गीत गाते हुए
खिलखिलाते हुए
यह सफर काट लो
गुनगुनाते हुए।
दूर करते हुए
सारी नाराजगी
दोस्तों से मिलो
मुस्कुराते हुए।
Category: मुक्तक
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दोस्तों से मिलो मुस्कुराते हुए
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चाँदनी है दिखी
आज दिन में हमें
चाँदनी है दिखी,
तार झंकार दे
रागिनी है दिखी।
बात करते नहीं तो
करें मत मगर
आंख में चाह की
कुछ नमी है दिखी। -
आप बेकार में यूँ खफा हो गए
आप बेकार में यूँ खफा हो गए
दुश्मनों के हमारे सखा हो गए,
प्यार में जो संजोये थे पल आपके
नफ़रतों में सभी वे अदा हो गए। -
मुस्कुराहट बिखेरो न यूँ ठंड में
मुस्कुराहट बिखेरो न यूँ ठंड में
विघ्न डालो नहीं आज आनन्द में,
मन है कोमल, जरा भोलेपन में भी है
आज डालो नहीं आप फिर द्वंद में। -
तुम्हारे बिना
तुम्हारे बिना पाना पाना नहीं है
तुमसे अधिक कुछ खजाना नहीं है,
तुम तो हो ताकत, तुम तो हो हिम्मत,
तुम्हें पास रखना है गँवाना नहीं है। -
परम सुख मिलेगा ब्रह्मचर्य पालन करने से
परम सुख मिलेगा ब्रह्मचर्य पालन करने से
कुछ नहीं रखा है गंदे ख्यालतों में ।।1।।
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अब तक जो करते आये हो गंदे काम
सब छूट जायेंगे तेरे ब्रह्मचर्य पालन करने से ।।2।।
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दो राहों पर कभी एक साथ नहीं चला करो मेरे दोस्त
कब तक अंदर की आवाज को दबाओ मेरे दोस्त ।।3।।
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अप्राकृतिक मैथुन सबको बर्बाद करती,
लेकिन अंदर बैठा वह आत्मा सबको सही राह दिखाती ।।4।।
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तु अंदर की आवाज को दबाता जाता
और मन की बहकावे में बहकता जाता ।।5।।
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तु इंसान है, खुद पर नियंत्रण लगा सकता है
तु ब्रह्मचर्य का पालन करके मन को जीत सकता है ।।6।।
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अपनी जिन्दगी सबके अपने हाथ में है
चाहो तो खूद को संभाल लो,
नहीं तो माया का बिगड़ना काम है ।।7।।
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सबसे पहले खूद को सुनो, उसके बाद हरि भक्तों को,
अप्राप्त वस्तु को प्राप्त करना, यहीं ब्रह्मचारी का काम है ।।8
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अगर इस दुनिया में कुछ असंभव होता
तो सारी सृष्टि में कोई ब्रह्मचारी ना होता ।।9।।
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मंथनहब, क्रेजी फिलोसर, अग्नि देव आर्य,
आचार्य प्रशान्त, पंडित रामकिंकर उपाध्याय,
राजीव दीक्षित, और बहुत सारे जिसे हम अभी तक नहीं जानते,
जैसे महान यूट्यूबर चैनल क्रियेटर देश की शान है ।
इन्हें सुनो और अपनी मानव जीवन सँवारो ।।
यही बताना दास विकास का काम है ।।10।।
राम भक्त विकास कुमार -
दो गज़ ज़मीन
मै उनके गली में दो गज़ ज़मीन मांगी
एक आशियाना बनाने को
उसने इतनी बड़ी शर्त रखी कि ,
मैं दंग रह गया
सोचने लगा मेरी इतनी औकात कहाँ
जो उनकी ख्वाईश को हम पुरा कर सके
मै वापस वहीं चला गया जहाँ
आशिक़ गम की समंदर में
डुबकी पे डुबकी आज भी लगा रहे है। -
लहरों ने किनारा पा ही लिया…
आखिरकार बुलंदियों का
आसमां पा ही लिया…
आखिरकार आसमां से
एक सितारा तोड़ ही लिया…
बिछ गये रंगीन पंखों की तरह ख्वाब मेरे,
आखिरकार लहरों ने किनारा पा ही लिया… -
“एक ख्वाब जिया है मैंने”
किस्मत को आजमाकर
एक ख्वाब जिया है मैंने
आँसुओं को शराब- सा पिया है मैंने,
यहाँ से दूर चला जाऊंगा मैं
ये फैसला अब किया है मैंने… -
घड़ी
एक छोटी -सी डब्बी में
नाचती हैं सूईयाँ
बेशक बन्द होकर।
पर नचाती है
सारी दुनिया को
अपनी हीं नोंक पर।।
न ठहरती है कभी
न कभी ठहरने देती है।
ये तो घड़ी है ‘विनयचंद ‘
दुनिया को घड़ी बना देती है।। -
चमकती किरणों ने मुझे सहलाया
नई सुबह की
पहली किरण ने मुझे जगाया
हिलोरे देकर चांदनी रात ने था सुलाया
हटाये पर्दे जब माँ ने खिड़कियों से
धूप की चमकती किरणों ने
मुझे सहलाया… -
मन के घाव
मन के घाव भी भरने जरूरी हैं
तेरे-मेरे नैन भी मिलने जरूरी हैं
आकाश से धरती के जो हैं फासले तय हैं
बरस कर बूंद तुझमें ऐ जमीं !
मिलना जरूरी है… -
प्रभु
जरूरी है मन का झुकना
प्रभु नहीं मिलते हैं,
मात्र सिर झुकाने से.. -
क़हर
एक तरफ कर्ज तो दूसरी तरफ महामारी करोना।
कैसे जिये हम यही कहता है आज सारा ज़माना।।
कमाते है हम तब ही दो वक्त की रोटी मिलती है।
न काम है न पैसा है अगर है तो करोना का डर है।।
स्कूल कालेज सब बंद हुए शिक्षक विद्यार्थी मारे गये।
अनेक बच्चों के भविष्य बन कर भी आज बिगड़ गए।। -
धन्वन्तरि जी को प्रणाम
जिन्होंने दूर अनेकों रोग किये
औषधियों पर कितने शोध किये
उन धन्वन्तरि को नमन करती है प्रज्ञा
जिन्होंने लाखों तन नीरोग किये.. -
गंगा काशी
माँ बाप को दु:ख न देना
उसने ही तुम्हें चलना सिखाया
जिस पैर पर चल कर
तुमने कामयाबी हासिल की
उसी पैर पर उसने कभी
अपनी जान न्योछावर किया ।
हंसना सिखाया बोलना सिखाया
आज तुम हो गए इतने बड़े कि
डांट कर बोलती बंद कर देते हो
उसे अपनो से कमजोर समझ के।
तीर्थ कर के तीर्थराज बनते हो
अरे नादान सारे तीर्थस्थान तो
तेरे घर में विराजमान है
अपनी काली पट्टी तो खोल
देख गंगा काशी तेरे घर में है। -
वफा के बदले
खट्टी मीठी यादों से आज
उस बेवफा की तस्वीर बनाई।
दिल में आ कर देखिए
दूर हो गया आज सनम हरजाई।।
अक्सर मैं सुना करता था
प्यार में रब बसता है।
गर रब बसता है तो मैने
मुहब्बत में धोखा क्यों खाई।। -
*उपहार*
आपको मिलता है जो,
देखभाल और प्यार
आपके ही व्यक्तित्व को,
हमारी ओर से है उपहार..*****✍️गीता
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दुःख
मैं हमेशा दुःख से कतराती रही,
इसे दुत्कारती रही
मगर ये दुःख हमेशा ही मिला है
मुझसे बाहें पसारे…!!मैं भटकती रही चेहरे दर चेहरे
सुख की तलाश में…
और वो हमेशा रहा एक परछाई की तरह
जो दिखती तो है मगर क़भी कैद
नही होती हाथों में…!!दुःख बारिशों में उगी घास की तरह है जिसे
हज़ार बार उखाड़ कर फेंको मगर ये उग
ही जाता हैं दिल की जमीं पर..!!सुख ने हमेशा छला है मुझे एक
मरीचिका की तरह…
मगर दुःख ने मुझे सिखाया है स्थायित्व,
लाख ठोंकरों के बाद भी
दामन थामे रहना…!!©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’
(09/11/2020) -
गरीब की दीवाली
गरीब के घर में झांकीए
कैसे मनाते है निर्धन दीवाली।
मन में उमंगों की पटाखे फोर कर
निर्धन ऐसे मनाते है दीवाली ।।
दीया है बाती है मगर तेल नहीं
लाला भी आज उधार देगा नहीं।
मन में ख्वाईशें तो थी अनेक
चलो यह वर्ष न सही अगले वर्ष ही सही।।
मुनिया की मम्मी मुनिया के
पुरानी कपड़े धो देना क्योंकि,।
आ गयी है इस वर्ष की दीवाली।। -
एक ही दीया
हम सब दीप तो जलायेंगे,
बाहरी अंधेर को दूर करने के लिए।
मगर हम वो दीप कब जलायेंगे
मन में छिपे अंधेर को दूर करने के लिए।।
हम हर वर्ष बड़ी उल्लास के साथ
घर आंगन में जलाते है अनेक दीया।
छल कपट के छाती पर कब हम
जलायेंगे स्वच्छता के “एक ही दीया” ??।। -
वाह !! कहीं कहीं…..
कहीं दीप जले तो कहीं ,
गरीब के घर में चूल्हा न जले।
हम खुशियाँ मनाते रहे और वो,
अंधेरे में माचिस खोजते रहे।।
कहीं दीपावली की धूम तो कहीं
पापी पेट में भूख की शहनाई।
गगन में देखो रंग बिरंगी पटाखे
वाह रे दुनिया क्या मस्ती है छाई ।। -
गरीब के लाल
नये कपड़े, नयी उमंग,
पटाखे और डिब्बे की मिठाई ।
गरीबी में पल रहे लाल के
किस्मत में कहाँ है भाई ।।
दीप जला कर खेल कूद कर।
अपनी शौक को खुद में ही,
कभी सिमटते हुए देखा है भाई?।। -
क्या से क्या हो गया
हम दीवाली क्या मनाए
दीवाली तो करोना ले गए।
थी जुस्तजू मुझे भी मगर
साल २०२० हमें बर्बाद कर गए।।
हमे क्या पता था देश में
कभी ऐसे भी दिन आयेंगे।
बुरे वक्त पे रिश्ते नाते भी
अपनो के साय से दूर भागेंगे।। -
दु:ख
कभी कभी दु:ख को
गले लगा कर भी जीना पड़ता है।
तभी तो सुख से ज्यादा इस जहाँ में
दुःख की महता है।।
जब तक इंसान के जीवन के
धड़कन की डोर चलती है।
तब तक ए अमित रंग बिरंगी
दु:ख हमारे साथ कहाँ छोड़ती है।। -
प्रेम का सागर
उसकी आँखों में झलकता है,
उसके दिल मे बसे सागर का चेहरा !!दुःख की उद्दंड लहरें अक्सर छूकर,
भिगोती रहती हैं पलकों के किनारों को !!उस सागर की गहराई में बिखरे हैं,
बीते हुए लम्हों की यादों के लाखों मोती !!वो सागर है प्रेम का मगर अधूरी उसकी प्यास है,
एक राह से भटकी नदिया से मिलन की उसको आस है!!©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’
(03/10/2020) -
दोस्त
अगर खुदा तुमने ,
लाखों तकलीफें दी हैं;
मानुष को!
तो कोहिनूर से दोस्त भी दिए हैं,
उनकी मोजुदगी ही है,
जो मुझे आस्तिक बनाती है। -
प्यार की कहानी
तपकर धूप से मुझमें निखार आया है,
शोलों पर चलकर अब सम्हलना आया है।
कायनात में लिखूँगी अपने प्यार की कहानी,
जुनून से अपने अब यह विश्वास आया है। -
किया है प्यार
किया है प्यार तो इकरार से इन्कार क्या करना।
है मरना शौक़ बचने का जतन बेकार क्या करना।
तेरा आगोश ही मझधार बनकर गर डुबाता हो,
तो आशिक़ दिल ये कहता है कि दरिया पार क्या करना।संजय नारायण
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भावना-सद् भावना
भावना सद्भावना
( 12-मात्रा )स्वच्छंद वितान में
मानवीय विधान में
शब्द की झंकार में
गीत मधुर सुहावना
भावना सद्भावना ..।तन में दिव्य शक्ति हो
दिल में प्रेम भक्ति हो
सदा मित्र के भाव हो
उसे सदा सराहना
भावना सद्भावना .।कालिमा से दूर हों
सत्कर्म में चूर हो
भारत का विकास हो
है यही बस कामना
भावना सद्भावना..।नहीं शोषित वर्ग हो
मजहब पर न द्वंद हो
शांति दूत सदा रहे
यही जीवन साधना ..
भावना सद्भावना..। -
हँसना मेरी मजबूरी
18-हँसना मेरी मजबूरी
( मुक्त छंद 16 मात्रा )
फूलों में आज सुगंध नहीं
खुशियों का कोई भाव नहीं
न चेहरे पर मुस्कान कहीं
पर हँसना मेरी मजबूरी..।विनय रूप कायरता बनती
आंखों से जलधारा बहती
हुई ध्वस्त हमारी आशा
पर हँसना मेरी मजबूरी..।अहम भाव का ताज जहाँ हो
इंतिहान पल पल होता हो
उम्मीद वफा के टूट गई
पर हंसना मेरी मजबूरी…। -
मनमीत हो तुम
गीतों में सबसे प्यारा
गीत हो तुम
मेरे हमदम मेरे
मनमीत हो तुम
नहीं चाह मुझे
आसमां की बुलंदियों की
मेरी तो जीत हो तुम… -
नहीं मरेगा रावण
61-नहीं मरेगा-रावण
अहम भाव में बसता हूं मैं
कभी न मरता रावण हूं मैं
स्वर्ण मृग मारीच बनाकर
सीता को भी छलता हूं मैं..।किसे नहीं है खतरा सोचो
केवल अपनी सोच रहे हो
रावण वृत्ति कभी न मरती
यह सुनकर क्यों भाग रहे हो..।दुख का सागर असुर भाव है
क्या राम धरा पर आएंगे
सुप्त हुए सब धर्म-कर्म जब
रावण कैसे मर पाएंगे..।धर्म बहुत होता त्रेता युग
तक केवल लंका में रहता
कलयुग पाप काल है ऐसा
रावण अब घर-घर में बसता.। -
अब के दशहरे
चलो ! अब के दशहरे ,
नया कोई चलन करते हैं।
भला कब तक जलाते रहें,
लकड़ी का रावण,
मन में जो बैठा है,
उसी का आज दहन करते हैं,
चलो अब के दशहरे !
नया कोई चलन करते हैं। -
बीती सुध
बीती सुध ,जो कभी सुखदायक थी ,
आज वो बड़ा रुलाती हैं,
चार दिन की घनी हरियाली थी,
अब पतझड़ बड़ा सताती है। -
कालेज का नियम
मुक्तक- कालेज का नियम
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अनजाने से पथ पर,
एक अनजाने से पहचान हुई,
दो दुनिया के थे दोनों,
मानों अंबर का मिलन धरती से हुई|देखा उसको पहली बार,
भूल गया खुद होशो हवास,
सारी खुशियां संग संग थी,
पपीहा बन देख रहा-
अब स्वाति बरसे तो बुझती प्यास|एक मिनट दो मिनट,
बीत गये चालीस मिनट,
टीचर आये चले गए,
भुल गया कालेज का नियम|
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***✍ऋषि कुमार “प्रभाकर”—– -
पानी:- जीवन का आधार
जीवन का आधार है पानी
हर मानव का प्राणाधार है पानी
चलो बचाए जीवन इसका
सृष्टि का दिया वरदान है पानी -
कश्ती
मेरी भी कश्ती,
इक दिन लगे किनारे
मुकद्दर ना साथ दे तो,
साथ कर्म होंगे हमारे ।।*****✍️गीता
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गुरू
सबसे खूबसूरत तोहफा है गुरू
रब से भी पाक होता है गुरू
ढूंढ लो चाहे सारी दुनिया में
ना है जहान में कोई तुम-सा गुरू -
वे सो रहे हैं
वे सो रहे हैं व्यवस्था को,
जेब में लेकर,
हम रो रहे हैं ,
हाथ में मोमबत्तियां लेकर!
वे जागते हैं अक़्सर चुनाव में,
और हम हादसों में …. -
ऋतु बदलने सी लगी
अब अचानक ऋतु बदलने सी लगी
ठंड का अहसास सा होने लगा
प्यार की बारिश में उगती ख्वाहिशें
पड़ न जाएं ठंड में पाले के पाले। -
मोती
सागर में मोती मिलें,
गहरे तल में खोज
किनारों पर तो बस रेत मिले,
चाहे जा बैठो रोज़ ….. -
मैं नहीं कहता….
मैं नहीं कहता
सबको अपनी बहन मानो ,
चाहता इतना हूँ कि बहन क्या है ?
इतना ही जानो . -
कितने पर्दे बदले….
कितने पर्दे बदले हैं,
इस जिंदगी ने।
कभी पुराने,
तो कभी नए।
कुछ फीके,
कुछ मटमैले।
और कुछ रेशम से नए। -
रौशनी …
ये पथ ले जाएंगे, लक्ष्य तक जरूर
मत छोड़ना मनुज तू अपना गुरूर
हौसले बुलंद ही रखना तू सदा,
अंधेरों के बाद ही आती है रौशनी….*****✍️ गीता*****
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जब जब, मैं रोई!
जब-जब ,
मैं रोई!
तब-तब ,
चैन से मां ना सोई,
मां ने पाला ,
मां ने सम्भाला,
अपना निवाला,
मेरे उदर में डाला,
कोने में रोकर ,
मुझको हंसाया,
जिंदगी क्या है,
सलीका सिखाया। -
मुक्तक
मैं अभिमन्यु
मां के पेट में ही मज़दूरी के गुर
सीख चुका था;
किंतु निकल नहीं पाया इस
चक्रव्यूह से-
इसी से पीढ़ी दर पीढ़ी
मज़दूरी की विरासत बांट रहा हूं ! -
मुक्तक
लकड़ी जली, कोयला हुई
कोयला जला, राख रही
अग्नि परीक्षा सीता की
राम जी की साख रही२७.०९.२०२०
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सम्मान
सम्मान उनका कीजिए ,जो तुम्हे दिल से चाहते हैं।
वरना , देख कर तो सभी मुस्कुरा देते हैं । -
कमाल की जादूगरी…..
कमाल की जादूगरी आती है लोगों को…!
अब देखो ना..
चेहरे से मुस्कान ही गायब कर देते हैं लोग…!!