दो रोटी गर्म गर्म फूली हुई सी आज भी जो मिल जाये तो मै दौङी चली आऊँ, दो कौर तेरे हाथों से खाने को जो अब मिल जाये, तो मै सब कुछ छोङ आ जाऊँ। […]

तू कहाँ छुप गया है, ना कोई खबर ना पता है, ज़िन्दगी भी वहीं ठहर गई , मेरी दुनिया भी तभी सिमटकर रह गई, लफ़्ज़ ठिठुर रहे हैं, अहसास सर्द पङे हैं, जज़्बातों में जमी […]

घिर-घिर आये मेघा लरज-लरज, घरङ-घरङ खूब गरज-गरज, प्रेम की मानो करते अरज, धरती से मिलने की है अद्भुत गरज। रेशम सी धार चमकीली, नाचती थिरकती अलबेली सी,करती धरती से अठखेली, मानो बचपन की हमजोली । […]

मै कभी भी तुमसे परेशान नही हो सकता, कभी नही,किसी सूरत मे भी नही। तुम कभी मुझे हैरान नही कर सकती, गर ऐसा हुआ, तो बहुत हैरानी होगी। तुम चाहे कुछ भी करो मुझे नाराज़ […]

मिट्टी से गढ़ी है,  नन्ही सी परी है,  ना माँ की दुलारी, ना बाबा की प्यारी, ये सङकें ही घर है इसका , यहीं सारा जग है जिसका । ना गुङिया,मोटर गाङी,  ना बर्तन,कप-प्लेट,ना रेलगाङी,   […]

आज भी मै बेटी हूँ तुम्हारी, बन पाई पर ना तुम्हारी दुलारी, हरदम तुम लोगों ने जाना पराई, कर दी जल्दी मेरी विदाई। जैसे थी तुम सब पर बोझ, मुझे भेजने का इंतज़ार था रोज़, […]

आज चाँद जब कर रहा था अठखेलियाँ, विचर रहा था मेरे आसपास की गलियाँ, मैं भी आँखें मींचे, कर रही थी ठिठोली, दोनों इक दूजे संग खेल रहे थे आँखमिचौली। मैं परदे के पीछे से […]

यादों की गलियाँ सजी हैं, कुछ झालरें,पुराने दिनों की लगीं हैं, कुछ रंगी से दिन हैं बिछे, कुछ रेशमी रातों के पीछे। मेरी खिङकी के नीचे तेरा खङे रहना , चुपके से आकर,मेरी आँखें,अपनी हथेली […]

तबियत कुछ नासाज़ है, दिल ज़रा उदास है, तेरे ना होने से इधर, मैं हूँ बेसुध सी,बेखबर। माथे की बिंदी ना दमके, चमचम चमचम क्यों ना चमके! क्यों फीकी सी पङी है इस कदर, सूर्ख़,फिर […]

खुली हुई हथेलियाँ,मानो, किस्मत की पहेलियाँ l लकीरों का ताना बाना, ना जाना, ना पहचाना, जुडी हुई, ना जाने क्यूँ ! कैसे मेरे नसीब से यूँ , मकड़जाल सी ये रेखाएं , ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ, मानों […]

कुछ अनकहे अलफ़ाज़ , कुछ बुदबुदाते से अहसास, तेज़ होती साँसे, मनचली सी ख्वाहिशें और धडकनों का साज़ , जो देती हर पल आवाज़, यूँ दिल ने कहा , तू कहीं है यहीं , यहीं […]

हसरतें हैं, चाहते हैं और हैं ख्वाहिशें, ज़िन्दगी के रंग बिरंगे बुलबुले खुशनुमा है,खुशफहम है,फिर भी है गर्दिशें, दोस्ती है, है मुहब्बत, साथ फिर भी रंजिशें, खौफ है,और मौत है और हैं यूरिशें, फिर भी […]

बहुत थी मैं उसदिन रोई, अजीब पीङा में जब,माँ गयी पर देखो तो, माँ आई, माँ आई, साथ में अपने,भाई को भी लाई । थकी हुई सी माँ ,साथ नन्हा सा खिलौना माँ लेटी तो […]

दौङना चाहती हूँ मैं, क्या मुझे वो राहें दोगे? दुनिया को देखना चाहती हूँ मैं, क्या मुझे वो नज़रें दोगे? अपने दिन और रातों को रंगना चाहती हूँ मैं, क्या मुझे वो रंग दोगे? खिलखिलाकर […]

जलती हुई सूरज की किरणों के बीच, तपती हुई हर चीज़, जल, थल, खेत, मकान, गरमी से बोझिल हर जान। ऐसे में मेघों की गङगङाहट, ऊपर नीचे होते चातकों की फरफराहट, बूंदों की चाह में […]

भयावह हो,मासूम हो?कैसा है चेहरा तुम्हारा? घूमते हो बीच हमारे, फिर भी ना जाना हमारा, नज़रें तुम्हारी अनजानी सी, अनदेखी, ना पहचानी सी, ना जाने किस किसको ढूढ़ते रहते हो, ना जाने किस किसका शिकार […]

जुङे हुये दो बेरंग लब हैं, इनमें क्यों रंग भरना चाहते हो!! हर अंग मेरा बेज़ुबान है, तुम कैसे उन्हें बुलवाना चाहते हो!! सूखी हुई सी आँखें हैं, इनमें आँसूं क्यों लाना चाहते हो!! टूटा […]

क्या तुम्हे याद है कब हम-तुम मिले थे, काॅलेज के गलियारों में यूँ ही बतियाते चले थे, हल्की सी मूँछों वाले,कमसिन से तुम, जवानी की दहलीज़ पर खङीं,कोमल से हम, वो एक दूसरे से नज़रें […]

अंधियारे को उघाङती हुई, रोशनी सी बिखेरती हुई, वो छुपी सी इक काया, मुस्कुराती हुई ,तुम ही हो ना? शांत सी हवा में मानों,पायल की छमछम,   हल्के से कानों में बजती,साँसों की सरगम, वो […]

खुद को,झूठ के एक लौह जाल में घेर लिया तुमने झूठ का ये लिहाफ़,क्यों ओढ़ लिया तुमने, ये भी झूठ और वो भी झूठ, हर वचन पर,सच जाये टूट, हर मोङ पर तुम्हारे बोल, सिखा […]

क्या मै तुमसे करती हूँ प्यार, हाँ प्यार है, या है इनकार, बङी ही उलझन में पङ गयी हूँ , क्यों तय कर नही पा रही हूँ , कभी लगता है करती हूँ प्यार, कभी […]

कभी भी इतनी दूर ना मुझसे जाना, कि मुश्किल हो जाये पास आना, बहुत लम्बी होती है एक दिन की दूरी भी जब बैठी रहूँ मैं इंतज़ार में,कुछ बेइख़्तियारी सी भी है, जब चिराग की […]

जीवन के सफर में अकेला हर शख्स यहाँ, हर छोटे बङे रस्ते पर अकेले ही चला जा रहा, अक्स बहुत हैं बिखरे इधर, पर अपना ही अक्स सिर्फ दिखे जिधर, आजू-बाजू, पीछे -आगे , कहीं […]

तुम्हारे हाथ का हर एक छाला, चुभा जाता है इस दिल में एक भाला, हर एक रेखा जो तुम्हारी पेशानी पर है, एक दास्तां बयां कर जाती किसी परेशानी की है, बता जाती है वो […]

आसमां, बहुत है पास मेरे, कठोर बहुत हैं हवाओं के थपेङे, निष्फल करती मेरे हर उस कोशिश को, मानो मुझे रोकना ही, उसका एक मात्र ध्येय ये तुम जानो। उङ सकती हूँ इस दुनिया से […]

तितली सी उङती फिरती थी, ठुमक ठुमक कर,इतराती, सारे रंग संजो लेती थी, खुशियों से मुस्काती। माँ-बाबा से बकबक बकबक, भाई से नादां सी खटपट, गुङियों में तमाम ज़िन्दगी जी लेना, सपनों की सुंदर सी […]