बौना ****** मैं बौना हूँ सब कहते हैं जब निकलूं हँसते रहते हैं मानो मैं कोई जोकर हूँ सर्कस का कोई बन्दर हूँ हाँ, प्रकृति ने किया खिलवाड़ ना मिल पाया पोषण और प्यार तभी […]

किसी से कुछ कहना अच्छा नहीं लगता पर खामोश रहना भी अच्छा नहीं लगता पर्त दर पर्त खुलता जा रहा है जिन्दगी का पन्ना, पर हर पन्ना यूं बेवजह पलटना अच्छा नहीं लगता तुम्हारी आँखों […]

मन तुम्हारा हो गया यह तन तुम्हारा हो गया मन की पर्तों में जो गहरे दर्द बोये थे कभी तेरा निश्छल प्रेम उन जख्मों का मरहम हो गया…. तुम धूप-सी लगती रही मैं नीर-सा बहता […]

हे पयस्विनी ! तृप्त कर दे अपने निर्मल दुग्ध से दूर कर दे पाप सारे पंचगव्य से बुद्धि के शुद्ध कर दे प्रकृति सारी अपने सुंदर चरण से तेरी पूजा से मिले वह फल जो […]

हे तरंगों ! सज के निकलो भेदना तुमको हृदय है रोंकना तुमको है पथ में भटकते राही जो हैं राह दिखलानी उन्हे है जो बिछड़कर स्वयं से खो गये फिर ना मिले जोड़कर उनको स्वयं […]

किसान दिवस स्पेशल:- ********************* २३ दिसम्बर को हर वर्ष किसान दिवस मनाया जाता है मीठी-मीठी बातें कर हम किसानों को फुसलाया जाता है बैठा है दिल्ली में किसान मांगे अपने हक का मान पर सरकार […]

लब खामोश हों फिर भी बहुत कुछ कह जाते हैं आँखें नम हों फिर भी हम मुस्कुरा जाते हैं कोई नहीं समझता तन्हा दिल के गमों को चीखकर आह निकले तो जमाना तमाशबीन ही समझता […]

कहते हो मैं मर्द हूँ और औरत पर हाथ उठाते हो मर्जी हो या ना हो जबरन बातें मनवाते हो कभी जलाते हाथ तो कभी फेंकते एसिड हो सीना तान के फिर तुम मर्द कहाये […]

हे स्वर्णरश्मि ! हे दिनकर छवि ! विलम्ब न कर आजा झटपट निकला जाये मेरा दमखम प्रभु निवेदन है तुमसे विनम्र कर जोड़ खड़ा देखो मानव संकुचित है प्रकृति का हर अंग-अंग अविराम पड़े कोहरे […]

“चिता के फूल” **************** मेरी नाकामयाबी पर हँसकर वो चल दिये, मेरे ऊपर लानत के हजार कथन वह कह गये… हम भी चल दिये… इस जहान से नाउम्मीदी का एक बोझ लेकर, मेरी अर्थी के […]

आज का दिन पावन दिन है ८०० वर्षों बाद ऐसा संयोग बना शनि और वृहस्पति देव जी आये एक-दूजे के सन्निकट इतिहास में यह पावन दिन सदा के लिए दर्ज हो गया शनि और वृहस्पति […]

ठिठुरता जीवन कांपता है मन सर्दियों से डरता है ये मन चिपक रहा बेटा जब माँ से कितना बेबस होगा वह तन हड्डी-हड्डी कांप रही है रोम-रोम पिघलाता यौवन कंबल-चादर फटी पुरानी सिर ओढ़े तो […]

आखिरकार बुलंदियों का आसमां पा ही लिया… आखिरकार आसमां से एक सितारा तोड़ ही लिया… बिछ गये रंगीन पंखों की तरह ख्वाब मेरे, आखिरकार लहरों ने किनारा पा ही लिया…

शिकायत किससे करें ! जब अपने ही दामन को दागदार कर देते हैं उम्मीद किससे करें जब अपने ही साथ छोंड़ देते हैं जो कभी हमारे हो नहीं सकते ! आखिर ये नैन उन्हीं को […]

किस्मत को आजमाकर एक ख्वाब जिया है मैंने आँसुओं को शराब- सा पिया है मैंने, यहाँ से दूर चला जाऊंगा मैं ये फैसला अब किया है मैंने…

ले चल साकी! मुझे दरिया के पास मेरा मन बहुत प्यासा है मचल पड़ता है ये कांच का दिल जब वो मेरे करीब आता है बोल दो उसे- “मैं उसका नहीं किसी और का हूँ” […]

“राजा दशरथ और श्रवण कुमार” ************************** उठा लिया एक भारी बोझ-सा कंधे पर अंधे माँ-बाप को तीर्थ यात्रा कराई श्रवण कुमार सा हो लाल मेरा यही दुआ करे हर माई’ राजा दशरथ गये आखेट को […]

अक्सर आगे बढ़ने पर रुकावटें आती हैं मंजिल बहुत दूर बहुत दूर नजर आती है पर किया भी क्या जाये जब सपनें हों इतने बड़े कि सोने ना दें जागने पर भी चैन से रहने […]

*हाइकु विधा* ************** ऐ नींद ! बता तेरी क्या दुश्मनी है क्यों तू मेरे पास नहीं आती है डूबते हैं सब सपनों में क्यों तू मुझसे अदावत निभाती है ?? ना परेशान होती हूँ मैं […]

“गुलमोहर का पुष्प” अति मनमोहक है सुगंध इसकी अद्धभुत है इसकी जड़ें मिट्टी को चारों ओर से जकड़े हैं मानों जैसे हाथों में वक्त पकड़े हैं रात्रि की उनींदी आँखों में कुछ गहरे सपने हैं […]

उत्प्लावन करती हृदय में, अतृप्त अवांछित आकांक्षाएं संकीर्ण एवं सूक्ष्म वेग के व्याकरण’ गढ़ती हैं असंतृप्त आस्थाओं का प्रतीत प्रेम मधुमास की मधुर गर्जना करता है और ले जाता है पीपल की घनी छांव में, […]

जाने क्यूं आजकल खुद पर प्यार आने लगा है अपना ही चेहरा अब हमको रिझाने लगा है पहले डूबे रहते थे हम किसी की आँखों की मदहोशी में अब तो अपना चेहरा ही हमको भाने […]

तुम्हारे कानों के झुमके बहुत ही प्यारे हैं तुमने मुस्कुरा के जब कहा हम तुम्हारे हैं तुम्हारी बोली मुझको भजन-सी लगी तुम्हारी हँसी भी फूलों से प्यारी लगी तुमने जब कहा हम बहुत प्यारे हैं […]

लेख:- ‘मातृभाषा एकमात्र विकल्प’ मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो अपनी बात दूसरों तक पहुँचाने के लिये भाषा का प्रयोग करता है। वह अपनी बात लिखित,मौखिक व सांकेतिक रूप मे दूसरे तक प्रेषित करता […]

रात थी बात थी एक मुलाकात की तू मेरे साथ था मैं तेरे साथ थी पढ़ रहे थे तुम रात्रि में रश्मियां आँच में तेरी मैं फिर पिघलती रही चूड़ियों ने कहा जो था कहना […]

मेरी आँखों को ऐसी हँसी आ रही है जैसे मोमबत्ती जलकर पिघलती जा रही है कुछ जल गई रौशनी की फिक्र में कुछ बेखबर-सी पिघलती जा रही है पिघल गई धागे को जलाने के जश्न […]

लौट चल साथी ! यहाँ गम सबसे जियादा (ज्यादा) है बेबुनियादी रस्मोरिवाज में मन उलझा जाता है करते रहे कोशिश लाख जिंदगी संवारने की पर तरुवर में पीत पत्र फल से जियादा है नई सुबह […]

बेईमान-सा मन गिरती-उठती दीवारें आज सिर उठाकर खड़ी हैं यूँ तो सरचढ़ी हैं पर कुछ जिम्मेंदारियां भी हैं छत को संभाले हुए दिन भर खड़ी रहती हैं शाम को थककर चूर हो जाती हैं रात […]

बोया था एक रोज बड़े नाजोअंदाज से प्रेम का बीज’ आज उसमें फल पके हैं मायूसी और बेबसी के बहुत लदा है वो वृक्ष माँ अक्सर कहा करती थी तुम्हारा बोया बीज एक पुष्ट पौधा […]

चाहती हूँ एक कविता लिखना मगर नाकाम हो जाती हूँ विषय चुनने के लिए छटपटाती हूँ शब्द कुछ ऐसे हों भावनायें मेरी व्यक्त करें और कह दें वह जो मैं कह नहीं पाती हूँ निरर्थक […]

मुश्किल बहुत है खुशियों की तिजोरी भरना दुःख की गगरी भरने में दो पल नहीं लगते झूम जाता है मन जब कोई अपना कह देता है… अपनेपन के लिए तरसता रहता है जीवन नये सिक्के […]

मुझे लिख लो कहीं निकलने लगी हूँ तुम्हारी स्मृति से… खयालातों की दुनिया से बेदखल होने लगी हूँ मुझे छुपा लो कहीं… तुम जवाब दो हमको हम जवाब दें तुमको बातचीत का सिलसिला नजरों से […]

गज़ल ****************** सुना तुमने नहीं हमको, सुना हमने नहीं तुमको मगर महसूस करते थे हर एहसास में तुमको जुनून था तुमको हरगिज यार! औरों की मोहब्बत का, सब कुछ जानते थे हम मगर रोंका नहीं […]

पत्थर में डाल प्राण सेतु हम बनायेंगे माझी हैं मजधार के पार ही हो जायेगे ना रुकेंगे हम कभी आगे बढ़ते ही जायेगे सूर्य की आँखों से आँख हम मिलायेगे और चल पड़ेगे हम पवन […]

लिखकर अपने मन की पीर बोझ करूं मैं हल्का रोकर मिलता बड़ा सुकून लगता दिल को अच्छा आँसू से सींचू मैं जख्म हरे-भरे लहूलुहान हुए लेप लगाकर वही जख्म मेरे प्राणाधार हुए गटक लिए जो […]

कुदरत का अनमोल रत्न ******************** कुदरत का अनमोल रत्न है ये जीवन जब हों फूल से रिश्ते तो महकता है जीवन अगर हों बेनाम से रिश्ते तो सुगंध ही दुर्गंध बन जाती है फिर बोझिल- […]

मुझे लिखना कैसे आया ? अक्सर ये सवाल कर बैठते हैं लोग मैं कवियित्री क्यों बनी यही जानना चाहते हैं लोग पर कोई ये क्यों नहीं समझता ये कुदरत का वरदान नहीं मानवता का दिया […]

आँसू बहाते रहे हम रातभर इन्तजार करते रहे कोई आकर पोंछेगा ! कोई हाल तक पूंछने नहीं आया सिस्कियां कमरे के बाहर तक जाती रहीं तड़पकर चीख भी निकलती रही पर अनदेखा ही कर दिया […]

प्यार के हजारों रंग देखे मगर उन सभी रंगों में आत्मीयता का अभाव ही मिलता है लौटकर फिर तुम्हारे पास आ जाती हूँ फिर से उलझ जाती हूँ मैं बातों के जंजाल में, दुनिया के […]

१० दिसम्बर १९४८ ई० को संयुक्त राष्ट्र सभा ने संयुक्त रुप से मानवाधिकारों की घोषणा को अंगीकृत किया गया… जिसमें प्रस्तावना और ३० अनुच्छेद हैं प्रस्तावना में कहा गया:- हर मनुष्य को समानता एवं स्वतंत्रता […]

मांग की सिन्दूर रेखा ****************** हर सुबह बड़े स्वाभिमान से सजाती हूँ अपनी मांग में लाल सिन्दूर मेरे रूप लावण्य में मैं स्वयं एक वृहद परिवर्तन पाती हूँ…. मांग की सिन्दूर रेखा खूब लम्बी सजाती […]

ढूंढो मेरा प्रेम पथिक ! जाने कहाँ खो गया है कंकड़ीली-पथरीली राहों में विस्मृत-सा हो गया है उदासीन राहों में राही तुम भी भटक ना जाना मेरा प्रेम मिले जो कहीं उसे मेरी याद दिलाना […]

पलकों पर सजे थे सपनें मैं थी नींद के आगोश में, वो आया सपनों में मेरे बोला मुझसे हौले से; पी लो रानी! प्रेम का प्याला मैं चाँद निचोड़ के लाया हूँ तेरी खातिर आसमान […]

नाखूनों से नोंच जमीं मैंने बोया है मेहनत का बीज हलधर हूँ कहलाता चाहे कह लो पीर-फकीर पीता हूँ कुआं खोदकर पानी बीती निर्धनता में जवानी पर अपनी मेहनत से भरता हूँ मैं सबका पेट […]

तुम्हारी मौजूदगी को नजरंदाज करता है दिल बड़ी मुश्किल से संभलता है दिल साँसों से ज्यादा तेरी धड़कन में हूँ यही आजकल महसूस करता है दिल जब तू होता करीब तो थमती हैं साँसें और […]