नि:शब्द हूँ निस्तेज मैं मस्तिष्क के आवेश में शब्द भारी पड़ रहे कलम की स्याही से नित यह कह रहे ना उल्लिखित कर पाऊँगा मैं तेरे भाव को ना प्रकट मैं कर पाऊँगा तो मैं […]

जिनिगिया एगो खिलौनवा बा, जेकरा से सबै खेलत बिया। कौनो तड़पत बिया, कौनो रूतल बिया। जिनिगिया एगो खिलौनवा बा, जेकरा से सबै खेलत बिया। अंखियन के सपनवा , टूटल बिया। जिनिगिया एगो खिलौनवा बा, जेकरा […]

कथा सुनाऊ पुरुषोत्तम श्री राम की विष्णु रूपी अयोध्या पति नाथ की त्रेता युग में जनम हुआ राजा दशरथ के महल में अयोध्या हुआ पूरा चहल पहल में सुमित्रा से जनम हुआ लक्ष्मण और शत्रुघ्न […]

पैसे का इमान देता नहीं कभी साथ, गरिबी अमीरी छोड़ कर मिलाओ हाथ। अफसर बनकर भगवान तुम नहीं हुए, सद्भाव गलत कर्मो को माफ करो हे नाथ।। महेश गुप्ता जौनपुरी

“अन्नदाता की व्यथा ” टुकड़े-टुकड़े हुई मेदिनी , कैसी ये लाचारी है । ऐसे उजड़े खेत कि जैसे , कोई विधवा नारी है । शीश पकड़ बैठा किसान है , प्रश्न हजारों साल रहे । […]

भ्रष्टाचार की पोटली खोल रहें हैं अफसर, कुछ इमानदारी से कर रहे हैं उजागर। कुछ टेबल के नीचे से कर रहे हैं पार्सल, घी रोटी खाकर पेट फुलाये बने पड़े हैं अजगर।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

सरकार बेचारी फिसड्डी हो गयी, जनता अब मारी मारी है फिरती। लगकर लाईन में उम्मीद लगाएं, कोरोना का प्रकोप इन्हें है डसती।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

अपनी गलती कब तक हम ठेलेंगे, विज्ञान के आड़ में कब तक बम फोड़ेंगे। चुनौतियों से पिछा छुड़ा कर, अपनी नाकामी से कब तक हम भागेंगे।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

चंद लम्हो की ज़िन्दगी में अब और क्या- क्या होना है ब्रष्टाचार क्या कम था जो आगया कोरोना है गरीब खा रहे मांगके और अमीरो के पास सोना है मिडिल क्लास की किस्मत में तो […]

हमते घरइतिनि रोज़ु-रोजु कहति हइ , घुमावइ लई चलउ कहूँ । लॉक डाउन मा ऊबि गयेन हई , मईके कइसेऊ भेजि देउ तुम । हमका करी जब हमका पुलिस वाले रगदइहंइ , का करिबा जब […]

मजदूर हू मजबूर नहीं तेरे जैसे वीडियो के सामने मदद लेने से इनकार करता हू लाखों दूर घर की और सफर करता हूँ बिना किसी मदद के पैदल किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया कभी […]

“गाँव याद आये” ************** हमें क्या पता आज,ये दिन देखना पड़ेगा | न जाने कैसी मजाक,आज तूने किया है || हँसते हुए निकले घर से,भूख मिटाने सभी | गाँव घर ये आँगन,छोड़ चार पैसा कमाने […]

सीतापुरिया अवधी बोली:- हमका देखि बोलीं भऊजी काहे नाई सोउती हऊ तुम ? राति-राति भरि किटिपिटि- किटिपिटि फोन म का लिखती हउ तुम? हम बोलेन ओ भाउजी ! थोरी-बारी कविता लिखा करिति हन हम, घर […]

वहि घरका ना जाउ कबहुं जहां ना होइ सम्मान नीके जहां कोइ नाइ मिलइ हुंआँ जाइते हइ अपमान रूखी-सुखी खाइ लेउ बढ़िया व्यंजन छोड़ि प्रेम की छूड़ी रोटी छप्पनभोग सि बढ़िया होइ आधी राति का […]

सीतापुरिया अवधि:- राति क द्याखँइ चांद-सितारा दिनमाँ चांद निहारइ दिन भरि छोटुआ-छोटुआ कहिके अम्मा लाल पुकारइ अम्मा भई बाँवली। टूटी खटिया फटी चटाई जब अम्मा पहुड़इ चरमर-चरमर होइगइ पाई। अम्मा भाई बाँवली… घुटनन माँ तनिकऊ […]

सीतापुरिया अवधि:- राति क द्याखँइ चांद-सितारा दिनमाँ चांद निहारइ दिन भरि छोटुआ-छोटुआ कहिके अम्मा लाल पुकारइ अम्मा भई बाँवली। टूटी खटिया फटी चटाई जब अम्मा पहुड़इ चरमर-चरमर होइगइ पाई। अम्मा भाई बाँवली… घुटनन माँ तनिकऊ […]

सात वचनों और सात फेरों का अटूट बंधन आपका बंधा रहे हँसती रहें और मस्त रहें आप संग पिया के सजी रहें हर दिन हर पल खुशियों भर हो गमों का कहीं न नाम रहे […]

लौट रहा है बचपन दोबारा लॉक डाउन के माहौल में खेल रहे हैं वही पुराने खेल हम मिलके साथ में खो गया था बचपन हमारा व्यस्त की जीवन गाड़ी में मिला है कुछ पल इन […]

आज दिल फिर बच्चा होना चाहता है बचपन की अजूबी कहानियों में खोना चाहता है जीनी जो अलादिन की हर ख्वाहिश मिनटों में पूरी कर देता था, उसे फिर क्या हुक्म मेरे आका कहते देखना […]

जिस नारी को समझ पातकी पति ने पत्थर बना दिया था। दे निज चरणन की धूल रामजी पंचकन्याओं में सजा दिया था।। प्रातकाल उठि सुमिरन करते इनका जो भी नर -नारी। उनके सारे पाप कटे […]

कलम और पेन से अभी नाता कब का छूट चुका है अभी ज़माना ईमेल और मोबाइल का है छोटे उन पन्नो में अपनी भावनाएं सारी लिखने की नौबत अभी नहीं आती अभी तेरे ख़तों में […]

दादाओं के भी दादा थे वो ना जाने कितने युगों से खड़े थे एक पाँव पर अपने घर के पास। खेल कबड्डी गिल्ली डंडे भाग भाग के आँख मिचौनी खेला करते सदा हीं उनके आस-पास।। […]

बैठे थे गुमसुम से एक टक निहार के दादी आयी बोली फिर भुआ आ रही है ससुराल से ये सुनके खुश हुए की भुआ हमारी आएगी उनके आने से इस घर की रौनक बढ़ जाएगी […]

भोजपुरी देवी गीत – होखत दरशनवा | मह मह महकत बा भवनवा | कालिका जी के होखत दरशनवा| सोनवा से साजल माई दरबार बा | तोहरे खातिर छोड़ली घरबार बा | बलका रोई बरसत बा […]

शिक्षा और शिक्षक का नाता है भरा बस्ता, ज्ञान की बातों में छुपा है कोई रास्ता। भारी बस्ते से आमदनी है होता, बचपन के बोझ से उनका नहीं कोई वास्ता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी