आज अपनी बात करो मेरी बात रहने दो नींद नहीं है आती एक अर्से से मुझे जुल्फों में सुला लो तहकीकात रहने दो मुलाकातों के गुल खिला लेंगे किसी और दिन मुझे अपने ख्वाबों में […]
आज अपनी बात करो मेरी बात रहने दो नींद नहीं है आती एक अर्से से मुझे जुल्फों में सुला लो तहकीकात रहने दो मुलाकातों के गुल खिला लेंगे किसी और दिन मुझे अपने ख्वाबों में […]
आवारगी में हम क्या से क्या कर गये ! देते रहे मोहब्बत और हम बेवफा हो गये, जाने कैसे डूबा तेरी आँखों में मैं ! सपने सारे टूटे, हम जुदा हो गये अब डर नहीं […]
आज उठाई कलम है मैंने वीरों की तलवारों-सी पंक्ति है मेरी इतनी पैनी नैनों की तेज कटारी-सी चलती है जब कलम हमारी स्याही कम पड़ी जाती है लफ्ज हैं इतने भावुक मेरे कलम भी रोने […]
हाथ पकड़ा दो कलम मैं लिखती जाऊं हर लफ्ज को तेरे हर एहसास को, मेरी हर एक पीर को आवाज दूं गर तुम सुनो ! मैं गायिका बन जाऊंगी तुम्हारी इक मुस्कान पर मैं सौ […]
निम्नकोटि की कवि हूँ मैं !! हाँ, थोड़ी पागल हूँ मैं जाने कितनी खामियां मुझमें फिर भी सब कहते हैं अच्छी हूँ मैं ! मैं ना लिखती गज़ल कभी ना लिख पाती नज्म, रुबाई पद […]
हो जाए जो तेरी मेहर तो चमक उठेगी किस्मत मेरी पड़ा तम में स्वप्न जो दीप्तिमान हो जायेगा इस गरीब की कुटिया में आशा का दीपक टिमटिमायेगा पर तू ऐसा कहाँ करेगा ! भरा है […]
भार्या ********** मैं तुम्हारी भार्या हूँ संगिनी पथ की रहूंगी कष्ट ना होगा तुम्हें सारे दुःख मैं खुद सहूंगी बोलता है मन ये मेरा तुम व्यथित हो आजकल डूबते सपनें तुम्हारे तैरते हैं पलकों पर […]
जब-जब चलना सीखा हमने लोगों ने रोड़े ही लगाये खुशी के आँसू निकल ना पाए दुःख ही दुःख हमने अपनाए जाने क्या है भाग्य में मेरे जो मैं करती सबकुछ उल्टा पीर-फकीर सा मेरा जीवन […]
सिलसिले वार दम टूटता गया उम्मीदों का अब क्या करेंगे हम सुनहरे सपनों का अब तो अपना जीवन भी किराये का लगता है क्या करेंगे अब हौसलों के पंखों का ???
बाँसुरी की तान पर राधा दीवानी हो गई मीरा दीवानी हो गई प्रज्ञा’ दीवानी हो गई छेंड़ता मुझको है नटखट नंदबाबा का दुलारा छोंड़े ना मोरी कलाई ब्रज की गोपिन का है प्यारा प्रज्ञा लिखकर […]
छलना ही सीखा जीवन भर अच्छे कर्म कहाँ कर पाए जीवित होते पौधों को हम नेह का नीर कहाँ दे पाए पीर की चादर तान के हम तो रातोंरात कवि बन गये और ना कुछ […]
बेजान हुए पत्तों-सा जीवन भूमि पर आकर बिखर गया वृक्ष की डाली रही अकेली पत्ता भी पीला पड़ गया यह सब देख के वृक्ष ने बोला- ओ डाली ! तू क्यूं इतना संताप करे रोज […]
जीवन की आड़ी-सीधी रेखाएं बनती और बिगड़ती रहती हैं… देख के कर्मों की गति ये कभी हँसतीं तो कभी रुवासी रहती हैं… पथ पर अपने चलने को आतुर रहती हैं समय की गति से सौदेबाजी […]
ऐ काश! कोई तो होता जो बांहों में ले लेता कहता मुझसे दो बातें सबकुछ मेरा ले लेता मुझ बिन ना कटती रातें मुझ बिन ना सवेरा होता.. कभी रोती तो रोने ना देता सारे […]
हाय रे ! कितनी लोभी दुनिया हाय रे ! कितनी लोभी… अपनी इज्जत बाजारू कर घर की चलती रोटी… हाय रे ! कितनी लोभी दुनिया हाय रे ! कितनी लोभी…. बेंचकर अपने बाप का कफन […]
क्यूं इतना वैमनस्य बढ़ा है ?? दिल में बम-बारूद भरा है.. मुँह से तो बोले मीठा-मीठा मन में कितना पाप भरा है लुटा दी हमनें प्रेम की गागर फिर क्यों मन में जहर भरा है […]
बिटियारानी ! अब तो आओ कहां छुपी हो ये तो बताओ ढूंढ नहीं पाऊंगी अब तो नहीं सताओ सामने आओ लुका-छिपी अब बहुत हुई तेरी माँ बहुत थक गई कुछ तो खा लो कुछ तो […]
रोटी की लालसा में भटकते रहते हैं दर-दर की ठोकरें खाते रहते हैं रोटी की कीमत क्या होती है यह सिर्फ हम ही समझते हैं दिन भर उठाते हैं बोझा तब रात को दो निवालों […]
जिम्मेदारी के बोझ तले दबा रहता है जीवन जाने किन खयालों में खोया रहता है जीवन उठकर तलाशती हूँ मैं जमीं अपनी आसमां जाने क्या ढूंढा करता है जीवन…
आज विश्व एड्स दिवस है जो HIV के संक्रमण से जागरुकता हेतु मनाया जाता है… यह आठ सरकारी स्वास्थ्य दिवसों में से एक कहलाया जाता है…. सबसे पहले १९८७ में जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस […]
ऐ वतन ! तुझ पर हम अपनी जान लुटा देंगे तेरे कदमों में आसमां भी झुका देंगे गर आबरू पर तेरी आँच आई कभी दुश्मन को हम चीर-फाड़ देंगे है जुनून हमको तेरी मोहब्बत का […]
तुम्हारा वो sorry वाला मैसेज पढ़कर जाने क्यूं आँख में आँसू आ गये ! सुनने में तो बहुत अच्छा लगा कि तुम्हें अपनी गलती का एहसास तो हुआ ! पर जाने क्यूं एक टीस-सी उठी […]
क्या करना है मुझे यहां ठिकाना बनाकर मन चंचल है लगता है कहाँ एक ही जगह पर बदलकर फिर आऊंगा वेश मैं अपना घायल परिंदा हूँ गिरा हूँ धरा पर फिर उठूंगा, चलूंगा बनाऊंगा आसमां […]
नई सुबह की पहली किरण ने मुझे जगाया हिलोरे देकर चांदनी रात ने था सुलाया हटाये पर्दे जब माँ ने खिड़कियों से धूप की चमकती किरणों ने मुझे सहलाया…
मन के घाव भी भरने जरूरी हैं तेरे-मेरे नैन भी मिलने जरूरी हैं आकाश से धरती के जो हैं फासले तय हैं बरस कर बूंद तुझमें ऐ जमीं ! मिलना जरूरी है…
समवेत स्वर में जय हिंद बोल दो कभी प्यार के पट खोल दो कभी ये मुल्क तुम्हारा ही है दोस्त! इसे प्यार और सम्मान से देख तो कभी… *****************************
मेरा गम तेरे दर्द से ज्यादा है मेरी आँख में आँसू तुझसे ज्यादा है एक बार देकर प्यार की थपकी सुला दे साथी ! मेरे दिल में जख्म़ तुझसे ज्यादा है…
वो ऐसा सोंच भी कैसे सकते हैं मेरे देश के ही दुधमुहे बच्चे हैं पर करें भी तो हम क्या करें वह दहशत गर्दों के सम्पर्क में रहते हैं पथ्थर फेंकते हैं सेना के ऊपर […]
ताश के पत्तों की तरह बिखर गई मैं जब तूने कहा मैं तेरा नहीं किसी और का हूँ…!!
मंगलसूत्र को सुहाग का प्रतीक माना जाता है जाने क्यों ऐसा कहा जाता है?? बचपन से यही सोंचती थी मैं पर आज देख भी लिया अपनी आँखों से; एक विधवा स्त्री के सामने आने पर […]
दहेज प्रथा एक अभिशाप ********************** बूढ़ा बाप अपनी पगड़ी तक निकालकर दे देता है और माँ अपने कलेजे का टुकड़ा पर फिर भी नहीं भरता लोभियों का मन जाने क्या लेना चाहे वो ? समझते […]
छोंड़ दो इस बुढ़िया को किसी वृद्धाश्रम में यह सुनकर मुझको थोड़ा गुस्सा आया एक दिन फिर तंग आकर पत्नी से वृद्ध माँ को आश्रम मैं छोंड़ आया रोया बहुत माँ से लिपटकर माँ का […]
जला दिया क्यों मुझको ओ साजन! ऐसी क्या गलती कर बैठी थी मैं तो अपने सास-ससुर की पूजा देवों सम करती थी ननद को अपनी बहन की तरह मानती थी देवर को भैया कहती थी […]
जख्म अपनों ने दिल पे हर बार कर दिये अपने ही शहर के बच्चों ने हम पर पथराव कर दिये दर्द उस दम बढ़ा मेरा ऐ हिन्दुस्तानियों ! जब हमारी कुर्बानी पर भी सियासत के […]
तुम कहते रहे और हम सुनते रहे आख़री वक्त तक सपने बुनते रहे, उठ गई डोली मेरे अरमानों की फिर भी हम तुम्हारे नाम की मेंहदी रचते रहे…
आज तुमने मुस्कुराकर बात की कुछ रोने वाली और कुछ हँसने वाली बात की, अच्छा लगा मुझको तुम्हारा झगड़ा करना भी खुशी इस बात की है कि तुमने हमसे बात की…
इल्जाम पर इल्जाम लगाता ही रहा वो हम चुपचाप सहते रहे, जब हद हो गई सहने की तो हमने कुछ ना कहा बस दामन छोंड़कर चल दिये….
प्रकाश पर्व; गुरु पूर्णिमा ********************** आज है नानक जी का जन्मदिवस पावन बेला आई है प्रकाशपर्व है आज गुरु पूर्णिमा की सबको बधाई है जीवन में सबके आए खुशहाली नानक का सिर पर हाथ हो […]
कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव-दीपावली मनाते हैं सारी अप्सराएं नृत्य करती हैं इन्द्रदेव झूमते जाते हैं पूंछा मैंने माँ से एक दिन; क्यों देव दीपावला मनाई जाती है स्वर्ग सजाते हैं देवता धरती भी दीपों […]
किसानों ने ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ यह नारा सत्य कर दिखाया है पूरे देश को अपनी व्यथा से रूबरू करवाया है पर कुछ सियासत के घोंड़ो के कान पर जूं नहीं रेंगता है सारा देश […]
हे राम तुम्हारी दुनिया में ये कैसा कलयुग आया है…!! ************************* कहीं जल रहे दीप तो देखो कहीं अंधेरा छाया है हे राम ! तुम्हारी दुनिया में ये कैसा कलयुग आया है…!! तज रहे प्राण […]
मेरे देश के किसान ! मत हो परेशान यह बुरा वक्त भी टल जाएगा… जिसने जो बोया है वो वैसा ही फल पायेगा सुना तो होगा तुमने भी; बुरा वक्त सिर्फ हमारे सब्र का इंतेहान […]
ऐ जाते हुए लम्हों ! मुझको भी साथ में ले लो तुम संग मैं भी मिल लूंगा अतीत के मीठे सपनों से खो जाऊंगा मैं फिर से बिखरी-बिखरी जुल्फों में उन खुशबू वाली सांसों में […]
देखी दुनिया की खूबसूरती पर माँ सबसे खूबसूरत हो तुम मेरी सबसे अच्छी सखी और ममता की मूरत हो तुम जो मुख से निकले मेरे फौरन हाजिर कर देती हो मेरे चेहरे से ही तुम […]
वृक्ष कहे रोकर पृथ्वी से हे वसुधा ! मैं हूँ भयभीत बोया मुझको प्रेम से किसी ने रोपा और दिया आशीष पर जाने कब चले कटारी मेरे चौंड़े वक्षस्थल पर आज मैं देता हूँ छाया […]
आज है बैकुंठ चतुर्दशी पावन बेला शुभ दिन है श्री हरि विष्णु और महादेव का आज साथ में पूजन है…. जो पूजे विष्णु संग शंकर वो जाये बैकुंठ धाम बैकुंठ चतुर्दशी पर प्रज्ञा का हरि […]
“हरिवंश राय बच्चन बर्थ डे स्पेशल” **************************** आज जन्मदिन है उनका जिसने लिखी थी मधुशाला वह कहते थे अपने परिचय में:- ‘मेरे लहू में है पचहत्तर प्रतिशत हाला’ नाम है उनका ‘हरिवंश राय बच्चन जन्म […]
यादों के पंख फैलाकर सुनहरी रात है आई उन्हें भी प्यार है हमसे सुनने में ये बात है आई पैर धरती पे ना लगते उड़ गई आसमां में मैं जीते जी प्रज्ञा’ देखो स्वर्ग में […]
थक गई हूँ अब रोते-रोते, तन्हा राहों पर चलते-चलते इन बिखरी साँसों की अरज बस है यही तुमसे मिलन जब भी हमारा हो ना कोई गिला-शिकवा हो ‘प्रेम के उपनिषद्’ पर बस नाम अंकित तुम्हारा […]
“२६-११ हमले पर भावभीनी श्रद्धांजलि” ******************************* याद है वो २६-११ हमले की घटना जिसमें हमारे जवान शहीद हुए थे कैसे भूलेंगेे हम वो दिन जब हमारे सैनिक हमसे दूर हुए थे उन वीरों को प्रज्ञा’ […]
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