मैं हमेशा दुःख से कतराती रही, इसे दुत्कारती रही मगर ये दुःख हमेशा ही मिला है मुझसे बाहें पसारे…!! मैं भटकती रही चेहरे दर चेहरे सुख की तलाश में… और वो हमेशा रहा एक परछाई […]

गरीब के घर में झांकीए कैसे मनाते है निर्धन दीवाली। मन में उमंगों की पटाखे फोर कर निर्धन ऐसे मनाते है दीवाली ।। दीया है बाती है मगर तेल नहीं लाला भी आज उधार देगा […]

हम सब दीप तो जलायेंगे, बाहरी अंधेर को दूर करने के लिए। मगर हम वो दीप कब जलायेंगे मन में छिपे अंधेर को दूर करने के लिए।। हम हर वर्ष बड़ी उल्लास के साथ घर […]

कहीं दीप जले तो कहीं , गरीब के घर में चूल्हा न जले। हम खुशियाँ मनाते रहे और वो, अंधेरे में माचिस खोजते रहे।। कहीं दीपावली की धूम तो कहीं पापी पेट में भूख की […]

हम दीवाली क्या मनाए दीवाली तो करोना ले गए। थी जुस्तजू मुझे भी मगर साल २०२० हमें बर्बाद कर गए।। हमे क्या पता था देश में कभी ऐसे भी दिन आयेंगे। बुरे वक्त पे रिश्ते […]

कभी कभी दु:ख को गले लगा कर भी जीना पड़ता है। तभी तो सुख से ज्यादा इस जहाँ में दुःख की महता है।। जब तक इंसान के जीवन के धड़कन की डोर चलती है। तब […]

उसकी आँखों में झलकता है, उसके दिल मे बसे सागर का चेहरा !! दुःख की उद्दंड लहरें अक्सर छूकर, भिगोती रहती हैं पलकों के किनारों को !! उस सागर की गहराई में बिखरे हैं, बीते […]

तपकर धूप से मुझमें निखार आया है, शोलों पर चलकर अब सम्हलना आया है। कायनात में लिखूँगी अपने प्यार की कहानी, जुनून से अपने अब यह विश्वास आया है।

किया है प्यार तो इकरार से इन्कार क्या करना। है मरना शौक़ बचने का जतन बेकार क्या करना। तेरा आगोश ही मझधार बनकर गर डुबाता हो, तो आशिक़ दिल ये कहता है कि दरिया पार […]

भावना सद्भावना ( 12-मात्रा ) स्वच्छंद वितान में मानवीय विधान में शब्द की झंकार में गीत मधुर सुहावना भावना सद्भावना ..। तन में दिव्य शक्ति हो दिल में प्रेम भक्ति हो सदा मित्र के भाव […]

18-हँसना मेरी मजबूरी ( मुक्त छंद 16 मात्रा ) फूलों में आज सुगंध नहीं खुशियों का कोई भाव नहीं न चेहरे पर मुस्कान कहीं पर हँसना मेरी मजबूरी..। विनय रूप कायरता बनती आंखों से जलधारा […]

61-नहीं मरेगा-रावण अहम भाव में बसता हूं मैं कभी न मरता रावण हूं मैं स्वर्ण मृग मारीच बनाकर सीता को भी छलता हूं मैं..। किसे नहीं है खतरा सोचो केवल अपनी सोच रहे हो रावण […]

मुक्तक- कालेज का नियम ——————————— अनजाने से पथ पर, एक अनजाने से पहचान हुई, दो दुनिया के थे दोनों, मानों अंबर का मिलन धरती से हुई| देखा उसको पहली बार, भूल गया खुद होशो हवास, […]

सबसे खूबसूरत तोहफा है गुरू रब से भी पाक होता है गुरू ढूंढ लो चाहे सारी दुनिया में ना है जहान में कोई तुम-सा गुरू

वे सो रहे हैं व्यवस्था को, जेब में लेकर, हम रो रहे हैं , हाथ में मोमबत्तियां लेकर! वे जागते हैं अक़्सर चुनाव में, और हम हादसों में ….

ये पथ ले जाएंगे, लक्ष्य तक जरूर मत छोड़ना मनुज तू अपना गुरूर हौसले बुलंद ही रखना तू सदा, अंधेरों के बाद ही आती है रौशनी…. *****✍️ गीता*****

जब-जब , मैं रोई! तब-तब , चैन से मां ना सोई, मां ने पाला , मां ने सम्भाला, अपना निवाला, मेरे उदर में डाला, कोने में रोकर , मुझको हंसाया, जिंदगी क्या है, सलीका सिखाया।

मैं अभिमन्यु मां के पेट में ही मज़दूरी के गुर सीख चुका था; किंतु निकल नहीं पाया इस चक्रव्यूह से- इसी से पीढ़ी दर पीढ़ी मज़दूरी की विरासत बांट रहा हूं !

नैतिकता को पढ़ना-सुनना, अक्सर बहुत अच्छा लागे, सबपर पूरा असर , पूरा समर्थन, मगर आचरण में सबके क्यों नहीं? यह सवाल विचित्र-सा, काल्पनिक-सा…..

सही मायने में उजाला है, जहां बेटियों ने मां-बाप को संभाला है। चाहे मां पिता हो या मां पिता से सास-ससुर, उन्हीं से ही परिवार का सवेरा है।

तुम बिल्डर हो उम्र में इल्डर हो हो सके तो मेरे मन के किसी कोने में अपना घर बना लो। वीरान -सा छाया है हर तरफ यहाँ पर अपने प्यार का सुंदर -सा शहर बना […]

आज भी माँ की गोद में सिर रखकर सो लेता हूँ होता हूँ उदास कभी तो लिपटकर रो लेता हूँ माँ को गुजरे जमाने हुए हैं मगर मैं आज भी माँ से मिलकर प्यार बटोर […]

ऊंचे-ऊंचे घरों में , रहने वाले लोग, आजकल घरों में ही रहते हैं, मगर मैं निकला हूं बाहर, साहेब ! रेहड़ी लेकर, खाली उदर बच्चों का, टिकने ही नहीं देता है।

आपने जब हमें मित्र अपना कह दिया यकीन मानिए, जलवा हमारा बढ़ गया। अब ये माथा आपका झुकने न देंगे हम कभी आपको सिर-माथ पर हमने सजा कर रख लिया।

हमें क्या गिरा पाओगे, हमें क्या मिटा पाओगे, जो जवानी में गिर गिर के चलना सिखा हो, कभी आंसू तो कभी जहर पीना सिखा हो, आज खुश है हमें छोड़ कर, यारों हम भी खुश […]

कुछ भी उसमें खास नहीं था, फिर भी उसे दिल में बसाया था, कोई हमसे छीन ना ले.. हर दिन खुदा से दुआएं किया करता था मेरी तकदीर है, मेरी जन्नत की लकीर है, खुदा […]