Madhumita Bhattacharjee Nayyar, Author at Saavan's Posts

WORLD OF LOVE

Two beautiful souls together, Lost in themselves altogether, In each other’s eyes Their entire world lies, Her flowing hair Shades him from all harm and despair, Her loving arms around him, Filling his life with her love to the brim. Their looks meet, Their smiles sweet, Lips trembling with passion, Hearts full of red velvety emotions, The small love talks, Quietly the hour walks Disturbing ... »

SOLITARY FRIEND

The vast expanse of green High trees weaving a lovely screen And the solitary bench Like me alone, on this ground entrenched, Every morning we both sit together, Share our stories as birds chatter, Her old nuts squeak, My old bones creak, I sit for hours with her, Taking in the beauty around her, Breathing the fresh air, At times saying my morning prayers, My rosary in hand, Trying to reach out to... »

अपनी माँ को तरसती हूँ

दो रोटी गर्म गर्म फूली हुई सी आज भी जो मिल जाये तो मै दौङी चली आऊँ, दो कौर तेरे हाथों से खाने को जो अब मिल जाये, तो मै सब कुछ छोङ आ जाऊँ। तेरे हाथों की चपत खाने को अब तरसती हूँ मै, तेरी मीठी फटकार खाने को अब मचलती हूँ मै, बहुत याद आती हैं हर डाँट तेरी, वो झूठा गुस्सा शरारतों पर मेरी। वो हाथ पकङकर लिखवाना, कान पकङ घर के अंदर लाना, वो घूमती आँखों के इशारे तेरे, भ्रकुटियाँ तन जाने तेरे, मुझको परी बना... »

ओ हरजाई

तू कहाँ छुप गया है, ना कोई खबर ना पता है, ज़िन्दगी भी वहीं ठहर गई , मेरी दुनिया भी तभी सिमटकर रह गई, लफ़्ज़ ठिठुर रहे हैं, अहसास सर्द पङे हैं, जज़्बातों में जमी है बर्फ की चादर, चाहत की आग सुलग रही पर दिल के अंदर। अधर अभी भी तपते हैं, तेरे अधरों को महसूस करते हैं, आँखों में आ जाती नमी है, सब कुछ तो है मगर,एक तेरी कमी है, नज़रों को तेरे साये का नज़र आना भी बहुत है, तू जो दिख जाये तो ‘उसकीR... »

FREEDOM

Am I really free? Then why am I tied to thee My husband, my father, My son, my brother? Why are my wings clipped? Why am I not equipped With schooling and education Despite my adjurations! Am I just meant to stay at home! Why cannot I too like my brothers roam? Why are my demands met with silence And taken as my defiance? I should be free to study, Like everybody, To run and play, Sunday,Monday an... »

बरखा रानी

घिर-घिर आये मेघा लरज-लरज, घरङ-घरङ खूब गरज-गरज, प्रेम की मानो करते अरज, धरती से मिलने की है अद्भुत गरज। रेशम सी धार चमकीली, नाचती थिरकती अलबेली सी,करती धरती से अठखेली, मानो बचपन की हमजोली । बूंदों के मोती, हर पत्ते पर गिरती, आगे पीछे हिलती डुलती, फिर उनपर चिपक कर बैठी। किया है स्नान आज फूलों ने, खिल-खिल गयीं आज बूंदों से, रेशम सी पंखुङी में बंद कर कुछ मोती क्षण में । मीठी-मीठी बरखा की फ़ुहार, शीतल ... »

जलन

मै कभी भी तुमसे परेशान नही हो सकता, कभी नही,किसी सूरत मे भी नही। तुम कभी मुझे हैरान नही कर सकती, गर ऐसा हुआ, तो बहुत हैरानी होगी। तुम चाहे कुछ भी करो मुझे नाराज़ करने को, मै तुमसे कभी भी रूठ सकता नही। तुम कितनी भी कोशिशें कर लो मुझे जलाने की, कोई जलन कभी मुझे छू भर भी सकती नही। तुम चाहे किसी गैर के साथ आओ, किसी भी पुरुष के साथ जाओ, चाहे हज़ारों लब तुम्हारे जुल्फों में दिखें, या सैंकडो दिल तुम्हारे... »

FORGIVE

He was just like the fragrance, Only the essence, Could feel his presence Everywhere,every minute and second. What will happen to her, The beautiful,radiant flower, Freshly bathed in the dew drops shower, But losing her sheen every hour. She thought it was a minor injury, Would heal in a hurry, In deadning pain and misery, It was about him,she did worry. She could not figure that he was in her, In... »

Rain and Love

Ahh!! Those ole rainy days, Incessant water pouring through the whole day, You and me walking hand in hand, Towards distant dreamlands, Through the drizzle and sirimiri,  Amazed at nature’s glory, The dark sky overloaded With clouds heavy and ready to explode, Clouds like the heavily pregnant woman, Within her carrying triplets or twins. Our wet bodies with running streams  Of water;cold and close... »

परी

मिट्टी से गढ़ी है,  नन्ही सी परी है,  ना माँ की दुलारी, ना बाबा की प्यारी, ये सङकें ही घर है इसका , यहीं सारा जग है जिसका । ना गुङिया,मोटर गाङी,  ना बर्तन,कप-प्लेट,ना रेलगाङी,   कोई खिलौना नही खेलने को, नही कोई झूला झूलने को, बस है भूख और गरीबी, कोई और नही,बस यही दोनों इसके करीबी। ऊपर खुला आसमान,  नीचे गर्मी और थकान,  कभी सर्दी की रातों की ठिठुरन, कभी बरसात में बचता,बचाता भीगता बदन, सूरज,चंदा इसके... »

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