कई क़िस्से, कई बातें फिर हँसती खिलखिलाती मुलाकातें, उन दिनों की एक-एक यादें आज भी मेरे साथ हैं, तू जो छोड़कर चला गया अब क़लम ही एक विश्वास है, तेरे इश्क़ के अनुभव लिखने पे […]
कई क़िस्से, कई बातें फिर हँसती खिलखिलाती मुलाकातें, उन दिनों की एक-एक यादें आज भी मेरे साथ हैं, तू जो छोड़कर चला गया अब क़लम ही एक विश्वास है, तेरे इश्क़ के अनुभव लिखने पे […]
#भारतीय_रेल लोहे की खिड़की पे सिर रखकर, सपनो को करीब से देखा है, पहियों के रफ़्तार से, अनुभव को भरपूर जीता है इस तरह यादें समेटे सफर चलता जा रहा, भारतीय रेल का ये साथ […]
बहारो मे जब अकसर कुछ फूल आते है ये पौधे बेबसी अपनी अकसर भूल जाते है कुछ इस तरह मिलती है निगाह अजनबी से कहना क्या होता है हम अकसर भूल जाते है कल सरे […]
मैं कवि हूँ , भावना लिखता हूँ बोध संग गढ़ता हूँ प्रतिकार-अधिकार के लिए अस्त्र बन उभरता हूँ राह सुलभ करने का हुनर भी जानता हूँ राहगीर से मिलता जब भी, उनकी तकलीफ़ को स्याही […]
इक नज्म है जो दबी हूई है दिल की दरारों में आज फिर बहुत कोशिश की मगर निकल ना पाई
माँ तेरे प्यार को कैसे लिखूँ, प्यारे से दुलार को कैसे लिखूँ, सुबह का जगाना और रात लोरी सुनना पल पल पूछे खाना खाले जो चाहे वही बनवाले फिर बोले घर जल्दी आना देर हो […]
प्यार का इज़हार होने दीजिए। गुल चमन गुलजार होने दीजिए। खास हो एैसा ही, कोई पल दे दो, वक्त को हम – राज होने दीजिए। हो सदा वचनों में इक नव सादगी , प्यार काे […]
न ही उठानी है तलवार न ही उठाना है हथियार उठानी है बस हाथ में झाड़ू जिससे भारत हो खुशहाल न ही थूकना दीवारों पर न कूड़ा फेंकना इधर उधर कूड़ेदान का उपयोग खुद करके […]
Swcch bana h bharat mujhko Pr isse phle khud ko swcch bno
Sfai krna koi ni h krm Ye to aik puja h Isme hi lg jao sb
Saaaf krna h to iss mn ko kro Desh to sbnh saaf hoga Saaf krna h to desh ko kro Deish sbyn mhan hoga
स्वच्छ भारत एक सवेरा है जिसका भारत में डेरा है स्वच्छता का सूरज उगता है तो बीमारियों की शाम होती है स्वच्छता को बनाएंगे इस सूरज को उगाएंगे
स्वच्छता सम्बन्धी कुछ बातों को सबके दिल तक पहुँचाना होगा, ये जागरूकता फैलाने में हम सब को साथ निभाना होगा, फैल रहा जा कूड़ा करकट उसको मिल जुल कर साफ़ कराना होगा, बचना हो गर […]
जितना जिंदगी को पास बुलाओ जिंदगी उतना दूर हो जाती है मंजिलो पर नजर रखते रखते पैरों से राह गुम हो जाती है
देखा है दुनिया को अपनी दिशा बदलते अपने लोगो को अपनो से आंखे फ़ेरते कतरा कतरा जिंदगी का रेत फिसलता जाता है देखा है जिंदगी को मौत में बदलते
नहीं मालूम कहां गुम है वक्त सब ढूढ़ना चाहते है मगर ढ़ूढ़ने को आखिर वक्त कहां है सब कहते फिरते है, वक्त निकालूंगा वक्त निकालने को आखिर वक्त कहां है
आज मैंने वक़्त को महफील में बुलाया…. बहस तब छिड़ी जब वक़्त ही वक़्त पर ना आया… सबने आरोप लगाये लोग आगबबूला हुए… और वक़्त बेचारा नज़रे फिराए बैठा रहा… गरीब ने कहा मेरा वक़्त […]
अभी ज़िन्दगी की किताब के चन्द पन्नों को पटल कर देखा है। अपने बचपन को जैसे सरसरी निगाहों से गुजरते देखा है, यूँ तो खुशियों के पायदान के पृष्ठ पर आज पैर हैं हमारे, […]
प्यार का इज़हार होने दीजिए। गुल चमन गुलजार होने दीजिए। खास हो एैसा ही, कोई पल दे दो, वक्त को हम – राज होने दीजिए। योगेन्द्र कुमार निषाद घरघोड़ा ,छ०ग०
जिंदगी भी कितनी अजीब है एक लंबे संघर्ष के बाद ही खूबसूरत सी जीत है, आँधी की तबाही के पहले हर बार सन्नाटा सा होता रौशनी तभी जीत पाती है सामने उसके जब अँधियारा होता, […]
कौन कहता है के खेल को सीखना होगा, खेल है तो खेल को खेलना ही होगा, हार जीत की परवाह कहाँ है किसी को, पर अपने हिस्से का टुकड़ा तो छीनना होगा।। – राही (अंजाना)
मैं भी अब कुछ करने के क़ाबिल हो गया हूँ, रुपयों से खुशियाँ खरीदने की दौड़ मे मैं भी शामिल हो गया हूँ #पहलीनौकरीकीख़ुशीमे -मनीष
इश्क का दिलो में सुरूर होना चाहिए, मोहब्बत हो या जंग भरपूर होना चाहिए ! ग़र हो इंसा तो इंसानियत सजालो सर पे, ये वो अदा है जो हर शख्स में जरुर होना चाहिए ! […]
सावन का मुग्ध फुहार तू है । बूंदो की रमणीक धार तू है ।। कोमल वाणी मे खिली, आह! लचक सुरीली । खनकती बोली मे ढली, ओह!आवाज सजीली सावन झड़ी मस्त बहार तू है । […]
क्षणिका ?:– ✍ जब गम सताता है, गाने मैं गुनगुनाता हूं । जब ददं रुलाता है, तराने मैं सजाता हूँ ।। (1) जब रंज बढ आता है, रंगीला मन मै हो जाता हूं । जब […]
आज एक दस साल के बच्चे की कैंसर से मौत के बाद दिल पसीज गया और सोंचा इन आंसुओ को शब्द बनादूं बतलाकर जो चली गई है नुस्खा दादी नानी कहीं कहीं गांवो में मिल […]
अटल अविचल धर पग बढ़ नारी जीवन मे नव इतिहास गढ़ नारी नारी है तू यह सोच न कमतर कम॔ कर तू अभिनव हटकर तुझसे बंधा है सुख परिवार का सव॔ सुख दे सदा तू […]
शिव की शक्ति बनकर तूने हर एक क्षण साथ निभाया नारी, पिता- पती के घर को तूने हर एक क्षण महकाया नारी, हर एक युग में अपने अस्तित्व का तूने एहसास कराया नारी, प्रश्न उठे […]
चलो उठो ये प्रण कर लें हम भारत को स्वच्छ बनाना है, धरती माँ के आँचल को हरियाले,फल-फूलों से सजाना है, प्रदूषण की जहरीली हवा से पर्यावरण को मुक्त बनाना है, तन स्वच्छ तो करते […]
जिसके ख़ातिर छोड़ हम,आए थे घर-बार। वो ही अब कहने लगा,रहा नहीं है प्यार।। ठा. कौशल सिंह✍️
–:?गीत ?:- ✍ सावन का मुग्ध फुहार तू है । बूंदो की रमणीक धार तू है ।। कोमल वाणी मे खिली, आह! लचक सुरीली । खनकती बोली मे ढली, ओह!आवाज सजीली सावन झड़ी मस्त बहार […]
–:?गीत ?:- ✍ सावन का मुग्ध फुहार तू है । बूंदो की रमणीक धार तू है ।। कोमल वाणी मे खिली, आह! लचक सुरीली । खनकती बोली मे ढली, ओह!आवाज सजीली सावन झड़ी मस्त बहार […]
तुमसे मिलने की ललक.. मेरी इन साँसों को ! एक उम्मीद-औ-आशा की झलक दे जाती है !! तेरी बस एक झलक.. उम्मीदों के तप्त मरुस्थल में ! उमंगों की बहार.. अनेकों पुष्प खिला जाती है […]
चलना संभल कर यहां जर्रे जर्रे में है धोखा। अब सांसे भी सांसों को देता रहा है धोखा। यूं जिंदगी को न कर इस कदर रुसवा यहां हर गली हर चौराहे पर पसरा है धोखा। […]
तुम मुझे अपनी वाणी से हताहत कर सकते हो अपनी गंदी नजरों से मुझे काट सकते हो अपनी नफ़रत से मुझे मार सकते हो लेकिन मैं हर बार ऊठूंगी आग की तरह
लगता है हम बिखर चुके है, अब कोई जोश नही है,रोष नही है, हालातो का होश नही है जब सुनते है वो प्यारी बातें लगता है हम निखर चुके हैं, लगता है हम बिखर चुके […]
वो गए है छोड़ के हर बार की तरह, हम क्यों हैरान हो बेकार की तरह, ये कौनसी पहली दफा है मोहब्बत में, ये सब चलता रहता है सरकार की तरह, पता है वो वापिस […]
महिला दिवस पर प्रत्येक महिला को समर्पित ये छोटा सा लेख।। तेरी शान से ही तो हर पल मेरी शान है, जहाँ-जहाँ तू कदम रखे वहाँ मेरा सम्मान है, निःस्वार्थ भाव से सेवा करके तू […]
स्वच्छ्ता हो प्राथमिकता स्वयं से शुरुआत करिए। स्वच्छ हो घर-बार अपना स्वच्छता हो सार अपना ग़र नहीं मिलता समय तो दीजिए इतवार अपना मामला सबसे जुड़ा है इसलिए फिर बात करिए, स्वयं से शुरुआत करिए। […]
मिलकर साथ हाथ मिलायें खुद जागें और जगायें स्वच्छ भारत अभियान सफल बनायें। गली मोहल्ले गंद मुक्त हो सड़कें स्वच्छ चमके देहरी द्वार महक उठे ऐसा संघर्ष अभियान चलायें स्वच्छ भारत अभियान सफल बनायें। स्वच्छ […]
बह्र – २१२२ / २१२२ / २१२ :::::::::::::::::::;::::::::::::::::::::::::: जो हुआ वो सब भुलाना चाहिए । रूठे मन को अब मनाना चाहिए।१ बैठ यारों अब यहा महफिल सजें मयकशी का दौर लाना चाहिए।२ गर शिकायत हो […]
जो भी रस्म थी हर रस्म निभाता रहा हूँ मैं, तेरे माथे से हर शिकन मिटाता रहा हूँ मैं। खुद को समन्दर किया तेरी ख़ातिर, तेरी प्यास बुझाता और खुद को सुखाता रहा हूँ मैं, […]
गांधी जी का सपना सच करके हम दिखाएंगे अपने भारत को हम स्वच्छ भारत बनाएंगे साफ-सुथरी गलियां होगी साफ सुथरा होगा गांव साफ सफाई करने में कभी ना रुकेंगे हमारे पांव हमने वादा कर लिया […]
सियासी आदमी हरगिज़ तुम्हारा हो नहीं सकता। कोई भी मतलबी दुःख में सहारा हो नहीं सकता। जमीं ग़र रो रही है तो सुनो बस बेबकूफ़ी है- फ़लक़ का है जमीं का तो सितारा हो नहीं […]
अरे कौशल मिलाओ ख़ून में तुम भी ज़रा पानी, बहुत ख़ुद्दार होना भी तुम्हें बरबाद कर देगा। ठा. कौशल सिंह✍️
यार इसमें तो मज़ा है ही नहीं, यार इसमें तो मज़ा है ही नहीं, कोई हमसे ख़फ़ा है ही नहीं, इश्क है मर्ज़ है इसकी कोई भी दवा है ही नहीं।।। राही (अंजाना)
जब न था इश्क दर्दे-ए-दिल न था! जब से उनसे उलझी नज़रें बेकली सी हो गयी!! ********* इब्दिता-ए-इश्क में.. उनके उठाए नाज़-ओ-खम! अब ना जाने अपनी फ़ितरत… बेवफा सी हो गयी!! […]
गंदगी से हमें नाता तोड़ना होगा स्वच्छ से अब रिश्ता जोड़्ना होगा हो गयी बहुत खातिरदारी अब गंदगी की आ इसको दरवाजा हमें दिखाना होगा| भारत की पहचान स्वच्छता से हो यही संकल्प हमें अब […]
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