तेरी पहली पंक्ति में मैंने तुझे शीशे सा टूटता हुआ देखा, और जब तूने दूसरी और अंतिम पंक्ति लिखी तो उसी शीशे के टुकड़ों को ज़मीन पर बिखरते हुए देखा, तेरे लेख से मैंने तुझको […]

कदम दर कदम मै बढाने चला हूँ। सफर जिन्दगी का सजाने चला हूँ। ज़माने की खुशियाँ जहाँ पें रखकर दौर जिन्दगी बनाने चला हूँ।। योगेन्द्र कुमार निषाद घरघोड़ा

कुछ परेशानी से तो कुछ संघर्ष की कहानियों से, जीवन नहीं कटता बिना दुःख और दर्द की निशानियों से, कभी टूटता तन, तो कभी रूठता मन लम्हे कितने भी खूबसूरत क्यों न हों, हर खूबसूरती […]

नहीं थकती……। —————————- अश्रुपूरित नयन मेरे क्यों….? राह तुम्हारी ताकते नही थकती शून्यमात्र बिन तेरे-जीवन के पल “प्रीत”हमारी-कहते नही थकती मनुहार दिल की-सुने तेरा दिल भी “उम्मीदें”दिल की-सहते नही थकती गुदगुदाते मन को-मिलन के पल […]

चांद की चमक और तुम्हारी मेहक एक सी है दोनों मुझ तक पहुंच जाती है लेकिन लौट न जा पाती है और तू है की मुझे समझ ही नहीं पाती है इतना क्यों इतराती है!! […]

“**प्रातः अभिवादन “** *********** मित्रतामय जगत सारा , मित्रता ही महकती है । गुलाबों की तरह हर पल दुख के शूलों के संग रहती। निभा कर साथ, सुख दुख में , मित्र के सुख दुख […]

**मित्रता के तख्त पर”** मधुर प्रातः स्मरण ” नित शाखें प्यार की हैं झूमती , हर जिंदगी के. दरख्त पर । हर सुवह शाम की दुआ-सलाम, करते है मित्रता के तख्त पर । जानकी प्रसाद […]

ना शब्द, ना बात और ना ही मुलाकात, तुम सब समझ लेते हो , सुनकर बस मेरी एक आवाज़। जानते हो मेरी हर एक बात, फिर भी कभी कुछ जताते नही, और भले हो कितनी […]

सुप्रभाती-नमन दुआओं की दवाओं ने, वह असर दिखला दिया। दस दिनों की जगह, दो दिन में ही अंतर ला दिया। जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो, गुनगुनाती सुवह का रसीला नमन, सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें । सादर […]

कई क़िस्से, कई बातें फिर हँसती खिलखिलाती मुलाकातें, उन दिनों की एक-एक यादें आज भी मेरे साथ हैं, तू जो छोड़कर चला गया अब क़लम ही एक विश्वास है, तेरे इश्क़ के अनुभव लिखने पे […]

#भारतीय_रेल लोहे की खिड़की पे सिर रखकर, सपनो को करीब से देखा है, पहियों के रफ़्तार से, अनुभव को भरपूर जीता है इस तरह यादें समेटे सफर चलता जा रहा, भारतीय रेल का ये साथ […]

बहारो मे जब अकसर कुछ फूल आते है ये पौधे बेबसी अपनी अकसर भूल जाते है कुछ इस तरह मिलती है निगाह अजनबी से कहना क्या होता है हम अकसर भूल जाते है कल सरे […]

मैं कवि हूँ , भावना लिखता हूँ बोध संग गढ़ता हूँ प्रतिकार-अधिकार के लिए अस्त्र बन उभरता हूँ राह सुलभ करने का हुनर भी जानता हूँ राहगीर से मिलता जब भी, उनकी तकलीफ़ को स्याही […]

माँ तेरे प्यार को कैसे लिखूँ, प्यारे से दुलार को कैसे लिखूँ, सुबह का जगाना और रात लोरी सुनना पल पल पूछे खाना खाले जो चाहे वही बनवाले फिर बोले घर जल्दी आना देर हो […]

प्यार का इज़हार होने दीजिए। गुल चमन गुलजार होने दीजिए। खास हो एैसा ही, कोई पल दे दो, वक्त को हम – राज होने दीजिए। हो सदा वचनों में इक नव सादगी , प्यार काे […]

न ही उठानी है तलवार न ही उठाना है हथियार उठानी है बस हाथ में झाड़ू जिससे भारत हो खुशहाल न ही थूकना दीवारों पर न कूड़ा फेंकना इधर उधर कूड़ेदान का उपयोग खुद करके […]

स्वच्छता सम्बन्धी कुछ बातों को सबके दिल तक पहुँचाना होगा, ये जागरूकता फैलाने में हम सब को साथ निभाना होगा, फैल रहा जा कूड़ा करकट उसको मिल जुल कर साफ़ कराना होगा, बचना हो गर […]

देखा है दुनिया को अपनी दिशा बदलते अपने लोगो को अपनो से आंखे फ़ेरते कतरा कतरा जिंदगी का रेत फिसलता जाता है देखा है जिंदगी को मौत में बदलते

नहीं मालूम कहां गुम है वक्त सब ढूढ़ना चाहते है मगर ढ़ूढ़ने को आखिर वक्त कहां है सब कहते फिरते है, वक्त निकालूंगा वक्त निकालने को आखिर वक्त कहां है

आज मैंने वक़्त को महफील में बुलाया…. बहस तब छिड़ी जब वक़्त ही वक़्त पर ना आया… सबने आरोप लगाये लोग आगबबूला हुए… और वक़्त बेचारा नज़रे फिराए बैठा रहा… गरीब ने कहा मेरा वक़्त […]

  अभी ज़िन्दगी की किताब के चन्द पन्नों को पटल कर देखा है। अपने बचपन को जैसे सरसरी निगाहों से गुजरते देखा है, यूँ तो खुशियों के पायदान के पृष्ठ पर आज पैर हैं हमारे, […]

प्यार का इज़हार होने दीजिए। गुल चमन गुलजार होने दीजिए। खास हो एैसा ही, कोई पल दे दो, वक्त को हम – राज होने दीजिए। योगेन्द्र कुमार निषाद घरघोड़ा ,छ०ग०

जिंदगी भी कितनी अजीब है एक लंबे संघर्ष के बाद ही खूबसूरत सी जीत है, आँधी की तबाही के पहले हर बार सन्नाटा सा होता रौशनी तभी जीत पाती है सामने उसके जब अँधियारा होता, […]

कौन कहता है के खेल को सीखना होगा, खेल है तो खेल को खेलना ही होगा, हार जीत की परवाह कहाँ है किसी को, पर अपने हिस्से का टुकड़ा तो छीनना होगा।। – राही (अंजाना)

सावन का मुग्ध फुहार तू है । बूंदो की रमणीक धार तू है ।। कोमल वाणी मे खिली, आह! लचक सुरीली । खनकती बोली मे ढली, ओह!आवाज सजीली सावन झड़ी मस्त बहार तू है । […]

आज एक दस साल के बच्चे की कैंसर से मौत के बाद दिल पसीज गया और सोंचा इन आंसुओ को शब्द बनादूं बतलाकर जो चली गई है नुस्खा दादी नानी कहीं कहीं गांवो में मिल […]

अटल अविचल धर पग बढ़ नारी जीवन मे नव इतिहास गढ़ नारी नारी है तू यह सोच न कमतर कम॔ कर तू अभिनव हटकर तुझसे बंधा है सुख परिवार का सव॔ सुख दे सदा तू […]

शिव की शक्ति बनकर तूने हर एक क्षण साथ निभाया नारी, पिता- पती के घर को तूने हर एक क्षण महकाया नारी, हर एक युग में अपने अस्तित्व का तूने एहसास कराया नारी, प्रश्न उठे […]