कभी गौर से देखना खुद को आईने में, खुद ही खुद में ना खो जाओ तो कहना,, कभी पासजाकर देखना गुलाब के, खुशबुसे खुद ही ना बिखर जाए तो कहना,, बहुत नाज़ कर रही हैं […]

सिमट गया जो चंद अल्फ़ाजों में, उस अफ़साने की बात करते हो खुद को हमारी जिंदगी बनाकर, छोड जाने की बात करते हो |   नहीं है कोई अंजाम इस अफ़साने का, मालूम था हमें […]

क़भी जब गिर के सम्भ्लोंगे  तो मेरी याद आएगी , कभी जब फिर से बहकोगे  तो मेरी याद आएगी। वो गलियां , वो बगीचे ,वो शहर ,वो घर , कभी गुजरोगे जब उनसे तो मेरी […]

इतना आसान हूँ मैं कि हर किसी को समझ में आ जाता हूँ,, शायद तुमने ही मुझे पन्ने छोड़-छोड़ कर पढ़ा था!! इसलिए हक हैं तुझे,, तू भी तो मुझसे दूर सकता हैं,, मेरा भी […]

आती नहीं है नींद क्यों रातों में आजकल। तस्वीर बन रही है एक आँखों में आजकल। फूलों से दोस्तीदोस्ती है या उल्फत का असर है। शोखी घुली है उसकी बातों में आजकल। कुछ दिल से हो रही है क्यों महकी हुई फ़िज़ा। मेहंदी रचा रही है वो हाथो पे आजकल। #कुलदीप अनजाना

वक़्त बदलेगा किसी वक़्त पर सोचा इस कदर से नहीं, पिलाकर नजरो से हाला, फिर बोला कम जहर से नहीं,, इज्जत बहुत हैं तेरी दिल में, तुझसा दोस्त ना पाऊँगी, मैं प्यार तुझी से करती […]

हम अपना हाल -ए- दिल आपसे कहते रहेकभी बच्चा तो कभी मासूम आप हमें कहते रहे आज तक कोई सबक पढा न जिंदगी में हमनेताउम्र हम आपकी आखों जाने क्या पढते रहे इक अरसा बीत […]

तेरे  जाने  से सब  ये सोचते  है मैं अकेला  हूँ  , उन्हें  शायद खबर न हो कि तेरी याद  बाक़ी है . मैं तनहा कैसे समझूँ मीर इन ख़ाली मकानों को , तेरे और मेरे […]

बहुत सो लिए हम,, अब हमारे जागने की बारी हैं!!! बहुत लूटा परिंदों ने, अब तड़पने की उनकी बारी हैं!!! मन हमारे अकेले थे, सो वार कर गये वो हम पर,, अब एकजुट होकर कुछ […]

सिमट रहा हूं धीरे धीरे इन सर्द रातों में छिपा रहा हूं खुद को खुद में इस बेनूर अंधेरे में कभी कोई चीख सुनाई देती है खामोश सी, कभी सर्द हवाओं को चीरती पत्तों की […]

बगरस निगाहें तेरी , आँखों की सुराही तेरी, करती हैं क्या बातें,साहेबान ,   मन की दुया इन मेरी, रूबरू न आएं तेरी, करती हैं क्या बातें, साहेबान,   जुस्तजाजु  मेरी  वह  ही  हैं , […]

मन में जो इतने ख्वाब बने, वो आखिर किसे समझाते हो, लिखते इतना अच्छा हो पर जताकर किसको पास बुलाते हो,, तुम्हारे मन में भी फिर-फिर कर यह सवाल आता होगा,, बहुत हरे-भरे रहते हो, […]

नैनो के सूखे मेघो से मैं आज अगर बरसात करूँ ,हल करुँ ज़मीन ए दिल में मैं नीर कहाँ से मगर भरूँ?है सूख चुका अब नेत्र कूप न मन का उहापोह बचा ,न मेघ रहा […]

कहीं आसूं  की बारिश थी ,कहीं यादों का झोंका था, जिसे देखा था बस्ती में वही दिन रात रोता था . नगर था प्यार का , उजड़ा था गुलशन , शाम ख़ाली थी, रहूँ कैसे […]

मन हमारे आजकल अपनेपन की परिभाषाये बदल रहे हैं,, सारे प्यारे दोस्त हमारे,, अब भीड़ सामान ही लग रहे हैं,, पराई नगरी में भी अकसर लोगों में घुल जाया करता था,, अब खुद की बस्ती […]

ये जहाँ तो सबका हैं,, जिसे हम सबने मिलकर संवारा हैं,, बस किसी गर्दिश की बंदिश में फंसा मेरा सितारा हैं,, कहती,, मंजूर नहीं उसको सामने खुदा के भी हाथ फैलाना,, अतः मेरे हाथ वाले […]