ॠणी आपके हैं हम सभी, त्याग, तप, पौरूष की गाथा भूलेगे ना कभी । 28 सितम्बर, 1907 का था वो पावन दिवस बसंती चोला धारी, वीर क्रांतिकारी, सेनानी भगतसिंह का पंजाब की , पावन धरा […]

आज सवेरे ही मैने निश्चय किया मन में शत्रुता संभाल अब न रखूगी मेरे नज़र से जो भी मेरे दोषी हैं उनके दोष मन से निकाल देखुगी । खुद को कलुषित करने वाले अंध विचारों […]

लगता पूछती हो, बता माँ कबतक बंदिशो में रहना होगा कब खुलकर हंसना, बोलना बेखौफ़ घर से निकलना होगा । कब मैं भी बेखौफ़, सुबह की सैर पर जाया करूँगी दिन ढले भी निश्चिंतता से, […]

माँ की सबसे अच्छी सहेली पिता की हर ज़रूरतों का ख़्याल बिटिया के बिना सब अधूरा इसके जैसा कहाँ कोई मिशाल । भाई की हर घङी हिमायत करने वाली बात -बात में, ठुनक कर लङाई […]

मेरे इन आँखों में प्यार की एक बूंद नहीं कभी इन में प्रेम का समन्दर उमङा था खुद पर पछतावा करें या खामोशी से भूल स्वीकार करें इसी जद्दोजहद में, मन में उमङते जज़्बातो के […]

मास्क-सेनेटाइजर से मुक्ति दिला दो प्रभु फिर से वही हमारा जहाँ लौटा दो। जहाँ खुलकर रह सकें, खुली हवा में गमन कर सकें गमगीन है इस धरा के वासी, फिर से वही हंसी लौटा दो। […]

तुम क्या गये हम तो जीना भूल गए । तेरा छाया था कैसा सरूर तेरा होके था खुद पे गुरूर सच झूठ की कालीमा से बाहर आया हम प्यार पे विश्वास करना भूल गए हाँ, […]

आज किन रंगों से सजा होगा यह दिन क़ोई पल न गुजरे प्रभु तुझ बिन आज किन रंगों से सजा होगा यह दिन क़ोई पल न गुजरे प्रभु तुझ बिन त्राहि त्राहि कर रही तेरी […]

चलो आज अपनी तन्हा जिन्दगी को नया रूप देते हैं सशंकित ह्रदय में फिर से नव उम्मीदों के बीज बोते हैं । रोज की भागदौड़, दोहरे कामों से मन है बेहाल घर-बाहर की जिम्मेदारियां, फिर […]

समझ में बिलकुल नहीं आता ये कैसी फितरत है इनकी जहाँ देखा नफ़ा अपना हाथ थाम ली उनकी । हल्ला मचा करके बस बात रखनी है फिक्र कहाँ इनको, अपनी भेट भरनी है हमारे धरतीपुत्र […]

बहुत कोशिश की मैने तुम से दूर जाने की हर कोशिश जाया ही जाती रही हरदम तुम ही दिखाई देते हो, आँखे बंद कर के भी । गजब का अहसास है तेरा रह पाता नहीं […]

जाना ही था उसको,चला ही गया वो, जाते-जाते बेजान कर गया वो।। जाने वाले को रोक पाया है कहाँ कोई होता है वही जो, नसीब में सबके होई जिन्दा हैं पर जान ले गया वो […]

हर घर की यह बस मिलती-जुलती गाथा है बेटी का कुछ वर्षों का मैके से नाता है । हीना रचने से पहले थी अलहङ अब चौका-चुल्हा बना भाग्य विधाता है थोड़ी सी भूल, भूलवश हुई […]

कयी प्रश्न है मानस पर उभरे यहाँ दस्तूर भी हैं कैसे-कैसे अपने भी हैं क्यूँ पराए जैसे माँ-पापा ने भरपूर स्नेह दिया फिर क्यों कर खुद से दूर किया जन्म दिया, पालन पोषण करके क्यू […]

हम शिक्षक हैं शिक्षा की लौ दिखलाते हैं देश के नौनिहालो में उम्मीद की किरण जगाते हैं । समाज की प्रतिष्ठा हमसे है हम भारत भाग्य विधाता हैं मुल्क का मान बढ़ाने को, हम ज्ञान […]

मेरे कुल का दीपक तुझसे छाया प्रकाश है आया है तू जबसे आलोकित आकाश है । बहनों की तू आशा माता का लाल है सबो की तू आशीष से चमका तेरा भाल है सलामत रहें […]

माँ तेरी निश्छल ममता की, छाया नशा कुछ ऐसा है कुछ भी तो नहीं बदला हममें, हाँ सब पहले जैसा है आज भी माँ की आँचल में उम्मीदों की मोती पाती हूँ सुख की घङियो […]

किसी पर आख बंद कर एतवार मत करना किसी से टूट- टूट कर प्यार मत करना।। प्यार तो वो है जहाँ खोने का डर नहीं यह वो इवादत है जहाँ पाने की चाहत नहीं प्यार […]

सुबह सवेरे , आखोंदेखी घटना का है यह मंजर अरूणोदय से पहले पहुँची,बच्चों की टोली चलकर दौङ लगाते लगते थे, जैसे हो मंजिल पाने को तत्पर स्वाबलम्बी बनने को आतुर, पर मर्यादा का नाम नहीं […]

नारी तू जो चाह ले रच दे नव संसार तू होने वाले अपमान का करती क्यूँ न प्रतिकार तू ।। कभी दाव पे लगा दिया खुद तेरे ही परमेश्वर ने मौन हुए सब देख रहे, […]

खत्म होगा इन्तजार, स्वागत को कब होंगे तैयार वह सुहाना पल जब कोरोना मुक्त होगा यह संसार इस टूटन-घुटन पङी जिन्दगी से है सभी बेजार बस फिर से हो रब की नियामत सुखमय हो संसार

तस्लीम नहीं उनकी हिमाकत हरहाल में करेंगे अपनी हिफाज़त मुमानियत लगाए अपनी आकांक्षाओं पर नहीं तो भूल बैठेगे हम भी अपनी सराफत मकबूल नहीं तेरी अनैतिक मनाहट मान दोगे तो करेंगे हम तेरी इबादत

आज अवसादो से जुङा है रिश्ता अपना मुस्कुराना भूल गए, कहाँ होता है हंसना अपना वो बात- बात पर रूठकर चुप होके बैठे रहना थोड़ी- सी गुदगुदी पे खिलखिला के हंसना गम की परछाई नहीं,इतरा […]

हर मुश्किल को चुनौती देने की हमारी रवायत है हम नारी हैं, हर रिश्ता हमारे लिए एक इबादत है । हर नामुमकिन को मुमकिन बनाना अपनी आदत है हर खुशी, स्वप्न की अनदेखी कमजोरी , […]

आप हमेशा सलामत रहें अपना जन्मदिन मनाते रहे । आज वैश्विक मंच पे हमारे भारत को गौरवपूर्ण स्थान दिलाया है आपने एक उभरती शक्ति का अहसास, अपनी एक अलग पहचान बनाने का विश्वास हम सबो […]

दिल खाली-खाली क्यू है शाम भी क्यू तन्हा-तन्हा लागे है । बिन कारन, क्यू बेचैनी का साया है यह कैसा उलझन वाला पल आया है उम्मीदों की किरण कहाँ अब, घोर निराशाओं की काली छाया […]

हम भी हैं मुश्किलों से, हारने वालों में से है नहीं कोई भी चुनौती क्यू न आए, घबरायेगे हम तो नहीं कैसा भी हो अनल, स्वर्ण जैसे जलता है नहीं पर जबतक ना तपे वो, […]

बहुत ही कोशिश की,जरा हम भी बदले से जाएँ पर कैसे अब तक यह मन, बात समझ न पाए । अपनों से दर्द मिले थे अकसर शिकवा-शिकायत चलता ज्यादा- कमतर अनजान भी कैसे चोट पहुँचाए, […]

एकता के सूत्र में विविधता को पिङोती, जनमानस की भाषा है जो देवनागरी लिपि में गुथी हुई,अपनी राजभाषा रूप धर आई है जो। हर जन के दिलों में उमंग सी बहती हुई अभिलाषा सी हमारे […]

फांसी, एनकाउन्टर जैसी किसी भी सजा का नौनिहालो को न रहा है अब डर जब हो गया हो पतन नैतिक मूल्यों का फिर कैसे हो आदर्शों का असर।

चीखते चेहरों पर चीखने से क्या फायदा सजा मिल जाने पर, बेगुनाह साबित होने से भी क्या फायदा । इज्जत की नाम अपने ही मासूमो की हत्या साथ देने के बदले आरोप लगाते हैं मिथ्या […]

नदी नाम है अविरल बहती जलधारा की त्याग, गतिमय, अवगुण-गुण का भेद मिटाने की कश! हममें भी यह सब आ जाए अपना चित भी तरनी से निश्छल हो जाएँ

चलिए एकबार फिर से, खुद पर एतवार करते हैं । बहुत कर लिया गैरो से, इसबार खुद से ही प्यार करते हैं ।। बहुत किया भरोसा, जो भरोसे के हरगिज़ काबिल नहीं थे, खुद पर […]

विविधता में एकता के सूत्र को सहजता से पिङोती जो संस्कृत की बेटी, विविध भाषाओं की सहचरी है वो। माँ सी ममता जिसके हर वर्ण में समाहित है फिरन्गी भी जिसे सीखने को ललायित हैं […]

सोची समझी चाल से, शायद जानबूझकर पार्टियां वे कर रहे, विश्व को मौत में ढकेल कर। जिस वुहान से इसकी शुरुआत हुई इससे निजात की, तैयारी थी क्या कर रखी। मास्क को दे तिलांजली, दुनिया […]