दिल क्या कहता है इस दिल की बात सुनू दिल तो पागल है फिर भी इसके साथ चलू वे मक्शद आवारा पीछे भागा करता है मैं समझ नहीं पाता पागल ये प्यार किसी से करता […]

हमारे घर से ऑफिस (Office) का रास्ता कुछ 35 मिनट का है 3 सिगनल (Signal) और 64 km का यह रास्ता वही है जो GPS से सीखा है कोई नया मोड़ लेने की ना कभी […]

कहानी   जो रक्त न दे सको, तो यह जवानी दे दो… और वह भी तुमको प्यारी हो, तो ज़ुबान ही दे दो… दलदल मैं फसा यह देश, है सहारे की ज़रुरत, ज़रा हाथ लगा कर नवयुग को, प्रेरित करती कहानी दे दो…।   – पीयूष निर्वाण

नारों में गाते रहने से कोई राष्ट्रवादी नहीं बन सकता। आजादी आजादी चिल्लाने से कोई गांधी नहीं बन सकता। भगत सिंह बनना है तो तुमको फांसी पर चढ़ना होगा। देश के लिए कुछ करना है […]

अरमानों के पंख लगा मैं, नभ- तल में जो विचर रही, क्या तुम उसका प्रतिफल हो, प्रेम पाश में बाँध रहे क्या, प्रणय का मूक आमंत्रण हो, तुम आकुल मन की व्यथा को, लयबद्ध कर […]

खाकी – खद्दर पहने हुये , इंसान बिकने लगे कोडियों में यहाँ लोगो के,ईमान बिकने लगे ।। कही मुर्दे तो,कही आज शमशान बिकने लगे, चदरों पे खुदा,पत्थरो में भगवान बिकने लगे ।। सब की सब […]

ज़िन्दगी में तजुर्बों की इक किताब रख चेहरे देख परख और उनका हिसाब रख !! मुझे बे-घर कर दिया नींद के फरिश्तों ने सूनी आँखों पे पहले तू कोई ख्वाब रख !! खुद ही खुद […]

आँखों में दर्द की मौजे अब मचलने लगी साँसे ही मेरी अब साँसों को चुभने लगी जब से रुत-ए-बाहर तेरी यादों की आई है जर्द आँसू टूट के आँखें अब उजड़ने लगी न जाने कौन […]

पानी आँखों में ठहरा दिखाई देता है सीने में ज़ख्म गहरा दिखाई देता है अजीब दर्द लिए फिर रहा हूँ सीने में पुराना है मगर हरा दिखाई देता है घर की हर बात सुर्ख़ियों में […]

क्यों रूठे हो तुम हमसे…  ? ना तुम याद आते हो ना तुम्हारी याद आती है जिक्र जो करूँ तुम्हारा तो ये बैरन हवा दिल के पन्ने पलट कर चली जाती है छाया तेरी जुल्फों […]

तू कोरा पन्ना है मैं तेरी लिखावट बन जाऊँगा तू मेरी कलम के शब्द बन जाना मैं तेरे शब्दों की किताब बन जाऊँगा तू गुलाब के फूल बन जाना मैं तेरे घर की सजावट बन […]

Note: एक छोटी सी कविता यह दर्शाते हुए की किस तरह एक भीड़ दंगो का रूप ले लेती है और कौन उसे इतना भड़काता है बर्बरता वोह बोले हमसे वार करो, न चुप बैठो प्रहार करो, जो औरत, बूड़े, बच्चे आये, टूकड़े तुम हज़ार करो । आतंकी रथ सवार करो, और मृत्यु का प्रचार करो, यमलोक भी थर-थर कांप उठे, ऐसा भीषण नरसंहार करो । असुरो को त्यार करो, और मानवता की हार करो, धरती का धड़ चीर-फाड़ के, नर्क का तुम आविष्कार करो । विवेक का भहिष्कार करो बर्बरता का विस्तार करो सत्ता पर हम जड़े जमा लें, सपना तुम साकार करो । -पियूष निर्वाण

हसरतें हैं, चाहते हैं और हैं ख्वाहिशें, ज़िन्दगी के रंग बिरंगे बुलबुले खुशनुमा है,खुशफहम है,फिर भी है गर्दिशें, दोस्ती है, है मुहब्बत, साथ फिर भी रंजिशें, खौफ है,और मौत है और हैं यूरिशें, फिर भी […]

चंचल , अल्हड़ , बेपरवाह , बेफिक्र , यह इश्क़ है। प्रीतम क़े जाने पर  जो  प्रेयसी को कर दे बाबरा , यह इश्क़ है। जिसके दम  पर मीरा जहर का प्याला बेहिचक पी गई […]

एक टीस सी है उठती, जिगर में सुलगती, न बुझती, न जलती, जैसे कोई चिंगारी, तिनके की आस में, हो हवा की तलाश में । एक धुन्ध सी है, जो छँटती नहीं, जैसे हो अनसुलझी […]

देश बना बाज़ार अब, चारो ओर दुकान राशन है मँहगा यहाँ, सस्ता है ईमान राजा- रानी तो गए, गया न उनका मंत्र मतपेटी तक ही सदा, रहा प्रजा का तंत्र सर्वाहारी क्यों इसे, बना दिया […]

डूब वहाँ, मोती जहाँ, कंकड़ मत तू छान सुख-माणिक का सिंधु बस, राम नाम ही जान “मैं”, “मेरा” ही जगत में, सब कष्टों का मूल “तू”, “तेरा” वह मंत्र जो, काटे कष्ट समूल माया वह अंधी गली, […]

ह्रदय में ताला कहाँ लटकता ,मन में केवल भ्रम पलता है | आश्वासन में दुनिया चलती ,आमंत्रण मरण मात्र बेचैनी | नजरें मंजिल पर टिकी हुई ,संवाद हकीकत हो जाता है | स्याही सूख गई […]