गुजार दी मैंने जिन्दगी बस इन्तजार में तुम आकर सम्भाल लोगे मुझे टूटते हुए..
गुजार दी मैंने जिन्दगी बस इन्तजार में तुम आकर सम्भाल लोगे मुझे टूटते हुए..
तुम्हारा और मेरा हाल एक जैसा ही है, तुम्हें गैरों से फुर्सत नहीं हमें तुम्हारी यादों से…
ख्वाहिशें थी तुम्हें पाने की साहब ! पर बदनामी के सिवा कुछ ना हाथ आया..
क्या है आरक्षण और क्यों है आरक्षण ? क्यों हमें जाति के नाम पर अलग करते हो ? जब देखो तब हम युवाओं का बँटवारा करते रहते हो.. सवर्ण के हों इतने नंबर तब ही […]
कोरोना में लगा हुआ लॉकडाउन तो हट गया मेरी जिंदगी तो लॉकडाउन में ही बसर करती है..
मुझे मिटाकर कहता है वो तुम पहले जैसी नहीं रही, फकत शक्ल ही बची है खुशबू नहीं रही…
तू मेरी नज्म़ बन जाए मैं तेरी नज्म़ बन जाऊं तू मेरा राग बन जाए मैं तेरा राग बन जाऊं कुछ इस तरह जुड़ जाएं अलग ना कर सके कोई तू मेरी रूह बन जाए […]
कितनी पी लेते हो जो होश नहीं रहता है जमाना तुम्हें शराबी कहके हँसता है… इतना धुत हो जाते हो कि कुछ भी याद नहीं रहता है! किसे क्या कहते हो कुछ होश तुम्हें रहता […]
गीत, गज़लें लिख रही हूँ कुछ अलग ही दिख रही हूँ होंठों पर हैं लफ्ज अटके मन ही मन में पिस रही हूँ आ गई अब शाम, दिन की दोपहर ही लग रही हूँ गुनगुनी-सी […]
अपने भाई दूज की तुमको खिला मिठाई आँखों में थी हया ग्लास पानी का लाई… तुम तिरछी नज़रों से मुझको यूँ देख रहे थे मन ही मन में कितने लड्डू फूट रहे थे… ना तुम […]
मुझको सो जाने दो जीवन रात हुई अब बहुत घनी नैनों से ओझल हैं सपनें साँसों से भी ठनी-ठनी आसमान बाँहें फैलाकर मेरे स्वागत को आतुर है धरती पर बस बोझ बनी हूँ मिट्टी में […]
बहुत निराली है ये दुनिया प्रज्ञा ! यादों की बात तो करती है पर याद नहीं करती…
जब से अलग लिखने लगे हम सस्ते में बिकने लगे मौजें अलग होने लगीं पंख भी गिरने लगे बहरूपिया मन मोहकर बन बैठा है मेरा पिया हिय को अलग ना कर सके सपनें जुदा होने […]
आपको लगता है क्या मैं चाँद हूँ या चाँदनी रात के झुरमुट में बैठी हूँ मैं कोई अप्सरा गीत हूँ या हृदय की टूटी-फूटी रागिनी… आपको लगता है क्या.. अमरत्व का वरदान हूँ या करुणत्व […]
जो सोया है अन्धकार में जागेगा नवल प्रभात उठ-उठकर देखेगा किरणें सूर्योदय सम होगा ललाट रजत-चाँदनी में स्वप्न को नित पुष्पित कर देखेगा नारी सम्मोहन छोंड़ कवि अब प्रगतिवाद में चमकेगा बहुत हुआ प्रज्ञा! अब […]
क्या लिखूं कुछ भी समझ आता नहीं कोई भी अल्फाज दिल को अब भाता नहीं.. लिख तो चुकी हूँ हजार दफा खत तुमको आज क्या लिखूँ खत में तुमको कुछ भी समझ आता नहीं.. सवाल […]
आज बहुत उदास है दिल ये मेरा जब से तुम मेरे सामने से आकर गए लगता है कुछ छिन-सा गया है मेरा भूला तो दिया था मैंने कब का तुझे पर आज लगा जैसे गलत […]
अगर मैं गलत निकली तो कुछ भी हार जाऊंगी, लगा लो शर्त मुझसे तुम यकीनन हार जाओगे..
मेरी क्या मजबूरियां हैं कैसे बताऊं तुम्हें! मेरी सखियां भी कहती हैं तुम बात क्यों नहीं करती …
कैसे होगा ऐतबार उन्हें वफा पर मेरी, आजकल बहुत झूठ बोलती हो ! वो कहा करते हैं…
जब तुम्हारे और मेरे रास्ते अलग हैं तो मेरे रास्तों में आकर कांटे क्यों बिछाते हो? कोई मोहब्बत नहीं है हमसे अगर तो एहसान जताते क्यों हो?
फौज की तादात बढ़ाने से कुछ नहीं होगा चीन जंग जीतने के लिए शेर-सा जिगरा होना चाहिए..
आजकल वह बड़ा बेचैन रहते हैं.. हम जो जरा हँसकर किसी से बोल देते हैं..
मेहनत करने वाले मंजिल को पा जाते हैं और बेचारे कामचोर गाल पीटते रह जाते हैं..
जो नाउम्मीदी की डगर से गुजरते हैं वो ही शक्स पतन की बात करते हैं..
मंजिल पाने के लिए मैंने किसी से खैरात नहीं मांगी.. अपनी मेहनत से बुलंदियां हासिल की हैं..
बड़ी बदनामियां उठाने के बाद आज मैं फिर मुस्कुराई… एक अर्से के बाद जब मेरी जान लौट आई…
पापनाशक भागीरथी को इन्सान ने मैला कर दिया। राम तेरी गंगा मैली’ को हमने कड़ी मेहनत से चरितार्थ कर दिया। धो रही थी अब तक जो हमारे पाप को अपने पुनीत कर्मों से हमनें उसकी […]
गंगाजल की भी अपनी ही महिमा है। तभी बिकने लगा है आजकल जाने किस मिट्टी का है इन्सान यहाँ ! मिट्टी तो छोड़ी नहीं अब गंगाजल भी नहीं छोड़ेगा। बात अच्छी भी है कि अब […]
भारतीय परिधान सजीला पहने जो भी लगे रंगीला। देखी मैने एक सुन्दर बाला हाँथों में चूड़ी, कानों में बाला। जुल्फें जिसकी काली-काली होंठों से टपक रही थी लाली। माथे पर थी नीली बिंदी होंठों पर […]
छोंड़कर बातें पुरानी कविता किया करो। सपनों में नहीं हकीकत में जिया करो। तोड़ दे दिल कोई तो खैर तुम उसकी मनाओ दिल के लिए अच्छा यही है कि पुरानी बातों पर मिट्टी डाल दिया […]
चलो एक बार हम फिर से दिखावा आज करते हैं तुम पूँछो की कैसे हो ? हम कह दें की अच्छे हैं। अब तो रातों में रोना भी हमको खूब आता है बस एक बार […]
नज़रंदाजी को तेरी मैं मजबूरी समझती थी.. तेरी बेवफाई को ये प्रज्ञा प्यार कहती थी..
तेरे दर्द के बाद सोंचती हूँ मैं क्यों जन्म दिया ऊपर वाले ने मुझे !! ठोकर खाने के लिए या तुलसीदास बनने के लिए !!
मेरे दामन को सरेआम दागदार कहता है, गंदी नाली का कीड़ा है तू गंगाजल को अपवित्र कहता है..!!
मुझे जख्म लगते ही वो सिलने बैठ जाता था… बात इतनी-सी थी कि वो बिना धागे के सिलता था…
❤❤ अभिव्यक्ति दिल से ❤❤ _______________ बेइन्तहां मोहब्बत थी उनसे हमें एक छींक पर भी जान निकलती थी हमारी…. ना जाने क्यूँ उन्हें हमसे मोहब्बत ना हुई! इसमें भी शायद खता थी हमारी.. जब वो […]
नारी हूँ मैं मुझे इस बात का गर्व है… नारी का जीवन बसंत का पर्व है… अपने सुगंधित पुष्पों से नारी महकाती है घर-गगन हरियाली खुशियों की फैलाकर…. नित्य पल्लवित करती है सुमन… नहीं है […]
जब मैं कली बन मुस्कुराई अली तब ही प्रियतम बन आए अली… घेरा मुझको बाहुपाश में डूब गई मैं प्रेमपाश में… प्रिय चले गए वनवास अली जब बिछोह की हवा चली… नित क्रंदन, रुदन करूं […]
आज बहुत व्यथित थी बार-बार निगाहें दरवाज़े तक जाकर लौट आ रही थीं…. ना जाने कहाँ रह गए वो! मेरा बेचैन मन मुझे अधीर कर रहा था…. कहा तो था जल्दी ही आ जाऊंगा ना […]
नई भोर है सूर्य का स्वागत करेंगे हम… खिड़कियों से पर्दे हटा किरणों से नहाएगे हम.. तितलियों के पंख से चुरा लेंगे तमाम रंग फीके आसमां पे जा नित नवीन चित्रकारी करेंगे हम.. सागर की […]
कितना नादान था वह बचपन जब… माँ मुझे चाँद की कटोरी में खिलाती थी… मैं खाना खाने में नखरे हजार दिखाती थी… पर माँ चाँदनी रात में कटोरी में जल भर लाती थी.. मेरी बाँहें […]
मनु की संतान पर तंज कसने की कोशिश की है मैनें.. नया विषय और भारत की समस्याओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने की चेष्टा की है मैनें… द्वापर छोंड़ दुर्योधन और दुःशासन कलयुग में […]
संवेदनाएं कहाँ रहती हैं आज-कल, मैं यह जानती नहीं.. लोग क्यों जलाते हैं नफरत के चिराग मैं यह जानती नहीं.. ऊब चुकी हूँ जिन्दगी से अपनी, साँसों की डोर कब टूटेगी मैं यह जानती नहीं… […]
कितनी प्यारी होती हैं बेटियाँ, प्रेम की मूरत होती हैं बेटियाँ.. आती है जब परिवार पर आँच कोई, सबसे आगे खड़ी होती हैं बेटियाँ… प्यार के पालने में झूलती हैं, माँ के आँचल में पल्लवित […]
O my ganesh ji Your glory is infinite … Today we all need your blessings very much… Hey Ganesh! All your troubles … All the troubles from the world Erase and Bless us .. I […]
शीर्षक:- पिता:-बरगद का वृक्ष पिता वह बरगद का वृक्ष है जिसकी छांव में हमें प्रेम, स्नेह तथा सुरक्षा मिलती है.. पिता नारियल का वह फल है जो ऊपर से सख्त परन्तु अन्दर से सुकोमल होता […]
शरीफों की सभा लगी फिर लुटती रही क्यों द्रौपदी? दु:शासन के दुराचार पर संवेदना क्यों मर गई? यही पूँछे द्रौपदी हर सड़क और हर गली… देवताओं का दाग अहिल्या के दामन जा लगा.. वह नारी […]
कोशिश कर आगे बढ़ने की बंदे, तुझमें है सिंहों-सा दम… ना मान हार तू लहरा दे, अपनी ताकत से जग में परचम… नित अग्रसर हो जीवन पथ पर, मत गवां समय तू रुक-रुककर… तू जवाँ […]
कुछ खार जमाने में हर चमन में होते हैं, चुभते हैं जिस्म को लहूलुहान कर देते हैं, तो कुछ खार लफ्जों से घायल कर देते हैं, उन खारों से कोई जाकर पूंछे, क्या उन्हीं का […]
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