Praduman Amit's Posts

गम

वफा के बदले उनके शहर में”अमित”बेवफ़ाई ही मिला। चलो गम को भुलाने के लिए मयख़ाने में मय तो मिला।। »

कामयाब आशिक़

ए दोस्त —- जो इश्क़ में बदनाम होते है। दरअसल वही आशिक़ कामयाब होते है।। »

नादान आशिक़

झील में उतरने से पहले काश मैं गहराई को नाप लेता। अब दलदल में फंसता जा रहा हूँ काश कोई बचा लेता।। »

बद से बदनाम

हम उनके लिए “मीर”, बद से बदनाम होते गए। वो नादान मुझे इम्तहान पे इम्तहान लेते गए।। »

अश्क

उनकी आँखों से ,अश्क क्या गिरी। मैं समझा मुझ पे, बिजली गिरी।। »

अभिलाषा

प्रेम नगरी में मैने प्रेमा से पूछा प्रेम के क्या है परिभाषा। शर्माती हुई कही “ए अजनबी क्या है तेरा अभिलाषा”।। »

खुदा के लिए

मत आना मेरे मैयत में , अश्क समंदर बन जाएंगे । डर है क़यामत के ए नूरी, कब्र भी मुझे ताने ही देंगे।। »

अरमान

जब तुम गेसूओं में गुलाब गूंथते थे। तब मेरे अरमान के फूल खिलते थे।। »

तुझको हवाले

पत्थर पे लकीर, खींचने वाले। खुद को किया, तुझको हवाले।। संवार दे तू , या बर्बाद कर दे। जो भी दे, हंस हंस के दे। »

बीते कल

ए हमजोली जरा बता तो सही कहाँ गए वो दिन । रह नहीं पाते थे कभी हम एक दूसरे के बिन।। वो कसमे वादे वो हसीन ख्यालों के मीठा ख्वाब। आज वक्त के साथ सभी क्यों दफन हो गए जनाब।। याद है तुम्हें जब हम कभी तुझ से रुठ जाया करते थे। चाँद से सितारे तोड़ लाने की तुम बातें किया करते थे।। »

दीवाने

पत्थर को पत्थर से मारे तो क्या मारे ए दीवाने । दिल को जरा शीशे बना कर वार करो तो जाने।। »

शेर

बेवफाई के बाजार में ए दोस्त वफाई नहीं मिलती। सब है यहाँ धोखेबाज़ कोई प्रेम कली खिलती तो कैसे खिलती ।। »

ए चाहत

एक दिन दिल ने जब कहा , वहाँ दग़ाबाज़ों का बसेरा है। नादान चाहत से तब मैं कहा , संभल वहाँ जरूर कोई सपेरा है।। »

पल दो पल

कर ले ख्वाईश पुरी जो आज तुम्हारे दिल में है। क्या पता कल मैं रहूं या न रहूं ए किसने देखा है।। »

नारी और कविता

चलो हम फिर नारी पे, एक सुंदर कविता रचे। नारी जीवन से प्रेरित रचना ही कविता में सजे।। »

घात

मेरी मुहब्बत को उसने भरी महफिल में तमाशा बना दिया। मैने जब दी उसे तोहफ़ा, तब उसने ज़हरीली मुस्कान लेती हुई मेरे मुंह पे फेंक दिया।। »

नाराजगी

हम तो आपकी चाहत में , फ़लक से सितारे तोड़ कर लाए है । जरा चाँद से हो गई है नाराजगी, बस यही आपसे कहने आए है ।। »

फरिश्ता

नाउम्मीदी से अश्क का गहरा रिश्ता है। तभी तो बने है वो आज का फरिश्ता।। »

ठोकर

पत्थर समझ के ए ज़माना, मुझे ठोकर पे ठोकर न मार। कभी कभार पत्थर भी बन जाता है तलवार की धार।। »

गंगा

गंगा स्वच्छ है तो देश स्वच्छ है। यानी नारी ही देश की गंगा है।। इनके ही पवित्रता से । हर दिन नया प्रभात उगा है ।। »

उम्मीद की कश्ती

हमने ज़माने से पूछा मैं बदनामी का बहुत बड़ा धब्बा हूँ क्या आपके शहर में पनाह मिलेगा मैं उम्मीद की कश्ती पे सेहरा बांध के आया हूँ ज़माना हंसते हुए कहा —- अरे यार सतयुग गया कलयुग गया इस भ्रष्टयुग में भी जनाब अंधेरे में लाठी चलाते हो क्यों तुम अपनी ज़मीर को हमारे ज़माने के बही में नामांकन कराना चाहते हो मैं बुत बन कर कहा — अच्छा, अब मैं चलता हूँ। »

जलन

नारी के अनेक रुप मिले। इसलिए पुरुष नारी से जले।। »

वक्त

वक्त के सिकन्दर से पूछो दोस्त कितनी ताक़त है वक्त में । ठोकरें खा के भी वक्त को झुकने नहीं दिया इस ज़माने में।। »

दरियादिली

गम की दरिया में मुझे दरियादिली नहीं मिला। जो भी मिला सब एहसान फ़रामोश ही मिला।। »

दिन थे वो यकीन के

चले थे मेरे साथ साजन घर से यह कह के। निभाएंगे साथ हम रिश्ते है सौ जन्म के।। थक गए है आज कुछ ही दूर पैदल चल के। मत हो उदास ए दिल जो मुहब्बत कर गए दिन थे वो यकीन के।। »

अपनी अदा यों न दिखाएँ

जब जब मैं कलम उठाना चाहा हसीन शेर लिखने के लिए उसने कहा लगता है मैं हो जाउंगी बदनाम शायद तुम्हारे लिए मैं चाह के भी उसके लिए शेर नहीं लिख पाया अब कोई उनसे कह दो अपनी अदा यों न दिखाए इन बहारों में खुदा के लिए। »

गोधूलि

फिर वही ढलती गोधूलि मन में एक एहसास जगा दिया। नादान था दिल, बिना सोचे दिल दग़ाबाज़ को दे दिया।। »

नाकाम

हम दो जिस्म एक जान हो कर भी ज़माने को हम कहाँ झुका पाए आज फिर ज़माना मुहब्बत पे भारी पड़ी आखिरी बार भी तुम्हें कहाँ गले लगा पाए। »

क़ाबिल

ए कविता चल आज कवियों के अंजुमन में। शायद दीदार के क़ाबिल हो जाए उनके अंजुमन में।। »

क्या नारी तेरी यही कहानी ?

युग युग से तू ,आंसू बहाती आई पुरुष के अधीन तू, सदा रहती आई अपने घर, अपने बच्चो के लिए युग युग से तू ,मर मिटती आई क्या नारी तेरी यही कहानी ? आंचल में दूध है, आंखों में पानी अपनो ने ही ,तुझ पे बनायी नयी कहानी खुद दलदल में फंस के,अपनो को आज़ाद किया एहसान के बदले में, अपनो ने तुझे क्या दिया क्या नारी तेरी यही कहानी ? इस युग में भी, तू पुरुष से कम नहीं जब कि, संसार तुझ से ही बना पुरुष से नहीं झुका दिया... »

…क्या कम है?

कौन कहता है, पुरुषों के जीवन में रौशनी नहीं है। उनकी अर्धांगिनी की बिंदिया क्या रौशनी से कम है।। »

राह में रोड़े

ए दोस्त सोचो,अगर राह में रोड़े न होते। जीवन के परिभाषा, हम कैसे समझ पाते।। यही रोड़े सभी को जीवन धारा बदल दिया। वरना संसार के इस सैलाब में हम कहाँ होते।। ठोकर पे ठोकर खा के भी हम कब संभल पाए। काश हम दुनिया को राह के रोड़े से तौल पाते।। »

साक्षात…..

युग युग से नारी पुरुष के हाथों, छलती आई। तभी तो नारी आज की साक्षात देवी कहलाई ।। —प्रधुम्न अमित »

….. नारी के कर्जदार

यदि नारी से निर्माण हुआ है नया संसार। फिर क्यों नारी पे हुआ घोर अत्याचार।। हम कहते है नारी होती है ममता के सागर। फिर क्यों हुआ बाजार में आज ममता बेकार।। आंचल में हम युग युग से पलते, बढ़ते आए। आज हम वही आंचल के बने है खरीदार।। माँ, बेटी, बहन, पत्नी के रुप इसमें है समाया। फिर क्यों जुर्म की चक्की में पीस रहे है बार बार।। कहे कवि “गर नारी न होती, तो हम कहाँ होते। इसलिए तो पुरुष आज भी है नारी के... »

अनजान

अनजान बन कर चैन से जीने वाले । तू क्या जाने कौन गोरा कौन काले।। »

अश्क ए तालाब

मुद्दत बाद आज ही नहाया हू़ँ अपने अश्क ए तालाब में। कहीं कोई काली नैनो़ से देखा तो नहीं मुझे नहाते हुए।। »

जरा प्यार से……

पागल पुकारो आवारा पुकारो या तुम दीवाना पुकारो। जो भी पुकारो जरा प्यार से अपना कह कर पुकारो।। »

यादें

आँखों से हुई थी अश्कों की बरसात। याद है मुझे वो थी बरसात की रात ।। »

शकुन

हम वो शख्स नहीं जो, गड़े मुर्दे को भी कब्र में सोने न दे। मुद्दत बाद नींद आयी है कम से कम कुछ पल सोने तो दे।। »

शेर

हमने दर्द को दावत दे दिया अपनी गुलिस्ताँ में। देखें क्या रंग लाती है इन अमीरों के अंजुमन में।। »

चाहत

आ सनम तुझे मैं आज, अपनी इन गेसूओं में छुपा लूं। ए आँखें बंद होने से पहले, मैं तुझे आँखों में बसा लूं।। »

मर्द

जिसने परखा औरत के दर्द। वही कहलाया जवां एक मर्द।। भाई ताक़त से नहीं जाना जाता। उसे उसका हक़ दो तो ही मर्द।। हुकूमत की चक्की में पीसने वाले। क्यों कहलाते हो तुम जवां एक मर्द।। औरत के कमजोरी पे सदा राज किया। शान से कहलाते हो तुम आज के मर्द।। जरा सोचो गर पल में ही पासा पलट दे। फिर हम और तुम काहे के वीर मर्द।। औरत नहीं तो यह संसार नहीं। यही सूत्र क्यों न समझे नादान मर्द।। »

खफ़ा

इनायत की थी मैने कोई शिकायत नहीं। बेवजह कह गए वो आपसे कोई रिश्ता नहीं।। »

इरादे

मंजिल दूर है “राहत “, फिर भी इरादे बुलंद है। इसलिए तो आज भी मेहनत ज़िंदाबाद है।। »

कब आयेगा नया सवेरा

स्वतंत्रता दिवस काव्य पाठ प्रतियोगिता:- रवि के उजाले में हम तिरंगा लहरायेगें वीर जवानों की गाथा फिर से हम दोहरायेंगे दो मिनट का मौन रखकर हम सब एक साथ इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगायेंगे वतन के लिये हमने क्या किया भूल जायेंगे हम गर्व से सुभाष बापु की डगर पर जीना सिखलायेंगे आजाद देश का गुलाम बनकर जी रहें हैं हम फिर भी आजादी की कीमत सभी को बतालायेंगे »

हिचकी पे हिचकी

दिल का मचलना बार बार हिचकी पे हिचकी आना। बता “राहत ” किधर जाना इधर जाना या उधर जाना।। »

अंजुमन

खत्म हुआ खेल मुहब्बत का। गिर गया पर्दा मेरे अंजुमन का।। »

कब आएगा नया सवेरा (स्वतंत्रता दिवस प्रतियोगिता)

रवि के उजाले में हम तिरंगा लहरायेंगे। वीर जवानो के गाथा फिर से हम दोहरायेंगे।। दो मिनट के मौन रख कर हम एक साथ। इंकलाब जिंदाबाद के नारा लगायेंगे।। वतन के लिए हमने क्या किया भूल जायेंगे हम। गर्व से सुभाष बापू के डगर पे हम सबको चलना सिखलायेंगे।। आज़ाद देश के गुलाम बन कर जी रहे हैं हम। फिर भी आज़ादी की कीमत सभी को बतायेंगे।। »

हिन्दुस्तान हमारा (स्वतंत्रता दिवस प्रतियोगिता)

अपना देश कितना सुंदर कितना प्यारा। हर देश से प्यारा देश हिन्दुस्तान हमारा।। हिन्दी है हम हिन्दी ही मेरा परम धरम। इसलिए तो गर्व करे आज भी हिन्दुस्तान हमारा।। पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण वालों से कोई भेद नहीं। सभी को एक नजर से देखे हिन्दुस्तान हमारा ।। जिसको हिंद से प्रेम नहीं वह अभागा कपूत नादान है। उसे रास्ते पर लाओ यही संदेश देता है हिन्दुस्तान हमारा।। वैसे भी नादान को सही रास्ते पर लाना हम जानते है... »

नाजुक कली

हसीन अदा इनके अंग अंग में, अल्हड़पन सी लगती भली है। माना इन पर चढ़ी नही जवानी, फिर भी यह नाजुक कली है।। »

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