रखे रहो हाथो पे हाथ प्रिया ,
सोचती रहो कोई अनसोंची बात प्रिया,
सर्द हवा के झोंके में,
जरा- ठहर जाओ रात प्रिया,
हम मिलजुल कर सुख दुःख बाटेंगे,
जो मिलेगा जन्म जात प्रिया।
Category: मुक्तक
-
प्रिया (कविता)
-
अंगारों से खेलूंगा
अंगारों से खेलूंगा और तूफ़ा से लड़ जाऊंगा
मंज़िल मुठ्ठी में होगी ,ऐसे पीछे पड़ जाऊंगा
एक हार से कम ना आंको मुझे जरा दुनिया वालों
हर मुश्किल घुटने टेकेगी, गर जिद पे अड़ जाऊंगा
शक्ति त्रिपाठी देव -
शिव वंदना
जय महादेव जय मृगपाणी दक्षाध्वरहर जय कामारी
शशिशेखर ,नीलकंठ भगवन जय महाकाल जय त्रिपुरारी
शिव शंकर, गंगाधर शंभू जय जगद्गुरू जय व्योमकेश
मुझे अपनी शरण में लो भगवन ,सर्वज्ञ अनिश्वर जय महेश।
✍️ देव 🙏 -
तुम मिटाती रहो सबूत
तुम मिटाती रहो मेरे प्यार के सबूत
मैं सबूत जुटाता रहूंगा।
तुम कितना भी मेरे ख्वाबों से बचना चाहो
मैं हर रात ख्वाबों में आता रहूंगा। -
मुक्तक
स्वप्न में रोज लिखती हूँ
तुम्हारे नाम की कविता,
कहीं कोई देख ना ले
बस इसी चिंता में रहती हूँ,
इसलिए उन सबूतों को
मिटाकर ही मैं जगती हूँ। -
हौसला
हौंसले के दम पर जीते आ रहा हूं,
लहू को बहाकर घूंट पीते आ रहा हूं।
पहचान की परवाह करना मैं छोड़ दिया,
धर्म कर्म से जीने का सलीका जब से सीखा हूं।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
नाम
नाम पहचान को तांक में रखकर,
धर्म कर्म सदैव करते रहना यारों।
अजर अमर के ढोंग को त्याग कर,
मरकर ख्वाहिश फूलों का ना करो।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
हारा प्राणी
हारा प्राणी
हारा प्राणी धूल चटाता,
जीता प्राणी टेस में जीता।
जागरूक हमेशा लड़ता है,
हालातों से कभी नहीं घबराता।।✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
-
बात
बड़ी बड़ी बाते से हौसला मिलता,
चींटी के कहर से हाथी मरता ।
ईर्ष्या बड़े बड़े को नाश करता,
छोटे बनने से बहुत कुछ मिलता।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
ज्वाला
तन मन में मेरे ज्वाला धधक रहा,
सीने में मेरे बदले की भावना पनप रहा।
दूर हो जा मेरे नज़रों से पापी पाकिस्तानी,
तेरे दशहतगर्द का खेल मैं जान रहा।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
राजनीति
आज राजनिति का लगता है भोर हुआ है,
चारों तरफ नेता जी का मचा शोर हुआ है।
आंख खुला नेता जी का जथ्था देखा घर पर,
लगता है वर्षो बाद चूनाव का बिगुल बजा हुआ है।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
देश समाज
देश समाज में ये क्या फैला है,
आतंक का बजता बिगुल यहां हैं।
देख कर अहर्निश का अपराध,
रो रो कर मेरा बुरा हाल हुआ है।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
आतंक
आतंक का आओ मिलकर नाश करें,
चोर उचक्कों का चलो पर्दाफाश करें।
छोटे मोटे गुंडे मवाली को सबक सिखा,
उनके अपराधी हौसले का अंत करें।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
अपराधी
अपराधी खुल्लम खुल्ला घूमें,
चमचों का जब बाजार गरम हो,
नेता जब जनता का कदम चूमें,
तब समझो चुनाव का भोर हुआ हैं।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
दिल
मुझे देख तुम्हें सच में रोना आता हैं,
मैं खुश हूँ इंसानियत को जिंदा देखकर।
हालातों को देख मुँह फेरने वाले सैकड़ों हैं,
एक जिंदा दिल को देख मेरे दिल तू दुआ कर।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
चोर
चोर चोर मौसेरा भाई,
नेता अपराधी जट्टे बट्टे।
काम निकालते बनकर सच्चे,
अपराध को बढाते बनकर अच्छे।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
दिल्ली
दिल्ली के चोर सन्नाम हैं जहाँ में,
नेता और चोर बेइमान हैं वहाँ के।
कभी मत आना उनके झांसे में,
फ्री फ्री बोलकर ठगते बहुत है।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
दिल का सुनो
दिल की सुनो दिल से करो बात,
इंसानियत को जगाओ मित्र करो ना रात।
रब से करो तुम अपने दुख का फरियाद,
अपने प्यार को लुटा नफरत को दो मात।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
मुक्तक
बरसात हो रही है
मन झूम रहा है ऐसे
ऊँचे ऊँचे पेड़ों की
पंत्तियां
झूम रही हैं जैसे,
रिम झिम छम छम
छम छम छम छम -
आग जलने दो
आग जलने दो यारों, धुआं ना करो
दिल के जख्मों को गहरा कुआं ना करो
मर ही जाने दो मुझको तुम्हें है कसम
मेरे जीने की रब से दुआ ना करो
शक्ति त्रिपाठी देव -
मेरी फितरत
आम खाके गुठलियों का ढेर लगाना
है मेरी नहीं फ़ितरत।
एक गुठली से बृक्ष लगाना, चाह मेरी
और मेरी यही फितरत।। -
इश्क
तुम्हारे प्यार में मैं क्या से क्या हो गया,
कभी मिट्टी का दीया कभी मटका बन गया,
जब देखा तुम्हारो हाथों में गैर का हाथ।
मैं फौलादी मिट्टी का इंसान टूट कर बिखर गया।।महेश गुप्ता जौनपुरी
-
साक्षात्कार
आतंकी गुंडे मवालियों का जात धर्म नहीं होता,
सपनों में भी हत्यारो से अच्छा कर्म नहीं होता।
गुंडे बदमाश के लिए आलाप कढ़ाने वाले आस्तीन,
जाहिलो के लिए दिल में कोई मर्म नहीं होता।। -
मुक्तक
संवेदनाएं मर चुकी हैं आज सब
किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो
सब दिखावा है मेरे व्यवहार में
किस तरह कविता कहूं तुम ही कहो.
डॉ. सतीश पांडेय, चम्पावत
उत्तराखंड -
Muktak
देखी दुनिया सारी
फिर भी रहे अनाड़ी
कर कुछ भी न पाए
वो बनते रहे खिलाडी -
सुनाती नहीं मैं अपना गम
सुनाती नहीं मैं अपना गम किसी को
तो खुशियों का इजहार करूँ कैसे,
मुश्किले है मेरी राह में बहुत
मैं अपनी मंजिल पर आगे बढूँ तो बढूँ कैसे? -
मेरा खामोश घर
दीवारों के भी कान होते है,
लोग कहते हैं
लेकिन मेरी चीखें क्यों सुन नहीं पाता है
मेरा खामोश घर -
बिना पत्तों की टहनियां
बिना पत्तों की टहनियां
कहां छांव देती हैं
जिंदगी से जब ज्यादा मांगो
तो हमेशा घाव देती है -
अजीब दुनिया
कितनी अजीब है दुनिया
कितने अजीब है लोगों के काम
बटोर रहे हैं दोनों हाथों से
जाने को कर खाली झोली तमाम -
आज टूट गये हम
आज टूट गये हम
तुम्हारे वादों की तरह
बरस गयी आंखे हमारी
बावरे सावन की तरह -
जरूरी नहीं कि हर दिल इश्क में टूटा हो
जरूरी नहीं कि हर दिल इश्क में टूटा हो
अक्सर अपने भी दिल तोड़ दिया करते हैं,
खुशियों में तो मशरूफ हो जाते सभी पर
मुश्किल पड़ते ही दामन छोड़ दिया करते हैं -
ख्वाहिशों के बाजार
ख्वाहिशों के बाजार में आयी हूं
कुछ खरीदने की खातिर
मगर दाम ही इतने है हर ख्वाहिश के
कि खाली हाथ ही वापस चली, बन मुसाफ़िर -
चाय में डूबे बिस्किट
चाय में डूबे बिस्किट
सी हो गयी है जिंदगी
कब टूट जाये,
कब घुल जाये
खबर नहीं -
आवाज
अपने आवाज को बुलंद करके देखो,
अपने वाणी में मधुरता घोल करके देखो।
पावनता में तुम एक बार जी कर देखो,
रिश्तों को हवा पानी खाद एक बार दे कर देखो।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
शिखर
शिखर की ऊंचाईयों को टकते सभी,
पांव के छाले खून का रिसाव दिखता नहीं।
मेहनत हौसले को दुनिया समझती नहीं,
यहा के लोग बड़े जालिम है तरक्की देखते नहीं।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
समाज
समाज में धोखेबाजों का लगा अंबार है,
असमाजिक तत्वों से भरा संसार है।
उग्रता में बह रहा देश का अहंकार,
चरित्र के आन बान पर टिका यह संसार है।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
आदर्श
आदर्श के बल पर ही टीका है संसार,
आदर्श से ही चल रहा रिति व्यवहार।
नजर खतरों का अबइशारा हो गया,
नजर से नजर मिला कर धोखाधड़ी कर रहा।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
रहमो-करम
बातों से कब तक जीते रहेंगे,
रहमो करम पर कब तक रहेंगे।
उग्रता के शाख पर कब तक बैठोगे,
सच्चाई को समझो और बढ़ो तुम आगे।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
पग
पगड़ी मत उछालों बीच बाजार में,
पग होता है शान नेक इंसान का।
झूठ का दामन पकड़ जलील ना करो,
इंसानियत का गला घोंटना काम है शैतान का।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
नेता
नेता जी मिठी बाणी बोले लगता है चुनाव आया है,
भरी दोपहरी मेड़ पर डोले लगता तनाव छाया है।
याचना में भैया बाबू करके मांगे वोट दिन दुखी बन,
जीतते चुनाव तेवर बदले सलाह देते करते प्रहार है।।महेश गुप्ता जौनपुरी
-
आन बान
आन बान शान में जले मेरी जवानी,
लहू के कतरे को देख तड़पे मेरी जिंदगानी।
अहर्निश के वादों को मैं संजो कर रखता,
कभी भूल सकता नहीं वीरों की बलिदानी।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
तन्हा सफर
तन्हा सफर में मैं आगे बढ़ रहा हूं,
मजबूरी की गठरी लेकर चल रहा हूं।
वादें पुरा करने को पैदल सफर कर रहा हूं,
अपने कदमों से गिन गिन कर दूरी तय कर रहा हूं।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
रहस्य
आ गया वक्त अब रहस्य उजागर करने का,
यथार्थ के चक्कर में समय ना बर्बाद करो।
साधक बनकर देश का कल्याण करो,
सांत्वना देकर परेशान आत्मा पर उपकार करो।।✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
-
योग
देशवासियों योग करो तन मन से निरोग रहो,
आयुर्वेद योग के अलौकिक गुणों को अपनाकर ।
अपने इम्यून सिस्टम को हम सभी मजबूत करें,
आओ एक उपकार करें योग के गुणों को बतलाकर।।महेश गुप्ता जौनपुरी
-
मां सरस्वती
हे मां शारदे करो मेरा अभिनन्दन स्वीकार,
अज्ञानता को दूर कर करो मातृ हम पर उपकार।
हाथ जोड़ विनती करूं शीश झुका करूं प्रणाम,
नव कण्ठ स्वर चेतना का भर दो मां शारदे भण्डार।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
योग दिवस
योग करो निरोग रहो का आन्दोलन चलाना है,
घर घर को जागरूक करके अलख जगाना है,
नित सुबह और शाम योग करना व करवाना है।
तन को निरोगी बनाकर रोग मुक्त भारत बनाना है।।✍महेश गुप्ता जौनपुरी
-
हिंदुस्तान के हाथों मारा जाएगा
ताश के पत्तों-सा ढह जाएगा
तू एक दिन विलुप्त ही हो जाएगा।
यही हरकतें रही ना तेरी चीन
तो तू बिन मौत ही हिंदुस्तान के हाथों मारा जाएगा। -
अब बस खामोशी है जो अजीज है
चंद सिक्के क्या खत्म हुये
रुखसत हो गये जो मेरे करीब थे
तनहाई है जो साथ रहती है
अब बस खामोशी है जो अजीज है -
शहीदों को श्रद्धांजलि
विनयचंद यूँ रो रो कर
कितने को श्रद्धांजलि दोगे।
आँसू कम पड़ जाऐंगे तेरे
आखिर कितना रोओगे।।
सभी शहीदों के खातिर
अब अपना शीश झुकाता हूँ।
एक जन्म क्या हर जन्मों में
आभार तेरा फरमाता हूँ।।
जय जवान…. जय हिन्दुस्तान।। -
शहादत के सात फूल
बीस वीरों की टोली में
ये सात रत्न बिहारी हैं।
शहादत के सात फूल पे
‘विनयचंद ‘बलिहारी है।।