हिन्दी-उर्दू कविता

skoon

!!!!! SAGAR KE DIL SE !!!!!! Tum tau sau gaye skoon ki neend ……………….sapurde khakh ho kar hamara tau skoon bhi gaya neend bhi ……………………sapurde jahaan ho kar @@ SAGAR @@ 02/10/15 :: 11:00 PM… (104) … © »

कुछ  अनकहे एहसास   : )

कुछ अनकहे एहसास : )

aaj Shaam yun hi Tanha Baith kar   Tere Baare mein Socha to hai      bheegti barishon ko aanshu-wo se bheega-kar  un bheege paloon ko pukara to hai     Bahti hawaon, Sagar ki Lahron pe  Tere Naam Ek Paigam ,bheja to hai     Yun hi Besakhta Teri baaton pe  chehre ne ek Muskaan Bikhera to hai     Kya hai tu, kaun hai tu Kaisi hai tu?  Hazar Sawalon k beech   Tere Andekhe Wajood se ek dhaga babdha to... »

समंदर में इक कश्ती है छोटी सी

समंदर में इक कश्ती है छोटी सी

समंदर में इक कश्ती है छोटी सी कभी रोती थी रेत के दरिया में अब दरिया ए अश्क में तैरती है.. »

rishta-e-zindagi

!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!! Ik dastoor tha zindagi hum nibhate chale gaye jo paraye thay unko bhi apna banate chale gaye bari shiddat ke saath nibhaya hummne har rishte ko phir na jaane kyoun sab apne humme yuhi rulaate chale gaye @@ SAGAR @@ 4/9/15 :: 10:55 PM .. (596) … © »

मेरे चेहरे की दो निशानियाँ ……  :)  :(

मेरे चेहरे की दो निशानियाँ …… :) :(

थोड़े हम अमीर थे एक दिल के थोड़े हम गरीब थे एक दिल के थोड़ा मुस्कुराते थे टुकड़ों में थोड़ा गुनगुना लेते थे मुखड़ों में कभी सौदागर थे हंसी के कभी रो लेते थे पीछे मुड़ के कुछ बदनाम हैं दर्द मेरे और कुछ पाक हैं अत्फ़ मेरे …बस यही है …… मेरे चेहरे की दो निशानियाँ »

Raakh

!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!! jalte hue diye ko dekh kar socha ki isse tau sab ne dekha jalte hue ! aur main bina kisi ke ahsaas kiye khaak aur raakh hota chala gaya !! @@ SAGAR @@ 1/10/15 ::3:15 PM…. (608) … © »

रंगीन दुनिया में अब बस लहू नजर आता है

रंगीन दुनिया में अब बस लहू नजर आता है

न चिराग नजर आता है, ना आफ़ताब नजर आता है भीड है चारों तरफ़ मगर, ना कोई इंसान नजर आता है रंगो की ख्वाहिश थी इस दिल को दुनिया मे बिखेरने क़ि क्या करे रंगीन दुनिया में अब बस लहू नजर आता है »

zindagi ke mor

!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!! zindagi ke har mor par khayal rakhna har waqt apno par nazar rakhna kis mor par koi chor jaaye saath tumhara bas apno main paraayo ki pehchan rakhna @@ SAGAR @@ 30/9/15 :: 8:00 PM…. (607) … © »

कुछ कमाल की बात है

कुछ कमाल की बात है

कुछ कमाल की बात है उनकी आवाज में कभी कोयल सी मधुर लगती है कभी बिजली की कडक सी कर्कश तो कभी बूंद बनकर बरसती है मेरे सूखे पडे ह्रदय में कभी बहा कर ले जाती है डुबा देती है समंदर के आगाज़ में कुछ कमाल की बात है उनकी आवाज में »

दर्द- इश्क और ज़िन्दगी

लड़कपन की बात ही कुछ और थी, तब तो मेरी भी आँखों में सपने सुहाने थे ! हाथों में हाथ डाल कर, सीखेगी दुनिया हमसे प्यार करना, कुछ ऐसे वादे हमारे थे! चलता तो रहा मैं सिर्फ उसको देख कर, उस पर विश्वास कर, अनजानी सी राहो पर, पर छोड़ अकेला मुझे वो चला ही गया, बिना कुछ बताये खुद की बनाई हुई नयी राहो पर!!   ना जाने ऐसा क्या था उसी में, जो टूट कर मैं इतना बदल गया, शराब के नाम से नफरत करने वाला, आज उसी में सिमटत... »

ahsaas

!!!!! SAGAR KE DIL SE !!!!! Jab itne kareeb ho koi tau ahsaas kyoun ho door hone ka aur jab door ho jaaye koi tau ahsaas kyoun karna kareen ka jo apna hai wo door ho ke bhi door nahi jo apna nahi wo paas ho ke bhi paas nahi bas ik payar hai.. bas ik ahsaas hai aur kuch nahi …..aur kuch bhi nahi @@ SAGAR @@ 30/8/15:: 10:30 PM…. ( 590) … © »

ek muskurahat

!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!! hum tau udaasiyon main bhi jala dete hai khushion ke chiraage na jaane kyoun logo ko muskurane ki wajah nahi milti @@ SAGAR @@ 31/8/15 :: 2:36 PM… (591) …. © »

बरस चला सारे साल का सावन

बरस चला सारे साल का सावन

सिमट कर आ गये सारे अहसास आज आंखों में बरस चला सारे साल का सावन, आज रुखसारों पर  »

मृत्यु : परम  सत्य

मृत्यु : परम सत्य

here is some para frm my long work describing the truth “death”.. hope u all ll like .. वेदो  की  वाणी  भूल  गयी ,ममता  माया  सब  छूट  गयी .. तैयार  लगा  होने  अब  तो  प्रियतम  के  घर  को  जाने  को लो  आज  चली  आई  मृत्यु  हमको  निज  गोद  उठाने  को … संघर्ष किया  था  जीवन  भर  किस  किस  से  लड़ा  किस  किस  को  छला अब  तो  निज  की  सुध  भी  भूली  कर  सकते  है  क्या  और  भला ‘... »

gunaah

!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!! Apne har gunaahgaar ko maaf kiye jaa raha hun khudh ko khudh se hi aazaad kiye jaa raha hun @@ SAGAR @@ 27/9/15 :: 8:48 PM … (604) …. © »

hussn-o-ishq

!!!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!!! teri mohabbat be-parwaah hi sahi par humne tau parwah kar kar ke apni ummar guzzar di tere hussn ki duniya kaayal hi sahi par humne tau teri saadgi dekh kar apni ummar loota di @@ SAGAR @@ 5/9/15 :: 3:03 PM … (597) …. © »

तो कहना !!!

कभी गौर से देखना खुद को आईने में, खुद ही खुद में ना खो जाओ तो कहना,, कभी पासजाकर देखना गुलाब के, खुशबुसे खुद ही ना बिखर जाए तो कहना,, बहुत नाज़ कर रही हैं लहरे आज कल खुद के इठलाव, बलखाव, झुमाव पर, आपकीजुल्फों के लहराव तले,लहरे खुद ही खुद में ना डूब जाए तो कहना !!!   चाँदबड़ा पागल हैं, कहीं और से रोशनी पाकर बहुत ही ज्यादा इतराता हैं, देख ले तुम्हे ज़रा सा एक बार,पसीने में लथपथ ना हो जाए तो कहना !!!   ... »

उस अफ़साने की बात करते हो

उस अफ़साने की बात करते हो

सिमट गया जो चंद अल्फ़ाजों में, उस अफ़साने की बात करते हो खुद को हमारी जिंदगी बनाकर, छोड जाने की बात करते हो |   नहीं है कोई अंजाम इस अफ़साने का, मालूम था हमें जला रखा था इक उम्मीद का चिराग़, उसे बुझाने की बात करते हो |   पहले से दफ़न है कई अहसास मेरे दिल की दरख्तों में कत्ल करके इक और अहसास का, दफ़नाने की बात करते हो |   आ गये है तेरे दर पर हम, अपना सबकुछ छोडकर अब खुद को छोडकर, लोट जाने क़... »

कल्पना

कल्पना

expecting ur reviews and kind attention with ur graceful words .. जब धरा उठ कर बने आकाश तो अच्छा लगे , जब मही की तृप्ति को बादल करे बरसात तो अच्छा लगे. है अँधेरा, धुंध सा है,राह पथरीली बहुत , इस घुटन को चीर कर लूँ साँस तो अच्छा लगे. मन शांत हो, जिज्ञाशु बुद्धि , और दया संचार हो, भीड़ से उठकर कोई बोले “शाबास “तो अच्छा लगे . खोज हो जब सत्य की , और धर्म  का संधान हो , शक्ति और क्षमता करें ... »

ख़ामोशी

ख़ामोशी

चुप रहता हूँ आजकल , कम बोलने लगा . देख लिया दुनिया को मैंने ,  जान लिया सच्चाई को . अब दिल बरबस रो पड़ता है, इस झूठी तन्हाई पर . इस ख़ामोशी को तुम क्या जानो , पाया कितनी मुद्दत बाद . अब तो सन्नाटे की भी आवाज़ सुनाई देती है , कितना सुन्दर आँखों को दुनिया दिखलाई देती है . चुप हो जाओ , चुप रहने दो ,  कुछ न कहूँगा आज के बाद . ख़ामोशी कितनी प्यारी है , चादर लेके चुपके चुपके  मीठी सी गहराई में , सोने की इच्... »

झुकी जो नजर

झुकी जो नजर

थोडा सा शरमाकर, हल्के से मुस्कुराकर झुकी जो नजरनज़रे-नूर-ओ-रोशनी में मेरी रंगे-रूह हल्के से घुलती गयी »

Ishq

!!! SAGAR KI KALAM SE !!!! Ishq hua jab humme unse tau umre-e-ishq na thi hussn aaya jab chehre par unke tau umre-e-hussn na thi kahin tau tha hamare ishq ka asar jo ban kar aaya noor unke chehre par par be-dard duniya ko ye hussn-e-ishq ki takreer pasand na thi @@ SAGAR @@ 9/09/15 :: 8:55 PM … (601) … © »

मेरी याद आएगी

मेरी याद आएगी

क़भी जब गिर के सम्भ्लोंगे  तो मेरी याद आएगी , कभी जब फिर से बहकोगे  तो मेरी याद आएगी। वो गलियां , वो बगीचे ,वो शहर ,वो घर , कभी गुजरोगे जब उनसे तो मेरी याद आयेगी। वो कन्धा मीर का तकिया तुम्हारा वस्ल में जो था, कभी जब नींद में होगे तो मेरी याद  आएगी। मुझे है याद वो पत्थर कि जिनसे घर बनाया था , आँखों ही आँखों से जहाँ सपना सजाया था , मुझे है याद वो आँखे, वो बातें और वो सपना, कभी उस घर से गुजरोगे तो मे... »

Khayaal

Khayaal

!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!! ik khayaal hai jo zehan se jaata nahi dil aaj bhi tumko kisi aur ka manta nahi waqt ki be-mani thi ya waqt ki thi maar verna aaj mere siva tera aur koi hota nahi @@ SAGAR @@11/9/15 ::9:15 PM .. (602) … © »

DARD

DARD

!!!!  SAGAR KI KALAM SE !!!! Choti choti baat par bhi bahana dundhte rehte hai ye aanssoo har watq beh jaane ke talash main rehte hai @@  SAGAR  @@   »

इतना आसान

इतना आसान हूँ मैं कि हर किसी को समझ में आ जाता हूँ,, शायद तुमने ही मुझे पन्ने छोड़-छोड़ कर पढ़ा था!! इसलिए हक हैं तुझे,, तू भी तो मुझसे दूर सकता हैं,, मेरा भी मन तो तेरी खातिर दुनिया को भुला बैठा था!! मगर इतना गुमान जरूर हैं मुझे अपने वजूद पर कि,, तू मुझसे दूर ही जा सकता हैं, मगर भुला नहीं सकता!!! न तो मैं अनपढ़ रहा, और ना ही काबिल रह पाया,, ऐ इश्क,, खाम-खाँ तेरे स्कूल में मेरा हुआ दाखिला था!!!! मगर ए... »

धड़क

धड़क

ऐ दिल,,,, सिर्फ धड़क »

आती नही हैं नींद

आती नही हैं नींद

आती नहीं है नींद क्यों रातों में आजकल। तस्वीर बन रही है एक आँखों में आजकल। फूलों से दोस्तीदोस्ती है या उल्फत का असर है। शोखी घुली है उसकी बातों में आजकल। कुछ दिल से हो रही है क्यों महकी हुई फ़िज़ा। मेहंदी रचा रही है वो हाथो पे आजकल। #कुलदीप अनजाना »

मुक्तक  32

मुक्तक 32

हवाओं  की नज़र से देखता हूँ मीर मैं तुझको , कि छूकर पास से निकलूं और तुझको खबर न हो . ये दिल पत्तों सा हिलता है तेरी यादों के आने से,, कभी तो झूम के बरसेगा सावन उम्मीद बाक़ी है . …atr »

मेरे अहसास

कभी लगता था कि मेरे अहसास सिर्फ़ मेरे है अब शायद वो भी पराये हो गये »

उस नजर से नहीं

वक़्त बदलेगा किसी वक़्त पर सोचा इस कदर से नहीं, पिलाकर नजरो से हाला, फिर बोला कम जहर से नहीं,, इज्जत बहुत हैं तेरी दिल में, तुझसा दोस्त ना पाऊँगी, मैं प्यार तुझी से करती हूँ,, मगर उस नजर से नहीं,, उसने तो हर एक बात को ऐसे मुंह उठाकर बोल दिया,, मेरे हर एक ख्वाब को बस,, तराजू जुटाकर तोल दिया, कहाँ खोजूं उस नजर को यारो, हर नजर ने राह को मोड़ दिया,, Amazon, snapdeal फेल हो गये, गूगल ने भी हाथ जोड़ दिया,, ... »

हाल -ए- दिल

हाल -ए- दिल

हम अपना हाल -ए- दिल आपसे कहते रहेकभी बच्चा तो कभी मासूम आप हमें कहते रहे आज तक कोई सबक पढा न जिंदगी में हमनेताउम्र हम आपकी आखों जाने क्या पढते रहे इक अरसा बीत गया हम मिले नहीं आपसेतुझसे मुलाकात के इंतजार में हम तनहा मरते रहे न हुई सुबह न कभी रात इस दिल ए शहर मेंकितने ही सूरज उगे कितने ही ढलते रहे अनजान राहों में चलते रहे मंजिल की तलाश मेंचलना ही मुसाफिर का नसीब है सो हम चलते रहे »

मुक्तक 31

दिल  के आइने में मीर तेरा अक्श देखूंगा , कभी सोचा नहीं था तुमपे इतना प्यार आएगा . …atr »

मुक्तक 30

तेरे  जाने  से सब  ये सोचते  है मैं अकेला  हूँ  , उन्हें  शायद खबर न हो कि तेरी याद  बाक़ी है . मैं तनहा कैसे समझूँ मीर इन ख़ाली मकानों को , तेरे और मेरे प्रेम का वो सहज संवाद बाक़ी है. . …atr »

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे उमडने को आतुर है ज़ज्बात मिरे वो तो अल्फ़ाज़ हैं कि कहीं खोये हुए है नहीं तो इक नज़्म लिख देते अश्क मिरे »

बारी हैं!!!

बहुत सो लिए हम,, अब हमारे जागने की बारी हैं!!! बहुत लूटा परिंदों ने, अब तड़पने की उनकी बारी हैं!!! मन हमारे अकेले थे, सो वार कर गये वो हम पर,, अब एकजुट होकर कुछ कर गुजरने की बारी हैं!! 28 राज्य और 3 देशों में बिखर कर रह गया इंडिया,, अब इंडिया को अखंड साम्राज्य भारत बनाने की बारी हैं!!! »

डर

डर

सिमट रहा हूं धीरे धीरे इन सर्द रातों में छिपा रहा हूं खुद को खुद में इस बेनूर अंधेरे में कभी कोई चीख सुनाई देती है खामोश सी, कभी सर्द हवाओं को चीरती पत्तों की सरसराहट, तो कभी कहीं दूर भागती गाडी की आवाज कभी कभी गिर पडते हैं ठण्डे – ठण्डे रूखसारों पर गर्म आंसू, कभी चल उठती है यादों की लपटें सर्द हवाओं के बीच, कभी डर उठता हूं पास आती अनजान आहटों से देखता हूं बार बार बाहर बंद खिडकी से झांककर कह... »

बगरस निगाहें तेरी

बगरस निगाहें तेरी , आँखों की सुराही तेरी, करती हैं क्या बातें,साहेबान ,   मन की दुया इन मेरी, रूबरू न आएं तेरी, करती हैं क्या बातें, साहेबान,   जुस्तजाजु  मेरी  वह  ही  हैं , रूबरू  कैसे  हो   सकु , उसको  बता  दे , साहेबान ,   बगरस निगाहें तेरी , आँखों की सुराही तेरी, करती हैं क्या बातें, साहेबान  »

अंदर-अंदर क्यों घुटीयाते हो!!

मन में जो इतने ख्वाब बने, वो आखिर किसे समझाते हो, लिखते इतना अच्छा हो पर जताकर किसको पास बुलाते हो,, तुम्हारे मन में भी फिर-फिर कर यह सवाल आता होगा,, बहुत हरे-भरे रहते हो, पर अंदर-अंदर क्यों घुटीयाते हो!! बचपन में कुछ ऐसा हुआ, लगने लगा मन हुआ बड़ा,, ह्रदय संजोये प्रेम-भाव फिर, पलटने जग हुआ खड़ा!! देखकर उसको मैं अकसर, बस उसमे ही रम जाता था,, पास उसको पाकर तो दुनियादारी से मन उठ जाता था!! आज पास नहीं ... »

ये गीत मेरे

नैनो के सूखे मेघो से मैं आज अगर बरसात करूँ ,हल करुँ ज़मीन ए दिल में मैं नीर कहाँ से मगर भरूँ?है सूख चुका अब नेत्र कूप न मन का उहापोह बचा ,न मेघ रहा न सावन है ,मिट गया जो कुछ था पास बचा .एक बार हौसला करके मैंने बीज प्रेम के बोये थे ,न मौसम ने रखवाली की ,सावन ने पात न धोये थे .अब न मन है , न मौसम है ,न उर्वर क्षमता धरती की ,न नैनो में अब पानी है ,न दिल में इच्छा खेती की .रोते है मेघ और कूप सभी ,करता ... »

मुक्तक 28

जवां दिल था , जवां धड़कन , जवां सांसे , जवां मन था , मगर बस मीर इतना था, जहाँ वो थी वहां मन था .. …atr »

बस्ती प्यार की

कहीं आसूं  की बारिश थी ,कहीं यादों का झोंका था, जिसे देखा था बस्ती में वही दिन रात रोता था . नगर था प्यार का , उजड़ा था गुलशन , शाम ख़ाली थी, रहूँ कैसे वहां मैं मीर , जहाँ बस ख्वाब सोता था .. …atr »

मन हमारे आजकल अपनेपन की परिभाषाये

मन हमारे आजकल अपनेपन की परिभाषाये बदल रहे हैं,, सारे प्यारे दोस्त हमारे,, अब भीड़ सामान ही लग रहे हैं,, पराई नगरी में भी अकसर लोगों में घुल जाया करता था,, अब खुद की बस्ती में भी यूँ हीं,, तनहा- मारे रम रहे है,, ये कैसा अजीब सा मोड़, मेरी ज़िन्दगी में आ रहा हैं.. अब दिल कुछ ज्यादा ही हावी, दिमाग पर हो रहा हैं.. जो सुकून मिला अकसर, माँ की गोद में सर रखकर,, आज उसे ही पराये मन के करीब पाना चाह रहा हैं,, ... »

जहाँ तो सबका हैं,,

ये जहाँ तो सबका हैं,, जिसे हम सबने मिलकर संवारा हैं,, बस किसी गर्दिश की बंदिश में फंसा मेरा सितारा हैं,, कहती,, मंजूर नहीं उसको सामने खुदा के भी हाथ फैलाना,, अतः मेरे हाथ वाले कटोरे में गोलगप्पे खाने का हुकुम हमारा हैं,, अब तू ही बता दे,, क्या बताऊँ इन सबको तेरे बारे में,, मेरी निगाहों में ढूंढ़ता तुझको पागल ये जहाँ सारा हैं!!! जब फिज़ाओ में महके मेरी नज्म के चर्चे, तब हुई चुगलियाँ,, उसकी बज्म से बह... »

तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना

तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना

तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना, दिल तो कल भी रेगिस्तान था और आज भी है »

मेरी मोहब्त को सलाम कर तू

मेरी मोहब्त को सलाम कर तू

मेरी मोहब्त को सलाम कर तू मेरी मोहब्त को सलाम कर तू ओ बेवफ़ा तूने ज़हर देकर बेवफ़ाई निभाई  और हमने जान देकर आशिक़ी तू चाहती थी छोड़कर जाना तू चाहती थी छोड़कर जाना और हम दुनिया छोड़ कर चले आये कहती हो खुश हु आज मेरा दिल ठुकराकर और हम और हम आज फिर से आंशू बहा आये हिम्मत तो बहुत थीं  दुनिया से लड़ने की और जीत लेते हम भी इस जहाँ को लेकिन तेरे सामने हम खुद को हार आये पोस्ट मार्तम कर ले यमराज तू भी पोस्ट मार्तम... »

खुद से परेशान

सबका जन्मदिन आता हैं, आज तेरा भी हैं, इसमें खास कौन सी बात हैं जो हाथ जोड़े, गिड़गिड़ाये, उसकी ही सुनते हो तुम,, ये कौन सी बात हैं,, कितनी भी परिक्षाये ले लो तुम इस सुदामा की,, मगर कृन्दन पुकार इस सीने से नहीं निकलेगी,, और तू भी इतना जरुर याद रख्नना कान्हा कि,, जब जब मेरा दर्द उबलेगा,, भाप बनकर तुझ तक जरुर पहुंचेगा, और जब ये ख़ामोशी से तेरे पास पहुंचेगा,, तेरे सिंहासन में हालन जरुर ले आएगा,, फिर जब ते... »

काश तुम चले आते!

काश तुम चले आते!

चली आतीं है अक्सर यादें तुम्हारी मगर तुम नहीं आते की कोशिश कई दफ़ा भूल जाने की तुम्हे मगर भूल नहीं पाते   आयीं राते पूनम की कई बार मगर न हुआ चांद का दीदार कर दिया है हमने अंधेरा अपने आशियाने में हम उजाला अब सह नहीं पाते काश तुम चले आते | »

क्लास में अकेले

ख्वाबो में भी अकेले होने पर जब बस शब्दों का सहारा होता हैं,, खुद की आधी-अधूरी सुनने पर भी जब मन छठपटा रहा होता हैं,, हालातों से बाहर आते ही जब ख्यालात नजर आ जाते हैं,, ह्रदय हारकर तन बिसराकर खुद वहाँ पहुँच तो जाते हैं,, फिर आसमान को समेटने की चाहत जब हाथ फैलाये रखती हैं,, खुद को महसूस करने खातिर जब स्वतः आँख बंद हो जाती हैं ,, तब हौले से एक कोयलिया स्वर ह्रदय-चीर मन बस जाती हैं,, आँखे खोली, कुछ नह... »

कविता

किसी की साँसों में जो घुल कर बोले,, उसका नाम कविता हैं,, आत्मा को जो परमात्मा से मिलाये,,  उसका नाम कविता हैं,, नवयुवती श्रृंगार हैं करती,, ना जाने किन किन बहानो पर यहाँ,, वृधा को जो भावनात्मक परिपूर्ण कर दे,, उसका नाम कविता हैं,, रुक्मणी,, जामवंती मिली हजारो एक से बढ़ कर एक यहाँ,, पर जो राधा को श्याम से मिलाये,, उसका नाम कविता हैं,, हर इंसान है प्यारा मेरा,, सबको मेरी फ़िक्र यहाँ,, पर जो किसी ... »

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