल ही आधुनिक–भारत का सच पढ़ते हुए , प्रत्यक्ष – से , परोक्ष – रूप […]

  सच्चा मित्र —— होता है : संघरित्र ! आपसे जुड़कर—आपका विषाद बाँटता है आपकी ऊष्मा आत्मसात् करता है ……….. आपको ऊर्जा से भरता है. सच्चे मित्र के मुँह पर ; ऊगते हैं : बबूल […]