जिंदगी एक कोरी किताब, जिसका हर पन्ना, हार जीत से भरना है । हर खुशियों की समेट कर, उसे रोज सवेरे, उत्साह से बुनना है। हर दिन मेहनत कर, अपने आप से ही, दो कदम […]

समय की तह में गुजरती ये ज़िन्दगी एक अहसास की पुल बनाती ये ज़िन्दगी अपनो से दूर होकर जीने वालो को एक साथ संजोती ये ज़िन्दगी कुचक्र में फसे ढिठ सृजन को कर्मा के नियम […]

तीन रंगो से बना, तिरंगा हमारा, थी अनोखी हमारे पूर्वजों, की विचारधारा, ऊर्जा व बलिदान का प्रतीक, बना हमारा केसरिया, सफ़ेद रंग ने दिखाया, शांति व ईमानदारी का जरिया, हरे रंग ने दिखाया, खुशाली व […]

हर भाषण में हिंदी होनी चाहिए, दुनिया भर में प्यार की लूट, तुम भारत की शान हो हिंदी, कितना घमण्ड करूँ तुम पर, मेरे पास शब्दों की कमी है मुझे आपको नीचे रखना है, आपको […]

मैंने तुम्हारा इंतज़ार किया था दिन के हर पहर , अनगिनत शामें हर चमकती काली रात में बरसते सावन के हर फुहार ,पवन, हर बयार में तुम बिन सुने पड़े आंगन के दरवाजे कि हर […]

From the moment you entered this world, With tiny fingers tightly curled, You filled our lives with boundless joy, Our little girl, our precious toy. Your laughter dances like a song, Bringing smiles when days […]

कुछ बातें तुम कहो, कुछ हम तुम्हारी सुने। आओ मिलकर एक दूसरे से , फिर से बातें करें।। कहना तुम भी कुछ चाहते, चुप हमें भी नहीं रहना। फिर यह दूरियां कैसी हैं, जिन्हें हम […]

Still beautiful souls are creating magic around you, Your aura is not just a fictional beauty dear human, Still someone with no envy in heart walks around you, Your happiness is not a saddening moment […]

एक स्त्री कि व्यथा को बचपन से गृहस्त जीवनी को दर्शते हुए सुंदर कविता… मैं अकेली परी सी बनी  माँ के कर्मों कि बुनी घर काम को करती  सही किताबों को पड़ती  कभी एक दिन होगायी बड़ी  ब्याह को राज़ी ख़ुशी फिर उठी डोली कही  ससुराल ने समझा नहीं  बिन सहारे रोती फिरी  प्रेम मोह से लड़ती रही  ईश्वर ने प्रथना सुनी  संतान से झोली भरी  दर्द भरी कहानी मेरी आँसू जैसे नदी बहीं जीवन मेरा कही अंकही.

रहने लगा हूं कुछ दूर सबसे गुजर गया एक वक्त जबसे मिला नहीं हूं खुदसे खो चुका हूं खुदको या कतराता हूं खुदको ढूंढने से? हु बे-असर या ठहरा रखे हैं सब जज़्बात खुद में? […]

कुछ बातें करनी थी तुमसे मगर अधूरी रह गई कुछ मुलाकातें करनी थी तुमसे मगर अधूरी रह गई कुछ ख़्वाहिशें पूरी करनी थी साथ तुम्हारे मगर अधूरी रह गई कुछ लम्हे गुजारने थे संग तुम्हारे […]

कुछ बातें करनी थी तुमसे मगर अधूरी रह गई कुछ मुलाकातें करनी थी तुमसे मगर अधूरी रह गई कुछ ख़्वाहिशें पूरी करनी थी साथ तुम्हारे मगर अधूरी रह गई कुछ लम्हे गुजारने थे संग तुम्हारे […]

ये सोच ही है जो जुबान से शब्दों के रूप में कही जाती है ये सोच ही है जो इंसान को एक दूसरे से अलग बनाती है। ये सोच ही तो है जो लोगों में […]

पिंजरे में कैद एक पंछी हूँ मैं, माना कि बंद हूँ पर एक जीव हूँ मैं, है मुझमे भी सांसें और दिल फिर क्यों नहीं मिलती मुझे मेरी मंजिल, वो नीले अम्बर में उड़ना मुझे […]

From the aurora over the silky Skyline There began the ending of the riverine Of the perennial pungency everlasting In the still haze,the vivid venus shinning I held hands with the deity of the dawn […]

तो कहा आज घूम हूं साए के खुदसे मैं चुप्ता क्यु घुम हू मैं ये झूठी लकीरें लेकर चल रहा बेफिजूल की जिंदगी जी राह भाग क्यों रहा हूं मैं उस शख्स से उस वक्त […]

अभी तो सिर्फ शुरुआत है, मेरी कलम की यह अदा है। सबके लिए नयी ये कविता, अनोखी, अनूठी और ख़ास है। आसमान की उचाईयों में, सपनों की उड़ान है। ज़मीन पर चलते चलते, हर रास्ते […]