सती और शिव संबाद प्रथम मिलन पर माना तुमने मुझसे प्रेम किया प्रेम ने मेरा भी मन छू लिया एक फ़क़ीर हूँ मैं, जानती हो ना तुम्हारा क्या भविष्य हुआ मेरे साथ बस धुआं ही […]
सती और शिव संबाद प्रथम मिलन पर माना तुमने मुझसे प्रेम किया प्रेम ने मेरा भी मन छू लिया एक फ़क़ीर हूँ मैं, जानती हो ना तुम्हारा क्या भविष्य हुआ मेरे साथ बस धुआं ही […]
जब तक मैं कंवारा था मजाक और झूठ का अंतर नही समझ पाया अब जानता हूँ सच तो लोग खुद से भी नही बोल पाते जब तक मैं कंवारा था किसी को दर्द में देख […]
एक छत है मगर अलग अलग कमरे है कही गम कही खुशी कही बेखबरी सभी अलग अलग चेहरे है कोई नही जानता रात किसकी कैसी थी कही हल्के कही गहरे काले घेरे है उसकी इजाजत […]
बरसेगी धरती पे कब सावन के फुहार। बता ए घटा कब आएगी बसंत बहार।। मोर पपीहा भी मिलन के गीत गुनगुनाने लगे। मन के बगिया मे सैंकड़ों फूल खिलने लगे।।
जब ज़िन्दगी कर रही होगी अंत निर्धारित हमारी कहानियों का जब वक्त की धुंध छँट जायेगी और साफ़ नज़र आने लगेगा चेहरा मौत का..!! जब उम्मीदों के पखेरूओं को रिहाई देकर नियति के आगे नतमस्तक […]
नारी के नवोन्मेष पर ————————– चाँद ने पलकें उठा कर देख तो लिया है अब~ पश्चिम से आते प्रकाश को, पर आधुनिका को यह स्वीकार्य नहीं है, कि धरा पर रहने वाले लोग ,यह कहें […]
मेरा इंतज़ार एक पुल है असमर्थताओं के उस उफनते दरिया पर जो बह रहा है हम दोनों की दुनियाओं के बीच..! जिससे गुज़रकर एक दिन मेरी आँखों मे पलते मखमली सपनें उतरेंगे वास्तविकता के धरातल […]
नदियाँ- सागर, सहरा- पहाड़, पानी-प्यास, सूखा- बरसात, तितली-फूल, छाया- धूप पंछी- आकाश, जंगल- उजाड़ सबकी पीड़ाओं को आश्रय दिया है तुम्हारे हाथों ने कहो प्रेम! मेरे विस्थापित अश्रु अछूते क्यों हैं अब तक तुम्हारे हाथों […]
कलयुग आधार है मिलता सदा प्यार है गाओ अधिकार है मुश्किल मे संसार हैं आत्मा का उद्धार है जीवन का सार है तुलसी का उपकार है मतलब के यार है एक ही प्रकार है करना […]
जुल्म अब सहा नहीं जाता है दुख कितना कहा नहीं जाता घर मे अब रहा नहीं जाता कुछ करो हे विधाता सबका दुनिया से बना रहे नाता हर कोई रहे हँसता मुस्कुराता
क्या मापदंड हैं नज़दीकियों के कितनी नगण्य है दो लोगों के बीच स्थित भौगोलिक दूरी जिनके दिल धड़कते हैं एक ही लय में..!! और कितना अर्थहीन है उन दो लोगों के बीच का सामीप्य जिनके […]
कुएं का मेंढक समझता है और आएं नहीं मैं ही टर्राते रहूँ, राज अपना समझ कर और पर गुर्राते रहूँ। दूसरों के आने की आहट को सुन पूरा तालाब गंदा कर देता है।
कोशिश थी परिवर्तन लाने की उसके दिल के करीब जाने की हवा के झोंके ने रुख बदल सा दिया मेरी लाज ने मुझे आज रोक लिया।
सबसे भयानक मंजर वह होता है, जब जहर उगलने वाला खुद को विदूषक समझने लगता है। मन में इर्ष्या जलन और खुद ही पाऊँ और न पायें की भावना रखकर कुएँ के मेढ़क की तरह […]
मेरी दुआ है तुम आबाद रहो खुश रहो, चाहे जहाँ रहो। मेरी हर आरज़ू में तुम हो जहाँ रहो बस खुश रहो।
पिता वह दरख्ता है जिसकी छांव में रहकर नन्हे-मुन्ने पौधे भी जीवित रहते हैं और थके हारे राहगीर उसकी ठंडी छांव में आराम पाते हैं ।।
तुम्हें बोलने को कुछ कविता मन तक आती है पर संस्कार हमारे हमें गूंगा बना देते हैं…
किसका शौक पूरा हुआ है, गम खुशी में जीवन रहा है, जो दिखावा कर रहे जमाने में, खुशी के लिए बहुत कुछ सहना पड़ रहा है, हालत ने पटका ऐसे, जो कल जी रहें थे […]
सागर के सीने पर उठने वाले ये विकराल तूफ़ान, वास्तव में उसकी पीड़ाएँ हैं, जो रह-रह के उद्वेलित होती रहती हैं, उस नदी की प्रतीक्षा में जिसे सागर में विलीन होने के पहले ही सोंख […]
मुक्तक —————- मै मुर्गी खाऊ वो पाप बताते हैं वो कुकुरमुत्ता खाएं गर्व से स्वाद बताते हैं आगे से निकला पीछे से निकला उसका ऐसा वैसा स्वाद बताते हैं, शाकाहारी मांसाहारी कह करके सुबह शाम […]
पलक झपकते ही खो हो गए कितने ही मुस्कुराते चेहरे, जो कल तक थे हमारी कहानी का हिस्सा जैसे किसी चलचित्र में क्षण में बदल जाते हैं दृश्य…!! कितना कुछ बाक़ी रह गया जो कहा […]
केवल आकार का अंतर होता है आग की लपट और चिंगारी में परन्तु समान होता हैं उनका ताप और गुणधर्म उसी प्रकार सुख भी चाहे छोटा हो या बड़ा, हो क्षणिक या दीर्घकालिक, उसकी प्रकृति […]
तुम आओगे मुझे मिलने खबर ये जब से सुन ली है अपने अरमानों की डोली हमने फिर से बुन ली है….
तुमने भी मोहब्बत की हमने भी मोहब्बत की फर्क बस फकत इतना था हम तो तुमसे करते थे तुमने किसी और से ही की…
लेखनी चलती है घमंड चूर करती है, जो उड़ता है हवा में ज्यादा उसे जमीं में आने को मजबूर करती है।
माँ, तुम्हारे बारे में लिखना कठिन है या यूँ कहूँ कि ये असमर्थता समानुपातिक है उस सहजता के जिससे तुम मेरे मौन के पीछे छिपी गहरी उदासी पढ़ लेती हो..!! तुम जलती रहीं निरन्तर एक […]
कभी-कभी आसपास पानी होने का भ्रम चंद साँसों का इजाफ़ा कर देता है तड़पकर मरते हुए किसी प्यासे मुसाफ़िर की ज़िन्दगी में तुम भी मेरे जीवन में एक मरीचिका की तरह हो तुम कहीं नहीं […]
प्यार से पहले कमाई करो धन हो या शिक्षा उसकी रोपाई करो, भूखे कभी न रहोगे ठग कभी न जाओगे, दुनिया तुम्हें रुलाएंगी, है ज्ञान तो रोने से बच जाओगे, शिक्षा- संघर्ष सवाल देती है […]
मत कर होड़ा होड़ी बीच सड़क तू चलने में।
दिन पर दिन कर रहे व्यभिचार क्यों बढ़ा रहे हौं तुम ऐब, खुद बीड़ी सिगरेट गुटखा खाए तम्बाकू पिये दारू, बच्चा खाए ना पावे एको सेब, मक्कारी चोरी छल से ना धन जोड़िए , ना […]
आज जब धरती मां सुला रही लोगों को अपनी गोद फिर भी रंजिशे मिट नहीं रही ,पुरानी बातें भी रहें खोद प्यार स्नेह तो बचा नहीं, गालियां देते एक दूजे को रोज मां बहन के […]
महक रहा है सावन सुन्दर सुन्दर कविताओं का आँगन, और महक आ गई है जब से हुआ नये कवियों का आगमन।
आज की शिक्षित समाज के लोगों को मैंने अनपढ़ पाया , बेटी बनी बहू को भी एक पल में ठुकराया, मानवता तो बची नहीं जताते बड़ा अपना_ पराया , मायका भी है ससुराल भी है […]
2 साल अभी बस बीते, पोते की खुशी में सब जीते , अचानक पति की तबीयत बिगड़ी और वह सांस ना ले पाया, छोड़ दी उसने अपनी सांसे ऑक्सीजन उसे न मिल पाया , बेटे […]
आज मन बड़ा द्रवित हुआ , सोचा सबको बतला दूं, समाज का एक ऐसा भी रूप सोचा सब को दिखला दूं, बड़ा परेशान पिता था बेटी की शादी के लिए , ना जाने कितने लड़के […]
सोचा था आज है हनुमान जयंती, कराऊगीं सुंदर से भजन कीर्तन पर बड़ा द्रवित यह मन हो उठा, सुनकर चंहुओर क्रंदन करती हूं प्रार्थना बजरंगी, सुन लो अब मेरी विनती । लोगों की पीड़ा हरो […]
है अनमोल धरोहर ये अपनी बौद्धिक संपदा कर सकता इसे कोई इसे क्षीण नहीं ,रहती साथ में सर्वदा कोई नया काज करें , या कोई हो स्रजित् अविष्कार हो कोई कलात्मक कार्य , या हो […]
एक बूढ़ी अम्मा का घर आना हुआ, बातों का सिलसिला जब शुरू हुआ, अम्मा कहती जब से ई मोबाइल आया, वयस्कों संग बच्चा भी हमसे बात करने से कतराया, जैसे ही सुबह हुई बच्चों ने […]
कहा बकरी ने मेमने से मैं तुझे जहां भेजती हूँ हंसते हुए जाना ले जाने वाला भगवान् के सामने तेरी काटेगा गर्दन और तेरे जिसम का प्रसाद बांटेगा मगर तुम रोना मत क्यूँकि ये संसार […]
आकाश की सुंदरता बढ़ाता कपासी बादल नहीं धरती का प्रियतम है वह काला बादल जो अपने प्रेम से करता है धरा का शृंगार.. कानों में रस घोलती सुरीली तान फूटती है काली कुरूप कोयल के […]
पर्यावरण बचाइए, हे मानव समुदाय सुख समृद्धि शांति, का है जो पर्याय नदिया पर्वत वन और, वन्य जीव समुदाय मानव दानव से हमे, कोई लेव बचाय धरा वायु जल सब हुए, दूषित सुनो पुकार प्रकृति […]
भारत माता कह रही, एक जुट हो सब लाल शत्रु की ईंट जवाव दो, पत्थर से तत्काल भारत माता कह रही, संकट में इंसान मत भूलो इंसानियत, सब मारो शैतान भारत माता कह रही, ईश्वर […]
पाँच साल में अब नहीं, हो हर साल चुनाव बहती गंगा प्रेम की, होते दूर तनाव पढ लिख कर नौकर बने, या होते बेकार एक बार नेता बनो, दो कई पीढ़ी तार कानो को प्यारे […]
घर बनाने गए दो हाथ घर बनाने के लिए हाथ जोड़ते रह गए आखिर जबाब मिल ही गया काम नहीं तब से बनी हुई इमारत और पलंग तोड़ते रह गए
शक्कर पानी ज्यों घुले, ऐसे घुलमिल देश शर्बत पी लें शांति का, यह भारत संदेश भारत है एक बाग सा, कई प्रजाति के फूल औ माली भगवान् हैं, सींच रखे अनुकूल भाषाए होंगी अलग, होंगे […]
हे धारित्री, पञ्च महाभूतों में से एक तुम, तुमसे ही उत्पन्न होकर भी मानव अछूता रहा तुम्हारी सहनशीलता के गुण से..!! काश! तुम्हारे धैर्य का अंशमात्र भी वह आत्मसात कर पाता अपने भीतर तो आज […]
प्रेम…. किसी को समझाया नहीं जा सकता। यह तो केवल एक अनुभूति है, जो स्वयं ही होती है। प्रेम स्वार्थहीन है, सागर सी गहराई लिए हुए , एक खूबसूरत एहसास!! इन्तजार में और भी वृद्धि […]
कल अचानक ही तुम्हारी तस्वीर पर आकर ठहर गईं मेरी निगाहें… और मैं उलझकर रह गयी तुम्हारी आँखों के तिलिस्म में ..!! गहरी ख़ामोशी समेटे हुए सागर सी ये तुम्हारी आँखे, साक्षी हैं ज़िन्दगी के […]
नाम…. यही तो है हमारी पहचान, हमारे व्यक्तित्व की शान। नाम केवल एक नाम ही नहीं है, एक विशेष शख्सियत है… जिसे जानते हैं हम उस “नाम” से, उसके आचरण से और उसके व्यवहार से। […]
खूबसूरत सुबह तुझे प्रणाम है मेरा, सूर्य की रश्मियों को आज प्रणाम मेरा। खिल रही दिशाएं चहकते खग वृंदों, चमकती ओस बूंदो तुन्हें प्रणाम मेरा। तुम्हें प्रणाम मेरा।
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