Tu Naya He

March 8, 2022 in मुक्तक

Tu Naya he….

मुकाम ए जिंदगी

September 26, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

क्या मंजिले इतनी जरूरी हैं कि
रास्तों की कद्र न हो?
मुकाम ए जिंदगी पर तो हे दोस्त
राहे ही पहुंचाती हैं!

यूं तो मैं बहुत खुश हूं

September 23, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

यूं तो मैं बहुत खुश हूं
कि तुम्हे मिल गया वो
जिसकी चाहत थी तुम्हे
मगर इक टीस जरूर है
जो दिल को कचोटती रहती है

अधूरी नज्म

September 9, 2020 in शेर-ओ-शायरी

पुरानी सी डायरी के फ़टे पन्ने पर लिखी
अधूरी नज्म हूं मैं
जिसकी खूशबू बरकरार है अभी भी
कई मौसम गुजर जाने के बाद

जिंदगी

September 8, 2020 in शेर-ओ-शायरी

आंखे मीच कर भी में तुम्हे पहचान लेती हूं
जिंदगी तुम्हे मैं जीने से पहले जान लेती हूं

हाल-ए-दिल

August 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी

शब्दों का पिटारा तो हम रखकर बैठें हैं
लेकिन वो शब्द नहीं, जो हाल-ए-दिल बयां कर सके

बेहिसाब मोहब्बत

August 5, 2020 in शेर-ओ-शायरी

कैसे दूं हिसाब अपनी बेहिसाब मोहब्बत का
वो पूछ बैठे जो आज कि कितनी मोहब्बत है मुझे

पता नहीं तुम कैसे

July 24, 2020 in मुक्तक

पता नहीं तुम कैसे लिख लेते हो
कविता, इतनी आसानी से
मेरे तो ख्याल ही गुल रहते है
ठहरते ही नहीं कागज पर

पानी के बुलबुले जैसी जिंदगी है मेरी

July 23, 2020 in मुक्तक

पानी के बुलबुले जैसी जिंदगी है मेरी
सुन्दर है, सूरज से रोशन भी
मगर कब हो जाये खत्म
फ़ूट जाये कब बुलबुला, खबर नहीं

कैसी होती मैं?

July 20, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

वो मेरी काली जुल्फ़ों को
घटाओं सा सुंदर कहते थे
आंखो को मेरी वो
ठहरा हुआ समंदर कहते थे
आज वो करीब नहीं तो
सोचती हूं अक्सर
कैसी होती मैं,
अगर वो होते साथ मेरे?

तुम दरवाजे पर आते जरूर

July 11, 2020 in शेर-ओ-शायरी

बेशक हम बंद हैं अपने ख्यालों के दुनिया में
अगर तुम्हे आना होता तो तुम दरवाजे पर आते जरूर

क्या लिखूं जो अब तक लिखा नहीं

June 18, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

क्या लिखूं जो अब तक लिखा नहीं
कहने को बाकी अब कुछ रहा नहीं
जिंदगी पानी सी थी, बह चुकी है
अब तो बस खालीपन है, जो खला नहीं

है कोई दरवाजा जो अभी तक बंद है

June 17, 2020 in शेर-ओ-शायरी

है कोई दरवाजा जो अभी तक बंद है
मेरे दिल को अभी तुमने देखा ही कहां है

किताबों में दबे फ़ूल सी है जिंदगी मेरी

February 10, 2020 in शेर-ओ-शायरी

किताबों में दबे फ़ूल सी है जिंदगी मेरी
सूखी सी है मगर महक अभी तक बची है

इश्क़ की इलायची

July 12, 2019 in शेर-ओ-शायरी

कब इश्क़ की इलायची जिंदगी में घुलती है
जिंदग़ी में महक तभी ताउम्र ठहरती है

Teri Yaado ka ghar

June 4, 2019 in शेर-ओ-शायरी

Teri Yaado ka ghar bana ke rahati huoi puche agar ko mera naam, naam tera hi kahati hu

हवाओं में पतंग की तरह उड़ने को जी करता है

April 10, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

हवाओं में पतंग की तरह उड़ने को जी करता है
बैठकर लहरों की बाहों में तैरने को जी करता है
जी करता है पा लूं ऊंचाई आसमा की
पाताल की गहराई नापने को जी करता है|

जब छूटेंगे हम तीरों से

March 22, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

कितने भी जुल्म तुम कर लो,
बांध दो कितनी ही जंजीरो से
मिटा देंगे तेरी हस्ती पल भर में
जब छूटेंगे हम तीरों से

कहां कह पाती हूँ मैं कुछ तुमसे

March 22, 2019 in शेर-ओ-शायरी

कहां कह पाती हूँ मैं कुछ तुमसे
अल्फ़ाज जज्बातों का साथ ही नही देते।

जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं

January 16, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं
उत्सव का माहौल हवा में भर जाता है
इतने ध्यान से तैयार किया गया कागज
धागे के साथ पतंग बन उड़ जाता है

ये कागज की पतंगें बहुत आनंद देती हैं
नीले पैमाने पर, एकमात्र खिलौना
ये सबको मंत्रमुग्ध कर देती हैं|

हज़ारो पतंगे आसमान को भर देती हैं
कीमती हीरो की तरह कई आकारो में
सभी आँखें को आकाश की ओर मोड़ देती हैं

युद्ध की शुरुआत पतंगों के टकराने से होती है
पतंग काटने के लिए हम गुटों में बंट जाते है
नियमों को हम सभी का पालन करते हैं
मगर फिर भी आसमान नहीं बँटता!

नई इबारतें

December 31, 2018 in शेर-ओ-शायरी

लोग पुराने अफ़साने लिखते है
मैं नई इबारतें लिखना चाहती हूं

मैं मुझी में खो गई हूं शायद

December 25, 2018 in शेर-ओ-शायरी

खुद को अब किस जगह ढ़ूढ़ूं अब मैं
मैं मुझी में खो गई हूं शायद

दर्द के हर एक कतरे को

December 23, 2018 in शेर-ओ-शायरी

दर्द के हर एक कतरे को सहेज कर रखती हूं मैं
कब जाने कौन सा कतरा तुम्हे मेरे करीब ले आये

चुनावों के इस मौसम में

December 7, 2018 in Poetry on Picture Contest

चुनावों के इस मौसम में
फिजा में कई रंग बिखरेंगे
अगर कर सके हम अपने मत का सही प्रयोग
हम नये युग में नयी रोशनी सा निखरेंगे

मां

April 23, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

मां तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो
सुख-दुख, खुशी-गम हर परिस्थिति में थामें हाथ

बिन कुछ कहें ही समझती, मेरे दिल की हर बात

मां तुम मेरे लिए ईश सम्‍य हो ।।

धैर्य, संतोष व समय प्रबंधन जैसे

आत्‍म व जीवन प्रबंधन के गुणों से परिपूर्ण व्‍यक्तित्‍व

मां तुम तो हो मेरे सुखद भवितव्‍य का मूल प्रतिरुप,

मां तुम ही मेरी एकमात्र आदर्श हो ।।

तुम प्‍यार का सागर, तुम भावनाओं की निश्‍चल मूर्ती

तुमने ही मुझे सिखाया गिरकर संभलना, कभी हार न मानना,

अपने लक्ष्‍य की ओर बढते रहना,

मां तुम ही मेरी सबसे पहली गुरु हो ।।

जब जिंदगी ने किया दोराहे पर मुझे खडा

आत्‍मविश्‍वास डिगा, मैं लक्ष्‍य पथ से विमुख हो पीछे मुडा

तुमने मेरा हाथ थाम, मेरी आत्मिक शक्ति को जगाया

मां तुम ही मेरी सच्‍ची पथ प्रदर्शक हो ।।

जब अपने जीवन के महत्‍वपूर्ण निर्णय लेने में

पाता हूं खुद को लाचार

सही राह चुनने के लिए बस आता हैं मां का ही खयाल

मां तुम ही मेरी सच्‍ची सलाहकार हो ।।

जब दुनिया की मृगमरीचिका में खोकर

अपने दायित्‍वों,संस्‍कार व मूल्‍यों को बिसरा गया

तुमने मेरे अंतस को चेताकर, मानवीयता को जगाया

मां तुम ही मेरी आंतरिकशक्ति हो ।।

जब दुनिया की भीड में भी मैं तनहा था

बहुत मुश्किल काटना एक-एक लम्‍हा था

मां तुमने ही मेरे एकाकीपन को दूर किया

मां तुम ही मेरी सबसे अच्‍छी दोस्‍त हो ।।

मेरे जीवन की हर उपलब्धि का

श्रेय तुमको ही जाता हैं

तुम बिन जीवन की कल्‍पना करना भी मुझे नहीं आता हैं

मां तुम ही मेरी जीवन शक्ति हो ।

मां मेरे रक्‍त के कण-कण में हैं बस तेरा ही नाम

तेरे ही चरणों में हैं मेरे तो चारों धाम ।

जिंदगी

March 31, 2018 in शेर-ओ-शायरी

सोचा था जिंदगी इक पूरी किताब होगी
मगर ये तो चंद लफ़्जों में ढ़लकर रह गयी|

नये साल

January 1, 2018 in शेर-ओ-शायरी

नये साल का हम जशन मनायें कैसे
बीता हुआ साल बार बार आकर आंखे नम कर जाता है|

आरजू

December 30, 2017 in शेर-ओ-शायरी

उनके ख्यालों में हमार ख्याल हो इतनी सी आरजू है
उनके लफ़्जों मे हमारा जिक्र हो इतनी सी जुस्तजू है

क्या बतायें

March 11, 2017 in शेर-ओ-शायरी

क्या बतायें क्या हो गया है हमें
तुम ही बताओ कि क्या बतायें हम

रईस

January 26, 2017 in शेर-ओ-शायरी

कोई काली कमा के रईस हो जाता है
कोई सबकुछ लुटा के रईस हो जाता है
दुनिया का दस्तूर निराला है
यहां तो दिल का लुटेरा भी रईस हो जाता है|

इश्क में इन्सा को होश कहां है

January 22, 2017 in शेर-ओ-शायरी

कोई ये कैसे बताये, कि गम क्या है
इश्क में इन्सा को होश कहां है!

क्या छुपा के घूमते है लोग

November 14, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

क्या छुपा के घूमते है लोग,
पता नहीं,
किसी के ख्वाब, या ख्वाहिशें
खबर नहीं,
कुछ लम्हे दबा रखे है अपनी हथेली में
या फिर जिंदगी को कर लिया है कैद

खालिस बेमेल है जिंदगी मेरी

October 5, 2016 in शेर-ओ-शायरी

खालिस बेमेल है जिंदगी मेरी
निखरे हुए है जज्बात मेरे
लफ़्ज मेरे एकदम मासूम है
मगर फिर भी धोखे देती रहती है जिंदगी

जब जिंदगी खाली खाली सी है

September 30, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कैसे लिखें इस कागज पर
जब जिंदगी खाली खाली सी है
स्याही है ही नहीं
शब्दों को उतारने के लिए

लफ़्जों को खोल दो अपने

July 3, 2016 in शेर-ओ-शायरी

लफ़्जों को खोल दो अपने
अरमानों को इनमें भर जाने दो
दो जगह अपने दिल में मुझे
इनमें मुझे अपना घर बनाने दो

लफ़्जों को तो हम ढूढ कर ले आये हम

May 25, 2016 in शेर-ओ-शायरी

लफ़्जों को तो हम ढूढ कर ले आये हम
अब पराये जज्बातों को कैसे बुलाये हम

जो हो गयी है बंजर जमीन

May 12, 2016 in ग़ज़ल

जो हो गयी है बंजर जमीन, जमाने कि दिल की
तू कुछ अश्क बहाकर इसे नम कर दे||

हो गया हो अगर सूना तेरे मन का आंगन
इक पक्षी को रखकर इसमें कलरव भर दे||

मैं नही हूं तेरे करीब ये न सोच कभी
मेरी यादों को तो अपने दिल में घर कर दे||

अजीब सा है मगर, रिश्ता तो है तेरे मेरे दरम्या
आज इस रिश्ते को हम चलो अमर कर दे||

चेहरे का रंग

May 6, 2016 in शेर-ओ-शायरी

चेहरे का रंग तो हर कोई देखता है
दिल का रंग भी तो कोई देखे
जो खुमार छाया हुआ है आंखो में
आंखों में खोये हुए वो भी तो देखे

तेरी आवाज है जो हरदम सुनाई देती है

April 21, 2016 in शेर-ओ-शायरी

तेरी आवाज है जो हरदम सुनाई देती है
इक तेरा ही तो अक्स है जो हर जगह दिखता है मुझे
कहां मैं तुझे मिल पाऊंगी कभी
किस्मत पै भरोसा अब कहां है मुझे

गर फासले बढते है तो बढ जा

April 7, 2016 in शेर-ओ-शायरी

गर फासले बढते है तो बढ जायें
यूं करीब रहकर भी हम करीब थे कभी??

कभी कभी ये ख्याल आता है

April 4, 2016 in शेर-ओ-शायरी

कभी कभी ये ख्याल आता है
कि कभी उनका ख्याल ना आये
तो दिल को राहत मिले|

मिलते रहते है हमें अपना कहने वाले कई हमें
जो वाकई अपना समझे
कभी कोई ऐसा मिले|

दस्तक

April 3, 2016 in शेर-ओ-शायरी

किसी ने कल रात दस्तक दी दिल के दरवाजे पर
मगर दरवाजा खोला तो वहां कोई न था|

हाल ए दिल

March 22, 2016 in शेर-ओ-शायरी

क्या कहे जो अब तक न कहा
क्या सुने जो इन कानों से अब तक न सुना
क्या बात होती गर
बिना कहे बिना सुने
समझ लेते हाल ए दिल

इक बात जो कभी कही न गयी

February 28, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

इक बात जो कभी कही न गयी
इक बात जो कभी सुनी न गयी
इक बात जो कभी हुई भी नहीं
बो बात में अब कहूं कैसे ?

लफ़्जो का खेल

February 19, 2016 in शेर-ओ-शायरी

सब लफ़्जो का खेल है इस दुनिया में
ये ही रिश्ते बनाते भी है बिगाड़ते भी यही है

चाहतों की दुनिया से अब उकता गये है

February 12, 2016 in शेर-ओ-शायरी

चाहतों की दुनिया से अब उकता गये है
सब दिखता है यहां, मगर कुछ मिलता नहीं

हमारे जीवन की कविता

January 20, 2016 in शेर-ओ-शायरी

हमारे जीवन की कविता कहानी सी हो गयी है
चली जा रही है, बिना किसी लय के, बिना किसी तुक के

सितम पे सितम तुम ढाते रहे

January 8, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

सितम पे सितम तुम ढाते रहे
अफ़साने मगर महोब्बत के बनते रहे
लफ़्जों में कहां बयां होती है कहानी मेरी
कर सको गर महसूस तो जानो
किस कदर हम दरिया ए आग में जलते रहे…

कोई कभी कितना भी दूर क्यों न हो
हो जाते है करीब महोब्बत गर रहे
आंखों में जो हो जाये बयां
उस अहसास में हम ढलते रहे…

लड़ती रही जिंदगी से खुशियों के लिए

December 30, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

लड़ती रही जिंदगी से खुशियों के लिए
झगड़ती रही खुद से अपनों के लिए
उम्मीद थी इक सच्चे प्यार की इस झूठी दुनिया में
आंखे बंद करने की ख्वाहिश है सपनों के लिए

I’ll run away

December 15, 2015 in English Poetry

One day
I’ll run away
To a place,
Where nobody can find me,
even me.

Away from nostalgia,
aroma of affection and,
water of eyes.
A place hidden in my dreams!

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