आज अर्ध-निद्रा में ही कुछ जागने की चेष्टा की जाने कितनी दूर चलकर मैं जाने कहाँ पहुँच गई ! अर्द्ध विक्षिप्त अवस्था में, देखा तो हजारों पुष्प सोने के सरोवर में स्नान करके पूजा करने […]
आज अर्ध-निद्रा में ही कुछ जागने की चेष्टा की जाने कितनी दूर चलकर मैं जाने कहाँ पहुँच गई ! अर्द्ध विक्षिप्त अवस्था में, देखा तो हजारों पुष्प सोने के सरोवर में स्नान करके पूजा करने […]
आकांक्षाओं माला इतनी वृहद होती है कि उनकी एक माला जपते-जपते हीरे जैसे कीमती संबंध बिखर जाते हैं ।।
करो काम भगवान् का, रखकर हरपल ध्यान सब जीवों के ह्रदय में, बसते हैं भगवान् बसते हैं भगवान्, दिखावा नहीं जरूरी रक्षक बन ईमान, आवश्यकता कर पूरी कह पाठक कविराय, प्रेम से खाई भरो सब […]
बच्चे बूढ़े युवक सब, ले साधन संचार अपनो से हुए दूर औ, तस्वीरों से प्यार तस्वीरों से प्यार, बढ़ी संवाद हीनता मोबाइल मन लीन, ऊर्जा रहा छीनता कह पाठक कविराय, सभी उपकरण हैं अच्छे सीमित […]
तलाश करने जो चले सुकून के पल घूमकर आ गये वहीं जहां से चले होके बेकल। मन में भी सुकून नहीं फिर ढूंढते फिरते कहां जीवन पे ही छाया ग्रहण छिनती सांसों की गिनती कहां […]
किसका शौक पूरा हुआ है, गम खुशी में जीवन रहा है, जो दिखावा कर रहे जमाने में, खुशी के लिए बहुत कुछ सहना पड़ रहा है, हालत ने पटका ऐसे, जो कल जी रहें थे […]
घर की फुलवारी उजड़ गयी,सब गलियां सूनी हुई जांय, हंसी ठिठोली अपना सुनावे,सुनने को कान तरस है जाय, इस महामारी से बचने को एकै उपाय यही सुझाय, दो गज दूरी मास्क जरूरी, सब जन लेव […]
कोरोना महामारी आयी हाहाकार है दियो मचाय, अंतर्मन चित्कार करें अब,कैसी दहशत दियो फैलाय, ज़रा सी खांसी और जुकाम से,पल में अपने दूर हुइ जांय, बुखार चढ़े ज्यों सौ से ऊपर,घर में क्वारंटाइन हुई जांय, […]
हृदय पर कितने पत्थर रखे हैं हिसाब नहीं हम तुम्हें याद कर कितना रोए हैं हिसाब नहीं। तुम देते रहे सितम अपनी मदहोशी में हमारे जमीर को कितनी चोट लगी हिसाब नहीं।।
मन बूढ़ा हो गया मगर ना मन की पीर गई सडकों पर ही जन्म लिया और सड़कों पर ही मर गई, कोढ़ की काठी, कोढ़ की काया, कोढ़ हुआ यह जीवन मन खनके कितने कंगना […]
नेताओं के बेटे क्यूं नहीं बनते सिपाही ? माना की राजनीति उन्होंने विरासत में पाई युवा नेता खुद को बताकर करते रहते तानाशाही यदि शहीद कहीं पर हो जाए कोई सैनिक ढाँढस बंधाने के नाम […]
भारतीय संस्कृति, अमिट अडिग अति सुन्दर मनभावन, स्वीकृत भावों की भंगिमा है जिसे अपनाया सहेजा संवारा और ह्रदय तल से स्वीकृत किया जाता है जो सदा सबका हित लिये रहती है और संस्कारों की धरोहर […]
बीच सड़क पर जलते देखो शोले और अंगारे, बूढ़े बच्चे और जवान इस अशांति से हारे। प्रेम से रहने का पाठ पढ़ाती है हमारी संस्कृति, अंतरराष्ट्रीय शांति पर कितनी लिखी जा चुकी हैं कृति। पर […]
ये रिश्ते अब अमानत इन्हें तुम ऐसे मत तोड़ो अगर कोई शिकायत है तो हमसे बेझिझक बोलो मगर ए हुस्न के मालिक ! ना इतरा तू इस तरह से क्षणिक है हुस्न की महफिल इसे […]
दिल के दर्मियां कुछ जख्म हरे हो रहे हैं वो हमारे और करीब हो रहे हैं वह अब यह नहीं जानते इन रिश्तों से मेरा दम घुटने लगा है हमें अब उनके सहारे से ज्यादा, […]
फूलों से भी प्यारा लगता रिश्तों का यह मेला जिन रिश्तों ने मुझको पाला दिया जीवन को नया सवेरा कुछ रिश्ते दम घोंट रहे जो स्वार्थ की करते सवारी हैं जो देते हैं मुझे प्रेरणा […]
रुदन कर रही देखो प्यारे गौ माता निज राहों में अपने बछड़े को मनुहार से बुलाती आजा प्यारे बाहों में अब यह दुनिया नहीं रही विश्वास के लायक गौ माता बस एक जानवर हो चाहे […]
मन को परेशान मत करो गंदे विचारों से सीख लिया करो कुछ नदी के किनारों से मस्तिष्क में आएगे भूकंप के झटके बच कर रहना चाहिए घर की दीवारों से
यारों ! ये कैसा कहर हो गया। बंद खिड़कियों का शहर हो गया।। बाहर बीमारी, भीतर लाचारी देख आबोहवा भी जहर हो गया।। मुँह पे पट्टी चढ़ी, पेट में खलबली दवा संग दुआ भी बेअसर […]
रिमझिम रिमझिम बरस रहा पानी है चल रही शीतल हवा शाम ये सुहानी है हरी हरी घास से धरती करे मुस्कान कह रही प्रिय तम से मिलने की कहानी है
आई है जब से महामारी ये मितवा हर तरफ का मंजर दुखदाई है मितवा न हर्षित मन न पुलकित तन गुनगुनाया जाये न कोई गीतवा सरकार अऊ डॉक्टर देते एकै संदेशवा ‘दो गज दूरी’ और […]
अकसर ये ख्याल उठते जेहन में रात तूं किधर ठहर जाती पलक बिछाए दिवस तेरे लिए तूं इतनी देर से क्यूं आती।। थक गये सब जर-चेतन थका हारा है सबका मन आने की तेरी आहट […]
सागर के सीने पर उठने वाले ये विकराल तूफ़ान, वास्तव में उसकी पीड़ाएँ हैं, जो रह-रह के उद्वेलित होती रहती हैं, उस नदी की प्रतीक्षा में जिसे सागर में विलीन होने के पहले ही सोंख […]
मानवता की सच्ची सेवा है सच्चे सुख का श्रोत है सहयोग चले गए अंग्रेज बापू का असहयोग आंदोलन जारी है बापू ने तो अत्याचार के खिलाफ चलाया था बड़ा भयानक है आज अपनो के ख़िलाफ़ […]
रामायण में जिक्र आता है कि रावण के साथ युद्ध शुरू होने से पहले प्रभु श्रीराम ने उसके पास अपना दूत भेजा ताकि शांति स्थापित हो सके। प्रभु श्री राम ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि […]
समूची इंसानियत के हक-हकूक की बात ऊंचे-ऊंचे ओहदे पर आसीन जनों की असली औकात भुला पाना आसान नहीं। बदतरी में बेहतरी तलाशने की नाकाम कोशिश क़ातिल पंजों की पकड़ से निकलने की कोशिश भुला पाना […]
अब मिठास बची कहां ना रिश्तो में ना नातों में ना अपनों की बातों में कड़वाहट के बीज बोयें जा रहे ना जाने कहां-कहां ? अब मिठास बची कहां ? बातें भी शुरू होती सिर्फ […]
यह मन बड़ा चंचल कभी डोलता इधर कभी डोलता उधर ना जाने कब हो जाए किधर कभी दूजे की कभी अपनी फिकर मन में चलता रहता उछल-पुथल कभी रहती सद्भावना कभी रहता स्वार्थ कभी सोचे […]
अदृश्य, अकल्पनीय, प्रारब्ध की ऊँघ, उच्छ्वास प्रकृति का है मां का प्यार प्रभाकर की रोशनी से भी तीव्र है ममता की लौ जिसमें पुलकित होते हैं नन्हें सुमन और देते हैं जहान को सुन्दर सुगंध […]
परिवार है एकता के सूत्र की माला, जिसमें हर सदस्य समाया है, जीवन रूपी नैया को, रंग बिरंगे रंगों से सजाया है, परिवार है हमारा रक्षा कवच, जिसने ढाल बनकर, हमारा अस्तित्व बचाया है, बिखरे […]
परिवर्तन प्रकृति का नियम है बदल जाएगा कोरोना संसार से सदा के लिए भाग जाएगा फिर से पटरी में दौड़ेगी समय की ट्रेन इंतजार कर फिर से हँसेगा और मुस्कुराएगा
आजकल मन बहुत उदास है ना जाने इसे किसकी तलाश है मुश्किल भरे दौर को बनाना खूबसूरत और खास है
भोजपुरी देवी पचरा गीत- सोनवा असनवा देई के | काली मइया के बोलईबे सोनवा असनवा देइके | मोर महारानी के सुनइबे गीतवा डासन गाइके| केवन सवारी चढ़ी अईहे मोर मईया , केवन रुपवा है काली […]
मेरे मन अकेला जानकार मुझे सहानुभूति का भाव भरो अर्जुन नहीं हूँ परंतु अभिनय करना है श्रीकृष्ण सा समझाया करो भगवान् का अस्तित्व स्वीकार है खाली समय प्रभु भक्ति में विताया करो प्रदूषण में भी […]
जग गया हूं प्रभु फिर एक बार शुक्रिया धन्यवाद कोटि-कोटि बार हर दिवस का जब होता अवसान अंदेशा रहता होगा कि न होगा बिहान तुझ पर भरोसा है भारी होगा कल्याण सांसों की पुंजी का […]
जुल्म सितम बढ़ रहा था हर तरफ मै हुयी बिल्कुल अकेली ना कोई पास मेरे ना कोई साथ मेरे किससे करूं हंसी ठिठोली तभी नजर आई मुझे कलम कलम बोली मुझसे क्यूँ रहती हो अकेली […]
दुख दर्द किसको सुनाए सब अपने मे खोए हुए हैं बुरा सपना देखकर जागे हम सब सोए हुए हैं मन का बोझ हल्का होता कुछ बाते करने से गैरों का क्या कहना जब अपनो से […]
हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है दुश्नाम[1]! तो नहीं है ये इकराम[2] ही तो है करते हैं जिस पे ता’न[3], कोई जुर्म तो नहीं शौक़े-फ़ुज़ूलो-उल्फ़ते-नाकाम ही तो है दिल मुद्दई के हर्फ़े-मलामत[4] […]
मुक्तक —————- मै मुर्गी खाऊ वो पाप बताते हैं वो कुकुरमुत्ता खाएं गर्व से स्वाद बताते हैं आगे से निकला पीछे से निकला उसका ऐसा वैसा स्वाद बताते हैं, शाकाहारी मांसाहारी कह करके सुबह शाम […]
गम के दौर में भी खुशी खोज लेना है बांट ले दुख दर्द अपनो का साथ देना है घर में हंसी खुशी का वातावरण रहे डूबे न नाव करना तैयार एक सेना हैं
घर की चारदीवारी से बाहर कब जाएंगे कोरोना से हार गयी जिंदगी इसे कब हराएंगे गति रुक गई है दुनिया की प्रश्न गूंजते हौसला के पंख फिर से कब आयेंगे
मुस्किल घड़ी में भी हम घबराए नहीं भगवान् से दूर कभी जाए नहीं वक्त बुरा है इंतजार कर रहे हैं क्यूँकि अभी अच्छे दिन आए नहीं
विश्वास रखते हैं पर फिर भी टूट जाता है जब कोई जनाजा सामने से गुजरता है क्या कमी थी इस जहान में सब कुछ तो था इतनी खूबसूरत थी दुनिया कोरोना का डर ना था […]
कुछ उम्मीदों के सिक्के यूं ही खनकते रहते हैं हम आगे बढ़े, तुम आगे बढ़ो ये ही कहते रहते हैं पर क्या करें पैरों में बेड़ियां हैं सपने बड़े हैं पर रास्ते में रोड़ियां हैं […]
मत गंवाओ जीवन खाने और सोने में मत गंवाओ जीवन हँसने और रोने में हर काम का हिसाब देना पड़ेगा जान मतलब तो कुछ निकाल इंसान होने में
क्या पाया नहीं तूने क्या माँग रहा है कब का हुआ सवेरा अब जाग रहा है भगवान् के सम्मुख ख़ुद का कर समर्पण रनछोण दास जैसे क्यूँ भाग रहा है
जारी रहता है जीवन में समस्याओ का आना जाना मुकाबला करो इनका मत बनाओ बहाना संघर्ष बिना जीवन में सौंदर्य नहीं आता गिरना स्वभाव है मगर फिर से संभल जाना
मत डरो रात से सुबह आएगी सदा नहीं रहा कोई कैसे रह जाएगी गम में डूबी हुई दुनिया फिर से खिलखिलाएगी और मुस्कुराएगी
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