ओ; तट पर बैठे, तटस्थ लोगों ! सुनो, मेरे सन्मुख ; लक्ष्य है —- राह नहीं है मैं; धारा पर धारा—प्रवाह मुझे विराम की चाह नहीं है ॰   तुम; क्या समझे ! डूब जाऊँगा […]

जुङे हुये दो बेरंग लब हैं, इनमें क्यों रंग भरना चाहते हो!! हर अंग मेरा बेज़ुबान है, तुम कैसे उन्हें बुलवाना चाहते हो!! सूखी हुई सी आँखें हैं, इनमें आँसूं क्यों लाना चाहते हो!! टूटा […]

क्या तुम्हे याद है कब हम-तुम मिले थे, काॅलेज के गलियारों में यूँ ही बतियाते चले थे, हल्की सी मूँछों वाले,कमसिन से तुम, जवानी की दहलीज़ पर खङीं,कोमल से हम, वो एक दूसरे से नज़रें […]

  पल-पल, छिन्न-भिन्न टूट  रहा भ्रम , अपनी छाया ढूँढ़ रहा मन, अब तक निज पद- चापो में, तेरी छाया देख रही थी, स्व अरमानों की वो माला, तेरे धागे में पिरो चली थी, दिल […]

पल-पल, छिन्न-भिन्न टूट  रहा भ्रम , अपनी छाया ढूँढ़ रहा मन, अब तक निज पद- चापो में, तेरी छाया देख रही थी, स्व अरमानों की वो माला, तेरे धागे में पिरो चली थी, दिल के […]

कहो कोई तो कि आज फिर से शाम हो जायें, मजबूर हूँ बन्द आँखों से कुछ भी दिखायी नहीं देता, मैं सन्नाटे में क्यों कर बोलता रहता, मेरे अल्फ़ाजों को भी क्या कोई गवाही नहीं […]

****सोचना भी मत में कमजोर नहीं **** मुझे अपना पसंद का चिकन ब्रियनि खाने की तरह सोच कर खाने  की सोचना मत भी मत मेरे करीब आकर मुझे छूना भी मत , में कमजोर नहीं ओरत […]

तम्हारे हाथों की मेहंदी से मेरा नाम मिट गया वह तुम्हारी मोहब्बत है लेकिन मैं अपनी नज़्मों से तुम्हें जाने न दूंगा ये मेरी मोहब्बत है ।

मिले वो ज़ख्म के सारे अजीब लगते हैं पराये अपने हमारे अजीब लगते हैं जो तुम थि साथ अँधेरे से दिल बहेलता था जो तुम नहीँ तो सितारे अजीब लगते हैं कली कि शक्ल से […]

हर शक्स अपने आप में बिमार जैसा है! दिल में है दर्द आँखों में खुमार जैसा है! जल रहा है दामन हरतरफ उम्मीदों का, जिन्द़गी से हर कोई लाचार जैसा है! Composed By #महादेव

करुणा की बारिश हुई, लथपथ हुआ शरीर ! देहियां में दीपक जला, लउका परम शरीर !!   एक रूप सब में बसा, एक ही बना अनेक ! सागर गागर में दिखे, सूरज एक अनेक !! […]

“हक मेरी माँ को होता”   मेरी तकदीर में जख्म कोई न होता, अगर तकदीर बनाने का हक मेरी माँ को होता,   मेरी तस्वीर पे आज धूल न होता, अगर तस्वीर पोछने का हक […]

‪#‎_मेरा_वाड्रफनगर_शहर_अब_बदल_चला_है‬ _______**********************__________ कुछ अजीब सा माहौल हो चला है, मेरा “वाड्रफनगर” अब बदल चला है…. ढूंढता हूँ उन परिंदों को,जो बैठते थे कभी घरों के छज्ज़ो पर शोर शराबे से आशियानाअब उनका उजड़ चला है, […]

छीनकर खिलौनो को बाँट दिये गम। बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम।। अच्छी तरह से अभी पढ़ना न आया कपड़ों को अपने बदलना न आया लाद दिए बस्ते हैं भारी-भरकम। बचपन से दूर बहुत […]

***कल *** एक कल बीत गया,और बीतता ही है कोई नहीं रोक सकता उसे एक कल जो आने वाला हे आएगा ही वो भी आज बातें कर लें हम कल ना फिर से आयेगा कल […]

जंगल नाचत मोर है, अंगना नाचत भोर ! मैं नाचत-नाचत थका, तब तनि हुआ अंजोर !!   मनुआ माया में फंसा, भूला अपनी राह ! गहरी खाई में गिरा, राम मिले न राह !!   […]

  साथ चलते हैं। चल साथ चलते हैं। मंज़िल की छोड़ ना!! इस बार हम राह चुनते हैं। गुज़रते जायेंगे लम्हें हर लम्हों को कहीं किसी भी तरह क़ैद करते है चल! साथ चलते हैं। […]

पृथ्वी और आकाश में एक पुरुष का वास ! कण-कण जिससे व्याप्त है, जीवन, मृत्यु, प्रकाश !!   पूरब कोई पश्चिम कहे, पृथ्वी और आकाश ! कण-कण में मुझको दिखे, आगे पीछे  पास !!   […]

तेरे लिए खुद़ को हम खोते चले गये! जिन्दगी को अश्क से भिगोते चले गये! धड़कनों में घुल गयी हैं यादें इसतरह, मयकशी में दर्द़ को डूबोते चले गये! Composed By मिथिलेश राय ( महादेव […]

अंधियारे को उघाङती हुई, रोशनी सी बिखेरती हुई, वो छुपी सी इक काया, मुस्कुराती हुई ,तुम ही हो ना? शांत सी हवा में मानों,पायल की छमछम,   हल्के से कानों में बजती,साँसों की सरगम, वो […]

हुयी है अभी शाम मगर रात हो जाने दो! तपते हुए इरादों को दर्द में खो जाने दो! जब जागते हैं ख्वाब भी तड़पाते हुए मुझे, दो घड़ी के लिए मुझे चैन से सो जाने […]

“कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं” मैं चाँद नहीं वो प्रचलित तारा ध्रुव भी नहीं मेरे दिखने का कोई दिन नहीं पूर्णिमा नहीं अमावस्या भी नहीं मैं कई प्रकाश वर्ष दूर आकाश का तारा हूँ […]

  सो जाते हैं हम अधूरेपन की थपकी उधेड़बुन वाली लोरी कल परसों की सिसकी और किसी दी हुई हिचकी लिए सो जाते हैं हम सपनों की तकिया सुकून की रजाइयाँ अनजान से सन्नाटे और […]

कुछ बच्चे औपचारिक शिक्षा के लिये अपने को अयोग्य पाते हैं किन्तु उनके अभिभावक इस सत्य को अस्वीकार करते हैं और अनावश्यक दबाव में बच्चे असहज रहते हैं – ऐसे माता पिता के लिये एक […]