सीमित शब्दों में मैंने रखी है अपनी बात सुंदर-सुंदर वृक्ष हैं चिकने इसके पात, चिकने इसके पात है आभा बड़ी मनोरम सुंदर-सुंदर पुष्पों से भरा है आंगन कैसी सुंदर छटा है कितनी सुंदर बात यूं […]
सीमित शब्दों में मैंने रखी है अपनी बात सुंदर-सुंदर वृक्ष हैं चिकने इसके पात, चिकने इसके पात है आभा बड़ी मनोरम सुंदर-सुंदर पुष्पों से भरा है आंगन कैसी सुंदर छटा है कितनी सुंदर बात यूं […]
मानो अगर मानव संसार ही परिवार है फिर क्यूँ उठा रहे बंदूक औ तलवार है इंसानियत के नाते सहयोग सबका करना कर्तव्य कर संसार में करना तुम्हें अधिकार है
पाया है मानव तन तो उपकार कीजिए छोटे बड़े सभी से ही प्यार कीजिए उदर भरना जानवार भी जानते हैं खूब नफरत से नहीं प्रेम से अधिकार कीजिए
मिलता रहे प्यार अपनो से दूर ना हो कर न सके बात इतना मजबूर न हो समझे एक दूसरे के जज्बात को किसी भी परिस्थिति में क्रूर ना हो
मत करो प्रार्थना बाधाओं को आने दो मुकाबला करो और जाने दो हिम्मत रखो तो बाधा॒एं झुक जाती है कह दो बाधाओं से रोयेंगे नहीं गाने दो
नदी के किनारे है जीत और हार नदी का बहता पानी है तुम्हारा प्यार नौका की जरूरत नहीं साथ रहो पार कर जाएंगे नदी की मझधार
अपनो से कैसी प्रतियोगिता हम हार जाएंगे आँगे बढ़ेगे अपने हम मल्हार गाएंगे तुम्हारी ऊंचाइयों की छाँव में रहकर हम जीने के लिए तुमसे उपहार पाएंगे
मुश्किलों का दौर है घबराए गे नहीं घर के बाहर अभी जाएगे नहीं छुआ छूत की बीमारी आई है सावधान रहेगे तो पछताएगे नहीं
वो भी योद्धा है जो जंग के मैदान में हार जाते हैं पूंछता नहीं कोई समाज वाले भी मार जाते हैं सहानुभूति की जरूरत है हारे हुए योद्धा को पा जाए सहारा तो मंजिल के […]
मुह जो नहीं कह सकता वो कलम कहेगी जुल्म होगा तो चुप नहीं रहेगी कलम को मत मानो कमजोर हथियार अत्यचारियों के रक्त की धारा बहेगी
सहयोग, श्रम, शांति बहुत जरूरी है करते रहे प्रयास भले मजबूरी है मानवता के आभूषण है तीनो इनके बिना मानवता अधूरी है
कविता विचारों को व्यक्त करने का बहाना है कविता सच्चाई को सुनना और सुनाना है कविता अक्सर बन जाती है अपने आप कविता संसार से रागात्मक संबंध बनाना है
एक रोटी के लिए अक्सर कुत्ते लड़ जाते हैं आदमी वो है जो मिलबाँट कर खाते हैं आदमी वो है भूखे रहकर मां की तरह खाते हैं बाद में पहले खिलाते हैं
सावन की आभा खिले खिले विश्व में चहुँ ओर लेखनी मेरी प्रखर हो हो दीप्तिमान चहुं ओर नेह की सुंदर कलम से लिखा हुआ साहित्य स्वार्थ हीन हो हिय मेरा ईर्ष्या हीन कर्तव्य दीनों के […]
मिलता प्रेम अपार है मिलता यहां सम्मान अपनी लेखनी से सदा बढ़े विश्व का मान बढ़े विश्व का मान लेखनी ऐसी हो मेरी ना मन में हो कलेश ना किसी से द्वेष, यही आकांक्षा मेरी […]
जीत हार से परे है काव्य की अनुपम छटा नवांगतुक कविजन लिखते बहुत ही अच्छा लिखते बहुत ही अच्छा चाहे जो भी जीते जीत हार की काव्य में नहीं हैं रीतें मुझे नेह है मिल […]
सावन में आज फिर बहे प्रेम की धार गा रहे कवि सभी मीठा मीठा राग मीठा मीठा राग गायें मिल सभी कविजन, ना मन हो छोटा यह है सावन का आँगन बिना अनर्गल बातों में […]
जरूरतमंद आए नजर तो न करें वहां से ‘पलायन’ करें मदद उसकी दें कुछ उसे ‘उपायन’ निज तन से करी मदद उसकी ना करें चहुंओर ‘गायन’ अपने संग दूजे का होता रहे ‘कलायन’ कदम बढ़ाए […]
कहीं लाऊं मैं खुशियां कहीं खुशनुमा माहौल लाती हूं कभी लिखती हूं कविताएं कभी भजन गुनगुनाती हूं चहुंओर बरसे प्रेम, स्नेह ऐसी बहार लाती हूं हो रही स्पर्धा में अपनों को जिताने में चलो मैं […]
साहित्य एक विधा है न कुछ दिनों की संविदा है लिखूं कुछ ऐसा जिसकी सबको प्रतिक्षा है कहीं मिले आलोचना कहीं मिले सुंदर समीक्षा है अभी मैं हूं एक ‘नन्हीं कलम’ पर आकाश छूने की […]
दहेज प्रथा का प्रचलन किसने चलाया ? यह सवाल मन में बार-बार उठता है दहेज प्रथा के कारण ही बेटियां जलाई जाती हैं। दुनिया में आने से पहले ही कोख में मार दी जाती हैं। […]
वृक्षारोपण कवच है वृक्षारोपण ही वैक्सीन वृक्षारोपण से धरती सुंदर हो हो मन हरा रंग भरा रंगीन हो मन हरा भरा रंगीन सुगंधित पुष्प खिलेंगे धरती उपवन बनेगी देवता आन मिलेंगे।।
सुंदर-सुंदर वृक्ष हैं सुंदर-सुंदर पात वृक्षारोपण करके ही प्रदूषण से मिलेगी निजात प्रदूषण से मिलेगी निजात सैकड़ों वृक्ष लगाओ अपने जन्मदिवस पर एक-एक पौधा सभी लगाओ वृक्ष लगाने से ऑक्सीजन लेवल बढ़ेगा महामारियों से निजात […]
भेड़िए की शक्ल लिए बैठा हर इंसान इनसे अब कैसे भला बच पाएगी जान, बच पाएगी जान करें अब कौन उपाय ? जब आस्तीन का सांप दोस्ती यार निभाए।।
कोरोना से जूझता था हर एक परिवार तभी कहीं से आ गया ब्लैक फंगस का वार, ब्लैक फंगस का वार हाय ! है बड़ा भयानक जिसको यह लग जाए मृत्यु हो जाए अचानक कैसे-कैसे लोग […]
नैनों के तटबंध से बहे अश्रु की धार मुख तो पट बंद हैं भीतर घोर अन्धकार भीतर घोर अंधकार, कहां से दिया जलाएँ बैठे-बैठे लुट गए किसे अब दोष लगाएं??
“मैं ये पल बार -2 लेना चाहती हूं और जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए सभी को “धन्यवाद” कहना चाहती हूं। यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है कि आपने अपना सारा समय अपने व्यस्त जीवन […]
तन मन में ऐसो रमो राम- श्याम का नाम काया हो गई श्याम रंग मन में राम का नाम, मन में राम का नाम लगन अब प्रेम की लागी राम से मिलने शबरी जैसी पीछे […]
मित्रता करने को हाँथ फ़ैल जाते हैं उड़ने को आसमान में पंख खुल जाते हैं जी करता है एक लम्बी साँस लूँ उड़ चलूँ गगन में बादलों से करूं आँख मिचौली बैठूँ सितारों के साथ […]
देखा बांहे फैलाये आसमान खड़ा है गुलाब में कुछ नई कोपलें फूटी, अजूबा सर उठाये खड़ा है शायद ये कल की बारिश का नतीजा है, जो सूखे पत्तों में भी जान फूंक दी।।
बुरा कोई नहीं, बुरी हमारी सोंच है मन के अन्दर ही बैठा पापी, कहने में क्या संकोच है। ढूँढ़ोगे जहान में यदि तुम अच्छा इन्सान, मिलना तब तो मुश्किल है जब बुरी तुम्हारी सोंच है।।
बेकारी उत्पन्न हो, जब जनसंख्या बुद्धि सीमित संसाधन नहीं, सबको सुख समृद्धि सबको सुख समृद्धि, स्ववलंबी बन जाओ कर दो लज्जा त्याग, नहीं बेकार कहाओ कह पाठक कविराय, जीत हो जाय तुम्हारी छोटा बड़ा न […]
बच्चे बूढ़े एक से, दोनों को दे प्यार दीपक हैं परिवार के, करते हैं उपकार करते हैं उपकार, जरूरत इन्हे तुम्हारी रखना सदा प्रसन्न, उठाओ जिम्मेदारी कह पाठक कविराय, ये दोनों दिल के सच्चे भूतकाल […]
छोटा हो परिवार अब, रखना इसका ध्यान जनसंख्या तलवार सी, निकल रही है म्यान निकल रही है म्यान, समस्या होगी भारी धरती का विस्तार, न होगी मारामारी कह पाठक कविराय, शपथ लो जल ले लोटा […]
आसमान में स्याह बादलों के पीछे, मैने तुम्हें देखा सफेद रंग की टोपी लगाए लाल रंग की शर्ट पहने तुम कोई चित्र बना रहे थे किसी की घनी जुल्फें, गोरी रंगत, पैरों में पायल होंठो […]
सो जाते हैं हम एक लम्बी साँस लेकर, नींद में तुम्हें देखने की तमन्ना रखते हैं । बार-बार खोलते हैं हम आँखें, इस तरह तुम्हारे इन्तज़ार में हम पूरी रात नहीं सोते हैं।।
तुम्हें बोलने को कुछ कविता मन तक आती है पर संस्कार हमारे हमें गूंगा बना देते हैं…
आँगे बढ़ने प्रतियोगिता में सब हुए हिस्से दार पग बढ़ रहे हैं भीड़ के लगातार मुश्किल है भीड़ को पहचान पाना भीड़ में अपनी पहचान बनाना प्रतियोगिता में पिछड़ने वालो को अपराधी मानते हुए उपेक्षित […]
दुनिया के सब देश मे, एटम बंब की होड़ शांति संधि सब शर्त को, पल में देती तोड़ पल में देती तोड़, बड़ा खतरा है भाई होगा दुनिया अंत, होड़ है ये दुख दाई कह […]
गर्मी ऋतु के बाद मे, आती है बरसात धरती उगती घास औ, तरु में आते पात तरु में आते पात, दामिनी चहुँ दिश चमके गिरती जल की बूँद, गगन में बादल दमके कह पाठक कविराय, […]
नारी नर में भेद मत, अब कर हे इंसान समता का अधिकार है, दो आँखो सा जान दो आँखो सा जान, बनो सब रूप पुजारी कन्या पत्नी बहिन, और माता है तुम्हारी कह पाठक कविराय, […]
नारी के सब रूप को, वंदन बारंबार जो करती सत्कर्म से, दोनों कुल उजियार दोनों कुल उजियार, सती श्री वीणापाणी ममता करुणा मूर्ति, जगत की है कल्याणी कह पाठक कविराय, आरती करे तुम्हारी हरण करो […]
दिन पर दिन दिखा रही प्रकृति रौद्र रूप फिर भी हम कर रहे प्रकृति की अवहेलना अभी भी मानव ने नहीं बंद किया प्रकृति से खेलना गर अभी नहीं सचेते रे मानव ना जाने क्या-क्या […]
है कितना मूर्ख मानव ?? बैठा जिस डाल पर काट रहा वही डाल है यदि कोई गरीब उसे समझाएं उस गरीब की उधेड़ देता खाल है पैसे कमाने के होड में भूल गया अच्छा बुरा […]
दो वक्त की रोटी भी ना दे सके वो बच्चे “उनको” (बूढे मां-बाप ) जिनके खातिर ‘खुद’ का जीवन लगा दिया कमाने में उस घर में एक कोना भी ना ” उनका” “जिन्होनें” सारी उम्र […]
भारत – माता की जय बोल। हरित रंग में रंगी धरित्री रंगों की बिखरी बरसात, गेंदा, अड़हुल, मस्त- चमेली पवन संग झूमे पारिजात। वल्लरियाँ गातीं नित डोल […]
ये भारत भूमि है अपनी मैं भारत माँ की जाई हूँ किसी दीवाने के दिल की मैं मीठी सी रुबाई हूँ मेरे संबंध है सब कुछ यही अब मेरी दौलत हैं नहीं ये पूंछो अब […]
मानवता का मत हनन करो ईर्ष्या द्वेष नफरत को अब दफन करो ना जाने कब रुक जाएं यें सांसे ? अब तो अच्छे कर्म करो खुद में जगाकर मानवता प्रेम से रहने का जतन करो […]
तबाही मेरे मन की तुम हंसी में लेके मत डोलो मेरे गीतों को अपने प्रेम के भेंट मत बोलो जो कभी मरते-मिटते थे मेरे अल्फाजों के दम पर, कि अब देकर हमें कसमें वो अब […]
ना जाने ज़मीर कहां खो गया उनका, जो आतंकियों का साथ निभाते हैं, हिंसा, नफरत का पाठ सीख कर, दहशत,डर फैलाते हैं। मजहब ,जिहाद के नाम पर, मानव जाति को लड़वाते हैं, स्वयं आतंक की […]
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