वो रात भर खांसती! चिल्लाती! घबराती! फड़फड़ाती! भुखी-प्यासी, आंसू बहाती, अकेली तड़पती, चलीं गईं! छोड़ सांस , वो चली गई। मगर बेटे बड़े संस्कारी! ऐसे ना भुखा जाने देंगे, जीते जी तो कुछ कर ना […]

बहुत झगड़े हम रात भर दिल से अपने , मगर बदनामी करे, मनमानी करे, दिल मेरा , तुम्हारी ही गुलामी करें , आखिर आना ही पड़ा लौटकर , तेरे शहर में, तेरी गलियों में, हसरत […]

यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ नकाब ही नकाब है। यह कैसा मातम आज शायरो पे आया है।। ना नज्म है ना ग़ज़ल है ना नातशरीफ है। मौसम भी कुछ कुछ शायरों से ख़फा है।। गुलशन में […]

” गीता” इस संसार में, दो तरह के लोग, परवाह नहीं इस भयंकर रोग की, भागे फिरते रोज़ । दूजे वाले डरकर रहते, घर से बाहर कम निकलते, मगर मज़े की बात देखो, ……. दोनों […]

दिन रात घर घर की यही कहानी है। सास बहू के झगड़े युग युगांतर पुरानी है।। सास की कड़वी – बोली मैं तुमसे कम नहीं कलमुंही। बहू की कड़वी जबाब – तू ही जहर की […]

बड़े शहर की जिंदगी को छोड़ , अब छोटे शहर की जिंदगी को, जीकर देख रहे हैं यहां भी लोग हैं; वहां भी लोग थे, यहां सोच बड़ी, वहां सोच छोटी , न निभाते हैं […]

पाकर सब नदियों का पानी सागर को खूब मचलते देखा। पत्थर के कलेजे रखनेवाले हिमालय को पिघलते देखा।। गम्भीर बड़ा आकाश मगर हमने उसको भी रोते देखा। सबको पाक करे जो नदियाँ बीच कीचड़ में […]

आओ थाली बजाते हैं! गरीबी का मुंह दिखाने वाली, बेरोजगारी के लिए , आओ ताली बजाते हैं! देश की कमर तोड़ने वाली मरी हुई अर्थव्यवस्था के लिए, आओ थाली बजाते हैं! झूठ को सच बनाने […]

शोर भीतर भी है। शोर बाहर भी है । ये ऐसा मंथन हैं। जो चलता रहता है। गुंजता रहता है। हम शांत नहीं कर पाते। बस बना लेते हैं। शोर को अपनी आदत का हिस्सा।

लाखों की डिग्री लेकर, खोज सके न वैक्सीन| कवि खोज दिए कलम से अपने, कोरेना का ऐतिहासिक सीन| नेता की नियत बताएं, डॉक्टर मिल करते खेल| लिवर किडनी गुर्दा ही बेचे, कोरोना में गजब ही […]

मां ने जब रोटियां बनाना सिखाया , मुझे कुछ समझ ना आया , कभी रोटियां जली तो कभी हाथ, फिर सीख ही गई मैं, रोटियां बनाना, और अब रोटियां नहीं जलती , बस जलते हैं […]

माँ ही है संतान मोह में, सबसे से लड़ जाती है| जिसकी माँ खुद जज वकिल बने, उन बच्चों की हार नहीं हो सकती है| लाख गुनाह छिप जाते है, बस माँ के आ जाने […]

मेरी शिक्षक मेरी मां ही तो है , सिखाया उसने चलना , बोलना और पढ़ना -लिखना। अर्थ न जाने कितने समझाएं । पूछो कितनी ही बार ;वह प्रश्न , फिर भी कभी ना डांट लगाए […]

मान हैं सम्मान हैं देश की जान हैं। आम नहीं खास नहीं राष्ट्र निर्माता हैं शिक्षक। नाक से नेटा टपक रहा था। आंसू का कतरा लुढक रहा था। बाहुपाश में भरकर जिसने अपनाया वो मेरे […]

क्यों कुछ कहते नहीं, सब गूंगे बहरे बैठे हैं , सबके भीतर जलती है आग, फिर क्यों खामोश बैठे हैं, खो दिया है सम्मान को , अपने भीतर के इंसान को, तभी तो चुप ही […]

नारी तुम पर कविता लिखने को वर्णांका असफल है मेरी तुम तो जीवन की जननी हो सब कुछ तो तुम ही हो मेरी। माँ बनकर जन्म दिया मुझको यह सुन्दर सा संसार दिखाया, अच्छी-अच्छी शिक्षा […]

हम काटते ही नहीं , बुराइयों की जड़ें, पालते हैं ,पोषते हैं , कभी इच्छाओं के लोभ से, कभी रूपयों की चाह से, जब लगता है , वह जड़े हमें बांधती है, हम उठ खड़े […]

वो मेरा बहुत ख्याल रखता , मुझे भले-बुरे की पहचान कराता, जब भी संकट आता ,मुझे बचाता, मगर उससे ज्यादा , मैंने दूसरों से प्यार किया, पर,जब सबने ठुकराया, उसी ने मेरा हौसला बढ़ाया, बस […]

हमने ज़माने से पूछा मैं बदनामी का बहुत बड़ा धब्बा हूँ क्या आपके शहर में पनाह मिलेगा मैं उम्मीद की कश्ती पे सेहरा बांध के आया हूँ ज़माना हंसते हुए कहा —- अरे यार सतयुग […]

छोंड़कर बातें पुरानी कविता किया करो। सपनों में नहीं हकीकत में जिया करो। तोड़ दे दिल कोई तो खैर तुम उसकी मनाओ दिल के लिए अच्छा यही है कि पुरानी बातों पर मिट्टी डाल दिया […]

बादशाह बनने के लिए, कितने झूठ बोलोगे| जमाना आपका भक्त होगा, पर मेरी कलम की धार से रोओगे| ✍✍✍✍✍✍✍✍✍ मेरी कमी बताने का कष्ट करें

जब जब मैं कलम उठाना चाहा हसीन शेर लिखने के लिए उसने कहा लगता है मैं हो जाउंगी बदनाम शायद तुम्हारे लिए मैं चाह के भी उसके लिए शेर नहीं लिख पाया अब कोई उनसे […]

ये राजनीति बड़ा ही मीठा जहर, मानवता पर बड़ा ढहाती कहर , होते दंगे ,बिखर जाती लाशें, फिर मिडिया हमारी, दिखाती दलाली, हाए! हिन्दू मर गया , हाए! मुस्लिम मर गया, पर कौन बताए? और […]

युग युग से तू ,आंसू बहाती आई पुरुष के अधीन तू, सदा रहती आई अपने घर, अपने बच्चो के लिए युग युग से तू ,मर मिटती आई क्या नारी तेरी यही कहानी ? आंचल में […]

मैं सैनिक हूं, मैं देश को संभालता हूं, हर रोज मृत्यु को मारता हूं, मैं मौत से नहीं डरता हूं, मौत को तो मुठ्ठी में लेकर चलता हूं, परिवार की चिंता नहीं करता हूं, परिवार देश […]

शैतान की नानी, बन्दर-सी शैतानी, जादू की पुड़िया, सोने की गुड़िया, परियों सी रवानी, प्रेम की निशानी, बालों को नोचे, कान को खींचे, शरारतें उसकी मन को भाएं, थकान का आलस पल मे उड़जाए, बेटी […]