ये कैसी आहट है। … कौन है यहां, किसकी आहट है ये जो मन में नए भाव जगा रही है ये तो तुम हो मेरे प्रभु … ।
ये कैसी आहट है। … कौन है यहां, किसकी आहट है ये जो मन में नए भाव जगा रही है ये तो तुम हो मेरे प्रभु … ।
कौन कहता है कि यादें पुरानी होती है … ।
अक्सर दुनिया वाले मोहब्बत भरे चेहरों का खून करते हैं ।
खुदा जाने तुम इस वक़्त क्या कर रही होगी खुदा जाने तुम्हें अब मेरा नाम भी याद है या नहीं
भयावह हो,मासूम हो?कैसा है चेहरा तुम्हारा? घूमते हो बीच हमारे, फिर भी ना जाना हमारा, नज़रें तुम्हारी अनजानी सी, अनदेखी, ना पहचानी सी, ना जाने किस किसको ढूढ़ते रहते हो, ना जाने किस किसका शिकार […]
ढ़ूँढ रही मैं बावरी, अपने हिस्से का, स्वर्णिम आकाश, टिम-टिम करते तारे, हाय! सुख-दुख के, बन गए पर्याय , तम घनेरा ऐसे , छाय जैसे चन्द्र में ग्रहण लग जाए, मौसम आए मौसम जाए, कभी […]
थक कर अब बैठ गया हूं मैं तुम्हें भुलाना कुछ मुश्क़िल हो रहा है
उन जानवरों के सामने मैं निःशब्द था क्योंकि मैं भी एक इंसान था ।
उस कफ़न का रंग आज भी लाल है
मोहब्बत की भाषा सच बड़ी अनोखी होती है
माँ की चिट्टियां आती रहीं मैं अपनी दुनिया में गहरे डूबता ही रहा
और अपनी तन्हा रूह को चंद सांसे उधार देता हूं !
पर शायद कुछ भूल हो गई कुछ समय का रथ आगे निकल गया इस जन्म के लिए एक जन्म बीत गया !
बस यूं ही मुझे सपने देखने की आदत है एक सच्चा सपना गलती से देख लिया था कोई नहीं है जी, कोई नहीं है …
भले ही वो ख्यालों में हो या फिर अनजान ख्वाबो में या यूँ ही कभी बातें करते हुए या फिर अपने अपने अक्स को एक दूजे में देखते हुए हो
ओ; तट पर बैठे, तटस्थ लोगों ! सुनो, मेरे सन्मुख ; लक्ष्य है —- राह नहीं है मैं; धारा पर धारा—प्रवाह मुझे विराम की चाह नहीं है ॰ तुम; क्या समझे ! डूब जाऊँगा […]
जुङे हुये दो बेरंग लब हैं, इनमें क्यों रंग भरना चाहते हो!! हर अंग मेरा बेज़ुबान है, तुम कैसे उन्हें बुलवाना चाहते हो!! सूखी हुई सी आँखें हैं, इनमें आँसूं क्यों लाना चाहते हो!! टूटा […]
अगर मैं तुम्हारे आँखों के ठहरे हुये पानी से मेरा नाम पूंछू तो तुम नाराज तो नहीं होगे न ?
मैं सोचती हूँ अगर सियासतदानों ने ऐसे फैसले न किये होते तो आज हम ईद-दिवाली सरहदें तोड़कर मानते… !
‘मोती’ रोवत थान पर, माई गयी आकाश ! किसकी माई कब गयी, वह तो तेरे पास !! अलख जगा आकाश में, सुना जो भागत जाय ! बाकी सब नाचत फिरें, जग माया के साथ […]
‘मुफ्त फूलों के साथ बिकती है, खुश्बूओं में वजन नहीं होता।’ ………………..सतीश कसेरा
‘यहां नहीं तो कहीं ओर जल रहा होगा, किसी सूरज के मुकद्दर में, कोई शाम नहीं…।’ ……………..सतीश कसेरा
क्या तुम्हे याद है कब हम-तुम मिले थे, काॅलेज के गलियारों में यूँ ही बतियाते चले थे, हल्की सी मूँछों वाले,कमसिन से तुम, जवानी की दहलीज़ पर खङीं,कोमल से हम, वो एक दूसरे से नज़रें […]
पल-पल, छिन्न-भिन्न टूट रहा भ्रम , अपनी छाया ढूँढ़ रहा मन, अब तक निज पद- चापो में, तेरी छाया देख रही थी, स्व अरमानों की वो माला, तेरे धागे में पिरो चली थी, दिल […]
पल-पल, छिन्न-भिन्न टूट रहा भ्रम , अपनी छाया ढूँढ़ रहा मन, अब तक निज पद- चापो में, तेरी छाया देख रही थी, स्व अरमानों की वो माला, तेरे धागे में पिरो चली थी, दिल के […]
न कोई खुदा है मेरा , न कोई पैगम्बर है बस दिल एक मंदिर है मेरा, तेरी मूरत उसके अंदर है ।
कहो कोई तो कि आज फिर से शाम हो जायें, मजबूर हूँ बन्द आँखों से कुछ भी दिखायी नहीं देता, मैं सन्नाटे में क्यों कर बोलता रहता, मेरे अल्फ़ाजों को भी क्या कोई गवाही नहीं […]
कुछ कह गए तेरे कानों के झुमके कुछ बातें कर गए तेरे कंगन, कलाई ज़ुल्फ़ें कर गयी इशारा हवा के झोंके में और तुम कहती हो कुछ बात न हो पायी
****सोचना भी मत में कमजोर नहीं **** मुझे अपना पसंद का चिकन ब्रियनि खाने की तरह सोच कर खाने की सोचना मत भी मत मेरे करीब आकर मुझे छूना भी मत , में कमजोर नहीं ओरत […]
तम्हारे हाथों की मेहंदी से मेरा नाम मिट गया वह तुम्हारी मोहब्बत है लेकिन मैं अपनी नज़्मों से तुम्हें जाने न दूंगा ये मेरी मोहब्बत है ।
मुझे याद नहीं कि किसी और ने मुझे मेरी माँ जैसा खाना खिलाया हो …
आज सिर्फ माँ की याद रह गयी है, उसके हाथ नहीं । न जाने, मैं किसकी तलाश में इस शहर आया था… ।
मिले वो ज़ख्म के सारे अजीब लगते हैं पराये अपने हमारे अजीब लगते हैं जो तुम थि साथ अँधेरे से दिल बहेलता था जो तुम नहीँ तो सितारे अजीब लगते हैं कली कि शक्ल से […]
आज इस पल में सदियों का दर्द ठहर आया था जैसे उस पल में दो जुदा जिंदगियों की मौत हुई थी
उसने कहा कि नाम में क्या रखा है मैं जिस्म हूँ ।
अक्सर सोचता हूँ रिश्ते क्यों जम जाते हैं बर्फ की तरह |
अब थक गया हूँ मैं मुझे अपने पास बुला ले
हर शक्स अपने आप में बिमार जैसा है! दिल में है दर्द आँखों में खुमार जैसा है! जल रहा है दामन हरतरफ उम्मीदों का, जिन्द़गी से हर कोई लाचार जैसा है! Composed By #महादेव
करुणा की बारिश हुई, लथपथ हुआ शरीर ! देहियां में दीपक जला, लउका परम शरीर !! एक रूप सब में बसा, एक ही बना अनेक ! सागर गागर में दिखे, सूरज एक अनेक !! […]
“हक मेरी माँ को होता” मेरी तकदीर में जख्म कोई न होता, अगर तकदीर बनाने का हक मेरी माँ को होता, मेरी तस्वीर पे आज धूल न होता, अगर तस्वीर पोछने का हक […]
#_मेरा_वाड्रफनगर_शहर_अब_बदल_चला_है _______**********************__________ कुछ अजीब सा माहौल हो चला है, मेरा “वाड्रफनगर” अब बदल चला है…. ढूंढता हूँ उन परिंदों को,जो बैठते थे कभी घरों के छज्ज़ो पर शोर शराबे से आशियानाअब उनका उजड़ चला है, […]
छीनकर खिलौनो को बाँट दिये गम। बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम।। अच्छी तरह से अभी पढ़ना न आया कपड़ों को अपने बदलना न आया लाद दिए बस्ते हैं भारी-भरकम। बचपन से दूर बहुत […]
गुजर गये बहुत दिन मुस्कुराये हुए अब खुदा ने भी सोचा कि कुछ खुशियां इकट्टी की जायें और दुनिया में बांट दी जायें 🙂 🙂
***कल *** एक कल बीत गया,और बीतता ही है कोई नहीं रोक सकता उसे एक कल जो आने वाला हे आएगा ही वो भी आज बातें कर लें हम कल ना फिर से आयेगा कल […]
लिखते लिखते आज कलम रूक गयी इक ख्याल अटक सा गया था दिल की दरारों में कहीं|
जंगल नाचत मोर है, अंगना नाचत भोर ! मैं नाचत-नाचत थका, तब तनि हुआ अंजोर !! मनुआ माया में फंसा, भूला अपनी राह ! गहरी खाई में गिरा, राम मिले न राह !! […]
साथ चलते हैं। चल साथ चलते हैं। मंज़िल की छोड़ ना!! इस बार हम राह चुनते हैं। गुज़रते जायेंगे लम्हें हर लम्हों को कहीं किसी भी तरह क़ैद करते है चल! साथ चलते हैं। […]
पृथ्वी और आकाश में एक पुरुष का वास ! कण-कण जिससे व्याप्त है, जीवन, मृत्यु, प्रकाश !! पूरब कोई पश्चिम कहे, पृथ्वी और आकाश ! कण-कण में मुझको दिखे, आगे पीछे पास !! […]
लफ़्जों को तो हम ढूढ कर ले आये हम अब पराये जज्बातों को कैसे बुलाये हम
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