कभी वो कुछ कहते है, कभी हम कुछ कहते है हमारे रिश्ते चंद लफ़्जों में अक्सर महफ़ूज रहते है
कभी वो कुछ कहते है, कभी हम कुछ कहते है हमारे रिश्ते चंद लफ़्जों में अक्सर महफ़ूज रहते है
ღღ___मैं हँस रहा था जिस लम्हे में, बस अभी-2 तो गुज़रा है; . और लोगों से सुना है, गुज़रा हुआ वापस नहीं आता !!……#अक्स . .
hum pagal hi to the janaab, jo unhe apna samjhne ki bhool kar gaye….. wo humhein begaana keh kr chale gaye huzoor, anchaha dard diya humein, magar ye kya! hum to use bhi khushi khushi […]
कितनी बातें अनकही रह जाती है कितने लम्हे बिना जीए ही बीत जाते है सोचते सोचते दिन महीने साल धीरे धीरे सब गुजर जाते है
ღღ__तुमने रोका है इनको “साहब”, या हम भूलने लगे हैं अब; . कि अब ख्याल भी तेरे, हमसे मिलने नहीं आते !!………#अक्स
कुछ लोग कह रहे हैं ज़माना बदल गया ! नज़रें बदल गई हैं निशाना बदल गया !! मुद्दत की अपनी लाश है पहचानिए ज़रा ! केवल कफ़न नया है पुराना बदल गया !! आर्य हरीश […]
वर्ष कलैंडर शाल हैं बदले ! किंतु न अपने हाल हैं बदले !! नये साल का शोर करो मत ! पेड़ों ने बस छाल हैं बदले !! थोड़ा चतुर हुई क्या मछली ! मछुवारों ने […]
Shahaadatt ki Lekhni se ——— likhi gyi Aazadi ki daastaan Yaad rahega un veer sapooto ka balidaan katra– katra khoon se seenchee mitti Hindustan ki badhte gye aage hrrdm— parwaah kiye binaa Jaan ki zarrra– […]
ღღ___कुछ इस तरह से आकर, गम लिपट रहे हैं मुझसे; . कि जैसे हर एक दरिया, समन्दर से जाके मिलता है!!……#अक्स
!!!! SAGAR KE DIL SE !!!! EK dil hi tau tha Jisse samaj na paaya koi Ek ehsaas hi tau tha Jisse mahsoos na kar paaya koi Ek insaan hi tau tha Jisse apnaa na […]
वह भिखारी मलिन मटमैला फटा पट पहने था वह पथवासी नमित निगाहे नित पथ पर नयनों से नीर निकलता विदीर्ण करता ह्रदय अपने भाग्य पर कांपते हाथों में कटोरा स्कंध पर उसके परिवार का बोझ […]
मेरी सांसो में तू महकता हैँ क़ायनात – ए – ग़ैरों में तू ही अपना लगता हैँ 1 . होंठों की ख़ामोशी समझा ना सके नैनों में इश्क़ मेरा झलकता हैँ ( 2 […]
सितम पे सितम तुम ढाते रहे अफ़साने मगर महोब्बत के बनते रहे लफ़्जों में कहां बयां होती है कहानी मेरी कर सको गर महसूस तो जानो किस कदर हम दरिया ए आग में जलते रहे… […]
सर्द रातों का सितम कौन सहे इस हाल में तनहा कोई कैसे रहे तेरे नाम की चादर लपेटे लपेटे रात सारी बस कटती रहे
निकल जाते है उन रास्तों पर जिनकी कोई मंजिल नहीं अंधेरे होते है जिन राहों में मगर कोई अंजुमन नहीं होते है कांटे, कंकड़ फूलों का बागान नहीं बस इक साथी की तलाश होती है […]
ღღ__ज़रा देखो तो निकल के “साहब”, अब तक वो आए क्यूँ नहीं; . कहीं ऐसा तो नहीं रस्तों नें, उन्हें गुमराह कर दिया !!……..#अक्स
सोचता हूं कभी कभी क्यों हो जाते है शुष्क जम जाते है क्यों रिश्ते बर्फ़ की तरह लेकिन तभी लुड़क पडते है गर्म गर्म आंसू नर्म रुखसारों पर पिघल जाती है सारी बर्फ़ रिश्तों की […]
ना मेरे हाथों में था लहू , ना लगी थी मेहेंदी उसके हाथों में , ना जाने क्यों फिर भी रंग था गहरा || ना वो अकेली थी ना मै अकेला था , था […]
चाहे कितनी नफ़रत कर लो हमसे तेरे दिल को अपना बनाकर रहेगें बहुत रो चुकी है आंखे हमारी तेरी आंखों से आंसू हम गिराकर रहेंगे चाहे कितनी भी अंधेरी हो जिंदगी की रातें शम्मां महोब्बत […]
वो जो गुजर गये यूं मुंह फ़ेरकर उतरा उतरा रहता है तब से मुंह मेरा कयामत थी या क्या थी वो मिलकर उससे मजरूह हो गया दिल मेरा.. [मजरूह – जख्मी]
मौत करती है नए रोज़ बहाने कितने ए – अप्सरा ये देख यहाँ तेरे दीवाने कितने मुलाक़ात का इक भी पल नसीब ना हुआ कोई मुझ से पूछे बदले आशियाने कितने तेरे इंतजार […]
ღღ__अक्सर भीग उठती हैं “साहब”, पलकें तेरी नज़र-अन्दाज़ी से; . निगाह-ए-इश्क़ पे कोई फ़र्क, ज़माने का नहीं पड़ता !!………#अक्स
कुछ अश्कों की महफिल जमी और वो याद आये रुखसार कुछ नम से हुए और वो याद आये एक जमाने की मोहब्बत वो चंद लम्हो में भुला बैठे हम भूलकर भी उन्हे भूला ना पाये […]
सूनी सूनी रातों में कभी कोई दस्तक दे जाता है मेरे दिल के दरवाजे पर… कभी कोईे चेहरा नहीं दिखता बस आहट होती है हल्की सी और कुछ कदमों की आवाज जो मचा देती है […]
der raat jagne ki aadat hui h kya muje fir mohabbat hui h. has leti hu likhte likhte khamosh hoti hu kehte kehte. dil ne fir gustakhi ki h kya muje fir mohabbat hui h.. […]
!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!! Dhaffan ho gaya ik rishta Bahut dard samete hue Bina kisi awaaz kisi kraah ke na tum samaj paaye na main @@ SAGAR @@ 4/1/16 :: 9:33 PM .
dukh mere dekh kr, ab khushiyan bhi jholi mein aane lagi…. khaamoshi k baad, main fir se gungunaane lagi…. or dekh kr saahas mera, zindgi meri fir se khilkhilaane lagi…. asar itna h ‘huzoor’ ki, […]
hum intezaar mein baithe rahe unke… magar unki parchaayi bhi na pahuch saki mujh tak, na ja wo raste se bhatkk gaye…. yaa mujh se humesha k liye bichad gaye….
ღღ__ना जाने कैसे तुझको, “बे-हद” चाह बैठा “साहब”; . ये दिल जो अक्सर मुझको, मेरी “हद” बताता था !!………#अक्स
!!!!! AAJ KA SAGAR VICHAAR !!!!! Paisa……Payar…….aur Pratishta ye aap jabardasti nahi paa sakte aapke bhagya main hai tau milega no matter weather u deserve it or not JO MILA HAI ..USSI MAIN KHUSH RAHO […]
ღღ__नज़रों को इंतज़ार की, सजाएँ इतनी भी ना दो “साहब”; . ये बारिशें बिन मौसम की, हमसे अब देखी नहीं जाती !!…….#अक्स
wo kehte hai, ‘Tere har dard ka mujhe ehsaas hai’….. or hum puchte hai, ‘Aisa bhi isme kya khaas hai’… kya dil humare, sach mein itne paas hai!!!…..
haar k baad, jeet aati hai… or raat k baad, subh ho jaati hai… jab khyaal aata hai tumse bichadne ka dil mein, to shaayad kisi ki jaan nikal jaati hai… isi tarah! zindgi k […]
zindgi junoon hai, dil mein ek sukoon hai… manzil bhot door hai, magar rasta haseen hai… chalo ab ise bhi aazma lete hai, kismat ka mazaa thoda chakh lete hai… kyonki kal kisne dekha hai… […]
!!!! DIL KI BAAT !!!! Har takleef ko bhul jaa Har gam ko bhul jaa Gar ho sake tau Har ranj ko bhul jaa Naya suraj… Nayi urrza Nayi shakti…Naya wiswaas Lekar chal nayi disha […]
ღღ__आगाज़ तो इस बरस का, लाजवाब हुआ है “साहब”; . बस यही अन्दाज़, मेरे अन्जाम तक बनाये रखना !!……#अक्स . समस्त मित्रों एवं शुभचिंतकों को नूतन वर्ष २९१६ की हार्दिक शुभकामनाएँ !!
होते है वो दिन ख़ास जब ना कुछ खाते है ना पीते है पानी, बस किसी अपने अपने की याद में आँखों से बहता है नमक का पानी || होते है वो दिन ख़ास जब […]
रह – रह कर ज़ेहन में बस यही ख्याल आ रहा हैं मुझे तनिक बदलने दो , नया साल आ रहा हैं ….. बेचैन धड़कन हो गयी है शायद संग अपने ख़ुशियां बे-मिसाल ला […]
उन्नति को लगी रहे आप से मिलने की लगन …. इस नववर्ष , आपके यहाँ हो खुशियों का आगमन …. सिलसिलेवार रहे चेहरे पर रौनक – ए – मुस्कराहट ….. रब की रहमत से सदा […]
ღღ__दूर आप जा रहे हो ‘साहब’, या फिर ये दिसम्बर; . कोई भी दूर जाये हमसे, ये देखा नहीं जाता !!…….#अक्स
लड़ती रही जिंदगी से खुशियों के लिए झगड़ती रही खुद से अपनों के लिए उम्मीद थी इक सच्चे प्यार की इस झूठी दुनिया में आंखे बंद करने की ख्वाहिश है सपनों के लिए
!!!!! SAGAR KE DIL SE !!!!! apno ne hi loot liya yarro shikayat karte bhi tau kis se apno ne hi zakham diye yaaro marham lagwate bhi tau kis se chor kar aaye apne hi […]
व्यंग्य गीत ———– अनुपम त्रिपाठी ” किस्सा–कुर्सी — का ” बचपन में किस्सों में कुर्सियों की बातें सुनते थे।आजकल कुर्सियों के किस्से आम हैं । लेकिन ये कुर्सियाँ मिलती कैसे हैं ? इस लोकतंत्र की […]
(हर पति की ओर से अपनी पत्नी के प्रति शाश्वत भावना एवं हर पत्नी की अपने पति के प्रति सारस्वत भावना को समर्पित् हास्य — रचना ) आखिरकार ईश्वर ने हमारी सुन ही ली आज सुबह-सबेरे ही […]
गुस्ताखी माफ़ ! बच्चों के प्रश्न भी अज़ीब होते हैं ! मगर ; सच्चाई के कितने क़रीब होते हैं !! कल ही आधुनिक–भारत का सच पढ़ते हुए , प्रत्यक्ष – से , परोक्ष – रूप […]
सच्चा मित्र —— होता है : संघरित्र ! आपसे जुड़कर—आपका विषाद बाँटता है आपकी ऊष्मा आत्मसात् करता है ……….. आपको ऊर्जा से भरता है. सच्चे मित्र के मुँह पर ; ऊगते हैं : बबूल […]
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