मोहब्बत हो गई है तुमसे चांद हमारी बात ना माने जुगनू, सितारे ठिठोली करते सब हैं मेरी दुविधा जाने पीर प्रेम में ऐसी होवे दिल ही दिल का रोना जाने। सब जाने सब पहचाने बस […]

श्याम ने बंसी नहीं बजाई राधा हो गई जब से पराई आज एक खत लिखा चांद को, तुमसे भी खूबसूरत है कोई!! ❣❣❣ शिखर तक पहुंचने के लिए गिरकर संभलना भी जरूरी है नए आयत […]

न जाने कहां ले जा रही है जिंदगी.. जाने क्या चाहती है मुझसे यह जिंदगी?? खुद को जितना गमों से दूर रखती हूं, उतना ही गमगीन होती जा रही है जिंदगी… खुशियों की बात तो […]

जीवन ज्योति की एक ललित सरिता बहे सुंदर सुकोमल कविता बने, हो चहुँ ओर प्रकाश फैला हुआ मेरी लेखनी में वो बात रहे। नहाए हुए से लगे शब्द मेरे भाव तो जैसे खो ही गए […]

जब दिल में दर्द सा उठा एक तीर सा चुभा, जो कल था मेरी निगाहों से मारा गया। आज मेरे ही दिल का कातिल बना। वो फरेबी भी है, वो आशिक भी है, मेरी सांसों […]

यादों के भरोसे कट रही है जिन्दगी बाकी तो मर ही चुकी थी प्रज्ञा’ तेरे इन्तज़ार में। हिंदी वो भाषा है जो हृदय की गहराईयों से निकल कर सौंदर्य के सागर में नहाती है और […]

लक्ष्य को पाने के लिए अर्जुन सी निगाह होनी चाहिये मछली चाहे जितनी बड़ी ही क्यों ना हो सिर्फ आँख पर निगाह होनी चाहिए

अँधेरा होने से पहले आ जाओ इतने प्यार से बुलाया है आ जाओ जख़्म पे मरहम ना लगाओ ना सही जख़्म को हरा करने ही आ जाओ।

मोहब्बत में कितने फलसफे लिखे मेरे खत तेरे तकिये के नीचे मिले बुला लो अगर बुलाना है वरना आ जाओ इस दिल में तुम्हारा ही आशियाना है.. आजाद हूँ…. अपनी मस्ती में हूँ…. तुम्हारे बिन… […]

किताबों पे पड़ी धूल को कब से झाड़ा नहीं मैने आँगन को भी बुहारा नहीं बाल गंदे हो जाएँगे, रंग दब जायेगा, इसलिये कभी किसी काम को हाथ लगाया नहीं। 🤣🤣🤣

बे इन्तेहा मोहब्बत करते हैं ये हम बहुत गलत करते हैं तू मेरे कदमों के लायक भी नहीं और हम तुझे सर पर बिठा कर रखते हैं..!!! एक प्यारा सा दिल है जिसमें कई सपने […]

तू कांच का टुकड़ा है मैं तेरी टूटी तकदीर, तू फटा हुआ कागज मैं नाव बदनसीब। तू रेल सी चलती है और मैं वक्त हूँ ठहरा हुआ, तू तीखे बोल बोलती है पर मैं कान […]

ये तो दिल ही जानता है हम तुम बिन कैसे रहते हैं तुम्हें किसी और के साथ देखते हैं ये दर्द कैसे सहते हैं दिन तो हंसी खुशी बीत जाता है रात की खामोशी को […]

अकेले चलने से डर लगता है साथी साथ चलो मेरे मुझे अंधेरे से डर लगता है बाहों में लेकर रोज झूमते हैं तुम्हें तुम्हें खोने से डर लगता है पकड़ लो मेरा हाथ और ले […]

“नून” भोजपुरी कविता इक दिन बहुत हाहाकार मचल भात ,दाल ,तरकारी में। काहे भैया नून रूठल बा बैठक भईल थारी में। दाल- तरकारी गुहार लगईलक नून के बैठ गोर थारी में तरकारी कहलक सांस छूटता […]

नहीं चाह रही इस जीवन की भर गई समर्पण की गगरी अब पछताए क्या होवे है जो रोवे है सो खोवे है तीर लगा इस पाथर को पाथर में भी जान तो होवे है अबका […]

पहाड़ों के अंचल से निकली है हिम तरंगिणी काव्य की सरिता बहाने निकली है हिम तरंगिणी। —- 32 प्रबुद्ध कवियों के साझा काव्य संकलन हिम तरंगिणी में इसी सावन पटल पर मुलाकात हुई विद्वान कवियित्री […]

तुम्हें गले लगाकर रोना था इतना तो मेरा हक बनता था। हाथ पकड़ के कुछ दूर तक चलना था इतना तो मेरा हक बनता था। रुक जाते कुछ देर हम बहला लेते दिल को देर […]

खुद से पहले दूसरों का खयाल रखना प्यार सिखाता है । इज्ज़त से पेश आना प्यार सिखाता है। मन हो या ना हो फिर भी दूसरों की खुशी की खातिर खुद को कुर्बान करना प्यार […]

जरूरत से ज्यादा तुझसे प्यार करते थे बेवकूफ थे वो लोग जो तुझसे प्यार करते थे क्या है तुझमे!! और क्या खास है तू?? जो बेफ़िजूल में लोग अपना वक्त बर्बाद करते थे।

1 मेरे दिल से खिलवाड़ ना कर.. मैं तूफान का जलजला हूँ मुझसे प्यार ना कर.. 2 बढ़ती उम्र के साथ जिद समझौतों में बदल जाती है 3 इस चेहरे से तुमको प्यार नहीं है…!!!! […]

मोहब्बत की इबादत मैने हर बार की है कभी कभी प्यार में तकरार भी की है मिलो अगर कभी तन्हा तो बता देंगे तुम्हें, प्रज्ञा’ ने मोहब्बत में जान की भी ना परवाह की है।

लोगों की भीड़ मुझे कब पसंद आई है भर आई आँख मेरी जब तेरी याद आई है तन्हा कर देती हैं यादें” मुझे फिर मैं क्या करूँ ! देख सब छोड़ कर तेरी राधा लौट […]

तेरे नाम की मेहंदी लगा रखी है। तुझसे मिलने की बेचैनी दिल में छुपा रखी है। आओगे तो घूंघट ना खोलूंगी दरबान बना करके मैने कमरे में लाज बिठा रखी है।।

1) क्यों मजबूर हुए हम ये कभी सोंचा है?? मेरा गुरूर तो तुम्हें दिखता है वक्त मिले तो कभी सोंचना जरूर ! ये मासूम सा चेहरा इतना उदास क्यों रहता है 2) Attitude’ है मुझमें […]

इतना घमंड क्यों भरा है इन्सान में मत जियो अभिमान’ में। नफरत की बेल इतनी क्यों चढ़ा रखी है कांटों की सेज क्यों बिछा रखी है प्रेम के दीपक का तेल क्यों कम हो गया […]

ये वादियां ये फिजाएं क्यों बुलाती हैं मुझे जाने क्यों इतनी मोहब्बत जताती हैं मुझे। इन फिजाओं में लिपटी हुई मोहब्बत है मेरी दुआओं में फैला हुआ बस तेरा हक है। वफा की राह में […]

जब दुनिया पर गौर करो तो अपना अस्तित्व नजर आता है भूल हो जाए तो हर शख्स रूठ जाता है अच्छाई कहाँ याद रहती है किसी को एक गलती से रिश्ता भी टूट जाता है […]

सपनों की धूप में हम अपनी चादर सुखा रहे थे तेरे दिखाये हुए रास्ते में हम फूल बिछा रहे थे तेरी बेचैनी बढ़ गई थी कितनी जब हम मोतियों से बाल सजा रहे थे उतार […]

सबसे छुपा कर रखा है तुझको तू किसी और का ना हो जाये डर लगता है मुझको धूप की चादर हो चाहे शबनम की फुहार जान से ज्यादा चाहेंगे तुझको।

रुठे रुठे से हुजूर नजर आ रहे हैं हमें बेवफा बताकर शायद किसी के घर जा रहे हैं कानों की बाली खो गई है उनकी या किसी को निशानी में देके आ रहे हैं सुर्ख […]

मानवीय अलंकार से सुसज्जित:- दिलनशी शाम के सवेरे हैं वायु में मद घुली हुई है शहर का कोलाहल शांत है देखो ! शबनम भी नहा रही है चलो घूम लें थोड़ी देर छत पर रूह […]

मत रोको !!!! जाने वाले को जाने दो 🤗 उसको भी अपनी औकात समझ में आ जाएगी।❣ लौट के फिर वो आएगा आपके पास…. ….जब सारी दुनिया उसको ठुकराएगी। ❤

उसके होंठों को जब तुमने प्यार से चूमा होगा । ❤ खयाल एक पल को मेरा भी तो आया होगा । ❤

लओट कर ना आया,ओ रहबर – रहगुजर मेरा, त उमर रहा,तनहा सफर मेरा, हर रिश्ते फरेब देते रहे मुझे,ज़िन्दगी के हर मोड़ पर, बेवजह नेछावर कर दिए मैंने लहु का एक एक कतरा मेरा, ये […]