बहुत गुस्सा भर जाता है अन्दर जब मेरी माँ बोलती हैं पति मारे भी तो क्या: पत्नी को उस पर हाथ उठाना नहीं चाहिए। मेरे पति तो मुझे कितना मारते थे क्या कभी साथ छोड़ा […]
बहुत गुस्सा भर जाता है अन्दर जब मेरी माँ बोलती हैं पति मारे भी तो क्या: पत्नी को उस पर हाथ उठाना नहीं चाहिए। मेरे पति तो मुझे कितना मारते थे क्या कभी साथ छोड़ा […]
रुठे रुठे से हुजूर नजर आ रहे हैं हमें बेवफा बताकर शायद किसी के घर जा रहे हैं कानों की बाली खो गई है उनकी या किसी को निशानी में देके आ रहे हैं सुर्ख […]
दुनिया क्या कहेगी ये सोचेगा तो रुक जाएगा सफलता के लिए तपना पडे़गा , जितना तपेगा उतना निखर जाएगा मेहनत के बल पर ये जमाना क्या आसमां भी तेरे आगे झुक जाएगा
बंद आंखों की कोरों पर ठहरी बूंदें गोया पलकों के पीछे गहराते अंधेरे में क़ैद किरणें अपनी ही आंच में पिघलती जा रही हैं धीरे- धीरे ०४.०९.२०२२
अब के झमाझम सावन ने ताना अंतरपट झीना, झिलमिल – झिलमिल अंबर से धरती तक ढोल – नगाड़े बजते अविरत बिजली का मंडोला सजता नभ में बूंदों का सेहरा बांधे उतरा बादल धानी धरती का […]
एक व्यक्ति का व्यक्तित्व उस व्यक्ति की सोच पर हीं निर्भर करता है। लेकिन केवल अच्छा विचार का होना हीं काफी नहीं है। अगर मानव कर्म न करे और केवल अच्छा सोचता हीं रह जाए […]
दिल के वीराने में एक अंजुमन हम भी सजाते हैं। जब भी होते हैं तन्हा आपको उसमें बिठाते हैं। आप तो भूल गए हो यादें पुरानी, आइये हम आपको याद दिलाते हैं.. सावन, नदियाँ पर्वत […]
तुझसे बिछड़ के जिंदगी कुछ इस तरह से गुजरी है, न कोई राह-ए-सफ़र, न हम सया साथ चलता है, इतना तन्हा हुआ मैं तेरे जाने के बाद, ना अपना, ना कोई पर्य साथ चलता है। […]
विवाद अक्सर वहीं होता है, जहां ज्ञान नहीं अपितु अज्ञान का वास होता है। जहाँ ज्ञान की प्रत्यक्ष अनुभूति होती है, वहाँ वाद, विवाद या प्रतिवाद क्या स्थान ? आदमी के हाथों में वर्तमान समय […]
अब के झमाझम सावन ने ताना अंतरपट झीना, झिलमिल – झिलमिल अंबर से धरती तक ढोल – नगाड़े बजते अविरत बिजली का मंडोला सजता नभ में बूंदों का सेहरा बांधे उतरा है बादल धानी धरती […]
मेरी दुआ है आतिश-ए-इश्क़ में तेरा घर भी यूँ ही जला करे न ज़ख़्म हो न सकूँ मिले तेरा दिल भी यूँ ही दग़ा करे न दर्द हो न दवा मिले यूँ मेरी तरह तू […]
आज कुछ अजीब होते देखा। उसको उसकी ही नजरों में गिरते देखा।
Mana ki Zindagi ek kowaishon ka samandar hai,har khowaishe puri hon ye zaruri to nahi. ———————- Na jane kab khatam hogi jaddo-zahad zindagi ki,abhi talak uljha hun zindagi k sawalo me.
इस सृष्टि में बदलाहटपन स्वाभाविक है। लेकिन इस बदलाहटपन में भी एक नियमितता है। एक नियत समय पर हीं दिन आता है, रात होती है। एक नियत समय पर हीं मौसम बदलते हैं। क्या हो […]
कितनी बार सोंचा तुम्हारे बारे में ना सोंचूं, यही सोंचते सोंचते रात हो गई।
दर्द में मेरी जीभ मेरी नहीं होती,।फिर तुम तो कहीं बाहर से आये मेरी जिन्दगी में,।न सोचना तुम्हें सोचती हूँ ,मैं,तुम्हें माथे पर रखा ,खुद को बहुत कोशती हूँ ,मैं,,।।कविता पेटशाली 💔💔💔💔💔💔💔
नाम है अनेक तेरे कण कण मे आप हो देखना बस एक झलक, सांसो में आलाप हो मैं कलंकित शंकित हूँ जरा, गंगाधर आप हो मन से मेरे भवभय हरो, हर हर विश्वनाथ ओ। सभी […]
आज एहसास ये हुआ की मैं कितनी अकेली हूँ, सजल जल नैन भर बरसे दुख की मैं सहेली हूँ। कहाँ है प्रीत का सावन?? कहाँ है गीत मनभावन?? कहाँ है प्रेम की गगरी आज बिल्कुल […]
सच है एक कड़वी दवा, इसको धीरे-धीरे पिला। आदत तो हो जाने दे, इतना सच कैसे झेलूॅं, चाक सीना तो सी लूॅ़ं। भरम में ही जीती आई हूँ, भरम में ही जी लेने दे, सच […]
प्रतिकूल परिस्थितियों के लिए संसार को कोसना सर्वथा व्यर्थ है। संसार ना तो किसी का दुश्मन है और ना हीं किसी का मित्र। संसार का आपके प्रति अनुकूल या प्रतिकूल बने रहना बिल्कुल आप पर […]
भोजपुरी कजरी लोक गीत -दूर कईला सजना | अँखिया से बहे हमरे लोरवा | नजरवा से दूर भइला सजना | रतिया जोहत होला हमरो भोरवा | नजरवा से दूर भइला सजना| गोरी बहिया में खनकेला […]
मैं ,,जीयूं इस तरह , कि विभव में भोर हो जाए, मैं,, जीयूं इस तरह ,की कविता हर ओर हो जाए, देश ,लिखने वाले द्वेश नहीं लिखा करते, मिट्टी में भी सुगन्ध लिया करते हैं, […]
विषय –जगन्नाथ रथयात्रा (*जय जय हो तेरी प्रभु जगन्नाथ सरकार*) हरि बोल के जयकारों से गूंज रहा सम्पूर्ण संसार बजते ढोल नगाड़े मंजीरा, जय जगन्नाथ स्वामी मंत्रोच्चार रथ के लिए काष्ठ का चयन होता बसंत […]
अरसे बाद,खुद को पहचान पाई हूं, ये मेरे अहसास की सुगन्ध है,। समय का इक पहलू ,मेरा बड़ा भयभीत रहा , फिर भी मुसाफिर इक जिन्दाबाद रहा,। ज़िन्दगी का वह मोड़ क्या रहा होगा, जहां […]
आजकल थोड़ा खफा सा रहता है जग रहा मगर सोया सा रहता है पर जाने क्या है मजबूरी उसकी वो बैठा हुआ थका सा रहता है । अशोक बाबू माहौर
===== धर्म ग्रंथों के प्रति श्रद्धा का भाव रखना सराहनीय हैं। लेकिन इन धार्मिक ग्रंथों के प्रति वैसी श्रद्धा का क्या महत्व जब आपके व्यवहार इनके द्वारा सुझाए गए रास्तों के अनुरूप नहीं हो? आपके […]
Sabka bhla soch k itna achha krte krte; Apna itna bura kr gyi, pta hi na chla… Ek naariyal ka kirdaar tha mera, Kyu mera vajood unhe pathar-sa dikha… Dil roya andron bhot, maano kasoor […]
विषय– पिता की छांव मां-पापा हैं मेरे जीवन की पतवार कैसे चुका पाएंगे हम अपने पापा के उपकार चलना सिखाया पापा ने मुझे गोद उठा दिखलाया संसार एक साया बनकर चलते संग मुझे खुशियां देते […]
अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत पर नाज करना किसको अच्छा नहीं लगता? परंतु इसका क्या औचित्य जब आपका व्यक्तित्व आपके पुरखों के विरासत से मेल नहीं खाता हो। आपके सांस्कृतिक विरासत आपकी कमियों को छुपाने के […]
=================== कौरव सेना को एक विशाल बरगद सदृश्य रक्षण प्रदान करने वाले गुरु द्रोणाचार्य का जब छल से वध कर दिया गया तब कौरवों की सेना में निराशा का भाव छा गया। कौरव पक्ष के […]
सलीक़े से हवाओं में जो ख़ुशबू घोल सकते हैं अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जो उर्दू बोल सकते हैं ~ मुहम्मद आसिफ अली
विधा– नारा लेखन* 🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 वसुधा को बनाएं फिर से रत्नगर्भा हम आओ फिर से वृक्ष लगाएं हम। 🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 सिर्फ एक दिन ही वृक्ष लगाने से न पूरा होगा कर्तव्य पर्यावरण और हरित धरा बचाने को […]
======= हाल फिलहाल में मेरे द्वारा की गई मेरे गाँव की यात्रा के दौरान मेने जो बदलाहट अपने गाँव की फिजा में देखी , उसका काव्यात्मक वर्णन मेने अपनी कविता “मेरे गाँव में होने लगा […]
========= महाभारत युद्ध के समय द्रोणाचार्य की उम्र लगभग चार सौ साल की थी। उनका वर्ण श्यामल था, किंतु सर से कानों तक छूते दुग्ध की भाँति श्वेत केश उनके मुख मंडल की शोभा बढ़ाते […]
सोचता था तूने मुझे छोड़ दिया पर पीछे मुड़ा तो साया तेरा ही था हम टूटे थे उस वक्त जरूर पर खुद्दारी से लड़कर सफल होंगे ज़रूर जज़्बा है शोर नहीं काली रात है पर […]
सुना हैं कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता। हमें जैसा भी मिला है किसी को ऐसा भी आसमां नहीं मिलता।
ख़्वाब को साथ मिलकर सजाने लगे घर कहीं इस तरह हम बसाने लगे कर दिया है ख़फ़ा इस तरह से हमें मान हम थे गए फिर मनाने लगे
इस सृष्टि में कोई भी वस्तु बिना कीमत के नहीं आती, विकास भी नहीं। अभी कुछ दिन पहले एक पारिवारिक उत्सव में शरीक होने के लिए गाँव गया था। सोचा था शहर की दौड़ धूप […]
बस्सी पठाना पंजाब के पंडित विनय शास्त्री ‘ विनयचंद ‘ को काव्य रत्न और गोल्डेन बुक आॅफ वल्ड रेकार्ड से सम्मानित करते हुए डाॅ हरिसिंह पाल ने कहा कि एक साहित्यकार ब्रह्माजी होते हैं जो […]
अन्तर्राष्ट्रीय शब्द सृजन संस्थान गाजियावाद के तत्वावधान में आयोजित भारत रत्न विजेताओं के जीवन पर आधारित कालजयी ग्रंथ भारत के भारत -रत्न के भव्य लोकार्पण समारोह नई दिल्ली के हिन्दी भवन में विगत 15 मई […]
अपनी क़िस्मत को फिर बदल कर देखते हैं आओ मुहब्बत को एक बार संभल कर देखते हैं चाँद तारे फूल शबनम सब रखते हैं एक तरफ महबूब-ए-नज़र पे इस बार मर कर देखते हैं जिस्म […]
मुझे नहीं पता तू है कहाँ, खुश रहे तू है जहाँ। हृदय से देती हूँ तुझको दुआ, फ़िर न हो जैसा अब हुआ। हृदय में वास करेगी सदा, तेरा नाम रहेगा सर्वदा मेरी जु़बाॅं, वादा […]
द्रोण को सहसा अपने पुत्र अश्वत्थामा की मृत्यु के समाचार पर विश्वास नहीं हुआ। परंतु ये समाचार जब उन्होंने धर्मराज के मुख से सुना तब संदेह का कोई कारण नहीं बचा। इस समाचार को सुनकर […]
नहीं कर सकते हम अब और इन्तज़ार, करना ही नहीं अब हमें तुमसे प्यार। मेरी बेबसी का मजाक उड़ाते हो, मेरे दिल को रोज़ चोट पहुँचाते हो। कर नही सकते अब तुम पे ऐतबार जाओ […]
न जाने कहां ले जा रही है जिंदगी.. जाने क्या चाहती है मुझसे यह जिंदगी?? खुद को जितना गमों से दूर रखती हूं, उतना ही गमगीन होती जा रही है जिंदगी… खुशियों की बात तो […]
(3) दूसरों के घाव देखने वाले कभी अपने घाव नहीं भर पाते।।1।। वर्तमान हि सब – कुछ हैं भूत वासना का घर और भविष्य चिन्ता का जंगम हैं ।।2।। जो आंतरिक दुश्मन से लड़ते हैं […]
(3) दूसरों के घाव देखने वाले कभी अपने घाव नहीं भर पाते।।1।। वर्तमान हि सब – कुछ हैं भूत वासना का घर और भविष्य चिन्ता का जंगम हैं ।।2।। जो आंतरिक दुश्मन से लड़ते हैं […]
(2) लिखने मात्र से कुछ न होगा उसपे चलना तुम्हारी कवित्व को निखारेगा।।1।। सारी कृतियां समय व प्रस्तिथि कि देन हैं लोग अहम् – भाव के कारण अपना समझ बैठे हैं ।।2।। एक से अनेक […]
कीचड में ही कमल खिलता हैं, लेकिन ऊपर नीचे नहीं ..1.. बिषयाशक्त पुरुष खुश रह नहीं सकता और निराशक्त को दु:ख छू नहीं सकता ..2.. इंद्रियों का रुख , यदि सात्विक हैं। तो पूरी कि […]
हो रहा विमुख-सा मन, न इच्छा बची ना चाह। यह उम्र का पड़ाव, सच में इरादों को छीन-हीन, कर ही देता है। वह पहले सा उत्साह, मर ही जाता है। वो रंग-बिरंगे सपने, धुंधले पर […]
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