बहुत थी मैं उसदिन रोई, अजीब पीङा में जब,माँ गयी पर देखो तो, माँ आई, माँ आई, साथ में अपने,भाई को भी लाई । थकी हुई सी माँ ,साथ नन्हा सा खिलौना माँ लेटी तो […]

जान भी तू है ज़िन्दगी तू है जाने जाँ जाने शायरी तू है खुश्बू-ए-इश्क से धुली तू है मेरी सांसो मॆं बस गई तू है रूबरू ख़्वाब मॆं हक़ीक़त मॆं मेरी रग रग मॆं दौड़ती […]

दौङना चाहती हूँ मैं, क्या मुझे वो राहें दोगे? दुनिया को देखना चाहती हूँ मैं, क्या मुझे वो नज़रें दोगे? अपने दिन और रातों को रंगना चाहती हूँ मैं, क्या मुझे वो रंग दोगे? खिलखिलाकर […]

तुम भी इस जमाने में किसी से प्यार कर लो! गम की सरहद पर खुशियों की दीवार कर लो! मर रही है जिन्दगी दौलतों की चाहत में, खुद को इस मर्ज से कभी तो दरकिनार […]

एक ग़ज़ल  जो मेरे बेहद अज़ीज़ दोस्त को समर्पित है …. _________________________________ तुम्हारे चाहने वाले को क्यों आहें मयस्सर हैं ? नमी आँखों में लब पर हिज्र की बातें मयस्सर हैं..!! _________________________________ कोई प्यासा तेरे […]

मुझे अब ये तिश्नगी अच्छी नहीं लगती चेहरे पर मेरे मायूसी अच्छी नहीं लगती……   तेरे दीदार के लिए तेरी गली आता हूँ मुझे ये आशिकी अच्छी नहीं लगती…….   जब से देखा हैं उस […]

जलती हुई सूरज की किरणों के बीच, तपती हुई हर चीज़, जल, थल, खेत, मकान, गरमी से बोझिल हर जान। ऐसे में मेघों की गङगङाहट, ऊपर नीचे होते चातकों की फरफराहट, बूंदों की चाह में […]

तुझको पा कर वो यूँ नहीँ खोती गर महब्बत हक़ीक़तन होती रिज़्क़ अपना वो साथ लाती है बोझ लड़की कभी नहीँ होती सीपियों से न वास्ता अपना दर्दे दिल के हैं खुशनुमाँ मोती लोग खुशियाँ […]

तुम्हें याद करते-करते खामोश सा हो जाता हूँ! अपने ही जुदा ख्यालों से मदहोश सा हो जाता हूँ! जब भी करीब आता है तेरे ख्वाबों का काफिला, अपने आशियाने में खानाबदोश सा हो जाता हूँ! […]

चलो कुछ लिखते हैं एक अरसा हो गया कुछ लिखा ही नहीं जिसे लिख सकें ऐसा कोई ख्याल दिखा ही नहीं समझ नहीं पाते, लिखें तो कहाँ से शुरुआत करें अपनी, या जग की, या […]

हर ओर उम्मीदें हैं, हर ओर सहारा है। हम बदलेंगें दुनिया को, वक्त हमारा है।। थपेड़े सह लेगें, लहरों से लड़ लेंगे। समन्दर हमारा है, साहिल भी हमारा है।। लाख गहरा हो दरिया, पार उसे […]

ना तो इन्कार करते हैं ना ही इकरार करते हैं, मेरी हर अताओं को सरज़द स्वीकार करते हैं, हया की तीरगी को वो नज़र से खा़क  करते हैं, भरी महफिल में भी मुझसे निगाहें चार […]

मैं ! जटिल था ; आपने , कितना सरल-सा कर दिया । सोचता हूँ ; शुष्क हिमनद , को तरल-सा कर दिया ॥ खाली सीपों का भला , बाज़ार में क्या मोल होता ? आप […]

ये मत सोंचो एक कलम के बूते पर मैं दुनिया रोज बदलता हूँ । ये मत सोंचो कवि हूँ मैं तो बस कविता कर सकता हूँ ।। ठेले पर सपनो की दुनिया, लेकर चलने वाला […]

भयावह हो,मासूम हो?कैसा है चेहरा तुम्हारा? घूमते हो बीच हमारे, फिर भी ना जाना हमारा, नज़रें तुम्हारी अनजानी सी, अनदेखी, ना पहचानी सी, ना जाने किस किसको ढूढ़ते रहते हो, ना जाने किस किसका शिकार […]

ढ़ूँढ रही मैं बावरी, अपने हिस्से का, स्वर्णिम आकाश, टिम-टिम करते तारे, हाय! सुख-दुख के, बन गए पर्याय , तम घनेरा ऐसे , छाय जैसे चन्द्र में ग्रहण लग जाए, मौसम आए मौसम जाए, कभी […]