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Ashmita Sinha

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Ashmita Sinha

@Ashmita • Joined Mar 2015 • Active 5 years ago

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by Ashmita Sinha

आरजू

December 5, 2019 in मुक्तक

क्या आरजू है दिल की क्या बताएं
बस इक आह है जो दिल में बसी है

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by Ashmita Sinha

अधूरी नज्म

December 4, 2019 in शेर-ओ-शायरी

लफ्ज़ो में कहाँ बयां होती है
मोहब्बत जब बेहिन्तहा होती है
हम ही थे जो ये खता कर बैठे
अब नसीब में बस अधूरी नज्म होती है

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by Ashmita Sinha

ज़िन्दगी ने मुझको जीना सिखा दिया

November 23, 2019 in शेर-ओ-शायरी

ज़िन्दगी ने मुझको जीना सिखा दिया
अकेले होकर भी खुश रहना सिखा दिया
रहती है यादें अब खुशियों के दरम्या
यादों ने आसूंओ से दामन छूड़ा लिया

Tags: ज़िन्दगी पर कविता 10 Comments »

by Ashmita Sinha

हर चेहरा नकली है

November 23, 2019 in शेर-ओ-शायरी

हर चेहरा नकली है, हर रूह खुदगर्ज यहां
उस रूह को ढूंढ़ रही हूँ जो हो अपनी यहां
न कोई मुखोटा हो, न दीवारें हों
रूह से रूबरू हो हर रिश्ता यहां

9 Comments »

by Ashmita Sinha

दरारे ही दरारे

November 21, 2019 in शेर-ओ-शायरी

दरारे ही दरारे है आज रिश्तों जे दरम्यान
कहीं आँसू है तो कहीं नफरत की दास्तान

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by Ashmita Sinha

पहले से ज्यादा

September 14, 2019 in मुक्तक

जिन्हें चाहते थे खुद से भी ज्यादा
न निभा सके वो अपना वादा
तन्हा जब छोड़ दिया जमाने ने हमको
हम खुद के करीब हो गए पहले से ज्यादा

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by Ashmita Sinha

तेरे साये में बस हमे रहना है

September 8, 2019 in शेर-ओ-शायरी

नजरो से तुम क्या बयां करते हो
करीब आ कर कहो जो कहना है
हँसी नजारे न सही, अंधेरा ही सही
तेरे साये में बस हमे रहना है

12 Comments »

by Ashmita Sinha

अंधेरा

September 8, 2019 in शेर-ओ-शायरी

रोशनी तो रुखसत हो गयी है अरसे पहले
अंधेरा है जो अब तलाक साथ है मेरे

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by Ashmita Sinha

मेरे शिक्षक

September 1, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

मेरे जीवन के अहम इंसान
तुम्ही से स्पन्दित यह विश्व महान
सरस्वती माँ के तुम सारथी हो
तुम्ही से ज्ञान की गंगा का उत्थान

मेरा नमन स्वीकार करें
पथ मेरा आप सदा प्रदर्शित करें
अपने आदर्शों के पाठो से
मेरा भविष्य होगा महान

Tags: शिक्षक दिवस पर कविता 12 Comments »

by Ashmita Sinha

राखी का त्योहार है आज

August 15, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

राखी का त्योहार है आज,
आजादी का जशन भी है
बहन की खातिर जीना भी चाहता हूँ
देश पर मार मिटाने का मन भी है।
(देश के सैनिक की मन की बात)

Tags: रक्षाबंधन पर कविता 7 Comments »

by Ashmita Sinha

जब होगा दीदार रब का

July 11, 2019 in शेर-ओ-शायरी

जब होगा दीदार रब का तो पूछुंगी मैं
की तेरी इबादत मोहब्बत में इतनी अड़चने क्यों हैं

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by Ashmita Sinha

कोई क्या कहता है

July 9, 2019 in शेर-ओ-शायरी

कोई क्या कहता है परवाह किसे है
आंखे जब मुहब्बत से रोशन है
तो रातो दिन की फिक्र किसे है

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by Ashmita Sinha

वह दर्द बीनती है

July 2, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

वह दर्द बीनती है
टूटे खपरैलों से, फटी बिवाई से
राह तकती झुर्रियों से
चूल्हा फूँकती साँसों से
फुनगियों पर लटके सपनों से
न जाने कहाँ कहाँ से
और सजा देती है करीने से
अगल बगल …
हर दर्द को उलट पुलटकर दिखाती है
इसे देखिये
यह भी दर्द की एक किस्म है
यह रोज़गार के लिए शहर गए लोगों के घरों में मिलता है ..
यह मौसम के प्रकोप में मिलता है …
यह धराशाई हुई फसलों में मिलता है …
यह दर्द गरीब किसान की कुटिया में मिलता है…
बेशुमार दर्द बिछे पड़े हैं
लो चुन लो कोई भी
जिसकी पीड़ा लगे कम !
अपनी रचनाओंसे बहते, रिस्ते, सोखते, सूखते हर दर्द को
बीन बीन सजा देती है वह
लगा देती है नुमाइश
कि कोई तो इन्हे पहचाने , बाँटे
उनकी थाह तक पहुँचे …
और लोग उसके इस हुनर की तारीफ कर
आगे बढ़ जाते हैं …

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by Ashmita Sinha

हमारे हर लम्हे की कोशिश

July 2, 2019 in शेर-ओ-शायरी

हमारे हर लम्हे की कोशिश तुम्हारी रूह तक जाने की थी
मगर अफ़सोस आप ही इससे अनजाने थे

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by Ashmita Sinha

मुझे बारिश में भीगना पसंद था

June 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

मुझे बारिश में भीगना पसंद था,
तम्हें बारिश से बचना…
तुम चुप्पे थे, चुप रह कर भी बहुत कुछ कह जाने वाले।
मैं बक-बक करती रहती।
बस! वही नहीं कह पाती जो कहना होता।
तुम्हें चाँद पसंद था, मुझे उगता सूरज।
पर दोनों एक-दूजे की आँखों में कई शामें पार कर लेते।
मुझे हमेशा से पसंद थीं बेतरतीब बातें और तुम्हें करीने से रखे हर्फ़।
सच! कितने अलग थे हम..
फ़िर भी कितने एक-से।

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by Ashmita Sinha

धूल मेँ लिपटा माज़ी

June 30, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

जब चलते-चलते थक जाओ तो कुछ देर ही सही
थाम लेना पैरोँ के पहिए..

बहाने से उतर जाना पल दो पल ज़िन्दगी की साइकल से..

देखना ग़ौर से मुड़कर
कहीँ बहुत पीछे तो नहीँ छूट गया ना..

धूल मेँ लिपटा माज़ी….

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by Ashmita Sinha

प्रेम कविता

June 30, 2019 in मुक्तक

प्रेम कवितासबने प्रेम पर
जाने क्या-क्या लिखा
फ़िर भी अधूरी ही रही
हर प्रेम कविता

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by Ashmita Sinha

सावन स्पेशल

June 27, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

बदरा घिर घिर आयी देखो अम्बर के अंसुअन बरसे है
कोई न जाने पीर ह्रदय की पी के मिलन को हिय तरसे है
यह मधुमास यूँ बीत न जाये नैनों से झरता सावन है
जब से पत्र तुम्हारा आया भीगा भीगा सा तन मन है

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by Ashmita Sinha

और एक दिन

June 27, 2019 in शेर-ओ-शायरी

और एक दिन
दे दिये शब्द सारी व्यथाओं को
लिख डाली एक कविता
अपनी पहली कविता …

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by Ashmita Sinha

कभी लहरों को गौर से देखा है

June 27, 2019 in शेर-ओ-शायरी

समंदर के किनारे बैठे
कभी लहरों को गौर से देखा है
एक दूसरे से होड़ लगाते हुए ..
हर लहर तेज़ी से बढ़कर …
कोई छोर छूने की पुरजोर कोशिश करती
फेनिल सपनों के निशाँ छोड़ –
लौट आती –
और आती हुई लहर दूने जोश से
उसे काटती हुई आगे बढ़ जाती
लेकिन यथा शक्ति प्रयत्न के बाद
वह भी थककर लौट आती
.बिलकुल हमारी बहस की तरह !!!!!

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by Ashmita Sinha

लफ्ज़ो को बढ़े करीने से सजाया है

June 27, 2019 in शेर-ओ-शायरी

लफ्ज़ो को बढ़े करीने से सजाया है
इस नज़्म में नूर ए इश्क़ को बहाया है
कुछ समन लाकर रख दिये है इसके करीब
अपने होठों से हमने इसे गाया है

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by Ashmita Sinha

नारी की दशा बहोत ही विचित्र सी है

June 16, 2019 in शेर-ओ-शायरी

नारी की दशा बहोत ही विचित्र सी है
है देवी पर क्यों अपवित्र सी है ?
है हर जीवन का स्रोत… पर
जीते जी स्वयं मृत सी है

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by Ashmita Sinha

दिखावे के प्यार

June 16, 2019 in मुक्तक

दिखावे के प्यार
दिखावे का खुला आसमां मिला
जब भी उड़ना चाहा
मुझको बस नीचे का रास्ता मिला

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by Ashmita Sinha

कसम से हर जुबाँ से दर्द मिला

June 16, 2019 in शेर-ओ-शायरी

कसम से हर जुबाँ से दर्द मिला
कभी नज़रों से वो दर्द मिला
न जाने कब बदलेगा ये हालात
नारी होने का हर दर्द मिला

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by Ashmita Sinha

मै अपने साये में धूप लेकर चलती हूं

June 16, 2019 in शेर-ओ-शायरी

मै अपने साये में धूप लेकर चलती हूं
तेरे लिये छाव फैलाये चलती हूं
तू कभी मिल जाता है मुझे अगर
तेरे पाव के नीचे हाथ बिछाये चलती हूं

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by Ashmita Sinha

तन्हाई में तुम्हारा ख्याल जो आया

June 16, 2019 in शेर-ओ-शायरी

तन्हाई में तुम्हारा ख्याल जो आया
दूर पहाड़ो पर फैली धुंध बन गया
सर्दियों की खिली धूप बन तपा
फूलो पर ओस की बूंद बन गया……

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by Ashmita Sinha

Let me

June 8, 2019 in English Poetry

Let me take care of your life
Let me feel pain of your heart
let me hold you hand
and take you away
far from here
to the fresh sunlight

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by Ashmita Sinha

मुलाकात

April 14, 2019 in शेर-ओ-शायरी

आज मेरी खुद से मुलाकात हो गई
चुप थी जमाने से, आज खुद से बात हो गई।

3 Comments »

by Ashmita Sinha

बात

April 6, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

कोई बात दबी है जहन में मेरे
कोई बात चले तो कुछ बात बने

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by Ashmita Sinha

कितने जमाने आये और गुजर गये

February 28, 2019 in शेर-ओ-शायरी

कितने जमाने आये और गुजर गये
मुहब्बत के जमाने का असर मगर अब तक है

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by Ashmita Sinha

जिंदगी

February 23, 2019 in शेर-ओ-शायरी

जब हम साथ है तो फासलों का ज़िक्र क्यों करें
डर के शागिर्द में जिंदगी बसर क्यों करे

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by Ashmita Sinha

दफ़न कर दूं

January 22, 2019 in शेर-ओ-शायरी

दफ़न कर दूं अब अहसासों को
यही इक काम अब ठीक रहेगा

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by Ashmita Sinha

लापता हूं

January 11, 2019 in शेर-ओ-शायरी

क्या ठिकाना है मेरा मुझे नहीं पता
लापता हूं अरसे से खुद में कहीं

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by Ashmita Sinha

अन्नदाता कहलाता हूं

December 20, 2018 in Poetry on Picture Contest

अन्नदाता कहलाता हूं
पर भूखा मैं ही मरता हूं
कभी सेठ की सूद का
तो कभी गोदाम के किराये का
इंतजाम करता फिरता हूं

बच्चे भूखों मरते है
खेत प्यासे मरते है
अब किसकी व्यथा मैं दूर करूं
मैं ही हरपल मरता हूं
अन्नदाता कहलाता हूं

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by Ashmita Sinha

बेटी घर की रौनक होती है

December 12, 2018 in Poetry on Picture Contest

बेटी घर की रौनक होती है
बाप के दिल की खनक होती है
माँ के अरमानों की महक होती है
फिर भी उसको नकारा जाता है
भेदभाव का पुतला उसे बनाया जाता है
आओ इस रीत को बदलते है
एक बार फिर उसका स्वागत करते है

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by Ashmita Sinha

वोट डालने चलो सखी री

December 6, 2018 in Poetry on Picture Contest

वोट डालने चलो सखी री
लोकतंत्र के अब आयी बारी
एक वोट से करते हैं बदलाव
नेताजी के बदले हम हाव-भाव !
सही उम्मीदवार का करते है हम चुनाव,
बेईमानों को नहीं देंगे अब भाव !

आपका वोट है आपकी ताकत
लोकतंत्र की है ये लागत

सुबह सवेरे वोट दे आओ
वोटर ID संग ले जाओ !

Tags: चुनाव पर कविता, वोट पर कविता 8 Comments »

by Ashmita Sinha

डर

December 4, 2018 in शेर-ओ-शायरी

ख्याल आते तो है मगर दब जाते है कहीं दिल में
अक्सर डर जाते है जमाने के कहर से

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by Ashmita Sinha

हौसलों की उड़ान

November 25, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

सुरज की स्वर्णिम किरणें जब पड़ती धरा पर,
चहचहाते पक्षी मचाते कलरव,
हौसलों की भरते वो उड़ान है,
देखो जज़्बा उन पंछियों का,
छू लेते वो आसमान है।

देखकर पंछियों को लगता मेरे मन को,
काश कि मै भी उड़ सकता,
पंख फैलाकर नील गगन को मै भी छू सकता।

बस सोच ही रहा था बैठे-बैठे,
कि मेरे मन में ये ख्याल आया..

है पंछियों के जैसे मेरे पंख नहीं तो क्या,
है बुलंद इरादा मेरे भीतर जो छिपा बैठा,
है मुझमे हिम्मत, है हौसला मुझमे,
अपने सपनो को पंख लगाकर मै भी हूँ उड़ सकता।

हौसलों की उड़ान भरकर,
छू लूँगा मै लक्ष्य रूपी आसमान,
सफलता मेरे कदम चूमेगी,
कदमों में होगा ये सारा जहां॥

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by Ashmita Sinha

ख़रीददार

November 21, 2018 in शेर-ओ-शायरी

किसी कीं ख़ातिर दिल में मोहब्बत लेकर भटक रहे हैं
सब ख़रीददार मिलते हैं, बिकनेवाले नहीं मिलते |

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by Ashmita Sinha

बारिश

September 9, 2018 in शेर-ओ-शायरी

ये बारिश ये हसीन मौसम और ये हवाये
लगता है आज मोहब्बत ने किसी का साथ दिया है.

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by Ashmita Sinha

माथे की लकीरें

May 26, 2018 in हिन्दी-उर्दू कविता

माथे की लकीरें हर दिन बढ़ती जाती है
भविष्य की चिंता रोज उभरती जाती है

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by Ashmita Sinha

ख्वाहिश

May 23, 2018 in शेर-ओ-शायरी

तेरे कलाम में हर पहर पढ़ती रहती हूं
तेरी हर नज्म में खुद को ढ़ूढती रहती हूं
इक चाहत थी कि तुझसे किसी दिन मिलूं
इसी ख्वाहिश में हर लम्हा गुजरती रहती हूं|

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by Ashmita Sinha

इक फरियाद

April 11, 2018 in शेर-ओ-शायरी

इक फरियाद थी मेरे दिल की
आरजू थी इक दबी दबी सी
सब अधूरी ही रह जायेंगी
कह कर गया था वो अभी

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by Ashmita Sinha

लफ़्ज

March 12, 2018 in शेर-ओ-शायरी

लफ़्ज हो गये है खत्म दास्ता बयां करते करते
कुछ कहते हम अक्सर थम जाते है

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by Ashmita Sinha

याद

March 3, 2018 in शेर-ओ-शायरी

कोई बात है उनमें शायद जो याद आते है
या फिर हमें बस याद करने की आदत हो गयी है

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by Ashmita Sinha

तेरी ख्वाहिश

February 9, 2018 in शेर-ओ-शायरी

तेरी ख्वाहिश में हम क्या से क्या हो गये
कभी अपने थे हम, अब बैगाने हो गये

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by Ashmita Sinha

खुशबू

January 27, 2018 in शेर-ओ-शायरी

कभी लफ़्जों में ढल जाती हूं
कभी आखों में पिघल जाती हूं
मैं तो तेरी खुशबू हूं
हर तरफ़ बिखर जाती हूं

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by Ashmita Sinha

जल उठे थे बुझ के हम

December 28, 2017 in ग़ज़ल

जल उठे थे बुझ के हम, शमा – ए – लौ से प्यार की;
फिर तेरी हर एक झलक, पे नज़रों को झुका जाना;

गर कही जो चल पड़े, तेरे बुलाने पे सनम;
वो तेरा मंजिल – ए – इश्क, से वापस को बुला जाना;

कई असर चलती रही, कूचा – ए – गुल में यार की;
वो तेरा मुझको दीदार – ए – तर को तरसा जाना;

गर कहीं तुम मिल गए किस्मत सराहेंगे कसम;
वो तेरा खा कर कसम, हर कसम को झुठला जाना;

रात की खामोशियाँ, हमको सताती है “महक”;
तेरी याद से रोज़ – रोज़, दिल का यूँ धड़का जाना;

मेरी चाहत का सिला क्या देंगी तेरी तल्खियाँ,
वो तेरा हर मोड़ पर, दिल का बहला जाना;

देख कर हम लुट गए, तेरे प्यार की रुसवाइयां;
फिर कज़ा के वक़्त पर, चेहरे का मुरझा जाना;

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Saavan

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