धुंधले–धुंधले कोहरे में छिपती रवि से दूर भागती एक‘रश्मि’ अचानक टकरा गयी मुझसे आलोक फैल गया भव में ऐसे उग गये हो सैकडो रवि नभ मे जैसे सतरंगी रश्मियों से नभ सतरंगा सा हो गया […]
धुंधले–धुंधले कोहरे में छिपती रवि से दूर भागती एक‘रश्मि’ अचानक टकरा गयी मुझसे आलोक फैल गया भव में ऐसे उग गये हो सैकडो रवि नभ मे जैसे सतरंगी रश्मियों से नभ सतरंगा सा हो गया […]
काश! मेरे चाहने भर से मेरे पास वो होता । खुद से जाग कर के वो मुझी में सो गया होता । दौलतें सारे जहाँ की मैं लुटा देता उसी पर गर, ज़रा सा मुस्करा […]
आख़िरकार थक कर जिन्दगी मुझसे बोल ही पड़ी!! यूँ कब तक खुद से भागते रहोगे, जरा सा ठहरो, ठंडा-वंडा पानी पी!! जरा झांक कर तो देखो अपने अतीत में, जरा नजरे तो मिलाओ पुरानी प्रीत […]
दिल के ख्वाइशों को कौन सम्जा कौन जाना , तुझ बिन था तनहा यह दिल मेरा , तुझ बिन था सुना यह दिल मेरा , तेरे बिना यह दिल तरसा , बिलकुल तनहा , […]
[soundcloud url=”https://api.soundcloud.com/tracks/219644248″ params=”auto_play=false&hide_related=false&show_comments=true&show_user=true&show_reposts=false&visual=true” width=”100%” height=”450″ iframe=”true” /] oo meri janejana, meri bahon main aa na, meri sason main aa bhi jana tu, mere dil ki jo batain jo main kahan na pau, woh batein toh […]
mahi we teri yaad bahut aati hain mahi we teri yaad bahut aati hain, woh tera muskurana, woh tera bachpana, tu chod chal sari duniya ko mere sath, waha hoga sapno ka jahan, waha hogi […]
ghan ghata badal barse, man ki gagri bharney ko dil tarse, Tu jo na mila toh yeh dil tarse pyas yeh dil ki bujha ja tu, mere es dil main aa bhi ja tu, […]
Ghamzada hain kyun,humzada nahin hain kya ghumshuda hain kyun,humnawa nahin hain kya akhir tujhko, kis baat ki,fikar…, mujhe bata teri har ak,arzu ko karunga main pura Umra ke es padaw main akhir kya […]
काटी है रात तुमने भी ले-ले के करवटें देखो बता रही हैं, चादर की सलवटें। उधड़ेगी किसी रोज सिलाई ये देखना यूं इस तरहं जो लेकर अंगडाईयां उट्ठे। पहले ही हो रही है, बड़ी जोर […]
झगड़ों में घर के, घर को शर्मसार मत करो आंगन तो खुला रहने दो, दीवार मत करो। मारे शर्म के आंख उठा भी सकूं न मैं अहसानों का इतना भी कर्जदार मत करो। हर ओर […]
कभी दीवार गिरती है, कभी छप्पर टपकता है कि आंधी और तूफां को भी मेरा घर खटकता है। चमकते शहर ऐसे ही नहीं मन को लुभाते हैं पसीना भी हर इक मजदूर का इसमें चमकता […]
है कठिन जीवन बहुत, चहुं और हाहाकार है बोझ घर का सर पे है, हर चीज की दरकार है। बहन शादी को है तरसे, भाई तक बेकार है मात—पिता चुप हैं दोनों, थक चुके लाचार […]
अच्छा हुआ या बुरा हुआ सब पहले ही से है तय हुआ। कोई दूर से रहा ताकता कोई पास हो के भी न हुआ। मेरे दिल पे हाथ तो रख दिया मेरे दर्द को तो […]
यहां कोई न भला लगता है अब बियाबान मेंं जी लगता है। आ के शमशान में है ढ़ेर हुआ वो उम्र भर का चला लगता है। तुम भी ले आये क्या नकाब नई आज चेहरा […]
कोई तो दे दो वजह जीने की वरना मत पूछो वजह पीने की। दर्द अब आ गया है सहना तो क्या जरुरत है जख्म सीने की। मेरी खता नहीं तो कैसी सजा बात कुछ तो […]
दोस्त, दुश्मन तमाम रखता हूं मैं हथेली पे जान रखता हूं। शाम तक जाम क्यूं उदास रहे मैं तो अपनी ही शाम रखता हूं। कफन खरीद के है रखा हुआ आखिरी इन्तजाम रखता हूं। जब […]
थकी सोई हुई लहरों को चलकर थपथपाते हैं समंदर में चलो मिलकर नया तूफान लाते हैं। न आये पांव में छाले तो मंजिल का मजा कैसा सफर को और थोड़ा सा जरा मुश्किल बनाते हैं। […]
‘सच जो लिक्खा, तो ये मुमकिन है कि फंस जाओ तुम, मुकरना चाहो, तो हर बात जुबानी करना।’ ………सतीश कसेरा
कुछ न था हाथ की लकीरों में वरना होते न क्या अमीरों में। भरे जहान में भी कुछ न मिला हैं खाली हाथ हम फकीरों से। आपके प्यार से तो लगता है बंधे हो जैसे […]
खुशी तलाश की, तो मिल ही गई दर्द के नीचे दब गई थी कहीं। छेड़ बैठे वो अपना ही किस्सा बीच में बात मेरी, रह ही गई। एक दीवार सी थी दोनों में गिराने बैठे, […]
वो नदी सी थी, मैं किनारा सा कुछ ऐसा ही मिलन, हमारा था। खुद में बस डूबते, उतरते रहे न समन्दर था, न किनारा था। उसने शायद, सुना नहीं होगा मैने शायद, उसे पुकारा था। […]
क्या अजब दिन था वो, क्या गजब था जहाँ, मैं था बहती नदी, वो था सागर समां! यूं तो इश्क किया तूने खुद कान्हा, अब तू ही बता तेरी क्या हैं सलहा!! मेरे दिल की […]
कैसी कशिश हैं तुम्हारी आँखों में, पल में छपा दिल में अक्स तेरा,, मुझसे जुदा अगर हो जाएगा तो रब से भी छीन लाऊंगा सदा,, Because you are the one, Only you are the one, […]
‘उसे मालूम था मुझको जरुरत है बहुत उसकी, इसी खातिर मेरी नाराजगी में भी, वो घर आता रहा।’ …..सतीश कसेरा
‘बाद मुद्दत के मिला तो लिपट—लिपट के मिला, रोज मिलने से तो ये मिलना बडा अच्छा लगा।’ …..सतीश कसेरा
‘मैं दूर तक भी आ गया, पर वो वहीं पे खडा रहा ये उसको कैसे था पता, मैं मुड के देखूंगा जरुर।’ ……….सतीश कसेरा
हरे-भरे से थे रस्ते पहाड़ होने लगेनदी क्या सूखी, इलाके उजाड़ होने लगे।कौन से देवता को खुश करें कि बारिश होरोज चौपाल में ये ही सवाल होने लगे। लकीरे खिंचने लगी रिश्तों में तलवारों से […]
सोचता हूं अभी पाजेब बजी है उसकी……….. दूर अपने से उसे होने नहीं देता हूं मैं ख्यालों में उसके साथ-साथ रहता हूं। मैने दीवार पे टांगें हुए हैं फ्रेम कई उसको मैं सोच के तस्वीर […]
घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरेआईने पर भी अब मुझे न एतबार रहा हमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदरनिखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग ए रुख़्सार रहा हमारी […]
कितनी दूर हैं अंबर धरती, क्या प्यार कभी कम होता हैं,, गर सीने में हो दर्द धरा के, छुप छुप कर आसमां रोता हैं!! कभी फव्वारे, कभी फिर पानी, कभी पत्थर दिल होता हैं, पाकर […]
जिन्दगी जब जरा घबराने लगी फिर किताबों की याद आने लगी। कितना जागा हुआ था रातों का अब किताबें मुझे सुलाने लगी। उसकी तस्वीर अचानक निकली तो वो किताब मुस्कराने लगी। धूल का रिश्ता था […]
फूल……, किताब,……. अलमारी…….तुमने जो फूल मुझे दिया थाउसे मैने एककिताब में रख दिया था और किताब अलमारी में रख कर लगा दिया था ताला। अब उस ताले की चाबी खो गई मुझसे तुम्हारी तरह…। क्या कंरु […]
मिले थे फिर से तो, पर बात न होने पाई उनके लब कांप गए, मेरी आंख भर आई। बुझ गए थे सभी चिराग मगर इक न बुझा तो हवा जा के आंधियों को साथ ले […]
जो आँख देख ले उसे वो वहीं ठहर जाती हैदेखते देखते उसे शाम ओ सहर बीत जाती है फ़लक से चाँद भी उसे देखता रहता है रातभरउसकी रूह चाँदनी ए नूर में खिलखिलाती है महकते […]
रिश्ते के स्वेटर के प्यार की सलाई से ख्वाब मत बुन बावरी! शुरु में बड़ी आसान लगेगी लेकिन दिल तक आते-आते कभी टूटेगी ऊन पडऩे लगेंगी गांठे टकरायेंगी सलाईयां कभी गलत होंगे फंदे समझ नहीं […]
किस लिये रो रही हो नूर अपना खो रही हो एक ऐसे के लिये जो छोड़कर चला गया………. वो था धोखा पा के मौका आके तेरे दिल में जो आग सी लगा गया………. प्यार कैसा […]
पत्ता-पत्ता हिसाब लेता है तब कहीं पेड़ छांव देता है। भीड़ में शहर की न खो जाना ये दुआ सबका गांव देता है। हम भी तो डूबने ही निकले थे वरना कौन अपनी नाव देता […]
कौन सा दर्द सुनाया जाए………. नींद को ढूंढ के लाया जाए चलो कुछ देर तो सोया जाए। जल गई इंतजार में आंखें अब जरा अश्क बहाया जाए। आ के फिर बैठ गईं हैं यादें कौन […]
वो जमीं आसमां भी दूर रह के मिलते रहे हम अपने फासिलों में रहके बस तड़पते रहे। हमारे बीच खामोशी की नदी बहती रही हम किनारों की तरह वैसे साथ चलते रहे। जरा सा जिक्र […]
कुछ तो होता जरुर नाता है ऐसे कोई नहीं मिल जाता है। उसी के सामने दिल को खोलें जिसे कुछ हाल पढऩा आता है। फिर कोई भीड़ ही नहीं लगती भीड़ में जब वो नजर […]
कहीं बेघर ने इक छत का सहारा कर लिया होता तो फिर हर हाल में उसने गुजारा कर लिया होता। मुसाफिर का सफर थोड़ा जरा आसान हो जाता अगर रस्तों ने मंजिल का इशारा कर […]
चांद पे चरखा चलाती रही…….. खुदा की दुनिया है, इसमें तो क्या कमी होगी हमारी आंख ही में ठहरी कुछ नमी होगी। जितना जीने के लिये चाहिये वो सब कुछ है नहीं लगता है कि […]
झील सा जिस्म ओढ़ कर तुमने मुझको लूटा हैं, ईश्क से बुखार कर देने वाली बातो ने मुझको लूटा हैं, शौक नहीं था मुझे मर मिटने का मगर, आपकी नशीली निगाहों ने मुझको लूटा हैं!! […]
वो जब गली से गुजरें तो, कोई वहां न हो घर के सिवाय मेरे कोई, घर खुला न हो। बेहतर है कि दीवारों से, कुछ दूर ही मिलें दीवारों के भी कान कहीं दरम्यां न […]
उसने जब उठते हुए रोका नहीं मैने भी चलते हुए सोचा नहीं। सामने सबके गले लग के मिले कभी तन्हाई में तो पूछा नहीं। इतना हंसना, ये मुस्कराना तेरा कहीं जमाने से तो धोखा नहीं। […]
जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करेंजुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें
ढूंढा जिसे गली में, शहरा में शाम में , दीदार उसका हो गया बस एक ज़ाम में. …atr
तमाम गुलाबो की खुश्बू है तेरे इकरार में साकी , कही ऐसा न हो मैं खुश्बुओं की चाह ही रख लू.. …atr
तेरी आँखों से पीनी है, मुझे अब रात भर साकी , ज़रा अब फिर पिला दे न , तमन्ना अब भी है बाक़ी. …atr
ख़ुदा ने क्या दिया तुमको, ख़ुदा ने क्या दिया हमको, की तू है हुस्न की मल्लिका , औ मुझको आशिकी दे दी .. …atr
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