तुम्हारी शान में जो लफ्ज निकले गजल बन जाये। तेरे अधरों से निकला अल्फ़ाज ही कुरान बन जाये नसीहत तुझको क्या देगा कोई ऐसी किसकी जुर्रत! तू जो एक बार कह दे बस वही पहचान […]

आधार मेरी ज़िन्दगी का तू है मेरी सुबह और शाम तू है कैसे जिएंगे तेरे बिन जब मेरी आखरी साँस भी तू है

उन्हें खुद लिखना आता है तब भी भाव नहीं समझते हैं भावनाओं से परे हैं हाव भाव नहीं समझते हैं लाख कोशिश करें हम उनके दिल में समाने की, नासमझ हैं वो कुछ भी नहीं […]

कुछ लोगों से बात करके बहुत सुकून मिलता है एक अजब सा एहसास होता है दिल में मचलता है और मिलने को तड़प उठता है यह तड़प कभी-कभी इतनी बढ़ जाती है कि दिल पंछी […]

Part -2 ❤ तुमने मेरे दिल को और रुलाया है मुझे प्रेम का पुष्प मसलकर आसमान से गिराया है मुझे। तुमने रूहानी इश्क को जिस्मानी समझा पानी गला हुआ महज एक कागज समझा। पुष्प की […]

Part-1❤ आज सबूत माँग रहे हो कि तुमसे कब, कहाँ और कैसे प्यार किया ?? पहचानने से इनकार कर दिया मुझे ! और कर ही क्या सकते थे तुम! मेरे जिस्म से आती खुशबू को […]

दिल थक जाता है जब रूठने वाला जिद पे अड़ जाता है कितनी भी कोशिश कर लो हाथ ना आता है बस दूर चला जाता है इस छोटी सी जिन्दगानी में जब काम बहुत ज्यादा […]

एक वक्त था… जब तुम मेरे लिए रातों को जगा करते थे मैं कुछ भी कहती, तुम हंसकर सब सुन लेते थे। मुझसे ज्यादा तड़प होती थी तुमको मिलने की, व्हाट्सएप’ पर भी तुम अवलेबल’ […]

तुम मेरे ही और सिर्फ मेरे ही रहो मैने कब चाहा कि ऐसा ही हो। पीछे चलो कदमों के निशान ढूंढते हुए दे दो अपनी जान बस मुझको पूजते हुए। लाकर जहान की सारी खुशियाँ […]

आज एक अजनबी से मुलाकात हुई उसकी एक मुस्कान हृदय की शिराओं को झकझोर गई…. अन्दर एक प्रकाश का ज्वार फूटा! लौ जली, उसकी चितवन ले गई देह से खून निकाल कर..! साँस पर्वत सी […]

बदन पर साड़ी लपेटकर कितनी सुंदर लग रही है ये हुस्न देखकर दामिनी भी नतमस्तक हो रही है

===== अति शक्ति संचय कर , दुर्योधन ने  हाथ बढ़ाया, कटे हुए नर मस्तक थे जो , उनको हाथ दबाया। ===== शुष्क कोई पीपल के पत्तों जैसे टूट पड़े थे वो, पांडव के सर हो […]

उस तक बात नहीं पहुँचती आजकल ब्लॉक है सब जगह बात हुए अरसा हो गया कभी कभी देखता हु सपनो मे वही मेरा औकात है ऐसा उसने कहा था कुछ लोग साथ होते है कुछ […]

===== दुर्योधन को गुरु द्रोणाचार्य की मृत्यु के उपरांत घटित होने वाली वो सारी घटनाएं याद आने लगती हैं कि कैसे अश्वत्थामा ने कुपित होकर पांडवों पर वैष्णवास्त्र का प्रयोग कर दिया था। वैष्णवास्त्र के […]

जगमग ज्योति जगा री सजनी, घर – बाहर सब होय उजाला। घनी अमावस की रतिया भी आज,लगे धवल चांदनी वाला।। मिट्टी का दीपक रूई की बाती । सरसों का तेल भर दीया बाती।। मिटे अंधेरा […]

त्यागी जैसा दिखने का भाव कोई छोटी मोटी वासना नहीं है। इस त्यागी जैसे दिखने के भाव का त्याग करना बड़ी बाधा है, जिसपर साधक अक्सर ध्यान नहीं देते। परिणामस्वरूप त्याग का वो भाव, जो […]

कार्तिक मास अमावस घनेरी प्रकाश पुंज बिखरा तिमिर मिटाने आई है दीप जलें हर घर आंगन में शुभ दीपावली आई है। श्री गणेश लक्ष्मी कुबेर अनुकंपा बरसाते धन्य धन्य पूर्ण कार्य सब करते अंधकार से […]

जलता जाए दीप हमारा। मिट्टी के दीपों में भरकर तेल – तरल और बाती, तिमिर-तोम को दूर भगाने को लौ हो लहराती। मिट जाए भू का अँधियारा जलता जाए दीप हमारा। हो आँधी, तूफान मगर […]

वह कैसी तलवार कि जिसमें धार नहीं है कौन कहेगा सिन्धु जहाँ मझधार नहीं है, सिर्फ ताप के लिए जले वह ज्वाला कैसी आँखों से न बरसे तो अंगार नहीं है । अनिल मिश्र प्रहरी।

जिस दिन हिंदुत्व का परचम उस अम्बर पर लहराएगा उस दिन भारत की धरती पर श्री राम राज्य आ जाएगा ।। जिस दिन बदला लिया जाएगा चन्दन की कुर्बानी का हर नारी में रूप दिखेगा […]

( सभी कवि एवं पाठको को मेरा नमस्कार , आज 10 महीने बाद इस वेबसाइट पर आने का अवसर मिला है , एक वीरता पूर्ण कविता के साथ ) – धरा धरणि हिल गए निशाने […]

कहते हैं कि ईश्वर ,जो कि त्रिगुणातित है, अपने मूलस्व रूप में आनंद हीं है, इसीलिए तो उसे सदचित्तानंद के नाम से भी जाना जाता है। इस परम तत्व की एक और विशेषता इसकी सर्वव्यापकता […]

नजाने कब ख़तम होगी ज़द्दो ज़हद ज़िन्दगी की, अभी टॉक उलझा हूँ ज़िन्दगी क सवालो मे। अंदाज़ उसका बे मिसाल था,बेवफाई उसने की, मगर मई बदनाम था। ज़िन्दगी ने बहोत कुछ सीखा दिया मुझक।, इस […]

जब तुम नहीं होती तो ये सब होता है नींद रूठ जाती है खिड़की के परदे मुंह फेर लेते हैं बिस्तर की चादर भी बूढ़ी दिखने लगती है चेहरे पर सिलवटों से घिरी हुई दादी […]

तुम मेरे ही और सिर्फ मेरे ही रहो मैने कब चाहा कि ऐसा ही हो। पीछे चलो कदमों के निशान ढूंढते हुए दे दो अपनी जान बस मुझको पूजते हुए। लाकर जहान की सारी खुशियाँ […]

आज सबूत माँग रहे हो कि तुमसे कब, कहाँ और कैसे प्यार किया ?? पहचानने से इनकार कर दिया मुझे ! और कर ही क्या सकते थे तुम! मेरे जिस्म से आती खुशबू को क्या […]