माफी एक हुनर है, सत्य अहिंसा का पूरक है, राम कृष्ण ईशा को प्यारा है, बच सकते है शान तुम्हारे बिगड़े काम बने तुम्हारे झुक कर देखो एक बार, बागों में फूल खिले रोज तुम्हारे, […]
माफी एक हुनर है, सत्य अहिंसा का पूरक है, राम कृष्ण ईशा को प्यारा है, बच सकते है शान तुम्हारे बिगड़े काम बने तुम्हारे झुक कर देखो एक बार, बागों में फूल खिले रोज तुम्हारे, […]
ये जो जिन्दगी है ना, बहुत ख्वाब दिखाती है। कुछ ख्वाब होते हैं पूरे, तो कुछ अरमान मिटाती है। तोड़ कर दिल कभी किसी का, उसको आंसू पिलाती है। कभी किसी को, बिन प्रयास ही […]
दुनियाॅं के रंगमंच पर, हम सभी आते हैं अपना-अपना किरदार निभाने, किरदार निभाते-निभाते भूल ही जाते हैं.. कि एक दिन इस रंगमंच से, जाना है एक दूसरी दुनियाँ में, यहां रहकर जो मिला है किरदार, […]
दुनिया के रंगमंच में कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो कभी किसी का ध्यान आकर्षित नही कर पाते… मगर उनके बिना अधूरी है कहानी की खूबसूरती…!! वो कभी नहीं करते प्रयास कहानी का नायक बनने […]
काश के इतना आसान होता ! दिल के जख्मों का भर जाना, तुझे देखकर तुझको भूल पाना बिन देखे तुझे रह पाना…
असम्भव है तुम्हें परिभाषा के दायरे में बांधना.. तुम हो वो सागर, जिसमें विलीन होता है व्याकुलता का दरिया.. या निष्प्राण मन के भीतर बसी नीरवता को चीर के उपजी स्नेहमय अनुगूँज..!! एक बजंर हृदय […]
गौरैया, जाने कहाँ उड़ गई तुम अपने मखमली परों में बाँध के वो सुबहें, जो शुरू होती थी तुम्हारी चहचहाहटों के साथ और वो शामें, जब आकाश आच्छादित होता था तुम्हारे घोसलों में लौटने की […]
ख़ामोशी की तह में, छिपा कर रखते हैं हम, अपने सारे ग़म। क्योंकि कर के कोलाहल, दिखाकर दुःख दर्द अपने नहीं मिटेंगे अन्धेरे ज़िन्दगी के। पीना ही पड़ता है, ख़ामोशी का हलाहल ज़िन्दगी के कुछ […]
कठपुतली तो देखी होगी ना…. हाँ, वही काठ की गुड़िया। जिसकी डोर रहती है सूत्रधार के हाथों में, वह अपनी उँगलियों से जैसे चाहे, उसे नचाता है…. दर्शकों को भी आनन्द आता है। लगता है […]
संसार द्वारा रचित तुम्हारी महानता के प्रतिमान वास्तव में षड्यंत्र हैं तुम्हारे विरुद्ध…!! तुम सदा उलझी रही स्वयं को उन प्रतिमानों के अनुरूप ढालने में और वंचित रही अपने सुखों से..!! सुनो वनिता! जब तक […]
सुंदरता के प्रति हमारा उन्माद इतना अधिक रहा है कि हमनें तकनीकों का सहारा लेकर हर वस्तु को सुंदर बनाने का भरसक प्रयास किया…!! जबकि हमें बदलनी चाहिए थी अपनी दृष्टि जो रचती है भेद […]
कुछ एहसास हैं जो आकर ठहर गये हैं ज़बान की नोंक पर… होंठो की सीमाएँ लाँघने को आतुर, बस उमड़ पड़ना चाहते हैं एक अंतर्नाद करते हुए…!! मगर उन एहसासों के पैर बंधे हुए हैं […]
हम भ्रम पाल लेते हैं, “मैंने ही उसे बनाया है”, कभी सोचा तूने, भू-मण्डल किसने बसाया है। भाई ये सब कर्मानुसार ही, ब्रह्मा की माया है, कोई सूरमा आज तक, अमर नहीं हो पाया है।।
मनचले ने रुपसी पर, तंज कुछ ऐसा गढ़ा, काश जुल्फ़ों की छांव में, पड़ा रहूं मैं सदा। रुपसी ने विग उतार, उसे ही पकड़ा दिया, ले रखले जुल्फ़ों को तू, पड़ा रह सदा सदा।। फेसबुक […]
जब भी मन घिर जाता है अपने अंतर्द्वंदों की दीवारों से, जब मस्तिष्क के आकाश में छा जाते हैं बादल अवसादों के…!! तब छांट कर संशय के अँधियारों को, ये जीवन को नई भोर देती […]
एक महान विज्ञानी का कथन है… ‘हर क्रिया की बराबर किंतु विपरीत प्रतिक्रिया होती है’..!! प्रेम करने वाले इस तथ्य के जीवंत उदाहरण हैं…. समाज ने जितनी तत्परता से रचे हैं प्रेमियों को एक दूजे […]
वो भटकता रहा लफ़्ज़ दर लफ़्ज़ गढ़ने को परिभाषायें प्रेम की, रिश्तों की, विश्वास की…!! और मैंने अंकित कर दिया हर एहसास उसके दिल में सिर्फ चूम के उसके माथे को…!! ‘दरअसल चुम्बन, आलिंगन और […]
सांसारिक कुचक्रों में उलझ कर अपनी मौलिकता से समझौता करते मानव सुनो..!! अपने भीतर हमेशा बचा कर रखना इतना सा प्रेम…!! कि जब भी कोई व्यथित हृदय तुम्हारा आलिंगन करे तो उस प्रेम की ऊष्मा […]
यदि बाँधने जा रहे हो किसी को वचनों की डोर से, तो इतना स्मरण रखना कहीं झोंक न दे वचन तुम्हारा उसे उम्र भर की अनन्त प्रतीक्षा में… क्योकि, प्रतीक्षा वह अग्नि है जो भस्म […]
निकाल कर फेंक दिया है मैने अपने भीतर से हर अनुराग, हर संताप… अब न ही कोई अपेक्षा है बाक़ी औऱ न ही कोई पश्चाताप..!! मैं मुक्त कर चुकी हूँ स्वप्न पखेरुओं को आँखो की […]
जब भी प्रेम करने वालों को कोसा गया मैंने बंद कर लिए अपने कान… जब भी प्रेमियों पर अत्याचार किये गए मैंने मूँद लीं अपनी आँखें…!! जब भी किसी प्रेमी युगल ने देखा मेरी तरफ […]
एक विरोधाभास रहा है हमेशा से हमारी कल्पनाओं और वास्तविकता के बीच..!! जहाँ कल्पनाएं सुख की मीठी नदी है, वहीं वास्तविकता दुःख का खारा सागर..!! मगर हम हमेशा वास्तविकता की अवहेलना कर चुनते हैं कल्पनाओं […]
मुल्क है हम हैं, समझ जा जमाने तू, देश माँ है, तू बेटा है, जुट रिश्ता निभाने तू। किसी भी हाल में भारत को हमने सींच देना है, जय हिंद का जेहन में सबके गीत […]
वे न बोले हम न बोले चुप रहे, सच के आगे आज भी हम छुप रहे, रोशनी में डाल कर पर्दा बड़ा बस अंधेरे के ही नगमे लिख रहे।
कब तलक फूंकती रहेंगी गाड़ियां कब तलक यह आग सी मन में रहेगी, कब तलक सब ठीक होगा देश में, कब दिखेंगे लोग सच्चे वेश में।
ये सृष्टि हर क्षण अग्रसर है विनाश की ओर… स्वार्थ, वासना और वैमनस्य की बदली निगल रही हैं विवेक के सूर्य को..!! सुनो! जब दिन प्रतिदिन घटित होतीं वीभत्स त्रासदियाँ मिटा देंगी मानवता को जब […]
मुस्कुराहट प्रकृति की सुबह सुबह दिखती है उठो जागो जाग भी जाओ कहती है। साथ में चिड़ियों की चहचहाहट भी संगीत की लय में रहती है।
मुक्तक-खाएंगे —————— अब बनाने वाले ही खाएंगे , कोई खाने वाला रहा नही, लगता है, सब दावत मे गए, या घर सब, रुठ के छोड़ गए पर गए कहां यह पता नही, पता होता तो […]
खुशियां सदा अमावस की रात की आतिशबाजी की तरह आईं मेरे जीवन में… जो बस खत्म हो जाती है क्षण भर की जगमगाहट और उल्लास देकर… और बाद में बचता है तो एक लंबा सन्नाटा […]
अरी वो धूप तुम क्यों डर गई ठंडक से चीर कर आ जाओ हमें तपा जाओ, जीने की राह दिखा जाओ कुहरे को दूर कर आ जाओ।
न बोलिये बात ऐसी कि डर जायें हम, आपको देखकर चूक कर जायें हम। देखिए लाल आंखों से यूँ मत हमें, जिससे कि सचमुच सिहर जायें हम।
नववर्ष की शुभकामनाएं हैं हमारी ओर से, जिन्दगी खुशहाल हो पल पल खिला हो आपका। स्वस्थ तन हो स्वस्थ मन हो खूब धन हो आपका।
नया आ गया.. पुराना साल हजारों दर्द दे गया कुछ सिखाया कुछ समझाया, और आँखों में आँसू दे गया नया साल आ गया…
गीत गाते हुए खिलखिलाते हुए यह सफर काट लो गुनगुनाते हुए। दूर करते हुए सारी नाराजगी दोस्तों से मिलो मुस्कुराते हुए।
आज दिन में हमें चाँदनी है दिखी, तार झंकार दे रागिनी है दिखी। बात करते नहीं तो करें मत मगर आंख में चाह की कुछ नमी है दिखी।
आप बेकार में यूँ खफा हो गए दुश्मनों के हमारे सखा हो गए, प्यार में जो संजोये थे पल आपके नफ़रतों में सभी वे अदा हो गए।
मुस्कुराहट बिखेरो न यूँ ठंड में विघ्न डालो नहीं आज आनन्द में, मन है कोमल, जरा भोलेपन में भी है आज डालो नहीं आप फिर द्वंद में।
तुम्हारे बिना पाना पाना नहीं है तुमसे अधिक कुछ खजाना नहीं है, तुम तो हो ताकत, तुम तो हो हिम्मत, तुम्हें पास रखना है गँवाना नहीं है।
परम सुख मिलेगा ब्रह्मचर्य पालन करने से कुछ नहीं रखा है गंदे ख्यालतों में ।।1।। ————————————- अब तक जो करते आये हो गंदे काम सब छूट जायेंगे तेरे ब्रह्मचर्य पालन करने से ।।2।। ————————————— दो […]
मै उनके गली में दो गज़ ज़मीन मांगी एक आशियाना बनाने को उसने इतनी बड़ी शर्त रखी कि , मैं दंग रह गया सोचने लगा मेरी इतनी औकात कहाँ जो उनकी ख्वाईश को हम पुरा […]
आखिरकार बुलंदियों का आसमां पा ही लिया… आखिरकार आसमां से एक सितारा तोड़ ही लिया… बिछ गये रंगीन पंखों की तरह ख्वाब मेरे, आखिरकार लहरों ने किनारा पा ही लिया…
किस्मत को आजमाकर एक ख्वाब जिया है मैंने आँसुओं को शराब- सा पिया है मैंने, यहाँ से दूर चला जाऊंगा मैं ये फैसला अब किया है मैंने…
एक छोटी -सी डब्बी में नाचती हैं सूईयाँ बेशक बन्द होकर। पर नचाती है सारी दुनिया को अपनी हीं नोंक पर।। न ठहरती है कभी न कभी ठहरने देती है। ये तो घड़ी है ‘विनयचंद […]
नई सुबह की पहली किरण ने मुझे जगाया हिलोरे देकर चांदनी रात ने था सुलाया हटाये पर्दे जब माँ ने खिड़कियों से धूप की चमकती किरणों ने मुझे सहलाया…
मन के घाव भी भरने जरूरी हैं तेरे-मेरे नैन भी मिलने जरूरी हैं आकाश से धरती के जो हैं फासले तय हैं बरस कर बूंद तुझमें ऐ जमीं ! मिलना जरूरी है…
जरूरी है मन का झुकना प्रभु नहीं मिलते हैं, मात्र सिर झुकाने से..
एक तरफ कर्ज तो दूसरी तरफ महामारी करोना। कैसे जिये हम यही कहता है आज सारा ज़माना।। कमाते है हम तब ही दो वक्त की रोटी मिलती है। न काम है न पैसा है अगर […]
जिन्होंने दूर अनेकों रोग किये औषधियों पर कितने शोध किये उन धन्वन्तरि को नमन करती है प्रज्ञा जिन्होंने लाखों तन नीरोग किये..
माँ बाप को दु:ख न देना उसने ही तुम्हें चलना सिखाया जिस पैर पर चल कर तुमने कामयाबी हासिल की उसी पैर पर उसने कभी अपनी जान न्योछावर किया । हंसना सिखाया बोलना सिखाया आज […]
खट्टी मीठी यादों से आज उस बेवफा की तस्वीर बनाई। दिल में आ कर देखिए दूर हो गया आज सनम हरजाई।। अक्सर मैं सुना करता था प्यार में रब बसता है। गर रब बसता है […]
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