ना तो इन्कार करते हैं ना ही इकरार करते हैं, मेरी हर अताओं को सरज़द स्वीकार करते हैं, हया की तीरगी को वो नज़र से खा़क  करते हैं, भरी महफिल में भी मुझसे निगाहें चार […]

मैं ! जटिल था ; आपने , कितना सरल-सा कर दिया । सोचता हूँ ; शुष्क हिमनद , को तरल-सा कर दिया ॥ खाली सीपों का भला , बाज़ार में क्या मोल होता ? आप […]

ये मत सोंचो एक कलम के बूते पर मैं दुनिया रोज बदलता हूँ । ये मत सोंचो कवि हूँ मैं तो बस कविता कर सकता हूँ ।। ठेले पर सपनो की दुनिया, लेकर चलने वाला […]

मनहरण घनाक्षरी रण में लड़े जो सदा, शत्रुओं से डरे बिना वीरों में भी वीर ऐसे राणा अति वीर थे । धर्म देश जाति नीति, का सदैव मान रखे त्याग तप ज्ञान बुद्धि, की बड़ी […]

भयावह हो,मासूम हो?कैसा है चेहरा तुम्हारा? घूमते हो बीच हमारे, फिर भी ना जाना हमारा, नज़रें तुम्हारी अनजानी सी, अनदेखी, ना पहचानी सी, ना जाने किस किसको ढूढ़ते रहते हो, ना जाने किस किसका शिकार […]

ढ़ूँढ रही मैं बावरी, अपने हिस्से का, स्वर्णिम आकाश, टिम-टिम करते तारे, हाय! सुख-दुख के, बन गए पर्याय , तम घनेरा ऐसे , छाय जैसे चन्द्र में ग्रहण लग जाए, मौसम आए मौसम जाए, कभी […]

ओ; तट पर बैठे, तटस्थ लोगों ! सुनो, मेरे सन्मुख ; लक्ष्य है —- राह नहीं है मैं; धारा पर धारा—प्रवाह मुझे विराम की चाह नहीं है ॰   तुम; क्या समझे ! डूब जाऊँगा […]

जुङे हुये दो बेरंग लब हैं, इनमें क्यों रंग भरना चाहते हो!! हर अंग मेरा बेज़ुबान है, तुम कैसे उन्हें बुलवाना चाहते हो!! सूखी हुई सी आँखें हैं, इनमें आँसूं क्यों लाना चाहते हो!! टूटा […]

क्या तुम्हे याद है कब हम-तुम मिले थे, काॅलेज के गलियारों में यूँ ही बतियाते चले थे, हल्की सी मूँछों वाले,कमसिन से तुम, जवानी की दहलीज़ पर खङीं,कोमल से हम, वो एक दूसरे से नज़रें […]

  पल-पल, छिन्न-भिन्न टूट  रहा भ्रम , अपनी छाया ढूँढ़ रहा मन, अब तक निज पद- चापो में, तेरी छाया देख रही थी, स्व अरमानों की वो माला, तेरे धागे में पिरो चली थी, दिल […]

पल-पल, छिन्न-भिन्न टूट  रहा भ्रम , अपनी छाया ढूँढ़ रहा मन, अब तक निज पद- चापो में, तेरी छाया देख रही थी, स्व अरमानों की वो माला, तेरे धागे में पिरो चली थी, दिल के […]

कहो कोई तो कि आज फिर से शाम हो जायें, मजबूर हूँ बन्द आँखों से कुछ भी दिखायी नहीं देता, मैं सन्नाटे में क्यों कर बोलता रहता, मेरे अल्फ़ाजों को भी क्या कोई गवाही नहीं […]

****सोचना भी मत में कमजोर नहीं **** मुझे अपना पसंद का चिकन ब्रियनि खाने की तरह सोच कर खाने  की सोचना मत भी मत मेरे करीब आकर मुझे छूना भी मत , में कमजोर नहीं ओरत […]

तम्हारे हाथों की मेहंदी से मेरा नाम मिट गया वह तुम्हारी मोहब्बत है लेकिन मैं अपनी नज़्मों से तुम्हें जाने न दूंगा ये मेरी मोहब्बत है ।

मिले वो ज़ख्म के सारे अजीब लगते हैं पराये अपने हमारे अजीब लगते हैं जो तुम थि साथ अँधेरे से दिल बहेलता था जो तुम नहीँ तो सितारे अजीब लगते हैं कली कि शक्ल से […]

हर शक्स अपने आप में बिमार जैसा है! दिल में है दर्द आँखों में खुमार जैसा है! जल रहा है दामन हरतरफ उम्मीदों का, जिन्द़गी से हर कोई लाचार जैसा है! Composed By #महादेव

करुणा की बारिश हुई, लथपथ हुआ शरीर ! देहियां में दीपक जला, लउका परम शरीर !!   एक रूप सब में बसा, एक ही बना अनेक ! सागर गागर में दिखे, सूरज एक अनेक !! […]

“हक मेरी माँ को होता”   मेरी तकदीर में जख्म कोई न होता, अगर तकदीर बनाने का हक मेरी माँ को होता,   मेरी तस्वीर पे आज धूल न होता, अगर तस्वीर पोछने का हक […]