सावन परिवार के सभी सदस्यों को विश्व परिवार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।। ना पड़े रिश्तो में कोई दरारें अब न टूटे न बिखरे कोई परिवार मिलता रहे सभी को अपनों का स्नेह और प्यार जात-पात […]

चांद आया है जमीं पर आज मिलने को गले रमजान पूरे हो गए और ईद मिलने हम चले रोंकती राहें हमें है मिलने जा तू ना कहीं खौफ दिल में ये भरा है साँस थम […]

मेरे गतिशील पैरों को आखिर तुमने रोक लिया फूल तुम्हारा शुक्रिया नतमस्तक हूँ तुम्हारे निश्छल स्वभाव के सामने थकी उबी आँखो के तारा हो तुम हिरण की तरह उछलने वाले मन को ठहरे हुए जल […]

ना सोचा था हमने कभी भी ऐसे दिन में आएंगे घर में बैठकर तोडेंगे रोटी कमाने कहीं ना जाएंगे होंगे इतने आराम पसंद दरवाजे पर ही सब्जी लेंगे जो बन जाएगा वह खा लेंगे दिन […]

मोहब्बत का पैगाम लेकर आया है यह चांद अम्मी, अब्बू, खाला और आओ भाई जान बड़े तसव्वुर से गुजरे रोजे-रमजान ईद मुबारक हो सबको हिंदू हो या मुसलमान मस्जिद से आया बंदों एक जरुरी पैगाम […]

अभी तो शुरू ही हुई थी मेरी उड़ान पंख थे नए बस चाहत थी ऊपर उड़ने की कुछ करने की मेहनत बना था जुनून सफलता पाने की तीर निकलने ही वाला था धनुष से यह […]

अभी तो शुरू ही हुई थी मेरी उड़ान पंख थे नए बस चाहत थी ऊपर उड़ने की कुछ करने का महीना तो बना था जानू सफलता पानी के 3:00 निकलने ही वाला था धनुष से […]

अभी तो शुरू ही हुई थी मेरी उड़ान पंख थे नए बस चाहत थी ऊपर उड़ने की कुछ करने का महीना तो बना था जानू सफलता पानी के 3:00 निकलने ही वाला था धनुष से […]

भोजपुरी पूर्वी लोक गीत-आइल बिपतिया | आइल बिपतिया भइल पागल जईसन मतिया | नींदिया आवे ना सारी रतिया , उपईया कूछ करा मोदी जी | बहरे ना जाये पाई मन पगलाता | घरवे मे रही […]

मानवता निष्प्राण पड़ी है कब से देखो तड़प रही है कोई सहारा देने ना आया कितने लोगों की भीड़ लगी है कोई खींचता फोन से फोटो मेरी लाईव वीडियो वायरल हुई है हाय करे कोई […]

देखो बरस रही ठंडी फुहार, बदलियां भर आई। काले-काले मेघा उमड़ घुमड़ रहे, गरज गरज कर शोर सुना रहे, फिर दामिनी तड़की आया झंझावात, बदलियां भर आई। वन में नाचे मोर -मोरनी, प्रकृति का कैसा […]

इक्कीसवीं सदी के बच्चे हैं अपनी संस्कृति से अंजान, रामचरितमानस हो या हो भगवत गीता,इनका तनिक भी नहीं ज्ञान, पूछा कुछ बच्चों से….. कौन था रावण और कौन थे श्री राम, कौन थी अपनी सीता […]

झूठ की मिट्टी डालकर दफनाया गया है सत्य को परंतु वह अभी भी जीवित है मरा नहीं देर से ही सही भयानक रूप धारण कर सामने आएगा एक दिन वह एक दिन ऎसी अंधेरी रात […]

कविता- कुष्ठ रोग से पीड़ित माँ ————————————— साहब मुझको पैसा दे दो बच्चों को मेरे भोजन दे दो ठंड लगती है भारी अब तो इन बच्चों को कपड़ा दे दो क्या है गरीबी जाने बच्चे […]

पलक झपकते ही खो हो गए कितने ही मुस्कुराते चेहरे, जो कल तक थे हमारी कहानी का हिस्सा जैसे किसी चलचित्र में क्षण में बदल जाते हैं दृश्य…!! कितना कुछ बाक़ी रह गया जो कहा […]

सदियों पुरानी मर्यादाओं को क्षण भर में तोड़ देना अपने अब वही है जो जानते हैं नीबू जैसे निचोड़ लेना बहुमंजिला इमारत के नीव के पत्थर गायब है फिर ऎसा विश्वाश कैसे आया कि इमारत […]

कोरोना से सिमटते परिवारों की व्यथा:- कैसा जीवन हाय ! हमारा लगता ना कोई भी प्यारा मम्मी, पापा, दादी, बाबा भाई जो कल ही था दुनिया में आया, चले गए सब छोड़ मुझे अब कौन […]

असमंजस में जीवन गुजरा विपरीत दिशा जाती सांसें कोहराम मचा चहुँ ओर रोती बिलखती दिखती आंखें पीर उठे दिल में ‘प्रज्ञा चीख उठे पत्थर दिल भी ऐसे दृश्य ना देखे हमने कल्पना भी कभी न […]

प्रभु तुम्हारे चरणों में प्रातः वन्दन करता हूँ। जग का संकट दूर करो पीड़ित क्रन्दन करता हूँ।। व्याकुलता में सब जन तेरे कोरोना के मारे हैं। रक्षा करो करुणामय स्वामी पूत कपूत तुम्हारे हैं।।

सुबह का चाय बड़ा हीं मीठा । मीठी सोच विचार भी मीठा।। गमी खुशी से दूर कहीं कवियों का संसार भी मीठा। सुप्रभात विनयचंद आखे सावन का परिवार भी मीठा।।

केवल आकार का अंतर होता है आग की लपट और चिंगारी में परन्तु समान होता हैं उनका ताप और गुणधर्म उसी प्रकार सुख भी चाहे छोटा हो या बड़ा, हो क्षणिक या दीर्घकालिक, उसकी प्रकृति […]

गलियों को छोड़ हम इन्कलेभ में आ गए। छोटे छोटे घर आज महलों में छा गए।। दूर हो गए चाचे – ताए पड़ोसियों में छाया मतभेद। पाकर अकेलापन में बन्धु विनयचंद के मन में खेद।।

हे ईश्वर हम सब तेरी ही संतान करती हूं प्रार्थना इतनी सी, प्रभु दे दो वरदान मत छीनो हम बच्चों से मां पापा के साए लौटा दो अपने बच्चों की फिर से मुस्कान मत छीनो […]

सगे संबंधियों को भी बुलाते हैं केक काटने से पहले मोमबत्ती भी बुझाते हैं पर यह क्या ?? जिस कुलदीपक और घर की लक्ष्मी की खातिर मंदिरों में दिए जलाते हैं जिन के खातिर पूजा […]

बेटी को घर की लक्ष्मी और बेटे को घर का कुलदीपक बुलाते हैं, आए जब भी बेटी और बेटे का जन्म दिवस, बड़ी धूमधाम से जन्मदिन मनाते हैं, हुई सजावट रंग-बिरंगे गुब्बारों से, मंगाया सुंदर […]

कोरोना ने कर दिया, तन मन धन बर्बाद हे भगवान् करवाइए, अब इससे आजाद कोरोना से रुक गया, दुनिया सकल विकास दवा बनी जिसकी कमी, करती गयी हताश मास्क लगाकर कीजिए, कोरोना को दूर छह […]

भोजपुरी गजल – इश्क के दिया | दिल मे उठत ना दरद हमके तू आपन कहले रहतू | तरप दिल हाथ थमले ना रहती तू आपन मनले रहतू | उठाईके नजर मगर हमरा देखलु ना […]

रास्ते से एक विछिप्त महिला थी गुजर रही, याकायक मेरी नजर पड़ी, चली जा रही थी अपनी धुन में, ना जाने क्या थी बड़बड़ा रही, कुछ बच्चों ने उस पर पत्थर चलाएं, कुछ बच्चे उसे […]

हरदम शिकायत तूं मुझे माना करती कहां निमकी-खोरमा छिपा के रखती कहां भाई से‌ ही‌‌ स्नेह मन में तेरे यहां रह के भी तूं रहती कहां। जब भी कुछ बनाती, आंखें छलक आती तेरी गर […]

यह तन तो है माटी का बंदे, माटी में मिल जाएगा, जब अंत समय आएगा तो, सब यहीं धरा रह जाएगा। किस बात का है अभिमान तुझे, किस बात पर तू इतराता है, यह पैसा- […]

मन में उल्लास धधकता रहे अंगार की तरह हार के बाद भी जीत जाने की संभावना बनी रहे बीपत्तियों का सामना करे पहाड़ की तरह उम्मीद के दीपक जलाकर अंधेरे में चले अपनो के विश्वाश […]

माँ मैं फिर जीना चाहती हूँ, आपका प्यारा बच्चा बनकर, माँ मैं फिर सोना चाहती हूँ, आपकी गोद का झूला लेकर, माँ मैं फिर से दुनिया से अनजान बन कर आप के आँचल की छाया […]

माँ के बारे में कविता लिखना बहुत ही खुशी की बात है| पर मेरी माँ के बारे में चंद शब्दों में व्यान नहीं हो सकता है| माँ मेरे लिए ही नहीं हर किसी के लिए […]

मेरी नन्ही सी गुड़िया, मेरी जान, मेरी बच्ची, मुझे अच्छा नहीं लगता तुम्हें यूँ ही छोड़ कर ऑफिस आना, मेरी इच्छा है कि हर पल तेरे पास और तुम्हें गोद में लिए रहूँ। तेरी तोतली-2 […]

नई रौशनी कर रही है तेरा इंतजार यॅंहा । तू है वहाॅं, उसे भी तेरा इंतजार है। आजा लौट कर, बहुत सुनहरी दुनियाँ है, तेरे लिए सजाया है प्रभु ने सुखद संसार यहाँ॥ ____✍गीता

मैं अर्धविक्षिप्त अवस्था में थी, निकाल कर ला रही हूँ धीरे-धीरे स्वयं को । मेरे पाॅंव में डाली हुई आपकी नेह की डोर, लेकर आ रही है मुझे जिंदगी की ओर। आपके नेह का ऑंचल […]

है नामुमकिन मिटा पाना मेरे दिल से मोहब्बत को तेरी नजरों की शोखी को होंठों के हस्ताक्षर को जो तन से लेकर मन तक छपे उन मौनी चुंबनो के ठप्पे मिट कैसे पाएगें लगे तन […]

मेरी कलम और मेरी स्याही लिखते लिखते बोल रही ओ सखि ! तू किन ख्वाबों को पन्नों पर उकेरती रहती है ? रातों को जगकर खामोंखा जाने क्या लिखती रहती है! मैं बोली- ओ बावरी […]

तू किसी रेल-सी गुजरती है मैं पटरी-सा थरथराता हूँ दूर तुझसे नहीं रहता तेरा स्पर्श पाता हूँ जवाबों की सवालों की कहाँ बातें रहीं अब तो तू मेरी साँसों जैसी है मैं जीवनदान पाता हूँ […]

जो गज़लों में मोहब्बत हो तो कैसा हो ? तो कैसा हो ? जो आँखों में शरारत हो तो कैसा हो ? तो कैसा हो ? छनक कर तू मिले लफ्जों-सा मुझसे चूम ले मुझको […]

हर पन्ने पर तुम मोहब्बत को लिखते हो किसी की मोहब्बत में खोए से लगते हो आज पढ़ी तुम्हारे दिल की डायरी उलटकर मोहब्बत की तालीम लिये से लगते हो यूं तो हमारे बीच कोई […]

जो मनुज होते हैं धरातल पर ही रहते हैं जो दनुज होते हैं पवन में उड़ते रहते हैं रावण का अहंकार जब हद से बढ़ता है, लेकर धनुष और तीर राम संहार करते हैं यह […]