ह्रदय में ताला कहाँ लटकता ,मन में केवल भ्रम पलता है | आश्वासन में दुनिया चलती ,आमंत्रण मरण मात्र बेचैनी | नजरें मंजिल पर टिकी हुई ,संवाद हकीकत हो जाता है | स्याही सूख गई […]

बहुत थी मैं उसदिन रोई, अजीब पीङा में जब,माँ गयी पर देखो तो, माँ आई, माँ आई, साथ में अपने,भाई को भी लाई । थकी हुई सी माँ ,साथ नन्हा सा खिलौना माँ लेटी तो […]

जान भी तू है ज़िन्दगी तू है जाने जाँ जाने शायरी तू है खुश्बू-ए-इश्क से धुली तू है मेरी सांसो मॆं बस गई तू है रूबरू ख़्वाब मॆं हक़ीक़त मॆं मेरी रग रग मॆं दौड़ती […]

दौङना चाहती हूँ मैं, क्या मुझे वो राहें दोगे? दुनिया को देखना चाहती हूँ मैं, क्या मुझे वो नज़रें दोगे? अपने दिन और रातों को रंगना चाहती हूँ मैं, क्या मुझे वो रंग दोगे? खिलखिलाकर […]

तुम भी इस जमाने में किसी से प्यार कर लो! गम की सरहद पर खुशियों की दीवार कर लो! मर रही है जिन्दगी दौलतों की चाहत में, खुद को इस मर्ज से कभी तो दरकिनार […]

एक ग़ज़ल  जो मेरे बेहद अज़ीज़ दोस्त को समर्पित है …. _________________________________ तुम्हारे चाहने वाले को क्यों आहें मयस्सर हैं ? नमी आँखों में लब पर हिज्र की बातें मयस्सर हैं..!! _________________________________ कोई प्यासा तेरे […]

मुझे अब ये तिश्नगी अच्छी नहीं लगती चेहरे पर मेरे मायूसी अच्छी नहीं लगती……   तेरे दीदार के लिए तेरी गली आता हूँ मुझे ये आशिकी अच्छी नहीं लगती…….   जब से देखा हैं उस […]

माँ के दिल में बसर नहीं छोड़ा. बाकी कोई कसार नहीं छोड़ा. घर की मजबूरियों ने भेजा है, हमनें यूँ ही शहर नहीं छोड़ा. —–डॉ.मुकेश कुमार (राज गोरखपुरी) www.facebook.com/drmkraj2010

नीर बन जो बह रही धरा पर, थी वह पर्वत की शिरमौर्य कभी, आज तपन बाधाएँ निज पग में, सह रही जो,था उसके जीवन में, भी शीतलता का अंम्बार कभी, पतझड़ में झड़ते पत्ते जो, […]

तेरी मुलाकात मुझे अब याद नहीं है! अश्क की बरसात मुझे अब याद नहीं है! रफ्ता-रफ्ता गुजर रही है जिन्दगी मगर, दर्द़ की सौगात मुझे अब याद नहीं है! Composed By #महादेव

जलती हुई सूरज की किरणों के बीच, तपती हुई हर चीज़, जल, थल, खेत, मकान, गरमी से बोझिल हर जान। ऐसे में मेघों की गङगङाहट, ऊपर नीचे होते चातकों की फरफराहट, बूंदों की चाह में […]

तुझको पा कर वो यूँ नहीँ खोती गर महब्बत हक़ीक़तन होती रिज़्क़ अपना वो साथ लाती है बोझ लड़की कभी नहीँ होती सीपियों से न वास्ता अपना दर्दे दिल के हैं खुशनुमाँ मोती लोग खुशियाँ […]

तुम्हें याद करते-करते खामोश सा हो जाता हूँ! अपने ही जुदा ख्यालों से मदहोश सा हो जाता हूँ! जब भी करीब आता है तेरे ख्वाबों का काफिला, अपने आशियाने में खानाबदोश सा हो जाता हूँ! […]

चलो कुछ लिखते हैं एक अरसा हो गया कुछ लिखा ही नहीं जिसे लिख सकें ऐसा कोई ख्याल दिखा ही नहीं समझ नहीं पाते, लिखें तो कहाँ से शुरुआत करें अपनी, या जग की, या […]

हर ओर उम्मीदें हैं, हर ओर सहारा है। हम बदलेंगें दुनिया को, वक्त हमारा है।। थपेड़े सह लेगें, लहरों से लड़ लेंगे। समन्दर हमारा है, साहिल भी हमारा है।। लाख गहरा हो दरिया, पार उसे […]