सूरत तो उसकी देखी, पर सीरत नहीं देखी; ღღ_है मेरी खता ये, कि मैं आदमी-सा था ! . ღღ_वक़्त के साथ उनके, बदला किये ख्याल; इन हालात में बिछडना, तो लाज़मी-सा था!!……‪#‎अक्स

अपनी पूरी कमाई तूने मय पर लूटा दी…..   ए  – ग़ालिब…. जरा मुझे ये बता… उस दो घूंट में , जिंदगी जीने का स्वाद कितना है….   पंकजोम ” प्रेम “

बहुत याद करते है हम आपको क्या कभी आपके ख्यालों मे हम भी आते हैं होती है गुफ़्तगू कई दफ़ा दिन में क्या कभी आपके सपनों में हम भी आते हैं काश कभी ऐसा भी […]

कुछ ऐसा लिखूँ , की पढ़ने वाले को लगे … मेरा एक – एक  अल्फ़ाज , गहरा हैँ … खों जाये वो मेरे अल्फाज़ो की महफ़िल में .. लगे उसे , मानो आज वक़्त , ठहरा हैं.. यादगार हों जाये उसके लिए , मेरी हर इक सुखनवरी …. एहसास हो , जैसे….. रौनक के पहरे से रोशन उसका , चेहरा हैं ..   पंकजोम ” प्रेम “

दिल बेचैन हुआ , तो उसके दीदार का दिया दिलासा हैं ….. जाने वाले कल चले गए , लेकिन आज भी उनके लौट आने की …. छोटी सी आशा हैं ….. अब कोई तो बने सुराही – ए – मोहब्त …. क्योंकि ये सुख़नवर बहुत , प्यासा हैं ….   पंकजोम ” प्रेम “

वक़्त लगता हैं यहाँ , इंसान को इंसान समझने में ……. वक़्त लगता हैं यहाँ , पत्थर को भगवान समझने में …… आधी उम्र बीत जाती हैँ सोचने सोचने में .. क्योंकि वक़्त लगता हैं यहाँ , जीने के अरमान समझने में …..   पंकजोम ” प्रेम “

      मैं एेसे दरिया के किनारे बैढा हुं, हर घडी जहा से समुन्दर दिखने लगता है। ये मेरा दिल भी एक जिद्दी बुजुर्ग् जैसा है, जो रात होते ही किस्से सुनाने लगता है। […]

इश्क का दरिया हूँ मैं, मैं सागर की प्यास हूँ… बरसों से लापता है जो, वो तेरी तलाश हूँ… अंधेरों को रोशन कर दे, वो जीने कि आस हूँ… मोत को ज़िन्दगी कर दे, मैं […]

मैं अल्फ़ाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ, मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ, कब पूछा मैने की क्यूं दूर हो मुझसे, मैं दिल रखता हूँ तेरे हलात समझता हूँ…!

ये अल्फाज़ , अल्फ़ाज़ ही नहीं , दिल की ज़ुबानी हैं ….. इन्होंने ज़न्नत को , जो जमीं पर लाने की ठानी हैं … साथ देने को कई मरतबा भीग जाती हैं पलकें ….. समझों तो यही मोहब्त हैँ , ना समझों तो पानी हैं…..   पंकजोम ” प्रेम “

मुबारक हो तुमको एक नई रोशनाई,, चाहतों के समुंदर की प्यारी गहराई,, क्या तोहफा दूँ तुमको, समझ नहीं आता,, तुमने ने तो सारी दुनिया हैं महकाई,, हर तरफ अपनी मुस्कान बिखेरते रहना,, गमो को तो […]

बहुत सारी बातें है जो कहनी थी बहुत कुछ सुनना था तुमसे मगर कुछ न तुमने कहा न मैं ही कुछ बोल पायी जिंदगी गुजरती गयी चंद लम्हों में बटकर न तुम जी पाये, न […]

मेरे महबूब के जलवों की तो, पूरी दुनिया ही दीवानी है, ये जहाँ जो इक गुलिस्ताँ है, इसकी वो रात-रानी है; . चाल है गज़ालों सी, रुख में मौजों सी रवानी है, होंठों पे शबनम […]

क्या कहूं, क्या लिखूं कुछ समझ नहींं आता कुछ बाते हैं जो लफ़्ज का साथ ही नहीं देती कुछ बाते हैं जो दफ़न है जहन में कुछ बातें अनकही ही रह जाती है कुछ न […]

“इन्तजार” ! बहुत ‘मतलबी’ लफ्ज़ है ना ‘साहब’ ?? ღღ__रख लो तो अमानत, दे-दो तो इक ज़मानत; . ღღ__चाहो तो मोहब्बत, सोचो तो सिर्फ नफ़रत, काट तो दो तो इक उम्र, और जी लो तो […]

कल मैंने अपनी प्रेमिका के उतर दिल में , चाहत का ज़खीरा देखा ….. अपने जिल्ले – सुभानी के इंतजार में , उस चाँद का मायूस चेहरा देखा .. स्वागत में उसने आब संग बिछा दी पलकें , मैंने हर इक आब पर नाम , मेरा देखा …   पंकजोम ” प्रेम ”  

सोचती हूँ, क्या लिखूं…? कोई ग़ज़ल, या शायरी लिखूं…? या कोई क़िस्सा लिखूं प्रेम कहानी का.., जिसमें मैं ख़ुद को “तुम्हारी” लिखूं ।।

सम्भाल ले ऐ – ख़ुदा , एक लम्हे के लिए मुझे…. अब  मैं हार रहा हूँ ….. तू ही बता मेरे साहिब , मैं क्यों ये जिंदगी तन्हा गुजार रहा हूँ …   तूने साज़ […]

कुछ खास नहीं था कहना , कुछ बात नहीं था कहना , जो बोल न पाया ख्यालों की अंजुमन मैं , बिन बोले तुम तक वह बात पहुंच गयी , आस्चर्य मैं पढ़ जाता हूँ […]

दुनिया की आवाज़ों में मैरी एक आवाज़ भी है… इसमें मायने हैं कुछ, इसमें कुछ अल्फाज़ भी हैं… ज़ाहिर से इन क़िस्सों में, छिपी हुई सी ‘आह’ भी है.. फ़िज़ूल वाक़िये हैं कुछ, सुनाने की […]