अभिव्यक्ति बस दिल से:- ************** रोते नहीं हैं हम बस सिसकते रहते हैं तेरी यादों में आहें हम भरते रहते हैं नासमझ है तू जो नहीं चाहता मुझको ना जाने कितने दिल हैं जो मेरी […]

दिनकर ऐसा सूर्य है जिसने हिन्दी जगत को अपनी लेखनी की किरणों से चमकाया देशहित में लिखकर देश का गौरव खूब बढ़ाया जिनके सूर्यातप के आगे शशि भी मलिन हो जाए ऐसे राष्ट्रकवि को प्रज्ञा […]

ड्रग्स रैकेट से देश होता जा रहा है छिन्न-भिन्न कहाँ से शुरू हुई थी सुशांत की कहानी जाकर कहाँ पहुँची सितारों की जिन्दगानी मर रहा है देश का भविष्य गरीबी में ड्रग्स लिए जाते हैं […]

एक दौर हुआ करता था जब नित वंदन करता था नन्दन.. पिता के चरण दबाकर ही शयनकक्ष में जाता था नित उठकर मात-पिता को अभिनन्दन करता था नन्दन… अब समय हुआ परिवर्तित आई कलयुग की […]

बारी-बारी लूटा मुझको बारी-बारी रौंदा नारी होने पर बेबस थी खत्म हो गया जीवन का औधा ना..री…ना रो एक दिन मिलेगा तुझको इन्साफ सबने यही समझाया जब कोर्ट में सवालों ने किया शर्मिंदा कुछ भी […]

किसी के लिए दोस्त फरिश्ते हैं किसी के लिए जिन्दगी जीने का बहाना मेरे लिए सिर्फ आस्तीन का सांप हैं नहीं है दिल में अब दोस्तों के लिए कोई ठिकाना…

क्यों जताया जाता है प्रतिपल मैं दूसरे घर की लक्ष्मी हूँ हूं कुछ दिनों की मेहमान क्यों कहा जाता है हर पल यह एहसास होता है कि किस घर की हूँ मैं अपने ही माँ-बाप […]

**************** मेरी किस्मत रंगी है काले रंग में दर्द ही है जीवन के हर अंग में.. आँसुओं की लकीरें कभी मिटती नहीं बल्कि और गहरा जाती हैं जब किसी की बातें मेरे दिल को दुःखाती […]

निस्तेज-सी स्तब्ध-सी असहाय-सी अधूरी-सी निर्वेद-सी बैठी थी.. दुनिया की सबसे दुःखी आत्मा मैं ही थी… आपा खोकर भी मौन थी तुमसे दो टूक करने के बाद सारे ऱिश्ते खत्म करने के बाद क्रोध में आकर […]

जीवन के पहले प्रभात में ली मैंने अंगड़ाई बाल्यकाल था बीता किशोरावस्था की बेला आई.. रोंक-टोंक थी ज्यादा मुझ पर समझ नहीं मैं पाती थी बचपन से मैं ट्यूशन पढ़ने चाचा जी के घर जाती […]

वो हर कदम साथ देती थी मेरा, चाहे जितनी मुसीबतों ने हो घेरा.. हर मन्दिर में मेरी सलामती की दुआ मांगती थी, मैं बन जाऊं बड़ा यही मुराद मांगती थी.. पैरों में जूते भी ना […]

ख्वाहिशों की बदलियां छटने लगी हैं आजकल मुहब्बत की रेत फिसलने लगी है आजकल काजल आँखों का दुश्मन बन बैठा है मेहंदी से भी अब कोई कहाँ नाम लिखता है दिल की किताब के सारे […]

जा रहा हूँ आज फिर परदेश जहाँ से आया था धर प्रवासी मजदूर का वेश छोंड़ी थी जो गलियां यह सोंचकर मैंने के कभी ना लौटकर अब आऊंगा घर की बची रूखी-सूखी ही खाऊंगा जब […]

आज भी माँ की गोद में सिर रखकर सो लेता हूँ होता हूँ उदास कभी तो लिपटकर रो लेता हूँ माँ को गुजरे जमाने हुए हैं मगर मैं आज भी माँ से मिलकर प्यार बटोर […]

************* हे आराध्य प्रेम ! आज मैं तुम्हें प्रणाम करती हूँ क्योंकि तुम ही हो जिसने मुझे जैविक से सामाजिक प्राणी बनाया मेरे अन्तस में भाव स्फुटित हुए मन के कोंण रोम-रोम को सहला बैठे […]

हे हिमाद्रि ! सदियों से जब मैं नहीं थी तब भी तुम यूँ ही अडिग खड़े थे और आज भी एक इंच तक ना हटे भारत का शीर्ष मुकुट बनकर खड़े हो तुम गंगा को […]

मेरे होंठों की मुस्कान पर ना जाओ दोस्तों! ये तो मेरे यार की तरह फरेबी है! मेरे आँसू हैं मेरी असली पहचान जो बंद कमरे निकलते हैं कभी तकिये से आकर पूँछों हम उसे कितना […]

मेरे जीवन की कहानी दुःख ही रही आखिर क्या लिखूँ आज जो अभी तक मैंने लिखा नहीं… विधाता ने मेरे भाग्य में आँसुओं के सिवा कुछ भी लिखा नहीं… मेरे पतझड़ समान जीवन पर बरसात […]

कबूतर को भेजूं अब वो जमाना नहीं रहा खुद जाकर मिलूं यह सम्भव नहीं रहा कितने खत लिखे हैं उसके लिए मैंने डाकिया कहता है खत का जमाना नहीं रहा कलम में स्याही नहीं बची […]

दूध के दाँत पालने में ही टूट गये गरीबी का थप्पड़ इतनी जोर से पड़ा लाद दी जिम्मेदारी की पोटली कंधों पर बचपन के खिलौने पल में टूट गये थमा दी चाय की केतली जब […]

शिक्षा की खदानें बंद करो डिग्री बेचने वाली दुकानें बंद करो छात्रों को डालो जेलों में शिक्षकों की तनख्वाहें बंद करो ना लूटो हमको शिक्षा के नाम से ज़रा डरो राम के नाम से व्यापार […]

करुण रस की कविता:- ***************** जिसने हमको प्यार किया मेरी राह में सुबहो से शाम किया ना कद्र की हमनें एक पल भी उसकी अपशब्दों का उस पर वार किया एक रोज़ मैं बैठी थी […]

रोम-रोम में बसी हमारे हिंदी राजभाषा है बन जाए यह राष्ट्रभाषा इस जीवन की यह आशा है हिंदी है परिपक्व, परिपूर्ण हिंदी ही ममता-सी निर्मल है हिंदी है लहू में अपने हिंदी ही कण-कण में […]

हिंदी दिवस:- चौदह दिसंबर को हर वर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है उसी दिन क्यों हिंदी को सम्मान दिलाया जाता है हिंदी तो ऐसे ही वाणी है जो भारतीय परंपरा पर चलती है देशी हो […]

अभिव्यक्ति ह्रदय से:- +++++++++++++ आज तोड़ दिया तुमने मेरा टूटा हुआ दिल ! ऐसा लग रहा है जैसे सीने पर एक पत्थर-सा रखा है मेरे। एक तुम ही थे जिससे थोड़ी बहुत उम्मीदें लगा रखी […]

कहाँ रहे अब किताबों के दिन !! अब तो बस अलमारी में रखी हुई किताबें धूल खाया करती हैं गुजरती हूं जब कभी उनके करीब से तो मुझे बड़ी उम्मीद से देखती हैं कि शायद […]

बेजान है ये जिस्म मेरा लफ्ज भी लड़खड़ा रहे हैं भाव हैं बिखरे हुए हम सिमट ना पा रहे हैं ख्वाहिशों के पन्ने भीगे हैं अश्कों से मेरे बोलना बहुत कुछ चाहते हैं पर कुछ […]

❤❤ अभिव्यक्ति दिल से ❤❤ *************************** पहली मुलाकात और पहली भेंट आज भी याद है मुझे… वह बरगद के नीचे बैठकर करी थी जो बातें हमने दिल आज भी बेताब है… तुम कुछ लाए थे […]

चल साथी चल करें हम नये युग का सूत्रपात बढ़ चलें नवीन पथ पर हाथों में लेकर हाथ ना जाति-पांति के बंधन हों ना मरी हुई संवेदनाएँ ना लाशों के ढेर लगे हों ना आगे […]

मेरा जिससे था प्रेम प्रसंग वो रहता था हर पल मेरे संग हम एक दूजे के साये थे जन्मों बाद करीब आए थे.. वो हाथों में हाथ लिए बैठा था बोला मुझसे विवाह रचा लो […]

सीता वियोग में बहुत विकल थे प्रज्ञा के श्रीराम ! एकाएक याद हो आई सिय से प्रथम मिलन की बेला !! ज्यों घोर तिमिर में कौंध उठी हो अकस्मात दामिनी त्यों राम हृदय में जगमगा […]

एक सवाल पूंछना है तुमसे एक बार आकर तो मिलो सब कुछ तो ठीक हो गया है तुम्हारे जाने के बाद… पर नींद कहाँ गुम हो गई यही पूंछना है मुझे रातें चाँद, तारे देखकर […]

आंगन में एक पाटा रखकर पण्डित और परिचितों को बुलाकर लगा तैयारी में पूरा घर पकवान और मिष्ठान बनाकर हाथ जोड़कर सब बैठे हैं दादी की बरसी है आज एक बरस होने को आया पर […]

ऐसी लागी लगन सावन की मुझे, मैं तो घड़ी-घड़ी कविता बनाने लगी.. कभी सोते हुए कभी जगते हुए, बेखयाली में कुछ गुनगुनाने लगी.. गजलों में मगन, नज्म़ों में मगन, कल्पनाओं में दुनियां बसाने लगी.. छोंड़ा […]

आज तोड़ दी मैंने पीली पत्तियां पौधों से उसी तरह जैसे मैं दिल से बेदखल हुई थी तुम्हारे ! हरी पत्तियों पर जब पड़ती हैं ओस की बूंदें तो तुम्हारे होंठों पर टूटते गुलाब याद […]