धुयें से सेंकते क्यों हो…!!

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस:-
जीवन में ये जहर क्यों
घोलते हो
अपने फेफडों को तुम
धुयें से क्यों सेंकते हो
छोंड़ दो तम्बाकू का सेवन करना
सीख लो तंबाकू छोड़ कर जीना
ये तुम्हारी सेहत को नुकसान
पहुंचायेगा
जीवन को तुम्हारे दुष्कर बनाएगा।।

Comments

5 responses to “धुयें से सेंकते क्यों हो…!!”

  1. Praduman Amit

    आपकी कविता धुम्रपान पर केंद्रीत है। समाज के लिए व स्वस्थ के लिए अनमोल संदेश है।

    1. Pragya

      बहुत बहुत आभार

  2. vikash kumar

    Great poem

    1. Pragya

      Thanks a lot

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